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RBI ने FCNR(B) स्वैप सुविधा एक महीने पहले बंद की

RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट की विशेष स्वैप सुविधा एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा बंद की
RBI ने FCNR(B) स्वैप सुविधा 31 अगस्त से बंद करने का फैसला किया

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-निवासी भारतीयों (NRI) से विदेशी मुद्रा जुटाने में बैंकों की मदद करने वाली FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़ी विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को तय समय से एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया है। यह सुविधा अब 30 सितंबर 2026 के बजाय 31 अगस्त 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी। RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस योजना के जरिए उम्मीद से कहीं ज्यादा विदेशी मुद्रा भारत में आ चुकी है।

 

52.3 अरब डॉलर की FCNR(B) राशि जुटी

 

RBI की इस विशेष व्यवस्था के तहत बैंकों ने अब तक करीब 52.3 अरब डॉलर यानी लगभग ₹4.9 लाख करोड़ की FCNR(B) जमा जुटाई है। इसके अलावा बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और अन्य विदेशी मुद्रा उधारी से भी करीब 4.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह आया है। कुल मिलाकर इस पैकेज से 50 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भारत में आई है।

इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिली। RBI की पहल के बाद देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया।

 

आखिर एक महीने पहले क्यों बंद की गई सुविधा?

 

इस सुविधा को मूल रूप से 30 सितंबर तक चलाने की योजना थी। लेकिन RBI को उम्मीद से काफी ज्यादा विदेशी मुद्रा प्राप्त हो गई। Reuters के अनुसार, केंद्रीय बैंक को अब इस सुविधा को आगे जारी रखने से सीमित अतिरिक्त लाभ दिखाई दे रहा है। साथ ही बहुत ज्यादा विदेशी मुद्रा प्रवाह से घरेलू बाजार में अतिरिक्त तरलता, बाहरी देनदारियों और भविष्य में जमा राशि की परिपक्वता से जुड़े जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

 

बैंकों को अब जल्दी जुटानी होगी डॉलर फंडिंग

 

RBI के फैसले का सीधा असर उन बैंकों पर पड़ा है जो FCNR(B) जमा के जरिए डॉलर जुटा रहे थे। कई भारतीय बैंक अब इस विंडो के बंद होने से पहले तेजी से विदेशी मुद्रा जुटाने की तैयारी कर रहे हैं।

Reuters के मुताबिक ICICI Bank और HDFC Bank करीब 1.5-1.5 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रहे हैं। Axis Bank, YES Bank, RBL Bank और Kotak Mahindra Bank भी विदेशी बाजार से फंड जुटाने की तैयारी में हैं।

 

रुपये पर क्या होगा असर?

 

RBI का यह कदम ऐसे समय आया है जब कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण रुपये पर पहले से दबाव है। 18 अगस्त को रुपये के 95.68-95.72 प्रति डॉलर के आसपास कमजोर खुलने का अनुमान लगाया गया था। विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को जल्दी बंद करने के फैसले ने भी बाजार में रुपये को लेकर चिंता बढ़ाई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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RBI की ₹1.5 लाख करोड़ overnight VRRR नीलामी
RBI ने ₹1.5 लाख करोड़ की overnight VRRR नीलामी का ऐलान, बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी सोखेगा

