स्वास्थ्य

सिजेरियन के बाद महिला के पेट में ग्लव्स-नैपकिन मिलने का आरोप

सिजेरियन के बाद महिला के पेट में छूटे ग्लव्स और नैपकिन! हालत बिगड़ी

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
सिजेरियन के बाद महिला के पेट में सर्जिकल ग्लव्स और नैपकिन मिलने का मामला
बीड अस्पताल में सिजेरियन के बाद कथित लापरवाही का मामला

बीड। महाराष्ट्र के बीड जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में सर्जिकल ग्लव्स और पेपर नैपकिन छोड़ दिए गए। इसके बाद महिला को लगातार दर्द और उल्टी की शिकायत हुई और उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

 

जांच में पेट के अंदर मिली बाहरी वस्तु

 

 

परिवार के मुताबिक, सिजेरियन के बाद महिला को पेट में दर्द और उल्टी की समस्या होने लगी। बाद में जांच और सोनोग्राफी में पेट में मवाद होने की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने जांच के दौरान पेट के अंदर बाहरी वस्तु होने की बात बतायी। इसके बाद महिला को दोबारा ऑपरेशन के लिए ले जाया गया।

 

 

तीन सर्जरी के बाद भी हालत गंभीर

 

 

परिवार के अनुसार, महिला को पहले एक निजी अस्पताल और फिर अन्य अस्पतालों में ले जाया गया। बाद में उसे पुणे के ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बतायी जा रही है। इलाज के दौरान महिला की आंत की सर्जरी और गर्भाशय निकालने समेत तीन सर्जरी किए जाने का दावा किया गया है।

 

 

मां बोली- बेटी बच्चे को गोद तक नहीं ले पा रही

 

 

पीड़िता की मां ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बेटी पहली बार मां बनी, लेकिन अब वह अपने बच्चे को गोद में लेने की स्थिति में भी नहीं है। परिवार ने मामले की जांच कराने और जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

 

सामाजिक कार्यकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

 

 

सामाजिक कार्यकर्ता बाबूराव पोतभारे ने भी घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला ने ऑपरेशन के बाद दर्द की शिकायत की थी, लेकिन उसकी परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने एक डॉक्टर पर इलाज के लिए पांच लाख रुपये मांगने का आरोप भी लगाया है।

 

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अस्पताल की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

 

जांच और कार्रवाई की मांग

 

 

घटना के सामने आने के बाद पीड़ित परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। महिला की मौजूदा स्थिति गंभीर बतायी जा रही है और उसका इलाज ICU में जारी है। मामले में प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही लापरवाही के आरोपों की पूरी सच्चाई सामने आएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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हर महीने पीरियड्स में असहनीय दर्द से परेशान हैं? गर्म पानी से नहाना दे सकता है राहत, जानें कैसे

पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से, कमर और जांघों में दर्द या ऐंठन होना काफी आम है। मेडिकल भाषा में इसे Dysmenorrhea कहा जाता है। कुछ महिलाओं में यह दर्द इतना ज्यादा हो जाता है कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं। ऐसे में गर्म पानी से नहाना या पेट के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड लगाना राहत देने वाला आसान उपाय हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक हल्के से मध्यम पीरियड दर्द में हीट थेरेपी मांसपेशियों को रिलैक्स करने और ऐंठन कम करने में मदद कर सकती है। गर्म पानी पीरियड दर्द में कैसे करता है काम? पीरियड्स के दौरान शरीर में Prostaglandins नामक रसायनों का स्तर बढ़ सकता है। ये गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन पैदा करते हैं, जिसके कारण ऐंठन और दर्द महसूस होता है। गर्म पानी या हीट थेरेपी प्रभावित मांसपेशियों को आराम देने और उस हिस्से में रक्त संचार बेहतर करने में मदद कर सकती है। इससे गर्भाशय की ऐंठन और पेट-कमर के दर्द में कुछ राहत मिल सकती है। 10 से 20 मिनट का हॉट बाथ दे सकता है आराम पीरियड्स के दौरान आरामदायक तापमान वाले गर्म पानी में करीब 10 से 20 मिनट तक नहाना या बैठना कुछ महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके संभावित फायदे हैं: गर्भाशय और आसपास की मांसपेशियों को आराम मिलना पेट और कमर की ऐंठन में कमी शरीर में रक्त संचार बेहतर होना तनाव और बेचैनी कम होना शरीर को रिलैक्स महसूस होना ध्यान रखें कि पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो, क्योंकि इससे त्वचा जलने या चक्कर आने का खतरा हो सकता है। हॉट बाथ या हीटिंग पैड, क्या बेहतर है? दोनों ही Heat Therapy के तरीके हैं, लेकिन जरूरत के अनुसार इनका इस्तेमाल अलग-अलग हो सकता है। हॉट बाथ: पूरे शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है और कमर व पैरों की मांसपेशियों को भी आराम मिल सकता है। हीटिंग पैड: पेट या कमर जैसे दर्द वाले हिस्से पर सीधे गर्माहट देने के लिए अधिक सुविधाजनक है और घर के बाहर भी इस्तेमाल करना आसान हो सकता है। किस विकल्प से आपको ज्यादा राहत मिलती है, यह व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकता है। पीरियड दर्द में इन चीजों से भी मिल सकती है मदद हीट थेरेपी के अलावा कुछ आसान उपाय भी मददगार हो सकते हैं: हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें। पर्याप्त पानी पिएं। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें। पर्याप्त नींद लें। बहुत ज्यादा कैफीन और नमक का सेवन कम करें। शरीर को पर्याप्त आराम दें। कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है? हर महीने होने वाला हल्का दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन असहनीय या लगातार बढ़ता दर्द सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि रोजमर्रा के काम प्रभावित हों, हर महीने दर्द बढ़ता जाए, अत्यधिक ब्लीडिंग हो या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। कभी-कभी तेज पीरियड दर्द के पीछे दूसरी स्त्री रोग संबंधी समस्या भी हो सकती है।  

