रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले नेताओं के बयान भी लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। इसी बीच बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने बड़ा दावा किया है। भानु प्रताप शाही ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार को कुल 35 वोट मिलेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। उनका कहना है कि आंकड़े भाजपा के पक्ष में मजबूत स्थिति दिखा रहे हैं और उम्मीदवार आसानी से अच्छा प्रदर्शन करेगा।
राज्यसभा चुनाव में जीत-हार का पूरा खेल विधायकों के संख्या बल पर निर्भर करता है। ऐसे में हर दल अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहा है। जहां एक ओर इंडिया गठबंधन अपनी मजबूती दिखा रहा है, वहीं एनडीए भी अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर भरोसा जता रहा है।
मतदान से पहले नेताओं के इस तरह के दावों से राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। हर पक्ष अपने-अपने आंकड़े पेश कर माहौल अपने पक्ष में बनाने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान के बाद असल में किसके पक्ष में कितने वोट जाते हैं। राज्यसभा चुनाव के नतीजे जल्द ही सामने आएंगे, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि भानु प्रताप शाही का दावा कितना सही साबित होता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। घटना को अंजाम देने के बाद फरार हुए दोनों आरोपियों को एसआईटी ने बुधवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार, आरोपी स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से भागने की कोशिश कर रहे थे। कोडरमा में ट्रेन से ही दोनोंको गिरफ्तार किया गया। पुलिस की गोली से हुआ घायल इधर, गुरुवार को दोनों आरोपियों को रांची स्थित कोतवाली थाना की हाजत में रख गया। इस दौरान एक आरोपी खिड़की तोड़कर हाजत से भाग निकला। पुलिस ने कुछ देर बाद उसे चान्हो थाना क्षेत्र के लुकैया ढोंढा में एक बस से पकड़ा। इस दौरान आरोपी ने पुलिस से हथियार छीनकर फिर भागने की कोशिश। इसके बाद पुलिस को गोली चलानी पड़ी। फिलहाल उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रफीगंज स्टेशन पर ट्रेन रुकवाकर दोनों को पकड़ा इससे पहले आरोपियों को कोडरमा जंक्शन पर चिन्हित किया गया, लेकिन तब तक ट्रेन खुल चुकी थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए गया जिले के रफीगंज स्टेशन पर ट्रेन रुकवाकर दोनों को उतारा और हिरासत में लिया। फिलहाल पुलिस दोनों से गहन पूछताछ कर रही है, जिससे मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। देर रात पेट्रोल बम से हमला, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात यह पूरी घटना मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे की है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दो युवक कार से कार्यालय के पास पहुंचे और कुछ दूरी पर वाहन खड़ा कर दिया। इसके बाद वे पैदल कार्यालय परिसर तक आए और पेट्रोल से भरी कांच की बोतलों में आग लगाकर उन्हें अंदर फेंक दिया। पहली बोतल रात 12:38 बजे फेंकी गई, जबकि करीब एक मिनट बाद दूसरी बोतल भी फेंकी गई। एक बोतल छत पर गिरकर टूट गई, जिससे पेट्रोल फैल गया और आग की लपटें उठीं, लेकिन आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं होने के कारण आग खुद ही बुझ गई। दूसरी बोतल प्रवेश द्वार के पास गिरी, लेकिन उसमें आग नहीं लगी। बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही आरएसएस कार्यकर्ता और भाजपा नेता मौके पर पहुंच गए, वहीं पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एनआईए और फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की गंभीरता को देखते हुए दोपहर करीब तीन बजे एनआईए की तीन सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने बंद कमरे में प्रांत प्रचारकों के साथ बैठक की और फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया। छत पर जाकर टूटे हुए बोतलों के टुकड़ों की जांच की गई और नमूने एकत्र किए गए। करीब 3:50 बजे टीम वहां से लौट गई, हालांकि आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। इधर, नेता प्रतिपक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता भी कार्यालय पहुंचे और घटना की जानकारी ली। वहीं, बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने भी मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। संघ ने दर्ज कराई प्राथमिकी संघ की ओर से इस मामले में चुटिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। शिकायत के अनुसार, घटना के समय कार्यालय परिसर में करीब 20 लोग मौजूद थे, जिनमें प्रचारक, विद्यार्थी, चालक, रसोइया और अन्य कर्मचारी शामिल थे। सभी अपने कमरों में सो रहे थे। धमाके की आवाज से उनकी नींद खुली, लेकिन तत्काल कुछ समझ नहीं आया। सुबह करीब पांच बजे छत पर जाने के दौरान हमले का पता चला। संघ के एक प्रचारक ने बताया कि यह कार्यालय 1990 से संचालित है। झारखंड में इस तरह का हमला पहली बार हुआ है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई टीमों का गठन किया है। दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम का जल्द खुलासा किया जाएगा।
देवघर। देवघर नगर निगम को नया नगर आयुक्त मिल गया है। प्रशासनिक फेरबदल के तहत सुलोचना मीना ने गुरुवार को नगर निगम के नए नगर आयुक्त के रूप में विधिवत कार्यभार संभाल लिया। उनके पदभार ग्रहण करते ही निगम कार्यालय में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक की, जिसमें शहर के विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। विकास कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए निर्देश बैठक के दौरान सुलोचना मीना ने निगम क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक बिना किसी देरी के पहुंच सके। उन्होंने निगम प्रशासन को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने पर भी जोर दिया। साफ-सफाई और नागरिक सुविधाएं रहेंगी प्राथमिकता नई नगर आयुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। देवघर देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छता, पेयजल, कचरा प्रबंधन, सड़क व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाए रखना निगम की प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही जल-जमाव जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में भी काम किया जाएगा। जल्द करेंगी शहर का निरीक्षण सूत्रों के अनुसार, सुलोचना मीना जल्द ही नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेंगी। निरीक्षण के दौरान वे विकास योजनाओं की प्रगति, सफाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करेंगी। माना जा रहा है कि उनकी अगुवाई में नगर निगम शहर के समग्र विकास, बेहतर प्रशासन और जनहित से जुड़े कार्यों को नई गति देने की दिशा में काम करेगा।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन विधानसभा पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दोनों नेताओं के विधानसभा पहुंचने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। सुबह से ही विधानसभा परिसर में विधायकों की आवाजाही बनी रही और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर रखे हुए हैं।राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान सुबह 9 बजे से शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम आने की संभावना है। चुनाव को देखते हुए विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।