देवघर: राजकीय श्रावणी मेला अब पूरी तरह तकनीक की निगरानी में नजर आ रहा है. इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की गिनती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल सिस्टम से की जा रही है. पहली बार मेले में 150 एआई फेस रीडिंग हेड काउंटिंग कैमरे लगाए गए हैं, जो दुम्मा से लेकर बाबा मंदिर परिसर और कतार मार्ग के अंतिम छोर कुमैठा तक हर कांवरिये की सटीक संख्या दर्ज कर रहे हैं. इस तकनीक की खास बात यह है कि किसी श्रद्धालु की दोबारा गिनती नहीं होती, जिससे प्रशासन को वास्तविक और रियल टाइम आंकड़े मिल रहे हैं.
श्रावणी मेले में श्रद्धालु पैदल, रेल, सड़क और हवाई मार्ग से देवघर पहुंचते हैं. पैदल आने वाले कांवरियों की गिनती के लिए दुम्मा में 10 और शिवगंगा क्षेत्र में 8 हेड काउंटिंग कैमरे लगाए गए हैं. वहीं बाबा मंदिर के सभी प्रमुख प्रवेश और निकास द्वारों पर 10 AI कैमरे तैनात किए गए हैं. इसके अलावा संस्कार मंडप, क्यू कॉम्प्लेक्स, नेहरू पार्क और कतार के अंतिम छोर कुमैठा तक 122 फेस रीडिंग कैमरे लगाए गए हैं, जो पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रख रहे हैं.
एआई आधारित यह सिस्टम श्रद्धालुओं के चेहरे की पहचान कर उनकी गिनती करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई व्यक्ति दोबारा काउंट न हो. इससे प्रशासन को हर समय यह जानकारी मिल रही है कि मेले में कितने श्रद्धालु मौजूद हैं और कितने लोगों ने बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण किया है. इससे भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी काफी मदद मिल रही है.
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की गिनती की व्यवस्था समय के साथ लगातार आधुनिक होती गई है. शुरुआती दौर में सांख्यिकी विभाग के कर्मचारी मंदिर खुलने से बंद होने तक मैन्युअल तरीके से श्रद्धालुओं की संख्या दर्ज करते थे. इसके बाद टाइम स्लॉट कार्ड, फिर रिस्ट बैंड सिस्टम लागू किया गया.
बाद में एक्सिस कार्ड सिस्टम शुरू हुआ, जिसके तहत बिहार-झारखंड सीमा में प्रवेश करते ही कांवरियों की फोटो लेकर उन्हें कार्ड जारी किया जाता था. यह व्यवस्था लगभग एक दशक तक प्रभावी रही, लेकिन अब इसकी जगह पूरी तरह AI आधारित फेस रीडिंग और हेड काउंटिंग सिस्टम ने ले ली है.
प्रशासन का मानना है कि एआई कैमरों से न सिर्फ श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या का पता चल रहा है, बल्कि इससे भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी. डिजिटल निगरानी के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अनुभव मिल सकेगा.
इस नई तकनीक के लागू होने के साथ देवघर का राजकीय श्रावणी मेला देश के उन चुनिंदा धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गया है, जहां श्रद्धालुओं की गिनती और भीड़ प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
देवघर। राजकीय श्रावणी मेला 2026 में आने वाली महिला श्रद्धालुओं और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देवघर जिला प्रशासन ने रूटलाइन में 10 मातृत्व विश्राम गृह बनाए हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य लंबी यात्रा और भीड़ के बीच महिलाओं, खासकर छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं को आराम और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। महिलाओं और बच्चों के लिए राहत केंद्र श्रावणी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देवघर पहुंच रहे हैं। इस दौरान महिला श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने रूटलाइन में विशेष मातृत्व विश्राम गृह तैयार किए हैं। इन केंद्रों में महिलाओं और बच्चों को भीड़ से अलग कुछ समय आराम करने की सुविधा मिल रही है। प्रशासन की इस पहल को महिला श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा माना जा रहा है। गर्मी और भीड़ के बीच मिल रही राहत श्रावणी मेले के दौरान लंबी कतार और पैदल यात्रा के कारण छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं को विशेष परेशानी होती है। ऐसे में मातृत्व विश्राम गृह उन्हें बीच रास्ते में आराम करने का सुरक्षित स्थान उपलब्ध करा रहे हैं। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन की ओर से सहायता केंद्रों और अन्य सुविधाओं के साथ इन विश्राम गृहों को भी सक्रिय रखा गया है। प्रशासन ने सुविधाओं पर बढ़ाया जोर देवघर प्रशासन इस बार श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई व्यवस्थाएं कर रहा है। मातृत्व विश्राम गृहों के अलावा रूटलाइन में सहायता और सूचना केंद्र भी बनाए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को आवश्यक सहायता समय पर मिल सके। महिला श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी पहल मातृत्व विश्राम गृहों की व्यवस्था को श्रावणी मेले में महिला-केंद्रित सुविधाओं की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजन में ऐसी व्यवस्था से महिलाओं और बच्चों को आराम के साथ-साथ यात्रा के दौरान राहत मिलने की उम्मीद है। श्रावणी मेला जारी रहने के दौरान इन केंद्रों के माध्यम से महिला श्रद्धालुओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर प्रशासन का विशेष ध्यान रहेगा।
