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X पर कंटेंट हटाने के आदेश को लेकर मस्क को सरकार की दो टूक, कहा- भारत में कानूनों का पालन जरूरी

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
Government vs Elon Musk
Government vs Elon Musk

नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी स्तर से कंटेंट हटाने के अनुरोधों को लेकर केंद्र सरकार और एलन मस्क के प्लेटफॉर्म के बीच नया विवाद खड़ा होने के संकेत हैं। मस्क ने घोषणा की है कि X यूजर्स को यह जानने की सुविधा देगा कि किसी पोस्ट या अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए किस सरकार या सरकारी एजेंसी ने अनुरोध किया और उसका कानूनी आधार क्या था।

 

मस्क की इस पहल के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और लागू नियमों का पालन करना होगा।

 

सरकार ने X को क्या कहा?

 

केंद्र की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि X को भारत में संचालन के दौरान देश के कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का यह रुख ऐसे समय आया है जब मस्क प्लेटफॉर्म पर सरकारी सेंसरशिप से जुड़े अनुरोधों को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

सरकार के अनुसार, किसी प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता नीति उसे भारत में लागू कानूनी प्रावधानों से अलग काम करने की अनुमति नहीं देती।

 

यूजर्स को क्या जानकारी देगा X?

 

मस्क की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत X पर यूजर्स को यह जानकारी मिल सकती है कि किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किस सरकारी एजेंसी या सरकार की ओर से आया था।

 

जहां संभव होगा, वहां कार्रवाई के लिए बताए गए कानूनी आधार या कारण की जानकारी भी दी जा सकती है। इससे यूजर्स यह समझ सकेंगे कि किसी कंटेंट पर कार्रवाई X के अपने फैसले के कारण हुई या किसी सरकारी अनुरोध के बाद।

 

कंटेंट मॉडरेशन में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

 

एलन मस्क लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों और कंटेंट मॉडरेशन में अधिक पारदर्शिता की वकालत करते रहे हैं। X की ओर से कंटेंट की पहुंच, रिकमेंडेशन सिस्टम और मॉडरेशन से जुड़े फैसलों को समझने योग्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

नए बदलाव के जरिए प्लेटफॉर्म यह बताने की कोशिश कर रहा है कि किसी सामग्री की पहुंच कम होने या उसे हटाए जाने के पीछे क्या वजह रही।

 

सरकारों के अनुरोध पर X का रिकॉर्ड

 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मस्क के स्वामित्व के दौरान अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि में X ने सरकारों की ओर से किए गए कंटेंट हटाने के अनुरोधों में बड़ी संख्या पर कार्रवाई की है। विभिन्न अवधियों में अनुपालन दर 83 प्रतिशत से 98.8 प्रतिशत तक बताई गई है।

ऐसे में नई पारदर्शिता व्यवस्था से यह भी सामने आ सकता है कि अलग-अलग सरकारों के अनुरोधों पर X किस तरह कार्रवाई करता है।

 

Meta को लेकर भी सरकार सख्त

 

सोशल मीडिया कंपनियों को लेकर केंद्र सरकार का सख्त रुख सिर्फ X तक सीमित नहीं है। इससे पहले सरकार ने Meta को भी भारत के कानूनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप काम करने का संदेश दिया था।

सरकार ने कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक, CSAM और सिंथेटिक कंटेंट जैसे मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही स्थानीय भाषाओं और भारतीय संदर्भ में कंटेंट की समीक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।

 

पारदर्शिता बनाम कानून का पालन

 

X की नई नीति से एक तरफ यूजर्स को सरकारी कंटेंट हटाने के अनुरोधों की अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ भारतीय कानूनों का भी पालन करना होगा।

ऐसे में आने वाले दिनों में X की नई व्यवस्था और भारत के नियामकीय नियमों के बीच तालमेल एक अहम मुद्दा बन सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, हवाई किराए के लिए नए नियम 7 सितंबर तक पेश करने का निर्देश

