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झारखंड के आशीष कुमार दास बनेंगे इंफोसिस के नए CEO, सरायकेला के लाल ने रचा इतिहास

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
Ashish Kumar Das
Ashish Kumar Das

रांची। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित कृष्णापुर गांव के रहने वाले आशीष कुमार दास को देश की अग्रणी आईटी कंपनी इंफोसिस का अगला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया गया है। कंपनी के निर्णय के अनुसार, वह 1 अप्रैल 2027 से पांच वर्षों के लिए यह जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति शेयरधारकों की मंजूरी के बाद प्रभावी होगी। इस उपलब्धि के साथ आशीष कुमार दास झारखंड के लिए गर्व का प्रतीक बन गए हैं।

 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आशीष कुमार दास को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उनकी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान का सम्मान है।

 

मुख्यमंत्री ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस बैठक के दौरान आशीष कुमार दास के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए बताया कि उस दौरान झारखंड के खनन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस और युवाओं के कौशल विकास जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि आशीष के नेतृत्व में झारखंड और इंफोसिस के बीच सहयोग और मजबूत होगा, जिससे राज्य में तकनीकी नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास के नए अवसर पैदा होंगे।

 

सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफर

 

आशीष कुमार दास की सफलता संघर्ष और मेहनत की प्रेरक कहानी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजनगर के सरकारी एसएस प्लस टू हाई स्कूल से प्राप्त की और आगे चाईबासा के टाटा कॉलेज में पढ़ाई की। 12वीं कक्षा के दौरान पिता के निधन जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बाद में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम भी पूरा किया।

 

तीन दशक का अनुभव, अब संभालेंगे सबसे बड़ी जिम्मेदारी

 

आशीष कुमार दास पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इंफोसिस से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वह कंपनी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल बिजनेस पोर्टफोलियो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने वैश्विक कारोबार, ग्राहक सेवाओं, डिलीवरी और टिकाऊ व्यावसायिक रणनीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नेतृत्व किया है।

 

फिलहाल वह अमेरिका के लॉस एंजेलिस में रहकर इंफोसिस के वैश्विक कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास निवेशक गठबंधन और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी जुड़े रहे हैं। उनकी नियुक्ति को झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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हजारीबाग में पुलिस और राहुल दुबे गैंग के बीच मुठभेड़, एक बदमाश के पैर में गोली, दूसरा गिरफ्तार

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना के बुकरू ट्रांसपोर्टिंग रोड पर शुक्रवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घायल अपराधी का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा है।   हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमन कुमार ने बताया कि दोनों आरोपी कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पगार ओपी क्षेत्र में संचालित चंद्रगुप्त कोल खनन परियोजना के ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर कुछ अपराधियों ने फायरिंग कर गैंग का पर्चा छोड़ा है और जंगल की ओर भाग गए हैं।   सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। तड़के करीब 3:15 बजे बुकरू गांव के जंगल के पास एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस वाहन को देखते ही दोनों जंगल की ओर भागने लगे।   पुलिस के अनुसार, पीछा किए जाने पर बाइक असंतुलित होकर गिर गई और दोनों आरोपी पैदल जंगल की ओर भागने लगे। इसी दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर लगातार तीन से चार राउंड फायरिंग की। पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन दोबारा गोलीबारी होने पर आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई। पुलिस की तीन राउंड फायरिंग में एक गोली एक आरोपी के पैर में लगी, जबकि दूसरे को मौके से पकड़ लिया गया।   घायल आरोपी की पहचान बड़कागांव थाना क्षेत्र के चेप खुर्द निवासी मोहम्मद रागीब अफजल के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी केरेडारी थाना क्षेत्र के पगार ओपी इलाके का रहने वाला है।   पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुद को राहुल दुबे गिरोह का सदस्य बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कथित तौर पर लेवी नहीं मिलने पर कंपनी को धमकाने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ट्रांसपोर्टिंग रोड पर फायरिंग की और गैंग का पर्चा छोड़ा था।   एसपी अमन कुमार ने बताया कि घायल मोहम्मद रागीब अफजल का आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

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हजारीबाग में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़, एक अपराधी घायल

