भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली 2-1 की हार के बाद स्वीकार किया है कि आगामी टी20 वर्ल्ड कप में टीम की सफलता काफी हद तक उनकी और ओपनिंग पार्टनर शेफाली वर्मा की शुरुआत पर निर्भर करेगी। मंधाना ने माना कि इंग्लैंड सीरीज में दोनों बल्लेबाज टीम को मजबूत शुरुआत देने में नाकाम रहीं, लेकिन वर्ल्ड कप से पहले इस कमी को दूर करने के लिए वे कड़ी मेहनत करेंगी।
तीन मैचों की टी20 सीरीज में स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की ओपनिंग साझेदारियां क्रमशः 19, 27 और 0 रन की रहीं। दोनों बल्लेबाज अच्छी लय में नजर आईं, लेकिन बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं हो सकीं।
सीरीज के बाद मंधाना ने कहा कि वह और शेफाली टीम को तेज और मजबूत शुरुआत देने की जिम्मेदारी समझती हैं।
"मैं और शेफाली गेंद को अच्छी तरह टाइम कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से टीम के लिए बड़ी पारियां नहीं खेल पाए। हम नेट्स में वापस जाएंगे, और ज्यादा मेहनत करेंगे तथा एक मजबूत ओपनिंग जोड़ी के रूप में वापसी करेंगे।"
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में वर्ल्ड कप से पहले खेलने का अनुभव टीम की तैयारियों के लिए काफी अहम साबित होगा।
हालांकि भारत सीरीज हार गया, लेकिन टीम को कई सकारात्मक संकेत भी मिले। चोट से वापसी करने वाली यस्तिका भाटिया शानदार फॉर्म में दिखीं और 119 रन बनाकर सीरीज की सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं।
वहीं निर्णायक मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 40 गेंदों में नाबाद 56 रन की शानदार पारी खेली। जेमिमा रोड्रिग्स और दीप्ति शर्मा ने भी बल्लेबाजी में अच्छा योगदान दिया।
मंधाना ने हरमनप्रीत की तारीफ करते हुए कहा कि जब कप्तान अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में होती हैं तो उन्हें बल्लेबाजी करते देखना किसी आनंद से कम नहीं होता।
निर्णायक मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 180 रन का मजबूत स्कोर बनाया था। जवाब में इंग्लैंड एक समय 38 रन पर 3 विकेट गंवाकर मुश्किल में था, लेकिन एलिस कैप्सी और हीथर नाइट की 137 रनों की साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया।
मंधाना ने माना कि भारतीय गेंदबाज दबाव बनाने में नाकाम रहे और भविष्य में इस क्षेत्र में सुधार की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि टीम अब गेंदबाजी योजनाओं और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति पर दोबारा काम करेगी ताकि वर्ल्ड कप में ऐसी गलतियां दोहराई न जाएं।
टी20 वर्ल्ड कप में भारत अपना पहला मैच 14 जून को बर्मिंघम में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर मंधाना ने कहा कि भारत-पाकिस्तान मैच को अलग से प्रचारित करने की जरूरत नहीं होती।
उनके अनुसार, यह मुकाबला अपने आप में इतना बड़ा है कि स्टेडियम हमेशा दर्शकों से भर जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बड़ी संख्या में भारतीय प्रशंसक टीम का समर्थन करने पहुंचेंगे।
भारत को ग्रुप-1 में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स के साथ रखा गया है। टीम टूर्नामेंट शुरू होने से पहले वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ अभ्यास मैच भी खेलेगी।
भारतीय टीम का लक्ष्य पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के बाद अब पहली बार महिला टी20 विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करना होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Gyaneshwari Yadav CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने सिर्फ सिल्वर मेडल ही नहीं जीता, बल्कि अपनी मानसिक मजबूती और जज्बे की भी मिसाल पेश की। 22 वर्षीय ज्ञानेश्वरी ने महिलाओं की 53 किलोग्राम कैटेगरी में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उनकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि प्रतियोगिता के दिन उनके पीरियड का पहला दिन था। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि उन्हें यह पता नहीं था कि उस दिन उनका शरीर किस तरह प्रतिक्रिया देगा। इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम उठाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया। ‘मुझे नहीं पता था कि शरीर साथ देगा या नहीं’ मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने पहली बार अपने पीरियड के दौरान प्रतियोगिता में उतरने के अनुभव के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “आज मेरे पीरियड का पहला दिन था। मुझे नहीं पता था कि मेरा शरीर साथ देगा या नहीं।” उनका यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महिला खिलाड़ियों के लिए मासिक धर्म से जुड़ी शारीरिक चुनौतियों पर खेल जगत में लंबे समय तक पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। हर खिलाड़ी का अनुभव अलग हो सकता है और पीरियड के दौरान दर्द, थकान या कमजोरी की तीव्रता भी अलग-अलग होती है। स्नैच में एक भी प्रयास नहीं हुआ फेल ज्ञानेश्वरी ने प्रतियोगिता की शुरुआत बेहद आत्मविश्वास के साथ की। स्नैच राउंड में उन्होंने 82, 85 और 88 किलोग्राम के तीनों प्रयास सफलतापूर्वक पूरे किए। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहले 103 किलोग्राम वजन उठाया। दूसरे प्रयास में 107 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाने के बाद उन्होंने तीसरे प्रयास के लिए 111 किलोग्राम का वजन चुना। ज्ञानेश्वरी ने यह चुनौती भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। उनकी यह लिफ्ट उन्हें सिल्वर मेडल दिलाने के साथ-साथ रिकॉर्ड बुक में भी ले गई। 