झारखंड

JPSC-JSSC आंदोलन पर सरकार और छात्रों की चौथे दौर की वार्ता

JPSC-JSSC आंदोलन: सरकार से चौथे दौर की वार्ता शुरू

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों की वार्ता
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर सरकार से चौथे दौर की बातचीत

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC समेत प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता शुरू हो गई है। सोमवार को 10 सदस्यीय छात्र डेलिगेशन सरकार से बातचीत के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच लंबित मांगों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।

 

सरकार की ओर से चार मंत्री बातचीत में शामिल

 

 

छात्रों से बातचीत के लिए सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हैं। छात्रों की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में अपनी मांगें रख रहा है।

 

 

तीन दौर की बातचीत में नहीं बनी सहमति

 

 

सरकार और छात्रों के बीच इससे पहले तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। हालांकि, कई प्रमुख मांगों पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान के बाद सरकार ने एक बार फिर बातचीत की पहल की है।

 

अब चौथे दौर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि सरकार की ओर से छात्रों की लंबित मांगों को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव रखा जा सकता है।

 

JPSC-JSSC परीक्षा और CBI जांच समेत कई मांगें

 

 

छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, संबंधित परीक्षा को रद्द करने, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं।

 

छात्र लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से गठित मंत्रियों की कमेटी पहले भी छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर चुकी है।

 

बैठक के बाद तय होगी आंदोलन की आगे की रणनीति

 

 

चौथे दौर की वार्ता में अगर किसी अहम मुद्दे पर सहमति बनती है तो आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति बदल सकती है। वहीं बातचीत बेनतीजा रहने की स्थिति में छात्र अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला कर सकते हैं।

 

बैठक के नतीजे पर अब छात्र संगठनों और सरकार दोनों की नजर है।

 

ये 10 छात्र वार्ता में शामिल

 

 

छात्रों के 10 सदस्यीय डेलिगेशन में:

 

रविंद्र पासवान

पीयूष कुमार सिंह

रविंद्र कुमार रवि

कार्तिक सोरेन

राजेश प्रसाद

उमेश प्रसाद

शशांक कुमार

अंकित कुमार

आनंद कुमार

शालू कुमारी

वार्ता के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध टूटता है या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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MMDR Bill: JMM के आंदोलन पर भड़के बाबूलाल, हेमंत सोरेन पर साधा निशाना

रांची। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से विधेयक के विरोध में आंदोलन की घोषणा के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज विधेयक को लेकर सरकार की ओर से किया जा रहा विरोध छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश है।   संशोधन विधेयक में बड़ा बदलाव नहीं: बाबूलाल     बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संशोधन विधेयक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, इसमें राज्यों की ओर से प्रमुख खनिजों पर अलग-अलग तरीके से लगाए जाने वाले कर पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।   उन्होंने कहा कि विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य सरकारों के लिए इस तरह से सेस लगाने की व्यवस्था प्रभावित होगी। बाबूलाल ने झारखंड सरकार पर कोयला और लौह अयस्क पर सेस लगाने को लेकर भी सवाल उठाए।   'सांसदों ने संसद में विरोध क्यों नहीं किया?'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो रहा था, तब विपक्षी सांसदों को सदन में बहस और विरोध करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय इस मुद्दे पर प्रभावी तरीके से चर्चा नहीं की गई और अब झारखंड में आंदोलन की बात कही जा रही है।   उन्होंने कहा कि MMDR एक्ट में एकरूपता लाने का प्रावधान किया गया है। उनका दावा है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शुल्क की वजह से छोटे कारोबारियों को परेशानी होती थी।   'बिना केंद्र की अनुमति के राज्य नहीं लगा सकेंगे टैक्स'     बाबूलाल मरांडी ने कहा कि नए प्रावधान के तहत केंद्र की अनुमति के बिना राज्य सरकारों द्वारा कुछ प्रकार के अतिरिक्त कर लगाने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं है, क्योंकि देश के कई राज्यों में खनिज संसाधन मौजूद हैं।   उन्होंने रॉयल्टी में राज्य और केंद्र के हिस्से का भी जिक्र किया। बाबूलाल के अनुसार, पहले रॉयल्टी में राज्यों को 60.24 फीसदी हिस्सा मिलता था, जबकि अब यह हिस्सा बढ़कर 88.53 फीसदी और केंद्र का हिस्सा 11.47 फीसदी हो गया है।   सेस को लेकर राज्य सरकार पर हमला     नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड सरकार ने 2024 में सेस से जुड़े नियम बनाए और इसके बाद तीन बार सेस की राशि बढ़ाई गई। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल कोयले पर राज्य सरकार 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन सेस ले रही है।   उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सेस की दरें इससे कम हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के अतिरिक्त सेस से झारखंड को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।   'छात्र आंदोलन को भटकाने की कोशिश'     बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार MMDR एक्ट को लेकर आंदोलन की बात करके JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।   उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को बार-बार वार्ता के नाम पर लटकाया और भटकाया जा रहा है। बाबूलाल ने कहा कि सरकार की ओर से दोबारा वार्ता के लिए बुलाए जाने को लेकर भी छात्रों को सतर्क रहना चाहिए।

