झारखंड

हजारीबाग में वज्रपात का कहर, आंगनबाड़ी सेविका समेत तीन लोगों की मौत

abhishek singh जून 19, 2026 0
Hazaribagh Lightning Strike
Lightning Strike

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में गुरुवार को हुई वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। बड़कागांव और इचाक प्रखंड में आकाशीय बिजली गिरने से एक आंगनबाड़ी सेविका और दो किसानों की मौत हो गई। हादसों के बाद प्रभावित गांवों में शोक का माहौल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को आपदा राहत के तहत मुआवजा देने की मांग की है।

 

महुआ के पेड़ के पास गिरी बिजली, सेविका की मौत


बड़कागांव प्रखंड की आंगो पंचायत के फटरियापानी गांव निवासी शांति देवी, जो झिकझोर आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका थीं, गुरुवार शाम घर के पास महुआ के पेड़ पर डोरही तोड़ने गई थीं। इसी दौरान अचानक तेज गर्जना के साथ वज्रपात हुआ, जिसकी चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

 

खेत में काम कर रहे किसान की गई जान


बड़कागांव के पलांडू गांव निवासी किशुन महतो गुरुवार दोपहर खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज बारिश और गर्जना के बीच बिजली गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस की मदद से शव को पोस्टमार्टम के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। मृतक अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और तीन पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

 

इचाक में भी वज्रपात का शिकार बना किसान


इचाक प्रखंड के बरवा गांव निवासी सुरेश प्रसाद मेहता उर्फ चौधरी मेहता (55) की भी खेत में काम करने के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

 

प्रशासन से राहत की मांग


लगातार हुई इन दुखद घटनाओं के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मृतकों के परिजनों को आपदा राहत योजना के तहत शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही लोगों से बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों तथा खेतों में काम करने से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Dark clouds over Ranchi city as rain and strong winds hit Jharkhand under orange weather alert.
झारखंड में मौसम ने ली करवट, रांची समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी

झारखंड में मानसूनी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। शुक्रवार, 19 जून को राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से ही आसमान में घने बादल छा गए और कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और मध्य झारखंड के आसपास बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए रांची सहित 14 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन 14 जिलों में जारी हुआ ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने जिन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, उनमें शामिल हैं: रांची हजारीबाग खूंटी रामगढ़ गिरिडीह कोडरमा बोकारो धनबाद देवघर दुमका जामताड़ा गोड्डा साहिबगंज पाकुड़ इन जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर वज्रपात की आशंका जताई गई है। रांची का तापमान 19 जून को रांची का अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सुबह हुई बारिश के बाद मौसम काफी सुहावना हो गया। 24 जून तक सभी जिलों में येलो अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 24 जून तक पूरे झारखंड में बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। इसी को देखते हुए राज्य के सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। गुरुवार को कहां कितनी बारिश हुई? गुरुवार को सबसे अधिक 14 मिमी बारिश देवघर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मेदिनीनगर और बोकारो में भी हल्की बारिश हुई। वहीं अधिकतम तापमान की बात करें तो: मेदिनीनगर – 42°C बोकारो – 38.1°C जमशेदपुर – 36.6°C चाईबासा – 36.8°C रांची – 35.1°C वज्रपात और आंधी के दौरान बरतें ये सावधानियां मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। खराब मौसम के दौरान: किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर शरण लें। खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े न हों। बिजली के खंभों, मोबाइल टावर और धातु की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। मोबाइल फोन का अनावश्यक इस्तेमाल करने से बचें। समूह में होने पर एक जगह भीड़ लगाने के बजाय थोड़ी दूरी बनाकर खड़े रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी बरतकर वज्रपात से होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।  

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RSS कार्यालय हमलाः आतंकी संगठनों से जुड़े हमलावरों के तार

रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सैफ अंसारी, अमन अंसारी और सायम सुजान शामिल हैं। भागने के दौरान गुरुवार को सैफ अंसारी का हाफ एनकाउंटर हुआ था। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।   आतंकी संगठनों से निकला कनेक्शन एनआईए अधिकारियों की पूछताछ में सैफ और अमन के आतंकी संगठन आईएसआई व टीटीएच (तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान) से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। उनके मोबाइल से आतंकी संगठन से जुड़े होने के साक्ष्य मिले हैं। यह भी जानकारी मिली है कि दोनों ने संगठन के इशारे पर रांची समेत पूरे झारखंड में दहशत फैलाने के उद्देश्य से आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंका था। सायम सुजान उनकी मदद कर रहा था। आरोपियों ने पुलिस और एनआईए को कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी हैं। 50 हजार में तय हुआ था सौदा जांच एजेंसियों के समक्ष सैफ अंसारी ने बताया कि वह कुछ महीने पहले काम के सिलसिले में दुबई गया था। वहां उसकी मुलाकात टीटीएच के सदस्य राणा हुसैन और शाहबाज आलम उर्फ भट्ठी से हुई। सैफ के मुताबिक, संगठन से जुड़ने के बाद उसे बम बनाने और हमला करने का प्रशिक्षण दिया गया। आरएसएस कार्यालय पर हमले के बाद निश्चिंत थे मंगलवार की देर रात पेट्रोल बम फेंकने के बाद तीनों आरोपी मेन रोड स्थित कर्बला चौक पहुंचे। सैफ‎ अंसारी और अमन अंसारी अपने सहयोगी सायम‎ सुजान के साथ रात भर कर्बला चौक और‎ पथलकुदवा में बेखौफ घूमते रहे। पुलिस की कोई ‎हलचल नहीं देख तीनों इतने बेफिक्र थे कि फुलबगान‎ स्थित घर जाकर आराम से सो गए। बुधवार की सुबह‎ जगने के बाद सैफ को मोबाइल पर चल रहे वीडियो ‎से पुलिस की गतिविधियों की जानकारी मिली। शहर छोड़कर भागने का प्लान बनाया दोपहर बाद जब दोनों का सीसीटीवी फुटेज सोशल‎ मीडिया में वायरल हुआ और केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा‎ जांच शुरू करने की जानकारी मिली, तो बचने के‎लिए शहर छोड़कर भागने का प्लान बनाया। इसके ‎बाद सैफ अंसारी और अमन अंसारी रेलवे स्टेशन‎ पहुंचे। ट्रेन में पकड़े गये पुलिस की सख्ती देख दिल्ली भागने का प्लान ‎बनाया। दोनों रांची से नई दिल्ली जाने वाली झारखंड‎ स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में सवार हो गए। लेकिन, इससे‎ पहले ही पुलिस ने दोनों आरोपियों को गझंडी रेलवे‎ स्टेशन (कोडरमा) से गिरफ्तार कर लिया। दोनों की ‎निशानदेही पर तीसरा आरोपी भी पकड़ा गया।‎ थाने की खिड़की से भाग निकला सैफ गिरफ्तार तीनों आरोपियों को चुटिया थाना की हाजत से निकालकर पूछताछ के‎लिए गुरुवार की सुबह कोतवाली थाना लाया गया। जांच एजेंसी द्वारा थोड़ी देर ‎तक पूछताछ किए जाने के बाद सैफ अंसारी ने शौचालय जाने की इच्छा जताई।‎ एसआईआरबी का एक जवान उसे लेकर थाने के शौचालय में गया। सैफ‎ शौचालय के अंदर घुस गया और जवान दरवाजे पर खड़ा रहा। सैफ ने जवान‎ को चकमा देने के लिए शौचालय के नल का पानी खोल दिया और खुद खिड़की‎ तोड़कर बाहर छलांग लगा दी। सैफ वहां से भागकर रातू रोड पहुंच गया। इधर,‎ काफी देर तक जब आरोपी बाहर नहीं निकला तो जवान ने शौचालय का गेट खोला। इसके बाद जवान के होश उड़ गए। थाना के शौचालय से सैफ के भागने की जानकारी सुबह करीब 11.30 बजे कोतवाली थानेदार को ‎मिली। थानेदार ने सभी वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।‎ चान्हो में हुई मुठभेड़ पुलिस विभिन्न जगहों पर जांच शुरू की और दोपहर 2.30 बजे मांडर टोल प्लाजा के पास बस पर ‎सवार होकर जा रहा सैफ पकड़ा गया। आरोपी को ‎वहां से पूछताछ के लिए चामा पिकेट ले जाने के दौरान रास्ते में चान्हो स्थित लुकईया ढोडहा के पास ‎पुलिस की गाड़ी खराब हो गई। इस दौरान आरोपी ने चान्हो थानेदार टिंकू रजक का सर्विस रिवाल्वर ‎लूटकर भागने लगा। आरोपी ने एक गोली भी चलाई, ‎जिसमें थानेदार बाल-बाल बच गए। पुलिस ने भी‎ गोली चलाई जो आरोपी के पैर में लगी। घायल को ‎रिम्स में भर्ती कराया गया है।‎ एटीएस करेगी इस केस का अनुसंधान पेट्रोल बम कांड में शामिल अपराधियों का तार अंतरराष्ट्रीय‎ गिरोह से जुड़े होने की जानकारी मिलने के बाद रांची‎ एसएसपी ने आगे का अनुसंधान झारखंड एटीएस से कराने‎ का आग्रह किया था। उनके आग्रह पर पुलिस मुख्यालय ने ‎इसकी स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति मिलने के बाद इस केस को‎ झारखंड एटीएस को ट्रांसफर कर दिया गया है।‎‎

