झारखंड

झारखंड में मौसम का दोहरा मिजाज, कहीं झमाझम बारिश तो कहीं हीट वेव का कहर

abhishek singh जून 25, 2026 0
Jharkhand Weather
Jharkhand Weather News

रांची। झारखंड में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं, लेकिन राज्य के सभी जिलों में बारिश समान रूप से नहीं हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से अब तक सबसे कम वर्षा गढ़वा जिले में दर्ज की गई है। वहीं बुधवार को रांची, गुमला, जमशेदपुर, जामताड़ा और चाईबासा समेत कई इलाकों में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।

 

जामताड़ा में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत


बुधवार देर रात जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र स्थित चरकादाहा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। मृतकों की पहचान विनय सोरेन (50) और विश्वकर्मा टुडू (17) के रूप में हुई है। सभी एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। अचानक तेज बारिश शुरू होने पर वे एक मिट्टी के घर की ओट में खड़े हो गए, तभी घर पर बिजली गिर गई और यह हादसा हो गया। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

 

कई जिलों में यलो अलर्ट, तीन जिलों में हीट वेव की चेतावनी


मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए राज्य के कई जिलों में गरज, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में हीट वेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी गई है।

 

गढ़वा में सामान्य से 98 मिमी कम बारिश


बारिश के आंकड़ों के अनुसार, गढ़वा में अब तक केवल 1.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से 98 मिमी कम है। साहिबगंज में 3.2 मिमी और चतरा में 6.8 मिमी बारिश हुई है। वहीं दुमका में 124.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य के करीब है। पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 71.4 मिमी बारिश गुमला के रायडीह में रिकॉर्ड की गई। राज्य का सबसे अधिक तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस डाल्टेनगंज और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस लातेहार में दर्ज किया गया।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Tragic Incident Gumla
गुमला में हृदयविदारक घटना, महिला ने दो मासूम बच्चों के साथ की आत्महत्या

गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। घाघरा थाना क्षेत्र के मनातू गांव में एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और स्तब्धता का माहौल है। मृतकों की पहचान परदेशनी कुमारी (27 वर्ष), उनके पांच वर्षीय पुत्र अंश उरांव और चार वर्षीय पुत्री आशमानी कुमारी के रूप में हुई है।   परिजनों के अनुसार परिजनों के अनुसार, परदेशनी कुमारी पिछले लगभग आठ महीनों से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं और उनका इलाज रांची के कांके स्थित संस्थान में चल रहा था। महिला के पति जगन्नाथ उरांव ने बताया कि बुधवार दोपहर उनकी पत्नी दोनों बच्चों को साथ लेकर घर से निकली थीं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वे वापस नहीं लौटीं तो परिवार के लोगों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई।   खोजबीन के दौरान हुआ दर्दनाक खुलासा परिजनों और ग्रामीणों द्वारा आसपास खोजबीन की गई। इसी दौरान महिला के पति ने घर के पास स्थित कुएं में झांककर देखा, जहां पानी में कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से कुएं की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान सबसे पहले एक बच्चे का शव दिखाई दिया। बाद में महिला और दूसरे बच्चे के शव भी कुएं से बाहर निकाले गए। घटना की जानकारी मिलते ही घाघरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया है।   जांच में जुटी पुलिस एसडीपीओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव में मातम का माहौल है और लोग इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।

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मेडिकल सीट आवंटन और काउंसलिंग प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप, CID की टीम ने खंगाले दस्तावेज

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान रिम्स में मेडिकल सीट आवंटन और नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। शिकायतों के आधार पर झारखंड सीआईडी की एक विशेष टीम बुधवार को रिम्स पहुंची और डीन कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के दस्तावेजों की जांच शुरू की।   सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्र पिछले शैक्षणिक सत्र में हुए एडमिशन और उससे जुड़ी काउंसलिंग प्रक्रिया है। आरोप है कि कुछ छात्रों को नियमों की अनदेखी कर दाखिला दिया गया, जबकि पात्र अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिला। इसके अलावा कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी शिकायत सामने आई है।   नामांकन और टेंडर प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि जांच केवल एडमिशन तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान में टेंडर से जुड़ी प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है। टीम विभिन्न अभिलेखों, आवेदन पत्रों, काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि की जा सके।   स्वास्थ्य मंत्री ने दी थी कार्रवाई की जानकारी मामले को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी  ने कहा कि उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की शिकायतें मिली थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया की जांच कराने की सिफारिश की थी। मंत्री ने कहा कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।   जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें सीआईडी की प्रारंभिक जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल रिम्स प्रशासन और मेडिकल शिक्षा से जुड़े सभी पक्षों की नजर इस महत्वपूर्ण जांच पर टिकी हुई है।

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झारखंड में मोहर्रम को लेकर हाई अलर्ट, 16 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, ड्रोन से होगी निगरानी

रांची: मोहर्रम के अवसर पर झारखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यभर में 16 हजार से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सात कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई जाएंगी। संवेदनशील इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरों और वीडियो सर्विलांस के माध्यम से की जाएगी।   संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर   पुलिस मुख्यालय के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले तनाव या विवाद की घटनाएं सामने आई हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों के जरिए जुलूसों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर लगातार नजर रखी जाएगी।   अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई   प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साइबर सेल को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी भड़काऊ पोस्ट या फर्जी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।   शांति समिति की बैठकें पूरी   राज्य के सभी जिलों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रशासन ने सभी समुदायों के लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।   पुलिस की अपील   पुलिस ने कहा है कि मोहर्रम के सभी जुलूस तय मार्ग और निर्धारित समय के अनुसार ही निकाले जाएंगे। लोगों से सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है।

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