झारखंड

Storm Alert in Jharkhand

झारखंड में मौसम का कहर: 3 दिन तक तूफानी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में खतरे की घंटी

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Dark storm clouds over Jharkhand with lightning, heavy rain and strong winds warning
Jharkhand Weather Alert Storm Rain IMD

झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। India Meteorological Department (IMD) ने राज्य में अगले तीन दिनों तक तेज आंधी, भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सर्कुलेशन के कारण पूरे प्रदेश में मौसम अस्थिर बना हुआ है।

किन जिलों में ज्यादा खतरा?

राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में मौसम का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। जिन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • बोकारो
  • रामगढ़
  • हजारीबाग
  • खूंटी
  • गुमला
  • पूर्वी सिंहभूम
  • सरायकेला-खरसावां
  • पश्चिमी सिंहभूम

इन इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।

कितनी तेज चलेंगी हवाएं?

मौसम विभाग के अनुसार:

  • हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है
  • कई जगहों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना
  • वज्रपात (ठनका) का खतरा काफी ज्यादा

9 अप्रैल तक रहेगा असर

IMD के मुताबिक 7 अप्रैल से लेकर 9 अप्रैल तक पूरे झारखंड में मौसम खराब रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे साफ है कि राज्यभर में बारिश का असर देखने को मिलेगा।

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है:

  • खराब मौसम में घर के अंदर ही रहें
  • वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहें
  • ओलावृष्टि के समय सुरक्षित छायादार स्थान पर शरण लें
  • पशुओं को भी सुरक्षित स्थान पर रखें

किसानों की बढ़ी चिंता

बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण:

  • खड़ी फसलें खराब हो सकती हैं
  • बागवानी और वृक्षारोपण को नुकसान
  • खेतों में जलभराव की स्थिति

इस मौसम का सीधा असर कृषि पर पड़ सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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‘प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड’ से सम्मानित हुआ बीआईटी मेसरा

रांची। रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड्स’ के तहत बीआईटी मेसरा को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। यह सम्मान संस्थान को छात्र विकास, सामुदायिक सहभागिता, नेतृत्व क्षमता निर्माण और कक्षा के बाहर मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से न सिर्फ संस्थान, बल्कि पूरे झारखंड की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई पहचान मिली है।   कई शीर्ष शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से मिला सम्मान यह पुरस्कार वेटरन्स इंडिया द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें कई राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं का सहयोग रहा। इनमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA), भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) और शिक्षा प्रोत्साहन सोसाइटी ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वेटरन्स इंडिया, जो पूर्व सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम करती है, उन संस्थानों को सम्मानित करती है जो युवाओं के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।   1955 से तकनीकी शिक्षा में अग्रणी 1955 में स्थापित बीआईटी मेसरा देश के प्रमुख तकनीकी और शोध संस्थानों में गिना जाता है। संस्थान ने शुरुआत से ही इनोवेशन, रिसर्च और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खास बात यह है कि स्पेस इंजीनियरिंग और रॉकेट्री जैसे उन्नत कार्यक्रमों की शुरुआत में भी इस संस्थान की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि बीआईटी मेसरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान माना जाता है।   एलुमनाई नेटवर्क भी बना ताकत संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. राजेश जैन के अनुसार, बीआईटी मेसरा का एलुमनाई नेटवर्क आज दुनिया भर में प्रभावशाली पदों पर कार्यरत है। संस्थान के पूर्व छात्र रोहित प्रसाद (अमेजन एलेक्सा एआई), वी. वैद्यनाथन (आईडीएफसी फर्स्ट बैंक), अमित चौधरी (लेंसकार्ट) और करण बजाज (व्हाइटहैट जूनियर) जैसे बड़े नामों में शामिल हैं। यह उपलब्धि बीआईटी मेसरा की शैक्षणिक गुणवत्ता और उसके व्यापक प्रभाव को साबित करती है।

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रांची में बन रहा मेगा पार्क, सेहत से मनोरंजन तक का ख्याल रखेगा