111 किलो की लिफ्ट ने रचा इतिहास ज्ञानेश्वरी का 111 किलोग्राम का क्लीन एंड जर्क प्रयास बेहद खास रहा। प्रतियोगिता में यह वजन उठाने के साथ उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया। उनका कुल भार 199 किलोग्राम रहा। खास बात यह है कि 111 किलोग्राम का वजन उन्होंने ट्रेनिंग में पहले उठाया था, लेकिन प्रतियोगिता के मंच पर पहली बार इस वजन को सफलतापूर्वक उठाने में कामयाब रहीं। इसके पीछे उनके कोचों का भरोसा भी अहम रहा। ज्ञानेश्वरी के मुताबिक कोचिंग टीम ने उन पर विश्वास बनाए रखा और उन्हें इस वजन को आजमाने का मौका दिया। मीराबाई चानू से मिली प्रेरणा ज्ञानेश्वरी अपनी सफलता के पीछे भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने बताया कि जब मीराबाई ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए बड़े पदक जीते, तो नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा। ज्ञानेश्वरी के लिए मीराबाई सिर्फ एक चैंपियन नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उनका कहना था कि जब मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में भारत के लिए गोल्ड जीता, तो उनके मन में भी यह विश्वास आया कि अगर वह ऐसा कर सकती हैं तो वह भी बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं। चुनौती को कमजोरी नहीं बनने दिया ज्ञानेश्वरी की कहानी सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं है। यह उस मानसिक मजबूती की कहानी भी है, जिसके दम पर उन्होंने प्रतियोगिता के दिन अपने शरीर की अनिश्चितता के बावजूद खुद पर भरोसा बनाए रखा। पीरियड के दौरान हर महिला खिलाड़ी का अनुभव अलग हो सकता है। कुछ खिलाड़ियों को बहुत कम परेशानी होती है, जबकि कुछ को दर्द, थकान या कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी एक अनुभव को सभी खिलाड़ियों पर लागू नहीं किया जा सकता। ज्ञानेश्वरी ने अपनी चुनौती को अपनी कमजोरी बनने देने के बजाय उसे अपनी यात्रा का हिस्सा माना और मंच पर पूरी ताकत के साथ उतरीं। भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग के लिए बड़ा संदेश कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ज्ञानेश्वरी का प्रदर्शन भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका सिल्वर मेडल और 111 किलोग्राम का राष्ट्रीय रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित कर सकता है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को समझते समय उनकी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर खुलकर बात करना जरूरी है। ज्ञानेश्वरी ने अपनी स्थिति छिपाने के बजाय उसके बारे में बात की और यही बात उनके प्रदर्शन को और ज्यादा प्रेरणादायक बनाती है।
त्रिनिदाद, एजेंसियां। वेस्टइंडीज ने पहले टेस्ट मैच में पाकिस्तान को 90 रन से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 211 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पूरी टीम सिर्फ 120 रन पर सिमट गई। इस हार के साथ पाकिस्तान को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 अंकतालिका में बड़ा झटका लगा और टीम सबसे निचले स्थान पर पहुंच गई। जयडेन सील्स ने मचाया कहर वेस्टइंडीज की जीत के सबसे बड़े हीरो तेज गेंदबाज जयडेन सील्स रहे। उन्होंने पाकिस्तान की दूसरी पारी में पांच विकेट लेकर बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। उनके अलावा जस्टिन ग्रीव्स ने भी अहम विकेट लेकर मेजबान टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तान की बल्लेबाजी पूरी तरह फ्लॉप लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान के बल्लेबाज शुरुआत से ही दबाव में नजर आए। बाबर आजम ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें कोई खास समर्थन नहीं मिला। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और पूरी टीम 120 रन पर ढेर हो गई। कप्तान बाबर आजम ने हार के बाद माना कि टीम की बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। सीरीज बचाने की चुनौती इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने दो मैचों की सीरीज में बढ़त बना ली है। अब पाकिस्तान के सामने दूसरा टेस्ट जीतकर सीरीज बराबर करने की चुनौती होगी, जबकि वेस्टइंडीज की नजर अगले मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने 2027 वनडे विश्व कप को लेकर रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य पर चल रही बहस के बीच चयनकर्ताओं को अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा कि रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का मूल्यांकन केवल एक या दो मैचों के आधार पर नहीं किया जा सकता। चोपड़ा का मानना है कि यदि दोनों खिलाड़ी फिट हैं, उपलब्ध हैं और लगातार रन बना रहे हैं, तो उन्हें 2027 विश्व कप की योजना का हिस्सा बनाए रखना चाहिए। 'अनुभव की कोई कीमत नहीं होती' आकाश चोपड़ा ने कहा कि बड़े टूर्नामेंटों में अनुभव सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने विशेष रूप से रोहित शर्मा को भारत की वनडे टीम के लिए 'इररिप्लेसेबल' (अप्रतिस्थापनीय) बताते हुए कहा कि टीम प्रबंधन को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। उनके अनुसार, विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में दबाव झेलने का अनुभव युवा खिलाड़ियों से कहीं अधिक अहम साबित होता है। इंग्लैंड सीरीज के बाद बढ़ी अटकलें इंग्लैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि रोहित ने निर्णायक मुकाबले में शानदार शतक लगाकर आलोचकों को जवाब दिया। दूसरी ओर, BCCI की ओर से अभी तक दोनों खिलाड़ियों के 2027 विश्व कप खेलने या नहीं खेलने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। चयनकर्ताओं के सामने संतुलन की चुनौती पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि चयनकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि रोहित और विराट अपनी फिटनेस और प्रदर्शन का स्तर बनाए रखते हैं, तो दोनों 2027 विश्व कप में भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।