झारखंड

ओरमांझी में 'जनता दरबार' से समाधान की बयार: सीओ ने मौके पर निपटाए मामले

Anjali Kumari मई 6, 2026 0
Janata Darbar Ormanjhi
Janata Darbar Ormanjhi

रांची। रांची के ओरमांझी ब्लॉक में जनता अब सीधे प्रशासन के द्वार पहुंच रही है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। अक्सर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाने वाले ग्रामीणों के लिए अंचल अधिकारी द्वारा आयोजित 'जनता दरबार' एक बड़ी राहत लेकर आया है। यहां न सिर्फ शिकायतों को सुना जा रहा है, बल्कि सालों से लंबित मामलों का मौके पर ही निपटारा किया जा रहा है। 


राजधानी रांची से सटे ओरमांझी ब्लॉक परिसर में नजारा कुछ बदला-बदला है। यहां अंचल अधिकारी उज्ज्वल सोरेन की अध्यक्षता में एक विशेष जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य था—दूरी मिटाना और पारदर्शिता लाना। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे, जहां अंचल अधिकारी ने एक-एक कर सबकी फरियाद सुनी।


महिला को मिला टूटे घर का मुआवजा


इस जनता दरबार की सबसे भावुक और बड़ी सफलता रही एक असहाय महिला को मिली मदद। गौरतलब है कि पिछले साल भीषण आंधी और बारिश के कारण उस महिला का आशियाना जमींदोज हो गया था। महीनों से वह सरकारी सहायता की आस में थी। अंचल अधिकारी उज्ज्वल सोरेन के संज्ञान लेते ही, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज किया गया और उस महिला को 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। सहायता पाकर महिला की आंखों में खुशी के आंसू थे और उसने प्रशासन का आभार व्यक्त किया।


ऑनलाइन रसीद के कई मामले निपटाये गये


जनता दरबार में केवल आपदा राहत ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े पेचीदा मामलों का भी समाधान हुआ। ग्रामीण इलाकों में 'ऑनलाइन रसीद' न कटना एक बड़ी समस्या बनी रहती है, जिसके कारण किसान कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। सीओ के निर्देश पर मौके पर ही तकनीकी टीम बैठी और जिन लोगों की जमीन की रसीद ऑनलाइन नहीं कट रही थी, उनका तुरंत सुधार कर रसीद निर्गत की गई।


लोगों को परेशानी से बचाना है मकसद


सीओ उज्जवल सोरेन ने कहा कि "हमारा लक्ष्य है कि सरकार की योजनाएं और प्रशासनिक सुधार अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जनता दरबार का मकसद यही है कि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो।"


प्रसन्न हैं ग्रामीण


ग्रामीणों का कहना है कि अगर हर अधिकारी इसी तरह जनता के बीच जाकर काम करे, तो बिचौलियों का खेल खत्म हो जाएगा और गरीबों को उनका हक समय पर मिल सकेगा।
ओरमांझी से यह पहल बताती है कि जब इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो व्यवस्था को जन-हितैषी बनने में देर नहीं लगती।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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Supreme Court bail
पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से मिली बेल

रांची। टेंडर घोटाला के जरिए करोड़ों रुपए की मनी लाउंड्रिंग करने के आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की जमानत याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने आलमगीर आलम को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर लीय़ जामनत याचिका स्वीकार होने के बाद अब आलमगीर आलम करीब दो वर्ष के बाद जेल की सलाखों से बाहर आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम एम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की बेंच में आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई हुई। 11 जुलाई 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बेल के लिए गुहार लगाई। आलमगीर आलम की जमानत याचिका झारखण्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने खारिज की थी। पिछली सरकार में मंत्री रहे आलमगीर आलम को ईडी ने 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में हैं। आरोपों के मुताबिक उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल एवं उनके नौकर जहांगीर आलम के यहां से मिले 32.30 करोड़ रुपये नकद की बरामदी हुई थी। पैसे बरामद होने के बाद आलमगीर आलम से पूछताछ हुई थी फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
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कोकर से लापता 18 माह की अदिति पांडेय की सूचना देने वाले को 50 हजार का इनाम

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Jharkhand Weather update: झारखंड में बदला मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट

Road accident in Lohardaga
लोहरदगा में दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई कार, एक युवक की मौत

लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा सदर थाना क्षेत्र में शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पुलिस अधीक्षक आवास और उपविकास आयुक्त आवास के पास तेज रफ्तार टाटा सफारी कार पहले डिवाइडर से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर पेड़ से जा भिड़ी। हादसा इतना भीषण था कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार युवक अंदर फंस गए। इस दुर्घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।   शादी समारोह से लौट रहे थे युवक   जानकारी के अनुसार, सभी युवक कुड़ू थाना क्षेत्र के कड़ाक गांव में आयोजित एक शादी समारोह से लौट रहे थे। कार में आजसू नेता लाल गुड्डू नाथ शाहदेव के बेटे विराट शाहदेव और सम्राट शाहदेव समेत कुल छह लोग सवार थे। अन्य घायलों में विकेश सिंह, उतम सिंह और दीपेश्वर सिंह शामिल हैं। हादसे में खलारी निवासी प्रमोद कुमार सिंह उर्फ चंपा की मौत हो गई।   राहत-बचाव में जुटी पुलिस   हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक आवास के सुरक्षाकर्मी और राहगीर मौके पर पहुंचे। इसके बाद सदर थाना पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और सभी घायलों को कार से निकालकर लोहरदगा सदर अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चार गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) रांची रेफर कर दिया गया।   पुलिस कर रही मामले की जांच   पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में ले लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
Dark clouds and heavy rain over Ranchi city as Jharkhand weather department issues orange alert.

Jharkhand के कई जिलों में आज बिगड़ेगा मौसम, Ranchi समेत कई इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी

JTET Language Dispute

जेटेट भाषा विवाद सुलझाने के लिए सरकार ने बनाई पांच मंत्रियों की कमेटी

जनगणना-2027

जनगणना-2027: 15 मई तक स्व-गणना, 16 से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

JAS Officers Promotion
JAS के 31 अफसरों को संयुक्त सचिव रैंक में प्रमोशन

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 31 अफसरों को संयुक्त सचिव पद में प्रोन्नति दी है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 31 अधिकारियों को संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर प्रमोट कर दिया है।  विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की अनुशंसा के बाद जारी इस आदेश के तहत, इन अधिकारियों को अब पे-मैट्रिक्स लेवल 13 का लाभ मिलेगा। यह निर्णय राज्य में प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने और लंबे समय से लंबित प्रोन्नति की मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। भरे जा सकेंगे रिक्त पद इस फेरबदल से विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पड़े वरिष्ठ पदों को भरने में मदद मिलेगी, जिससे विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों की सूची में राज्य के विभिन्न जिलों और विभागों में कार्यरत अनुभवी अफसर शामिल हैं।  इन अफसरों को मिला प्रमोशन 1.    चंद्रभूषण सिंह, बंदोबस्त पदा. दुमका 2.    रामवृक्ष महतो, संयुक्त सचिव, राजस्व, निंबधन व भूमि सुधार विभाग 3.    मुमताज अली अहमद, उप निदेशक, जनजातीय कल्याण एवं कार्यक्रम आदिवासी कल्याण आयुक्त 4.    अरविंद कुमार लाल, उप सचिव जेएसएससी 5.    राज महेश्वरम, अपर समाहर्ता, गढ़वा 6.    हरिवंश पंडित, सचिव प्रादेशिक परिवहन प्राधिकार, दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल, रांची 7.    सीमा सिंह, उप निदेशक, रिनपास, रांची 8.    अनवर हुसैन, उप सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग 9.    अनंत कुमार, स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग 10.    ज्योति कुमारी झा, उच सचिव वित्त विभाग 11.    संदीप दुबे, आप्त सचिव ग्रामीण विकास मंत्री 12.    स्व. विनय कुमार मिश्र, तत्कालीन एडीसी, पूर्वी सिंहभूम 13.    संतोष कुमार गर्ग, निदेशक, एनइपी 14.    कमलेश्वर नारायण, अपर नगर आयुक्त, धनबाद नगर निगम 15.    विजय कुमार, सचिव प्रादेशिक परिवहन प्राधिकार, उत्तरी छोटानागपुर, हजारीबाग 16.    स्व. दीपू कुमार, तत्कालीन उप सचिव राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग 17.    संजय पांडेय, उप सचिव गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग 18.    राजीव कुमार, अपर समाहर्ता दुमका 19.    धीरेंद्र कुमार सिंह, उप निदेशक कल्याण एवं अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग विभाग 20.    राकेश कुमार, संयुक्त सचिव, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग 21.    राजेश्वर नाथ आलोक, अपर जिला दंडाधिकारी, रांची 22.    संजीव कुमार, उप निदेशक कल्याण, रांची प्रमंडल 23.    जियाउल अंसारी, विशिष्ट अनुभाजन पदा. धनबाद 24.    दिनेश कुमार रंजन, क्षेत्रीय उप निदेशक, जियाडा, आदित्यपुर 25.    पंकज कुमार साव, अपर निदेशक, उद्योग निदेशालय 26.    प्रणव कुमार पाल, संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग 27.    विनय मनीष आर लकड़ा, सचिव झारखंड राज्य आवास बोर्ड रांची 28.    योगेंद्र प्रसाद, प्रतीक्षारत 29.    अजय सिंह बड़ाइक, जिला भू-अर्जन पदा. पाकुड़ 30.    प्रेमलता मुर्मू, अपर समाहर्ता गोड्डा 31.    परमेश्वर मुंडा, अपर समाहर्ता खूंटी   

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
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