रांची। रांची में एक और मेगा पार्क बन रहा है। अगले छह माह में यह तैयार हो जायेगा। इसके बाद रांची को एक और पार्क की सौगात मिलेगी। वन विभाग की ओर से रिंग रोड के किनारे सेंबो से आगे बारीडीह गांव में 38 एकड़ जमीन पर पार्क बन रहा है। इस पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस पार्क को राजभवन के सामने स्थित नक्षत्र वन की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। औषधीय पौधों की जानकारी मिलेगी यहां पर्यटकों को औषधीय पौधों की जानकारी मिलेगी। यह पहला पार्क होगा, जहां बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की सेहत से लेकर मनोरंजन तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। क्योंकि, पार्क के अंदर दो तालाब बनेंगे। एक बोटिंग और दूसरा लोटस पॉन्ड बनेगा। पार्क के अंदर ट्री हाउस और एलिवेटेड व्यू सबसे बड़ा आकर्षण होगा। क्योंकि, ट्री हाउस के ऊपर कैफेटेरिया होगा, जहां पर्यटकों को लजीज व्यंजन परोसे जाएंगे।  बड़ा पार्किंग एरिया पार्क के पास वाहनों के लिए सबसे बड़ा पार्किंग एरिया बन रहा है, जहां 200 चार पहिया और दो पहिया वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।   पार्क बनने से फायदा पार्क में चारों ओर हरे-भरे पेड़ हैं। पार्क बनने से पेड़ संरक्षित रहेंगे। बड़े क्षेत्र में हरियाली रहेगी। पार्क बनने से पूरे क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ जाएगी। लोग अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम गुजार सकेंगे। उन्हें स्वच्छ वातावरण मिलेगा। पार्क के निर्माण से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। आसपास का क्षेत्र भी विकसित होगा। चहल-पहल बढ़ेगी तो बसावट भी बढ़ेगी।   बच्चों के लिए पहली बार टॉय ट्रेन व एडवेंचर जोन इस पार्क में बच्चों के लिए अम्यूजमेंट जोन बन रहा है। यहां तरह-तरह के झूले, खेल उपकरण और टॉय ट्रेन की सुविधा होगी। रांची में यह पहला पार्क होगा, जहां बच्चों के मनोरंजन के लिए इतने बड़े स्तर पर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। छोटे बच्चों से लेकर किशोरों के लिए अलग-अलग जोन बनाए जाएंगे। क्रिकेट बॉक्स सहित अन्य खेल भी होंगे। युवाओं के लिए ओपन जिम की सुविधा मिलेगी। नॉलेज के साथ स्वच्छ वातावरण का आनंद ले सकेंगे।   बाउंड्री से लेकर वॉकिंग ट्रैक तक का काम लगभग पूरा पार्क के चारों ओर बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। 2.25 किलोमीटर लंबा वॉकिंग ट्रैक भी तैयार है, जहां लोग सुबह-शाम टहल सकेंगे। इसके अलावा ट्री हाउस का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसके ऊपर कैफेटेरिया बनेगा। वाटर टॉवर के ऊपर भी लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि लोग ऊंचाई पर बैठकर पूरे पार्क का नजारा ले सकें।   बटरफ्लाई कंजर्वेटरी होगा आकर्षण का केंद्र नेचर लवर्स के लिए यहां बटरफ्लाई कंजर्वेटरी बनाई जा रही है, जहां विभिन्न प्रजातियों की तितलियां संरक्षित की जाएंगी। साथ ही नक्षत्र वन का छोटा स्वरूप भी विकसित होगा, जिसमें औषधीय और धार्मिक महत्व के पौधे लगाए जाएंगे। इससे यह पार्क मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षणिक महत्व भी रखेगा। यहां पर्यटकों को विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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रांची। असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज है। जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन और पार्टी के कई नेता पिछले दस दिनों से असम में कैंप कर रहे हैं। इस बीच असम में प्रशासन की ओर से हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को चुनावी सभा के लिए उड़ने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद हेमंत सोरेन ने मोबाइल से ही सभा को संबोधित किया। बता दें कि इससे एक दिन पहले हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को भी उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली थी।   कल्पना सोरेन को भी नहीं मिली थी अनुमति जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से इस आशय की जानकरा दी। इससे पहले रविवार को ऐसे ही कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को उड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी। जिसके कारण कल्पना सोरेन तीन में से दो सभाओं को संबोधित नहीं कर पाईं। इसके बाद कल्पना सोरेन ने इसे असम सरकार की एक साजिश करार दिया था। ऐसे षड्यंत्र से तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? हेमंत सोरेन के कहा कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गई। कल कल्पना सोरेन को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया। क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? पीएम मोदी के दौरे को लेकर अनुमति नहीं मिली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असम दौरे को देखते हुए सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है।

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