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दिमाग की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी और किडनी की खराब सेहत के बीच मिला संबंध, हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है अहम कारण

एक नए अध्ययन में मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी (Cerebral Small Vessel Disease) और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध सामने आया है। शोध के अनुसार, बुजुर्ग लोगों में मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी क्षति जितनी अधिक थी, किडनी की कार्यक्षमता खराब होने और पेशाब में एल्ब्यूमिन बढ़ने के संकेत भी उतने अधिक पाए गए। हालांकि, यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की बीमारी सीधे किडनी की बीमारी का कारण बनती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके लिए लंबे समय तक किए जाने वाले अध्ययनों की जरूरत है। 239 लोगों पर किया गया अध्ययन अध्ययन में 239 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागियों के मस्तिष्क की एमआरआई जांच और किडनी से संबंधित परीक्षण किए गए। मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी का आकलन 0 से 4 के स्कोर पर किया गया। इसमें सफेद पदार्थ में गंभीर बदलाव, छोटे स्ट्रोक जैसे घाव, मस्तिष्क में सूक्ष्म रक्तस्राव और रक्त वाहिकाओं के आसपास बढ़ी हुई जगह जैसे संकेतों को शामिल किया गया। किडनी की स्थिति जानने के लिए ईजीएफआर, सीरम क्रिएटिनिन, सिस्टेटिन-सी और यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन अनुपात जैसे मानकों का इस्तेमाल किया गया। बीमारी का स्कोर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता कम मिली शोध में पाया गया कि सेरेब्रल स्मॉल वेसल डिजीज के स्कोर में हर एक अंक की वृद्धि ईजीएफआर में औसतन लगभग 2.98 की कमी से जुड़ी थी। इसके अलावा, बीमारी का अधिक स्कोर: सीरम क्रिएटिनिन के बढ़ने से जुड़ा था। सिस्टेटिन-सी के बढ़ने से संबंधित पाया गया। पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा बढ़ने से जुड़ा था। समग्र किडनी dysfunction की अधिक संभावना से संबंधित था। एल्ब्यूमिन्यूरिया की संभावना भी अधिक पाई गई। हालांकि, कम ईजीएफआर के साथ संबंध सांख्यिकीय रूप से निर्णायक नहीं था। हाई ब्लड प्रेशर की भूमिका महत्वपूर्ण अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को लेकर सामने आया। जब शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर को विश्लेषण में शामिल किया, तो मस्तिष्क और किडनी से जुड़े कई संबंध कमजोर हो गए। शुरुआती मध्यस्थता विश्लेषण के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर ने इन संबंधों में लगभग 32% से 36.7% तक योगदान दिया हो सकता है। इससे संकेत मिलता है कि लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली साझा प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, जिसका असर मस्तिष्क और किडनी दोनों पर पड़ सकता है। क्या दिमाग की बीमारी से किडनी खराब होती है? फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। यह अध्ययन क्रॉस-सेक्शनल था, यानी प्रतिभागियों का आकलन एक समय बिंदु पर किया गया। इसलिए इससे यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी पहले हुई या किडनी की समस्या, अथवा दोनों के पीछे कोई साझा जोखिम कारक है। शोधकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए भविष्य में लंबे समय तक लोगों का अध्ययन करने वाले प्रॉस्पेक्टिव रिसर्च की आवश्यकता होगी। क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध? मस्तिष्क और किडनी दोनों ही शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं और रक्तचाप से प्रभावित होने वाले महत्वपूर्ण अंग हैं। इसलिए अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि दोनों अंगों के स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय रक्तचाप और रक्त वाहिका स्वास्थ्य को व्यापक रूप से नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो सकता है। फिर भी, इस अध्ययन के आधार पर किसी व्यक्ति को अपनी दवा या इलाज में बदलाव नहीं करना चाहिए। किडनी की कार्यक्षमता या रक्तचाप को लेकर चिंता होने पर चिकित्सकीय सलाह और उचित जांच जरूरी है।  