हजारीबाग। जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के बीच देर रात मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक अपराधी के पैर में गोली लग गई, जिससे वह घायल हो गया। घायल अपराधी को इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस पूरे इलाके में सर्च अभियान चला रही है।   बुकरु ट्रांसपोर्टिंग रोड पर हुई मुठभेड़   जानकारी के अनुसार, केरेडारी चंद्रगुप्त कोल परियोजना क्षेत्र के बुकरु स्थित ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर कुछ अपराधियों के जुटने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलने के बाद केरेडारी थाना पुलिस ने इलाके में घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।   पुलिस की गोली से घायल हुआ अपराधी   मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली एक अपराधी के पैर में लगी। घायल अपराधी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच उसका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में दोनों ओर से गोलीबारी हुई थी। वहीं, एक अन्य अपराधी के भी शामिल होने की सूचना मिली है, जो मौके से फरार हो गया।   मौके से हथियार और बाइक बरामद   पुलिस ने घटनास्थल से एक रिवाल्वर और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। घायल अपराधी से पूछताछ कर उसके साथियों और आपराधिक गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए इलाके में लगातार छापेमारी और सर्च अभियान चलाया जा रहा है।   एसपी ने घटनास्थल का लिया जायजा   मुठभेड़ की सूचना मिलते ही हजारीबाग एसपी अमन कुमार चंद्रगुप्त कोल परियोजना क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। फिलहाल इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अपराधियों की तलाश जारी है।   घायल अपराधी का खंगाला जा रहा इतिहास   केरेडारी थाना प्रभारी वेद प्रकाश ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि घायल अपराधी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। पुलिस जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत जानकारी साझा करेगी।

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Sikkim Tunnel Accident
सिक्किम टनल हादसा: झारखंड के चार मजदूरों की मौत, पीड़ित परिवारों तक पहुंचे अधिकारी

रांची। सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे में झारखंड के चार मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में अब तक 22 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में हजारीबाग के जागेश्वर ठाकुर, खूंटी के कृष्णा साहू और विकास कंडुलना तथा पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव निवासी मसीह बारजो शामिल हैं। हादसे की खबर के बाद संबंधित जिलों में शोक की लहर दौड़ गई है।   खूंटी के दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़   खूंटी जिले के रनिया प्रखंड निवासी कृष्णा साहू पिछले तीन वर्षों से परियोजना में कार्यरत थे। इसी महीने वह घर से वापस ड्यूटी पर लौटे थे। हादसे के बाद उनके बड़े भाई ने शव की पहचान कर परिवार को सूचना दी। वहीं विकास कंडुलना की पत्नी ने बताया कि वह फरवरी में गांव आए थे और मई में फिर काम पर लौट गए थे। उन्होंने बच्चों की बेहतर पढ़ाई का सपना देखा था, जो अब अधूरा रह गया।   प्रशासन ने सहायता का दिया भरोसा   घटना की जानकारी मिलते ही रनिया के बीडीओ प्रशांत डांग, सीओ, श्रम अधीक्षक वाल्टर कुजूर, जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मृतकों के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी और सरकारी प्रावधानों के तहत हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। प्रशासन ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शवों को झारखंड लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।   रोजगार के मुद्दे पर फिर उठे सवाल   इस हादसे के बाद झारखंड से पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार ने आरोप लगाया कि रोजगार के अभाव में युवाओं को दूसरे राज्यों में जोखिम भरे कार्य करने पड़ रहे हैं।   हजारीबाग के जागेश्वर ठाकुर के घर पसरा सन्नाटा   हजारीबाग के बरही प्रखंड स्थित तिलैया बस्ती निवासी जागेश्वर ठाकुर भी इस हादसे का शिकार हो गए। उनके पुत्र राहुल ठाकुर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सिक्किम पहुंच चुके हैं। परिवार ने अभी तक उनकी पत्नी को घटना की पूरी जानकारी नहीं दी है। परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे हैं।   सरकार से मुआवजा और नौकरी की मांग   ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने झारखंड तथा सिक्किम सरकार से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।   हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग   स्थानीय लोगों ने सुरंग निर्माण में सुरक्षा मानकों की जांच की मांग उठाई है। पड़ोसी सिद्धू कुमार दास ने कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मिट्टी और गैस की वैज्ञानिक जांच हुई थी या नहीं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।   शवों के झारखंड पहुंचने का इंतजार   प्रशासन के अनुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के शवों को सड़क मार्ग से एम्बुलेंस के जरिए झारखंड लाया जा रहा है। जागेश्वर ठाकुर का पार्थिव शरीर शुक्रवार तक हजारीबाग पहुंचने की संभावना है। परिजन अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे हैं, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

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