झारखंड

Kolhan Jails to Get High-Tech Security With New Watch Towers

कोल्हान की जेलों की सुरक्षा होगी हाईटेक, 360 डिग्री निगरानी के लिए बनेंगे नए वॉच टावर

kalpana अगस्त 17, 2026 0
New watch towers planned at jails in Kolhan for 360-degree security surveillance
Kolhan Jail Security to Get Major Upgrade With New Watch Towers

जमशेदपुर: कोल्हान क्षेत्र की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नए वॉच टावर और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया जाएगा. इन वॉच टावरों के जरिए जेल परिसर के अंदर और बाहरी परिधि पर 360 डिग्री निगरानी रखने में मदद मिलेगी.

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जेलों में सुरक्षा से जुड़े विभिन्न निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्यों को स्वीकृति दी गयी है. नए वॉच टावर बनने के बाद सुरक्षा कर्मियों को जेल की चहारदीवारी, बैरकों और संवेदनशील इलाकों पर ऊंचाई से नजर रखने में आसानी होगी. इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते निगरानी और कार्रवाई की जा सकेगी.

घाघीडीह सेंट्रल जेल में बनेंगे 6 नए वॉच टावर

घाघीडीह सेंट्रल जेल, जमशेदपुर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छह नए वॉच टावर बनाए जाएंगे. इनका निर्माण जेल की चहारदीवारी और बैरकों पर चारों ओर से निगरानी रखने के उद्देश्य से किया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 79.91 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को चार महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

नए वॉच टावर बनने के बाद सुरक्षा प्रहरियों को जेल परिसर के बड़े हिस्से पर एक साथ नजर रखने में सुविधा होगी. खासकर चहारदीवारी और संवेदनशील स्थानों की निगरानी पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है.

चाईबासा जेल में 8 वॉच टावर, क्वार्टर की भी होगी मरम्मत

चाईबासा मंडल कारा में सुरक्षा निगरानी बढ़ाने के लिए आठ नए वॉच टावरों का निर्माण कराया जाएगा. इन टावरों के निर्माण पर करीब 99.04 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

इसके अलावा जेल के स्टाफ क्वार्टर की छतों का वाटरप्रूफिंग कार्य भी कराया जाएगा. इस पर करीब 7.38 लाख रुपये खर्च होंगे और इसे तीन महीने में पूरा करने की योजना है. इससे कर्मचारियों के आवास से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार होगा.

सरायकेला जेल में बनेगा नया प्रशासनिक भवन

सरायकेला मंडल कारा में जेल के प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए नए प्रशासनिक भवन का निर्माण कराया जाएगा. इस भवन के निर्माण पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होंगे. निर्माण कार्य को छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

नए प्रशासनिक भवन से जेल प्रबंधन से जुड़े कामकाज के लिए बेहतर आधारभूत सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है.

सिमडेगा और खूंटी की जेलों में भी होंगे निर्माण कार्य

जेल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की योजना केवल कोल्हान तक सीमित नहीं है. सिमडेगा मंडल कारा में आठ वॉच टावर और मेन गेट शेड का निर्माण कराया जाएगा. वहीं खूंटी उपकारा में तीन वॉच टावर और मेन गेट शेड के साथ विभिन्न वार्ड, बैरक और क्वार्टरों की विशेष मरम्मत का काम भी कराया जाएगा.

इसके अलावा गुमला मंडल कारा में मेन गेट शेड का निर्माण किया जाएगा. विभाग की ओर से इन सभी कार्यों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गयी है.

सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

जेलों में नए वॉच टावरों का निर्माण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ऊंचे स्थानों से निगरानी होने के कारण जेल की चहारदीवारी और आसपास के क्षेत्रों पर सुरक्षा कर्मियों की नजर बेहतर तरीके से बनी रह सकेगी.

कोल्हान की प्रमुख जेलों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक भवन और कर्मचारियों के आवास की मरम्मत जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में जेलों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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देवघर में ऑनलाइन दवा ऑर्डर के दौरान साइबर ठगी का मामला
ऑनलाइन दवा मंगाना पड़ा महंगा, साइबर ठगों ने खाते से उड़ाए 40,600 रुपये

