झारखंड

Jharkhand Weather: Rain & Heat Alert

झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज: 27-28 मार्च को बारिश की चेतावनी, तेज धूप से बढ़ेगा UV खतरा

surbhi मार्च 24, 2026 0
People riding bikes and cycling in heavy rain on city road in Jharkhand amid changing weather conditions
Jharkhand Weather Change Rain Alert UV Risk

झारखंड में आने वाले दिनों में मौसम तेजी से बदलने वाला है। एक ओर जहां तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर 27 और 28 मार्च को बारिश और मेघ गर्जन की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग ने इसे लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

तापमान में तेज बढ़ोतरी के संकेत

मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों में राज्य के अधिकतम तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। 24 से 26 मार्च तक मौसम शुष्क रहेगा, जिससे गर्मी का असर और बढ़ेगा।

27-28 मार्च को बारिश और गरज के आसार

27 और 28 मार्च को झारखंड के कई हिस्सों में अचानक मौसम बदल सकता है। इस दौरान मेघ गर्जन, तेज हवाएं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
येलो अलर्ट का मतलब है कि मौसम सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

तेज धूप से बढ़ेगा UV किरणों का खतरा

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि साफ आसमान और तेज धूप के कारण अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों का प्रभाव बढ़ सकता है।
खासतौर पर दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है।

इन जिलों में बढ़ी गर्मी

राज्य के कई जिलों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है:

  • सरायकेला: 34.4°C (सबसे अधिक)
  • मेदिनीनगर: 33.6°C
  • जमशेदपुर: 33.5°C
  • बोकारो: 33.1°C
  • रांची: 27.9°C (4.2 डिग्री की बढ़ोतरी)

चाईबासा में 35°C तक पहुंच सकता है पारा

कोल्हान क्षेत्र के चाईबासा में अगले 24 घंटों में तापमान 34 से 35 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। रात की ठंडक अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है और गर्मी का असर बढ़ने लगा है।

कई जिलों में 36-37°C तक जाएगा तापमान

देवघर, धनबाद, जामताड़ा और गोड्डा में तापमान 35-36 डिग्री तक पहुंच सकता है।
वहीं चतरा, गढ़वा और पलामू में पारा 36 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है।
दक्षिणी झारखंड के सिंहभूम इलाके में तापमान 37 डिग्री तक जा सकता है।

29 मार्च से फिर साफ होगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, 29 मार्च के बाद फिर से मौसम साफ हो जाएगा और शुष्क स्थिति लौट आएगी।

लोगों के लिए जरूरी सलाह

  • दोपहर में तेज धूप से बचें
  • अधिक मात्रा में पानी पिएं
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें
  • बाहर निकलते समय सिर ढकें
  • बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची और पटना में जल्द शुरू होगी 'भारत टैक्सी' सेवा

रांची। केंद्र सरकार की सहकारी मॉडल पर आधारित 'भारत टैक्सी' सेवा का विस्तार जल्द ही झारखंड की राजधानी रांची और बिहार की राजधानी पटना सहित कई नए शहरों तक किया जाएगा। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार अगले दो वर्षों में इस सेवा को देश के 500 शहरों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।   इन शहरों में शुरू होगी नई सेवा वर्तमान में 'भारत टैक्सी' सेवा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में संचालित हो रही है। आने वाले महीनों में रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर जैसे प्रमुख शहर भी इस नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सहकारी मॉडल के माध्यम से यात्रियों को विश्वसनीय और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, साथ ही टैक्सी चालकों को बेहतर आय के अवसर देना है।   सहकारी जीवन बीमा कंपनी की भी घोषणा अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान यह भी घोषणा की कि सरकार 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की योजना बना रही है। उनका कहना था कि इससे सहकारी क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा करोड़ों सदस्यों को बेहतर बीमा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।   30 करोड़ से अधिक सदस्य होंगे लाभान्वित देश में वर्तमान में लगभग 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। वहीं, भारत में इस समय 26 जीवन बीमा कंपनियां संचालित हैं। सरकार का मानना है कि नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी बनने से सहकारी संस्थाओं की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों को प्रतिस्पर्धी एवं सुलभ बीमा सेवाओं का लाभ मिलेगा। 'भारत टैक्सी' सेवा का विस्तार भी इसी दिशा में सहकारिता आधारित आर्थिक मॉडल को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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Hazaribagh Treasury Scam: 12 साल में 29 करोड़ की फर्जी निकासी, छह पर चार्जशीट

हजारीबाग। हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड आरक्षी शंभु कुमार समेत छह आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच करीब 12 वर्षों तक पुलिसकर्मियों के वेतन मद में फर्जी टेंपररी आईडी बनाकर लगभग 29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। इस राशि को 24 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।   छह आरोपी चार्जशीट में शामिल सीआईडी की चार्जशीट में आरक्षी शंभु कुमार, उसकी पत्नी काजल कुमारी, आरक्षी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, उसकी पत्नी खुशबू कुमारी, रिश्तेदार सौरभ कुमार और आरक्षी धीरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों आरक्षी हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात थे और पूरे फर्जीवाड़े में उनकी अहम भूमिका रही।   24 खातों में पहुंची करोड़ों की रकम जांच में सामने आया है कि अवैध रूप से निकाली गई राशि 24 बैंक खातों में भेजी गई। फिलहाल सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाताधारकों को इन ट्रांजेक्शनों की जानकारी थी या नहीं। अब तक एजेंसी करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज करा चुकी है।   जमीन, मकान और जेवरात में किया निवेश सीआईडी के अनुसार, आरोपियों ने अवैध कमाई का इस्तेमाल जमीन और मकान खरीदने, जेवरात लेने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने में किया। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उन्हें आरोपियों की ओर से कमीशन भी दिया जाता था।   15.41 करोड़ की शिकायत से खुला मामला इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब शुरुआती जांच में आठ वर्षों के दौरान हजारीबाग जिला कोषागार से दो बैंक खातों में 15.41 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया। इसके बाद लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच सीआईडी को सौंपी गई। विस्तृत जांच के दौरान घोटाले का दायरा बढ़कर 29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी।

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झारखंड में ISIS-अलकायदा से जुड़े 61 संदिग्ध एटीएस के रडार पर, कार्रवाई की तैयारी तेज

रांची। झारखंड में आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। एटीएस ने राज्य में ISIS और अलकायदा से जुड़े 61 संदिग्धों की पहचान की है। इनमें 12 लोगों का संबंध ISIS और 49 का संबंध अलकायदा से जुड़े मामलों से बताया गया है। अब इन संदिग्धों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की जा रही है।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, एटीएस ने इस संबंध में एडीजी (अभियान), डीजी (अभियान) और राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय द्वारा 3 अप्रैल 2026 को जारी उस निर्देश के अनुरूप की जा रही है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 26 मार्च 2026 के निर्णय के आधार पर आतंकवादी संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाने को कहा गया था।   संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों के तहत संदिग्ध व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त करने, उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने तथा हथियारों से जुड़े लेन-देन पर रोक लगाने जैसे प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। एटीएस का कहना है कि चिन्हित व्यक्तियों के नाम पहले से आतंकवाद से जुड़े मामलों में सामने आ चुके हैं या वे जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में हैं।   सूत्रों के मुताबिक सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इन संदिग्धों के बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन, संपत्तियों और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही जिला पुलिस को निर्देश दिया गया है कि ऐसे लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत एटीएस मुख्यालय को दी जाए। एटीएस का मानना है कि समय रहते निगरानी और समन्वित कार्रवाई से राज्य में आतंकी नेटवर्क की संभावित गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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