अगर खाना खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन करता है, लेकिन बाजार की अधिक चीनी और घी वाली मिठाइयों से बचना चाहते हैं, तो मूंगदाल बर्फी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। खास बात यह है कि इस रेसिपी में न तो दाल को घंटों भिगोने की जरूरत है और न ही मावा या चाशनी बनाने की। कम समय में तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद के साथ-साथ पौष्टिकता का भी अच्छा संतुलन देती है।
यह आसान रेसिपी लोकप्रिय फूड एक्सपर्ट निशा मधुलिका द्वारा साझा की गई है, जिसे घर पर बेहद आसानी से बनाया जा सकता है। भुनी हुई मूंग दाल, ताजी मलाई, केसर और इलायची की खुशबू इस बर्फी को खास स्वाद देती है।
मूंग दाल को पहले साफ कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें। अब कढ़ाई में मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए हल्का सुनहरा और खुशबूदार होने तक भूनें।
भुनी हुई दाल को पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद मिक्सर में बारीक पीस लें और छलनी से छान लें।
कढ़ाई में ताजी मलाई गर्म करें। इसमें केसर डालें। अब मूंग दाल का पाउडर मिलाकर अच्छी तरह भूनें।
अब इसमें पिसी हुई चीनी और दरदरी कुटी इलायची डालकर लगातार चलाते हुए मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं।
एक ट्रे या प्लेट में हल्का घी लगाएं। तैयार मिश्रण फैलाएं और ऊपर से कटे हुए बादाम व काजू डालकर हल्का दबा दें।
करीब 1 घंटे के लिए फ्रिज में सेट होने दें। इसके बाद मनचाहे आकार में काटकर सर्व करें।
(कैलोरी सामग्री के अनुसार बदल सकती है।)
यदि आप फिटनेस फ्रीक हैं, तो इस बर्फी का सेवन सीमित मात्रा में करें।
यदि आपको डायबिटीज़ है, तो यह रेसिपी सामान्य चीनी के साथ उपयुक्त नहीं मानी जाती।
ध्यान रखें: यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन का अच्छा स्रोत भी है, लेकिन इसमें चीनी और फैट मौजूद होते हैं। इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Corn Tomato Soup Recipe: मानसून के मौसम में गरमा-गरम सूप का स्वाद पूरे दिन की थकान दूर कर देता है। अगर आप इंस्टेंट पैकेट सूप की बजाय घर पर ताजा, हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प तलाश रहे हैं, तो ढाबा स्टाइल भुट्टा-टमाटर सूप बेहतरीन रेसिपी हो सकती है। ताजे भुट्टे, लाल टमाटर, देसी मसालों और मक्खन से तैयार यह सूप सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण से भी भरपूर है। इस रेसिपी की खास बात यह है कि इसे बनाने में केवल 15 मिनट का समय लगता है और इसमें किसी भी तरह के आर्टिफिशियल फ्लेवर या प्रिजर्वेटिव की जरूरत नहीं पड़ती। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आने वाला हेल्दी स्नैक या स्टार्टर है। भुट्टा-टमाटर सूप के लिए सामग्री 1 कप उबले हुए स्वीट कॉर्न (भुट्टे के दाने) 3–4 पके लाल टमाटर 1 बड़ा चम्मच मक्खन 1 छोटा चम्मच बारीक कटा लहसुन 1 छोटा चम्मच बारीक कटा अदरक ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर स्वादानुसार काला नमक स्वादानुसार सादा नमक ताजा हरा धनिया (गार्निश के लिए) बनाने की विधि स्टेप 1: बेस तैयार करें टमाटरों को 2 मिनट उबालकर उनका छिलका उतार लें और मिक्सर में पीसकर प्यूरी बना लें। उबले हुए भुट्टे के अधिकांश दानों को थोड़ा पानी डालकर दरदरा पीस लें और कुछ दाने साबुत रहने दें। स्टेप 2: तड़का लगाएं एक पैन में मक्खन गर्म करें। इसमें लहसुन और अदरक डालकर लगभग 30 सेकंड तक भूनें, ताकि इसकी खुशबू अच्छी तरह निकल आए। स्टेप 3: सूप तैयार करें अब पैन में टमाटर की प्यूरी और पिसा हुआ भुट्टा डालें। 2–3 मिनट तक पकाएं। इसके बाद लगभग आधा कप पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। स्टेप 4: मसाले मिलाएं काली मिर्च, भुना जीरा, काला नमक और सामान्य नमक डालें। अब साबुत भुट्टे के दाने भी मिला दें और 4–5 मिनट तक मध्यम आंच पर उबलने दें। स्टेप 5: सर्व करें गरमागरम सूप को बाउल में निकालें। ऊपर से थोड़ा मक्खन और हरा धनिया डालें। इसे टोस्टेड ब्रेड, गार्लिक ब्रेड या क्रूटॉन्स के साथ परोसें। बनने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 5 मिनट पकाने का समय: 10 मिनट कुल समय: लगभग 15 मिनट अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: