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परीक्षा घोटालों के विरोध में जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन, जवाबदेही की मांग तेज

anjali kumari जून 20, 2026 0
Jantar Mantar student protest
Jantar Mantar student protest

नई दिल्ली, एजेंसियां। कथित परीक्षा घोटालों, बार-बार होने वाले पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के मद्देनजर जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

 

पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग


प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर रोक और छात्रों के हितों की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

 

थाली-चम्मच बजाकर जताया विरोध


कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन से पहले समर्थकों से थाली और चम्मच लेकर आने की अपील की थी। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी थाली और चम्मच लेकर पहुंचे और उन्हें बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग


प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।


प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरे समय मौके पर तैनात रही। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में भी आंदोलन जारी रहेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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लापता भारतीय नाविक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी गई स्थिति रिपोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश में लापता भारतीय नाविक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से मामले की स्थिति और भारतीय नागरिक की तलाश के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अदालत ने भारतीय नागरिक की सुरक्षा और उसके परिवार की चिंता को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।   नाविक के लापता होने का मामला   यह मामला विदेश में एक वाणिज्यिक जहाज से जुड़े भारतीय नाविक के लापता होने से संबंधित है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया और अन्य समुद्री क्षेत्रों में जहाजों पर हमलों के कारण कई भारतीय नाविकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी है। जुलाई में ओमान के पास GFS Galaxy पर हमले के बाद पुणे के 30 वर्षीय भारतीय मरीन इंजीनियर हेरंब करमाकर के लापता होने की खबर सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई।   सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब   सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि लापता भारतीय नागरिक को खोजने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत की चिंता इस बात को लेकर है कि विदेश में किसी भारतीय के लापता होने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ तेजी से कार्रवाई हो। अदालत के निर्देश के बाद संबंधित सरकारी एजेंसियों से मामले की मौजूदा स्थिति और खोज अभियान से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।   भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता   पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पहले ही निगरानी बढ़ा चुकी है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की निगरानी के लिए व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।   समुद्री मार्गों पर लगातार हमलों के कारण भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित आवागमन का मुद्दा अब सरकार और न्यायपालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।

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कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर यातायात प्रतिबंध
कांवड़ यात्रा के चलते 4 से 12 अगस्त तक दिल्ली-हरिद्वार हाईवे बंद, सभी वाहनों की आवाजाही पर रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज, 4 अगस्त से सभी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह प्रतिबंध 12 अगस्त 2026 तक लागू रहेगा। यात्रियों को इस दौरान वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।   12 अगस्त तक लागू रहेगा प्रतिबंध     कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों की ओर लौटते हैं। पैदल कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग को वाहनों के लिए बंद करने का फैसला लिया है। प्रशासन की ओर से पहले ही चरणबद्ध तरीके से यातायात प्रतिबंध लागू किए गए थे। अब 4 से 12 अगस्त तक इस मार्ग पर सभी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।     गंगा नहर मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही बंद     दिल्ली-हरिद्वार हाईवे के साथ गंगा नहर मार्ग पर भी 4 से 12 अगस्त तक सभी वाहनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। इन मार्गों पर कांवड़ियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है。   पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए अलग-अलग मार्गों पर डायवर्जन और प्रतिबंध लागू किए गए हैं।   यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह     दिल्ली से हरिद्वार, मेरठ, मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले यातायात व्यवस्था की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। हाईवे बंद होने के कारण वैकल्पिक मार्गों पर भी वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जरूरी यात्रा की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की है।     कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था     कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में पैदल श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह यातायात डायवर्जन लागू किए जा रहे हैं।  

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पुंछ के सीमावर्ती गांवों में मिले मोर्टार के गोले
पुंछ के सीमावर्ती गांवों में मोर्टार के गोले मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, इलाके में बढ़ाई गई निगरानी

पुंछ, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक स्थित कुछ सीमावर्ती गांवों में मोर्टार के पुराने गोले मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में इन संदिग्ध वस्तुओं के मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से ऐसी किसी भी वस्तु को छूने से बचने और तुरंत सुरक्षाबलों को सूचना देने की अपील की है।   सीमावर्ती इलाकों में मिले मोर्टार के गोले     प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पुंछ के LoC से सटे कुछ गांवों में ग्रामीणों को मोर्टार के गोले दिखाई दिए। सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की और संदिग्ध वस्तुओं की जांच शुरू की।   अधिकारियों को आशंका है कि ये गोले पुराने हो सकते हैं और पहले हुई गोलीबारी या सैन्य गतिविधियों के दौरान यहां रह गए होंगे। हालांकि, इनके वहां पहुंचने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।   सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी     घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु मौजूद न हो।   मोर्टार के गोले मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या ये वस्तुएं हाल की किसी गतिविधि से जुड़ी हैं या लंबे समय से जमीन में पड़ी हुई थीं।   ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील     सुरक्षा अधिकारियों ने सीमावर्ती गांवों के लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई मोर्टार का गोला, विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो उसे छूने या हटाने की कोशिश न करें। ऐसी वस्तु मिलने पर तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को सूचना देने को कहा गया है।   सीमावर्ती इलाकों में पहले भी पुराने और बिना फटे गोला-बारूद मिलने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ टीम ही वस्तु को सुरक्षित तरीके से हटाने या निष्क्रिय करने की कार्रवाई करती है।   जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति     फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद मोर्टार गोलों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ये गोले कितने पुराने हैं और उनके पुंछ के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचने की वजह क्या है।   घटना के बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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