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और पीक सीजन में अचानक बढ़ने वाले टिकट दामों को लेकर केंद्र सरकार से नए नियम जल्द अंतिम रूप देने को कहा है। केंद्र ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराए, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त सामान शुल्क से जुड़े नए नियमों को तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी।   हवाई किराए और सर्ज प्राइसिंग पर बनेगा नियम   केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नए नियमों का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रस्तावित नियमों में टिकट किराए, मांग बढ़ने पर किराए में होने वाली वृद्धि, अतिरिक्त सामान शुल्क तथा यात्रियों से जुड़े अन्य शुल्क को शामिल किया गया है।   सरकार ने अदालत के समक्ष नियमों का मसौदा सीलबंद लिफाफे में पेश किया। केंद्र की ओर से कहा गया कि कुछ बिंदुओं पर अंतिम चर्चा चल रही है और तीन सप्ताह में नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।   नियम नहीं मानने वाली एयरलाइंस पर सख्ती   सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन एयरलाइंस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही, जो हवाई किराए से जुड़े सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करती हैं। अदालत ने केंद्र से कहा कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाली एयरलाइंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई, यहां तक कि उन्हें ग्राउंड करने पर भी विचार किया जाए।   अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यात्रियों की ओर से त्योहारों, छुट्टियों और अधिक मांग वाले समय में टिकटों की कीमत अचानक बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं।   7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई   यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका से जुड़ा है, जिसमें हवाई किराए में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव और अतिरिक्त शुल्क को नियंत्रित करने के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी हवाई किराए में अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी को गंभीर चिंता का विषय बता चुका है।   अब केंद्र सरकार को नए नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का समय मिला है। 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट प्रस्तावित नियमों और विमानन क्षेत्र में किराया नियमन की व्यवस्था पर आगे सुनवाई करेगा।

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मध्य प्रदेश के भिंड में मजदूरों से भरी पिकअप और डंपर की टक्कर
मध्य प्रदेश में सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत, 32 घायल

भिंड, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात एक भीषण सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसा भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास करीब रात 1 बजे हुआ, जहां मजदूरों से भरी पिकअप की सामने से आ रहे डंपर से जोरदार टक्कर हो गई।   गायों के झुंड को बचाने के दौरान हादसा     प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हाईवे पर गायों का झुंड मौजूद था। उसे बचाने के प्रयास में मजदूरों से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे डंपर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप में सवार कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।     धान की रोपाई के बाद घर लौट रहे थे मजदूर     बताया जा रहा है कि पिकअप में सवार मजदूर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले थे। वे मध्य प्रदेश में धान की रोपाई के काम के लिए आए थे। काम पूरा करने के बाद मजदूर अपने घर लौट रहे थे, तभी छीमका गांव के पास यह दर्दनाक हादसा हो गया।     घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती     हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से घायलों को तत्काल गोहद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। हादसे के बाद पुलिस मृतकों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क करने में जुटी है।   उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

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आंध्र प्रदेश में लापता आठ मछुआरों की तलाश करता तटरक्षक बल
Fishermen Missing: आंध्र प्रदेश में 8 मछुआरे लापता, 13 अगस्त को लौटना था; समुद्र में कहां गायब हुई नाव?

अमरावती, एजेंसियां। आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले से समुद्र में मछली पकड़ने गई एक नाव के लापता होने से हड़कंप मच गया है। नाव में सवार आठ मछुआरे तय समय पर वापस नहीं लौटे हैं। नाव 3 अगस्त को ओडलारेवु से रवाना हुई थी और मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का डीजल और राशन मौजूद था। उन्हें 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला है।   3 अगस्त को समुद्र में गई थी नाव     जानकारी के मुताबिक, कोमारागिरी पटनम गांव निवासी कोपनाटी रामकृष्ण वर्मा नाव के मालिक और चालक हैं। नाव 3 अगस्त को वैनेतेय नदी और समुद्र के संगम के रास्ते मछली पकड़ने के लिए रवाना हुई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नाव विशाखापत्तनम से पारादीप के बीच के समुद्री क्षेत्र की ओर गई हो सकती है।   मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का राशन और डीजल था। हालांकि, नाव में मौजूद मोबाइल फोन और GPS सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही है।   13 अगस्त तक लौटना था, 4 दिन बाद मिली जानकारी     नाव को 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी जब मछुआरे नहीं लौटे तो परिवारों की चिंता बढ़ गई। करीब चार दिन बाद नाव मालिक के परिवार ने ओडलारेवु तटीय सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी।   मामले की गंभीरता को देखते हुए कोनसीमा के जिलाधिकारी आर. महेश कुमार ने विशाखापत्तनम स्थित भारतीय तटरक्षक बल से मदद मांगी है।   तटरक्षक बल की मदद से तलाश शुरू     जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को भारतीय तटरक्षक बल के साथ समन्वय कर खोज और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को नाव की संभावित दिशा, आखिरी संपर्क और समुद्र में उसके संभावित मार्ग से जुड़ी जानकारी जुटाने को कहा गया है।   इसके अलावा नाव मालिक, मछुआरों के परिवार और अन्य मछुआरों से भी जरूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नाव की संभावित लोकेशन का पता लगाया जा सके।   परिवारों को अपनों की वापसी का इंतजार     फिलहाल नाव और उसमें सवार आठों मछुआरों की सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिल सकी है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और तटरक्षक बल समेत संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क में है।   परिवारों की उम्मीद अब खोज और बचाव अभियान पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि समुद्र में लापता हुई नाव आखिर कहां है और उसमें सवार आठों मछुआरे सुरक्षित हैं या नहीं।

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