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INDIA bloc tensions Jharkhand
झारखंड में इंडी गठबंधन में किचकिच, कांग्रेस ने RJD और CPI पर लगाये आरोप, हुआ पलटवार

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के बाद इंडी गठबंधन के अंदर किचकिच शुरू हो गई है। कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की हार का ठिकरा RJD और CPI पर फोड़ा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने RJD और CPI पर आरोप लगाया है कि उनके विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है। इस पर दोनों ही दलों ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसे अपने ही गिरेबां में झांकने को कहा है।  झारखंड में बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी और JMM के बैजनाथ राम जीते बताते चलें कि झारखंड में एक सीट NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार उद्योगपति परिमल नाथवानी और दूसरी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीती हैं। झारखंड में क्रॉस वोटिंग झारखंड में क्रॉस वोटिंग की वजह से परिमल को जीत मिली। यहां 3 वोट अवैध पड़े। इसके बाद कांग्रेस ने आरजेडी और लेफ्ट पर साथ ना देने का आरोप लगाया। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि लेफ्ट और राजद ने धोखा दिया है।  कांग्रेस ने RJD और CPI पर लगाये आरोप झारखंड में कांग्रेस ने RJD और CPI पर  साथ नहीं देने का आरोप लगाया है। इस पर दोनों ही दलों ने पलटवार किया। CPI (ML) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस नेता के. राजू के आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया है। क्रॉस वोटिंग की बात पूरी तरह से गलत है। हमने गठबंधन धर्म का पूरी तरह से पालन किया है। RJD के केंद्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि राजू की भाषा दुखद है। मैं वहां एजेंट था। मेरे सामने चार विधायकों ने दिखाकर वोट दिया है। बिना किसी जांच के राजू जैसे नेता कहते हैं कि RJD ने धोखा दिया है। हमें नहीं लगता कि सांप्रदायिक ताकतों के साथ हाथ मिला सकते हैं। झारखंड में कैसे हुई वोटिंग, पूरा गणित समझे झारखंड में 81 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। अभी की मौजूदा स्थिति में NDA के 24, JMM-कांग्रेस के गठबंधन के 56 और JKLM का एक विधायक है। संख्या बल पूरा रहने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा मात्र 19 वोट ही ला सके और वह हार गये। वहीं, एनडीए के महज 24 वोट होने के बावजूद परिमल नाथवानी 28 वोट पाकर आसानी से जीत गये।

anjali kumari जून 19, 2026 0
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