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भारत-जापान शिखर वार्ता आज, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग रहेगा प्रमुख एजेंडा

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Modi Sanae Takaichi
Narendra Modi Sanae Takaichi

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और जापान के बीच आज होने वाली शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी प्रमुख एजेंडा रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री सानाए तकाईची के बीच होने वाली इस बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

 

रक्षा सहयोग को नई गति देने पर जोर

 

सूत्रों के अनुसार, दोनों देश रक्षा उपकरणों के सह-विकास, सैन्य तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यासों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए समुद्री निगरानी और लॉजिस्टिक सहयोग पर भी बातचीत होने की संभावना है।

 

इंडो-पैसिफिक में चीन की गतिविधियों पर नजर

 

विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। भारत और जापान लंबे समय से मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते रहे हैं।

 

आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग पर भी चर्चा

 

रक्षा मामलों के अलावा दोनों नेता सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्पों पर विचार करेंगे। जापानी निवेश को भारत में बढ़ावा देने और सप्लाई चेन साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर रहने की उम्मीद है।

 

क्वाड सहयोग को मिलेगा बल

 

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब क्वाड समूह—भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया—क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि आज की बैठक से भारत-जापान रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का हमला, बोले- ‘महाकाल मंदिर में भी हो रही चंदा चोरी’

भोपाल, एजेंसियां। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा संग्रह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कार्यक्रम में शामिल हुए दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि चंदे में गड़बड़ी हुई है और इसे "आस्था के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और अब इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे।   'आस्था के साथ हुई चोरी, कोर्ट जाऊंगा' दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है, क्योंकि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल धन की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी का मामला है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घरों और मंदिरों के बाहर "चंदा चोरों से सावधान" जैसे बैनर लगाएं।   महाकाल मंदिर और बीजेपी पर लगाए आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भी चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में महाकाल मंदिर की जमीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था को आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है।   राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से चंदा जुटाया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि वह इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे।   हालांकि, दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी या संबंधित मंदिर ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद आगे और तेज होने की संभावना है।

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जल संकट बनेगा 20 लाख करोड़ का मेगा मार्केट, इंफ्रा कंपनियों की होगी चांदी

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में गहराते जल संकट के बीच वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तेजी से उभरते निवेश अवसर के रूप में सामने आ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अगले दस वर्षों में पेयजल आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, डिसैलिनेशन, जल भंडारण और वितरण प्रणाली के विकास के लिए करीब 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। इससे इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए बड़े कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावना है।   2030 तक मांग होगी उपलब्ध पानी से दोगुनी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है। भारत के पास दुनिया की करीब 18 प्रतिशत आबादी है, जबकि मीठे पानी के संसाधनों में उसकी हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है। ऐसे में जल संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करना सरकार और उद्योग दोनों की प्राथमिकता बनता जा रहा है।   सरकारी योजनाओं से मिलेगा बड़ा समर्थन जल जीवन मिशन के लिए हर साल लगभग 67 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में जल शक्ति मंत्रालय को करीब 99,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा AMRUT 2.0 योजना के लिए लगभग 2.99 लाख करोड़ रुपये और नमामि गंगे फेज-2 के तहत 22,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं से जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।   सीवेज ट्रीटमेंट और वेस्टवॉटर मैनेजमेंट में बड़ा अवसर भारत में प्रतिदिन करीब 72,000 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि उपचार क्षमता केवल 27,000 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। यानी लगभग 70 प्रतिशत सीवेज बिना उपचार के ही रह जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश और कारोबार की संभावना है।   रिपोर्ट के अनुसार, VA Tech Wabag, Enviro Infra Engineers और Denta Water and Infra Solutions जैसी कंपनियां इस निवेश चक्र का लाभ उठाने की बेहतर स्थिति में हैं। लगातार सरकारी निवेश, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कड़े पर्यावरणीय नियम और उद्योगों में पानी की बढ़ती जरूरत आने वाले वर्षों में वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को देश की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री में शामिल कर सकती है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Sonam Raghuvanshi

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट से सोनम रघुवंशी को बड़ी राहत, जमानत पर रोक से इनकार

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अंडे-बैंगन हमले के बाद महुआ मोइत्रा ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, मांगी सुरक्षा

Government officials reviewing demographic data and maps of India, representing the newly formed high-level committee to study demographic changes after the 2011 Census.

