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SIR Campaign Removes 5.58 Crore Voters in India

SIR अभियान: देशभर में 5.58 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर, गुजरात टॉप पर

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Election Commission voter list revision process showing removal of names during SIR campaign across India
SIR Voter List Revision India 2026 Update

नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब तक करीब 5.58 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 9.55% है। यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक मतदाता पुनरीक्षण अभियान माना जा रहा है।

दूसरे चरण में सबसे ज्यादा नाम हटे

SIR के दूसरे चरण में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था, जिसकी प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से शुरू होकर हाल ही में पूरी हुई। इस चरण में ही करीब 5.37 करोड़ वोटर लिस्ट से हटाए गए, जो लगभग 10.55% के बराबर है।

अगर पहले चरण (जिसमें बिहार शामिल था) को भी जोड़ दें, तो कुल मतदाताओं की संख्या 58.87 करोड़ से घटकर 53.28 करोड़ रह गई है।

किन राज्यों में चला अभियान

दूसरे चरण में जिन प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया, उनमें राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुड्डुचेरी और लक्षद्वीप शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में कुल मतदाता संख्या 50.97 करोड़ से घटकर 45.59 करोड़ हो गई है।

गुजरात टॉप, यूपी दूसरे नंबर पर

नाम कटने के प्रतिशत के हिसाब से गुजरात सबसे ऊपर है, जहां 13.39% वोटर सूची से बाहर हुए।
दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 13.23% नाम हटे।
तीसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ (11.77%) रहा।

वहीं, पश्चिम बंगाल में 11.63% और तमिलनाडु में 11.55% नाम हटाए गए।
सबसे ज्यादा गिरावट केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दर्ज हुई, जहां 16.86% मतदाता कम हुए

संख्या के हिसाब से यूपी सबसे आगे

हालांकि प्रतिशत के मामले में गुजरात आगे है, लेकिन कुल संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम हटे। यहां मतदाता संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 13.39 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आयोग ने राज्य को अतिरिक्त समय भी दिया था।

क्यों चलाया गया SIR अभियान

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को यह फैसला लिया था। करीब 20 साल बाद इतनी व्यापक समीक्षा की गई।
तेजी से हो रहे शहरीकरण, पलायन और डुप्लीकेट या निष्क्रिय मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया, ताकि वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके।

क्या है SIR की प्रक्रिया

सामान्य पुनरीक्षण (SSR) के विपरीत, SIR में पूरी वोटर लिस्ट नए सिरे से तैयार की जाती है। इस बार सभी मतदाताओं को एक तय समय सीमा के भीतर फॉर्म जमा करना अनिवार्य किया गया था।

जो लोग ऐसा नहीं कर पाए, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हट गए। कई मामलों में नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए, जिस पर विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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पश्चिम बंगाल के स्कूल में करोड़ों का कैश बरामद और कंडोम पैकेट मिलने से मचा हड़कंप

कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज के बाद अब कांचड़ापाड़ा का एक इंग्लिश मीडियम स्कूल भी जांच के दायरे में आ गया है। कारण स्कूल से  1.77 करोड़ रुपये नकद बरामद होने से सनसनी फैल गई है। जांच के दौरान स्कूल परिसर के एक कमरे से बड़ी मात्रा में नकदी के अलावा कंडोम के पैकेट और एक सुसज्जित बेडरूम भी मिला। इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और स्कूल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।   रातभर चली नोटों की गिनती पुलिस को स्कूल के अकाउंट्स विभाग से नकदी से भरे कई पैकेट मिले। बरामद राशि इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक चली गिनती के बाद कुल 1.77 करोड़ रुपये मिलने की पुष्टि हुई। मामले में अकाउंट्स विभाग के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।   बेडरूम और आपत्तिजनक सामान मिलने से बढ़ी जांच तलाशी के दौरान अधिकारियों को कार्यालय के पास एक एयर कंडीशंड और पूरी तरह सुसज्जित कमरा मिला, जिसमें बिस्तर, अलमारी और अन्य सुविधाएं मौजूद थीं। अलमारी की जांच में कंडोम के पैकेट मिलने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल परिसर में इस तरह की व्यवस्था किस उद्देश्य से की गई थी।   राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू स्थानीय विधायक संदीप दास ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि स्कूल में भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखी गई थी। उन्होंने कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।   स्कूल प्रबंधन ने दी सफाई स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने कहा कि बरामद नकदी छात्रों की एडमिशन फीस से संबंधित है, जिसे विभिन्न कारणों से बैंक में जमा नहीं कराया जा सका था। वहीं कमरे में मिले बिस्तर को उन्होंने बीमार छात्रों के आराम के लिए बनाए गए कक्ष का हिस्सा बताया। कंडोम पैकेट मिलने पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी कि वे वहां कैसे पहुंचे।   जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। नकदी के स्रोत, कमरे के उपयोग और बरामद सामान के संबंध में कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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दिल्ली में गुरु रंधावा के जिम के बाहर फायरिंग, लॉरेंस गैंग ने ली जिम्मेदारी का दावा

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में पंजाबी गायक गुरु रंधावा के जिम के बाहर फायरिंग की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, बाइक सवार बदमाशों ने 24 HS Fitness Gym के बाहर पहुंचकर करीब सात राउंड गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गए। फायरिंग के कारण जिम के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।   बाइक सवार हमलावरों ने दिया वारदात को अंजाम प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए थे। जिम के बाहर पहुंचते ही उन्होंने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलाबारी से आसपास मौजूद लोग घबरा गए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।   सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का दावा फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें कथित तौर पर Lawrence Bishnoi गैंग के अनिल पंडित ग्रुप ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। इसके अलावा एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रही है, जिसमें खुद को गैंग से जुड़ा बताने वाला व्यक्ति इस हमले के पीछे कथित कारणों का जिक्र कर रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   पुलिस कर रही हर पहलू से जांच घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और ऑडियो की सत्यता की भी जांच की जा रही है।   जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग के पीछे असली वजह क्या थी और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

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Students and youth protest against alleged exam irregularities, demanding accountability from the Education Ministry.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, CJP ने 13 जून तक दिया अल्टीमेटम; देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

  नई दिल्ली: परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 13 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। परीक्षाओं में गड़बड़ी का लगाया आरोप बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) और सीयूईटी (CUET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है और सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। दीपके ने कहा कि युवा वर्ग अब अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है। 13 जून तक का समय, फिर शुरू होगा आंदोलन सीजेपी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को 13 जून तक इस्तीफा देने का समय दिया गया है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगा। दीपके ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत पुणे से की जाएगी, जहां 11 जून को शाम चार बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लखनऊ, अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। 20 जून को दिल्ली कूच की तैयारी संगठन ने 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो देशभर से छात्र और युवा दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करेंगे और छात्रों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील करेंगे। "एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित" अभिजीत दीपके ने दावा किया कि विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई समस्याओं के कारण एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है और संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र सीजेपी संस्थापक ने बताया कि 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस अल्टीमेटम और आंदोलन की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, संगठन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।  

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