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गर्भावस्था में Pregnancy Cravings और संतुलित खान-पान की जानकारी
Pregnancy Cravings: गर्भावस्था में बार-बार कुछ खास खाने का क्यों करता है मन? जानें क्रेविंग की वजह और क्या खाएं

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्भावस्था के दौरान अचानक किसी खास चीज को खाने की तेज इच्छा होना आम बात है। कभी मीठा तो कभी नमकीन या खट्टा खाने का मन करना प्रेग्नेंसी क्रेविंग कहलाता है। हालांकि, हर तरह की क्रेविंग को पूरा करना जरूरी नहीं है। गर्भावस्था में खान-पान ऐसा होना चाहिए, जिससे मां और बच्चे दोनों को पर्याप्त पोषण मिल सके।   हार्मोन में बदलाव से बढ़ सकती है क्रेविंग     गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन और ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG) जैसे हार्मोन में तेजी से बदलाव होता है। ये बदलाव मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं, जो भूख, स्वाद और गंध को नियंत्रित करते हैं। इसी वजह से गर्भवती महिला को अचानक किसी खास स्वाद या खाद्य पदार्थ की इच्छा हो सकती है।   इसके अलावा, गर्भ में बच्चे के विकास के लिए शरीर को आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। हालांकि, किसी खास क्रेविंग को सीधे किसी पोषक तत्व की कमी का निश्चित संकेत मानना सही नहीं है।   मिट्टी या चॉक खाने का मन हो तो सावधान     कुछ गर्भवती महिलाओं को मिट्टी, चॉक, बर्फ या दूसरी अखाद्य चीजें खाने की इच्छा हो सकती है। इसे पाइका (Pica) कहा जाता है। ऐसी क्रेविंग कभी-कभी आयरन की कमी से जुड़ी हो सकती है।   अगर गर्भावस्था में अखाद्य चीजें खाने की इच्छा हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच और उपचार कराना बेहतर है।   हर क्रेविंग पूरी करना क्यों सही नहीं?     गर्भावस्था में बार-बार चिप्स, मिठाई, मीठे पेय, फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाने से अनावश्यक कैलोरी बढ़ सकती है। इससे वजन बढ़ने और कुछ गर्भावस्था संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।   ऐसे खाद्य पदार्थों की जगह पोषक और संतुलित विकल्प लेना बेहतर है। गर्भावस्था में केवल अधिक खाना ही नहीं, बल्कि पौष्टिक और संतुलित भोजन करना ज्यादा जरूरी है।   क्रेविंग हो तो अपनाएं ये हेल्दी विकल्प     मीठा खाने का मन हो तो फल, खजूर या किशमिश जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। तली-भुनी चीजों की जगह भुने मखाने, नट्स या अन्य पौष्टिक स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।   दिनभर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में संतुलित भोजन लेने और पर्याप्त पानी पीने से भी अचानक होने वाली भूख या क्रेविंग को संभालने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर ने यदि आयरन, फोलिक एसिड या अन्य सप्लीमेंट्स बताए हैं, तो उन्हें उनकी सलाह के अनुसार लेना चाहिए।   कब डॉक्टर से संपर्क करें?     अगर क्रेविंग इतनी ज्यादा हो कि सामान्य और संतुलित भोजन प्रभावित होने लगे, अखाद्य चीजें खाने की इच्छा हो या खान-पान और वजन को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।   हर गर्भवती महिला की पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के चरण के अनुसार डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह से डाइट प्लान बनाना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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