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धनबाद। कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में 7 अगस्त को हुए भू-धंसान के बाद प्रभावित परिवारों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले नौ दिनों से प्रभावित लोग STG आउटसोर्सिंग कंपनी के स्थल के सामने धरने पर बैठे हैं। अब मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रभावितों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और बीसीसीएल प्रबंधन से बातचीत का आश्वासन दिया।   कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने किया घटनास्थल का दौरा     कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी भूपेंद्र मरावी, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, बेरमो विधायक अनूप सिंह, पूर्व विधायक जलेश्वर महतो, अंबा प्रसाद और कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत कई नेता आंदोलन स्थल पर पहुंचे।   इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र का भी जायजा लिया। नेताओं ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।   बीसीसीएल सीएमडी से होगी वार्ता     कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने घोषणा की कि प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर बीसीसीएल सीएमडी से बातचीत की जाएगी। इस दौरान बेरमो विधायक अनूप सिंह ने धरने पर बैठे लोगों की फोन पर बीसीसीएल सीएमडी मनोज अग्रवाल से बात भी कराई।   बताया गया कि गैर-रैयत प्रभावितों के लिए ढाई लाख रुपये और रैयतों को जमीन के मूल्य की चार गुना राशि देने के साथ दो फ्लैट उपलब्ध कराने की मांग पर चर्चा हुई। प्रभावितों के प्रतिनिधिमंडल की बीसीसीएल कार्यालय में वार्ता कराने की बात भी कही गई।   स्वास्थ्य मंत्री ने दिया मदद का भरोसा     स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि भू-धंसान में करीब 15 घर जमींदोज हुए हैं और प्रभावित परिवार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीसीसीएल सीएमडी से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।   मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो वह बीसीसीएल मुख्यालय कोयला भवन के गेट पर धरना देंगे।   कांग्रेस नेताओं ने सांसद पर लगाए आरोप     मौके पर कांग्रेस नेताओं ने धनबाद सांसद ढुल्लू महतो पर भी निशाना साधा। बेरमो विधायक अनूप सिंह ने सांसद पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि छाताबाद के प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।   वहीं, धनबाद सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा विधायक शत्रुध्न महतो की ओर से कांग्रेस पर घटना के बाद प्रभावितों की मदद नहीं करने का आरोप लगाया गया है।   कांग्रेस प्रभारी बोले- दोबारा नहीं हो ऐसी घटना     प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि पार्टी छाताबाद के प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी भू-धंसान की घटना दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करना बीसीसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।   फिलहाल प्रभावित परिवारों की नजर बीसीसीएल प्रबंधन के साथ होने वाली बातचीत पर है। मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास को लेकर समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है, यह वार्ता के नतीजे पर निर्भर करेगा।

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JSSC सचिव के आवास और कार्यालय पर CID की छापेमारी
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रांची। JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच तेज करते हुए CID ने सोमवार को JSSC सचिव सुधीर गुप्ता के आवास और JSSC कार्यालय पर छापेमारी की। जांच टीम ने कई घंटे तक तलाशी ली और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की। कार्रवाई के बाद मामले में नए खुलासे की संभावना बढ़ गई है।   सुबह पांच बजे सचिव के आवास पर पहुंची CID टीम     जानकारी के अनुसार CID की टीम सोमवार सुबह करीब पांच बजे मोरहाबादी स्थित हरिहर सिंह रोड पर सुधीर गुप्ता के आवास पहुंची। टीम ने वहां घंटों तलाशी ली और परीक्षा से जुड़े कई दस्तावेजों की जांच की।   इसके बाद टीम JSSC कार्यालय पहुंची, जहां भी दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला गया।   सचिव से पूछताछ, रिकॉर्ड की जांच जारी     बताया जा रहा है कि CID ने JSSC सचिव सुधीर गुप्ता को नामकुम थाने बुलाकर पूछताछ की। इस दौरान आयोग के कामकाज और परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की गई।   जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड से परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।   JSSC CGL के सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेज भी जांचे जाएंगे     CID अब JSSC CGL परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की भी जांच करने की तैयारी में है। जांच के दायरे में सभी सफल अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।   जांच में यदि किसी अभ्यर्थी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।   पेपर लीक और अनियमितता के आरोपों की जांच     JSSC CGL यानी JGGLCCE-2023 परीक्षा को लेकर पहले से ही कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। अब सचिव के आवास और कार्यालय पर हुई कार्रवाई से जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।   CID दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इन्हीं रिकॉर्ड से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।   छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी CID की कार्रवाई     JPSC-JSSC परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई शामिल है।   ऐसे में CID की ताजा कार्रवाई को आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, परीक्षा में वास्तव में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और कौन जिम्मेदार है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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