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए ₹1.5 लाख करोड़ तक की overnight Variable Rate Reverse Repo (VRRR) नीलामी का ऐलान किया है। यह नीलामी 18 अगस्त 2026 को आयोजित की जा रही है। RBI ने मौजूदा और आगे की तरलता परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है।   9:30 से 10 बजे तक होगी नीलामी   RBI के मुताबिक नीलामी 18 अगस्त को सुबह 9:30 बजे से 10 बजे के बीच होगी। यह एक दिन की अवधि वाली overnight VRRR सुविधा है, यानी बैंकों द्वारा RBI के पास रखी गई राशि अगले दिन बैंकिंग प्रणाली में वापस आ जाएगी।   VRRR से क्या करता है RBI?   VRRR का इस्तेमाल RBI बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से सोखने के लिए करता है। इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त धनराशि RBI के पास रखते हैं और बदले में उन्हें ब्याज मिलता है। इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त तरलता घटती है और अल्पकालिक ब्याज दरों को नियंत्रित करने में RBI को मदद मिलती है। इसे रेपो नीलामी का उल्टा समझ सकते हैं—रेपो के जरिए RBI बैंकों को पैसा देता है, जबकि VRRR में बैंक अपना अतिरिक्त पैसा RBI के पास रखते हैं।   ₹1.5 लाख करोड़ की पूरी रकम लेना जरूरी नहीं   यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1.5 लाख करोड़ अधिकतम अधिसूचित राशि है, इसका मतलब यह नहीं है कि RBI अनिवार्य रूप से पूरी ₹1.5 लाख करोड़ राशि सोखेगा। वास्तविक रकम बैंकों की बोलियों और उस समय की तरलता स्थिति पर निर्भर करेगी। इससे पहले 11 अगस्त को RBI ने ₹1 लाख करोड़ की overnight VRRR नीलामी की थी, जिसमें एक दिन के लिए अतिरिक्त बैंकिंग तरलता को सोखने की व्यवस्था की गई थी।   बाजार पर क्या असर पड़ेगा?   VRRR से बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी कुछ समय के लिए RBI के पास चली जाती है। इसका उद्देश्य मनी मार्केट में ब्याज दरों को व्यवस्थित रखना और अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना है। हालांकि, यह कदम अपने आप में मौद्रिक नीति को सख्त करने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए; VRRR मुख्य रूप से RBI का liquidity management tool है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने अडानी पावर को बड़ी राहत देते हुए कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी द्वारा दाखिल करीब ₹1,005 करोड़ के बिजली बिलों की वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत के इस फैसले से कर्नाटक की डिस्कॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा है।   ₹1,005 करोड़ के बिल को लेकर था विवाद   कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि अडानी पावर ने सरकारी पोर्टल पर करीब ₹1,005 करोड़ के गलत बिल अपलोड किए हैं। डिस्कॉम कंपनियां इन बिलों के भुगतान पर रोक चाहती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया।   अडानी पावर को क्या फायदा होगा?   फैसले के बाद अडानी पावर के लिए इन बिजली खरीद लेनदेन से जुड़े दावों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी को तुरंत ₹1,005 करोड़ की पूरी रकम मिल गई है; बिलों की वैधता और भुगतान से जुड़े आगे के कानूनी/नियामकीय पहलू अलग-अलग स्तर पर रह सकते हैं।   शेयर बाजार की नजर भी फैसले पर   अडानी पावर के लिए यह फैसला ऐसे समय आया है जब अडानी समूह की कंपनियां निवेशकों के फोकस में हैं। बाजार में इस तरह के कानूनी फैसलों को कंपनी की देनदारियों, संभावित प्राप्तियों और भविष्य के नकदी प्रवाह के संदर्भ में देखा जाता है।

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मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया। कारोबार खुलते ही सेंसेक्स करीब 250 अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे आ गया   निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट   सुबह 9:15 बजे निफ्टी 50 करीब 0.26% गिरकर 24,223.85 पर था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 0.40% टूटकर 77,418.97 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टरों में से 11 में गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 0.1% नीचे रहे।   IT शेयरों पर ज्यादा दबाव   शुरुआती कारोबार में IT शेयरों में बिकवाली ज्यादा देखने को मिली। Infosys और HCL Technologies समेत प्रमुख IT शेयरों पर दबाव रहा। बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क है और ऊंचे कच्चे तेल के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है।   कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता   अमेरिका-ईरान युद्धविराम की अवधि समाप्त होने और नए समझौते की संभावना कमजोर पड़ने से ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार पहुंच गया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता है।   आज बाजार के लिए अहम स्तर   तकनीकी तौर पर 24,200 के आसपास निफ्टी का अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे लगातार कारोबार होने पर 24,050 के आसपास अगला सपोर्ट देखा जा सकता है, जबकि ऊपर की तरफ 24,360-24,400 क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध बन सकता है।

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