लगभग 140–180 kcal प्रोटीन: 4–5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 22–26 ग्राम फाइबर: 4–5 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम (कैलोरी इस्तेमाल की गई सामग्री और मक्खन की मात्रा के अनुसार बदल सकती है।) सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है? भुट्टा-टमाटर सूप कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है और शरीर के कई अंगों को लाभ पहुंचा सकता है। हृदय (Heart) टमाटर में मौजूद लाइकोपीन और एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। पाचन तंत्र (Digestive System) भुट्टे में मौजूद डाइटरी फाइबर पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद करता है। इम्यून सिस्टम (Immune System) टमाटर में भरपूर विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। आंखें (Eyes) भुट्टे में मौजूद ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। त्वचा (Skin) टमाटर के एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। वजन नियंत्रित रखने में सहायक यह सूप कम कैलोरी और अच्छी मात्रा में फाइबर वाला है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। एक्सपर्ट टिप्स ताजे भुट्टे का इस्तेमाल करने से स्वाद बेहतर आता है। अधिक क्रीमी टेक्सचर के लिए थोड़ा दूध या लो-फैट क्रीम मिला सकते हैं। बच्चों के लिए तीखे मसाले कम रखें। हेल्दी विकल्प के लिए मक्खन की जगह ऑलिव ऑयल का उपयोग भी किया जा सकता है। ध्यान रखें: यह सूप पौष्टिक और हेल्दी विकल्प है, लेकिन यदि आपको कॉर्न, डेयरी या किसी अन्य सामग्री से एलर्जी है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार इसका सेवन करें।
Poha Nuggets Recipe: अगर आप रोज-रोज एक जैसा नाश्ता या शाम का स्नैक खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार घर पर क्रिस्पी पोहा नगेट्स जरूर ट्राई करें। बाहर से कुरकुरे और अंदर से मुलायम ये नगेट्स स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल हैं। इन्हें बच्चों के टिफिन, ऑफिस लंच, शाम की चाय या फैमिली स्नैक के रूप में आसानी से परोसा जा सकता है। पोहा, आलू और बेसिक मसालों से तैयार होने वाली यह रेसिपी कम समय में बन जाती है और हर उम्र के लोगों को पसंद आती है। इसमें पोहा ऊर्जा देता है, जबकि बेसन और चावल का आटा इसे हल्का कुरकुरा बनाते हैं। अगर आप इसे कम तेल में शैलो फ्राई या एयर फ्राई करें, तो यह और भी हेल्दी विकल्प बन सकता है। आवश्यक सामग्री (2 लोगों के लिए) 1 कप मोटा पोहा 2 मध्यम आकार के उबले आलू 1 बारीक कटा प्याज 1 बारीक कटी हरी मिर्च (वैकल्पिक) 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 2 बड़े चम्मच बारीक कटी धनिया पत्ती 2 बड़े चम्मच बेसन 2 बड़े चम्मच चावल का आटा स्वादानुसार नमक ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ¼ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर ¼ छोटा चम्मच गरम मसाला तलने के लिए तेल बनाने की विधि 1. पोहा तैयार करें सबसे पहले पोहे को 2 मिनट के लिए पानी में भिगो दें। फिर छलनी में निकालकर अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें और हल्के हाथों से मैश कर लें। 2. मिश्रण तैयार करें एक बड़े बाउल में मैश किया हुआ पोहा और उबले आलू डालें। अब इसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया, अदरक-लहसुन पेस्ट और सभी मसाले मिलाएं। इसके बाद बेसन और चावल का आटा डालकर अच्छी तरह मिक्स करें ताकि मिश्रण अच्छी तरह बंध जाए। 3. नगेट्स बनाएं हाथों पर थोड़ा तेल लगाएं और मिश्रण से छोटे-छोटे नगेट्स या टिक्की का आकार दें। 4. कुरकुरा होने तक पकाएं एक पैन में तेल गर्म करें और मध्यम आंच पर नगेट्स को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। चाहें तो इन्हें एयर फ्रायर या शैलो फ्राई करके भी बना सकते हैं। 5. सर्व करें तैयार पोहा नगेट्स को टोमैटो केचप, हरी चटनी, दही डिप या मिंट सॉस के साथ गरमागरम परोसें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: लगभग 230–280 kcal प्रोटीन: 5–7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 30–35 ग्राम फाइबर: 3–5 ग्राम फैट: 8–10 ग्राम (कैलोरी तलने के तरीके और तेल की मात्रा के अनुसार बदल सकती है।) तैयार होने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15–20 मिनट कुल समय: लगभग 25–30 मिनट यह रेसिपी किनके लिए उपयुक्त है? बच्चों और किशोरों के लिए ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए कॉलेज स्टूडेंट्स परिवार के सभी सदस्य शाम की चाय के साथ हेल्दी स्नैक पसंद करने वाले लोग वीकेंड ब्रेकफास्ट और टिफिन के लिए ध्यान रखें :- अगर कम तेल वाला विकल्प चाहते हैं, तो नगेट्स को एयर फ्राई या शैलो फ्राई करें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कद्दूकस की हुई गाजर, शिमला मिर्च या उबली हुई मटर भी मिलाई जा सकती है।