देवघर। पालोजोरी थाना क्षेत्र के चौधरी नवाडीह गांव निवासी जायद शेख ऑनलाइन दवा मंगाने के दौरान साइबर ठगी के शिकार हो गए। साइबर ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर बैंक खाते से 40,600 रुपये निकाल लिए। घटना 12 अगस्त की बताई जा रही है।   दवा ऑर्डर करने के बाद ठगों ने किया संपर्क     जानकारी के अनुसार, जायद शेख ने ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए ऑर्डर किया था। इसके बाद साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया और ऑर्डर से जुड़ी प्रक्रिया के नाम पर उन्हें अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए उनके खाते से 40,600 रुपये की अवैध निकासी कर ली गई।   खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करने और ठगी गई राशि वापस कराने की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।   फर्जी कस्टमर केयर के जरिए भी हो सकती है ठगी     ऑनलाइन दवा खरीदने वालों को साइबर ठग कई तरीकों से निशाना बना सकते हैं। फर्जी वेबसाइट, नकली कस्टमर केयर नंबर, डिस्काउंट ऑफर या भुगतान से जुड़े फर्जी मैसेज के जरिए लोगों को जाल में फंसाया जा सकता है।   कई मामलों में ठग खुद को दवा कंपनी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। ऑर्डर कैंसल होने, पेमेंट फेल होने या रिफंड के नाम पर लिंक भेजकर या बैंकिंग जानकारी मांगकर ठगी की जा सकती है।   OTP और UPI PIN कभी साझा न करें     ऑनलाइन खरीदारी के दौरान OTP, ATM PIN, UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन करने या भुगतान अनुरोध स्वीकार करने से भी बचें।   ध्यान रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।   खाते से पैसे निकलें तो तुरंत करें शिकायत     अगर बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकल जाए तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें और खाते या कार्ड को सुरक्षित कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज कराएं।   शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन की तारीख, रकम, बैंक से मिले मैसेज, संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक और स्क्रीनशॉट जैसी जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। ऑनलाइन दवा खरीदते समय केवल कीमत और डिलीवरी पर ध्यान देने के बजाय वेबसाइट या ऐप की विश्वसनीयता भी जांचें। किसी अनजान लिंक या फोन कॉल के जरिए भुगतान करने से बचें। डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता रखना ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।

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धनबाद। धनबाद के मेयर संजीव सिंह की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एसजेएएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेयर के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही उनके समर्थक और शुभचिंतक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचने लगे।   डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज     अस्पताल में चिकित्सकों की टीम मेयर संजीव सिंह के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। जरूरी जांच और उपचार किया जा रहा है। हालांकि, फिलहाल उनकी तबीयत बिगड़ने की सटीक वजह और स्वास्थ्य की विस्तृत स्थिति की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।     अस्पताल के बाहर जुटे समर्थक     मेयर के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना शहर में फैलते ही समर्थकों और शुभचिंतकों में चिंता बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनका हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे। समर्थक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।   अस्पताल परिसर में भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर मेयर संजीव सिंह के स्वास्थ्य से जुड़ी अगली जानकारी पर है।

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झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष और गांवों में पहुंचे हाथियों का झुंड
झारखंड में बढ़ रहा इंसान-गजराज संघर्ष, 23 साल में 1,340 लोगों की मौत

रांची। झारखंड में मानव और हाथियों के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। जंगलों से निकलकर हाथियों के झुंड गांवों और खेतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। रामगढ़ में सोमवार को करीब 15 हाथियों के झुंड के हमले में दो महिलाओं की मौत के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है।   23 साल में 1,340 लोगों की गई जान     एक दीर्घकालिक अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2000 से 2023 के बीच झारखंड के 22 वन प्रमंडलों में मानव-हाथी संघर्ष की 1,740 घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में 1,340 लोगों की मौत और करीब 400 लोग घायल हुए।   आंकड़ों के अनुसार, रांची क्षेत्र में सबसे ज्यादा 391 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद खूंटी में 131, पूर्वी सिंहभूम में 68, हजारीबाग में 58 और पलामू में 48 लोगों की जान गई।   रामगढ़ में 15 हाथियों के झुंड ने मचाया आतंक     रामगढ़ के रजरप्पा थाना क्षेत्र के बड़कीपोना गांव में सोमवार को करीब 15 हाथियों का झुंड पहुंच गया। कृषि कार्य कर रहीं भानो देवी और सबीना खातून की हाथियों के हमले में मौत हो गई। एक महिला और एक पुरुष के घायल होने की भी सूचना है।   घटना के बाद वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की चेतावनी दी। हाथियों का झुंड गांव, रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में घूमता रहा।   इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा     झारखंड के रांची, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम और रामगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खासकर जंगल से सटे गांवों में हाथियों के पहुंचने से फसल नुकसान के साथ-साथ जान का खतरा भी बढ़ जाता है।     आखिर क्यों बढ़ रहा है इंसान और हाथियों के बीच संघर्ष?     मानव-हाथी संघर्ष के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं। जंगलों का विखंडन, जंगलों के आसपास बढ़ती खेती और बस्तियां, सड़क-रेल परियोजनाएं और हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर में बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं।   इसके अलावा धान जैसी फसलें भी हाथियों को गांवों और खेतों की ओर आकर्षित करती हैं। जंगल और इंसानी आबादी के बीच बढ़ता संपर्क संघर्ष की स्थिति को और गंभीर बना रहा है।   सिर्फ हाथी भगाना नहीं, स्थायी समाधान जरूरी     विशेषज्ञों के मुताबिक, हाथियों को केवल एक जगह से दूसरी जगह खदेड़ना स्थायी समाधान नहीं है। हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित रखने, संवेदनशील गांवों में समय पर अलर्ट पहुंचाने और वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।   मानव-हाथी संघर्ष में नुकसान केवल इंसानों का ही नहीं होता। अध्ययन के अनुसार, इसी अवधि में झारखंड में 225 हाथियों की भी मौत हुई। बिजली का करंट, रेलवे दुर्घटनाएं और अन्य मानवीय गतिविधियां हाथियों के लिए भी जानलेवा साबित हुई हैं। रामगढ़ की ताजा घटना ने साफ कर दिया है कि झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष अब गंभीर जनसुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है।

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