देवघर। राजकीय श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को मिलावटी और खराब खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो संदिग्ध पेड़ा जब्त कर नष्ट कराया। कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में भी हड़कंप मच गया। खाद्य दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच श्रावणी मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंच रहे हैं। मेले में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें मिठाई, पेड़ा, घी और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाली दुकानों की जांच कर रही हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि के साथ-साथ भंडारण की स्थिति की भी जांच की। इसी क्रम में एक्सपायरी घी और संदिग्ध पेड़ा बरामद किया गया। 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो पेड़ा नष्ट जांच के दौरान टीम ने 45 किलो एक्सपायरी घी बरामद किया। इसके अलावा करीब 56 किलो संदिग्ध पेड़ा भी मिला। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने के बाद दोनों खाद्य पदार्थों को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री को रोकना है, जिनके सेवन से श्रद्धालुओं की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। दुकानदारों को सख्त चेतावनी खाद्य सुरक्षा विभाग ने मेले में खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों और कारोबारियों को साफ निर्देश दिया है कि वे केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री की बिक्री करें। अधिकारियों ने एक्सपायरी और खराब खाद्य सामग्री नहीं बेचने, खाद्य पदार्थों को उचित तापमान और स्वच्छ वातावरण में रखने तथा साफ-सफाई के नियमों का पालन करने की हिदायत दी है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। श्रावणी मेले में लगातार जारी रहेगा जांच अभियान श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग का जांच अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। विभाग की टीमें दुकानों, होटलों, मिठाई प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारियों की निगरानी कर रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देवघर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों।
रांची। झारखंड में अग्निशमन सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को धुर्वा स्थित गृह रक्षा वाहिनी के केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान से 58 आधुनिक मिनी फायर टेंडर को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया। इस दौरान विधायक कल्पना सोरेन और अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। फायर सर्विस के बेड़े में शामिल हुए आधुनिक वाहन अग्निशमन विभाग के बेड़े में शामिल किए गए ये मिनी फायर टेंडर वॉटर विद मिस्ट टेक्नोलॉजी से लैस हैं। इन वाहनों को विशेष रूप से शहरों की संकरी गलियों, घनी आबादी वाले इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से पहुंचकर आग पर काबू पाने के लिए तैयार किया गया है। दूरदराज इलाकों तक पहुंचेगी बेहतर अग्निशमन सेवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कई बार बड़े दमकल वाहन संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तक समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे आग पर नियंत्रण में देरी होती है। नए मिनी फायर टेंडर इस समस्या का समाधान करेंगे और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक भी प्रभावी अग्निशमन सेवा पहुंचाने में मदद करेंगे। आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का लिया जायजा कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने अग्निशमन विभाग की ओर से लगाई गई आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नए वाहनों और अत्याधुनिक अग्निशमन तकनीकों की जानकारी भी दी। डीजी ने भेंट किया स्मृति चिह्न समारोह के अंत में डीजी एमएस भाटिया ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन को स्मृति चिह्न और पौधा भेंट कर सम्मानित किया। सरकार का कहना है कि इन नए वाहनों के शामिल होने से राज्य में आपदा एवं अग्निशमन प्रतिक्रिया प्रणाली पहले से अधिक प्रभावी और तेज होगी।