PCOS Breakfast Ideas: PCOS से जूझ रही महिलाओं के लिए सही नाश्ता दिनभर की ऊर्जा, ब्लड शुगर कंट्रोल और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है। जानिए 4 आसान, हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर ब्रेकफास्ट ऑप्शंस। आज के समय में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस स्थिति में हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और बार-बार भूख लगने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन लक्षणों को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की शुरुआत ऐसे नाश्ते से करनी चाहिए जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स पर्याप्त मात्रा में हों। इससे ब्लड शुगर को स्थिर रखने, लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने और अनहेल्दी क्रेविंग्स को कम करने में मदद मिल सकती है। 1. ओट्स-बेसन चीला अगर आप रोजाना पोहा या सूजी का उपमा खाते हैं, तो उसकी जगह ओट्स और बेसन से बना चीला ट्राई करें। क्यों है फायदेमंद? प्रोटीन और फाइबर से भरपूर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने से बचाने में सहायक कैसे बनाएं? ओट्स का पाउडर, बेसन, प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च मिलाकर बैटर तैयार करें। हल्के घी या ऑलिव ऑयल में दोनों तरफ से सेंक लें। अनुमानित पोषण (1 सर्विंग) कैलोरी: 240–270 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम 2. अंडा भुर्जी और मल्टीग्रेन टोस्ट यदि आप अंडा खाते हैं, तो यह हाई-प्रोटीन नाश्ता बेहतरीन विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत मांसपेशियों और हार्मोन हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में सहायक कैसे बनाएं? दो अंडों की भुर्जी में प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी सब्जियां मिलाएं। इसे एक स्लाइस मल्टीग्रेन या होल व्हीट टोस्ट के साथ खाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 300–330 kcal प्रोटीन: 20–22 ग्राम 3. मूंग दाल इडली या डोसा चावल की जगह मूंग दाल से बनी इडली या डोसा बेहतर विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर इंसुलिन स्पाइक कम करने में मदद पाचन के लिए हल्का कैसे बनाएं? रातभर भिगोई हुई मूंग दाल पीसकर बैटर तैयार करें। इसमें अदरक और हरी मिर्च मिलाकर इडली या डोसा बनाएं। नारियल की चटनी के साथ परोसें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 230–260 kcal प्रोटीन: 12–15 ग्राम 4. चिया सीड्स पुडिंग अगर आपको सुबह मीठा खाने की इच्छा होती है, तो यह हेल्दी विकल्प हो सकता है। क्यों है फायदेमंद? ओमेगा-3 और फाइबर से भरपूर सूजन कम करने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कैसे बनाएं? बादाम या नारियल के दूध में 2–3 चम्मच चिया सीड्स रातभर भिगो दें। सुबह ऊपर से बेरीज, कद्दू के बीज और थोड़ी दालचीनी डालकर खाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–250 kcal प्रोटीन: 8–10 ग्राम PCOS में नाश्ता बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान हर नाश्ते में प्रोटीन जरूर शामिल करें। रिफाइंड कार्ब्स और पैकेटबंद फूड्स से दूरी बनाएं। हेल्दी फैट्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और कद्दू के बीज शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और नियमित शारीरिक गतिविधि करें। मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित रखें। ध्यान दें :- सिर्फ हेल्दी नाश्ता करने से PCOS पूरी तरह ठीक नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार भी जरूरी है।