अवैध घुसपैठ और जनसंख्या बदलावों की होगी वैज्ञानिक जांच, गृह मंत्रालय ने बनाई हाई-लेवल कमेटी

Residents and members of the Rail Line Construction Struggle Committee gather at a public meeting in Garhwa, demanding restoration of the original Barwadih–Chirmiri–Ambikapur railway route.
झारखंड-छत्तीसगढ़ रेल परियोजना पर विवाद, पुराने रूट में बदलाव का ग्रामीणों ने किया विरोध

गढ़वा: झारखंड के बरवाडीह को छत्तीसगढ़ के चिरमिरी और अंबिकापुर से जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन के रूट में बदलाव को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने मांग की है कि परियोजना का निर्माण पुराने प्रस्तावित मार्ग से ही किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि रूट बदला गया तो क्षेत्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़गड़ में हुई संघर्ष समिति की बैठक संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को गढ़वा जिले के बड़गड़ स्थित राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़गड़, भंडरिया और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में प्रस्तावित रेल परियोजना का मार्ग बदलने के निर्णय का सर्वसम्मति से विरोध किया गया। 'रूट बदला तो पिछड़ जाएगा पूरा इलाका' बैठक को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पुराने सर्वेक्षण वाले मार्ग को छोड़कर नई रेल लाइन किसी अन्य रूट से बनाई गई तो बड़गड़ और भंडरिया जैसे क्षेत्र रेल संपर्क से वंचित रह जाएंगे, जिससे विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। समिति के पदाधिकारी जयप्रकाश मिंज ने कहा कि बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल परियोजना इस आदिवासी और पिछड़े इलाके के विकास की आधारशिला है। रूट बदलने से स्थानीय लोगों के रोजगार, शिक्षा और व्यापार के अवसर प्रभावित होंगे। 'वर्षों की तैयारी को नजरअंदाज किया जा रहा' समिति के सदस्य आनंद सोनी ने कहा कि पुराने रेल मार्ग के लिए वर्षों पहले सर्वेक्षण सहित कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में अचानक नया रूट तय करना क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार से पुराने प्रस्तावित मार्ग को बहाल करने की मांग की। 65 एकड़ रेलवे जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप बैठक में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पहुंचे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलवे जंक्शन पहले सरनाडीह गांव में बनाया जाना था। उनका दावा है कि रेलवे की करीब 65 एकड़ भूमि आज भी सरकारी रिकॉर्ड में रेलवे के नाम दर्ज है, लेकिन उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर रखा है। इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की जा चुकी है और मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी लंबित बताया गया। जनजागरण अभियान और आंदोलन की चेतावनी बैठक में निर्णय लिया गया कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग को बहाल कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही रेल मंत्रालय, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बैठक में जिला परिषद प्रतिनिधि राधेश्याम जायसवाल, मुखिया प्रतिनिधि दिनेश लकड़ा, सत्यानंद बाखला, विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश, भाजपा मंडल अध्यक्ष बजरंग प्रसाद, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन मिंज सहित विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल परियोजना क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके मूल रूट में किसी भी बदलाव का वे पुरजोर विरोध करेंगे।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Logos of WhatsApp, Telegram and Signal displayed on a smartphone, representing the government's scrutiny of username-based messaging features over cybersecurity concerns.

यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त: WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी भेजा नोटिस

Rescue personnel remove a venomous cobra from inside a car after the driver safely stopped the vehicle on Ghaziabad's Elevated Road.

चलती कार में निकला जहरीला कोबरा, महिला की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा; गाजियाबाद एलिवेटेड रोड का वीडियो वायरल

Suvendu Adhikari

पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, हर थाने में शुरू होगी महिला हेल्प डेस्क

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abhishek singh जून 30, 2026 0

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