फुटबॉल जगत की नजरें एक बार फिर अर्जेंटीना के महान कप्तान Lionel Messi पर टिकी हैं। मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अपने खिताब की रक्षा करने उतरेगा और इस दौरान मेसी के पास कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा जो उन्हें फुटबॉल इतिहास में और भी ऊंचा स्थान दिला सकते हैं।
2022 में अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने वाले मेसी इस बार सिर्फ ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि कई बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं।
मेसी 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 के बाद 2026 में अपना छठा विश्व कप खेलेंगे।
इसके साथ ही वह Cristiano Ronaldo और Guillermo Ochoa के साथ छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो सकते हैं।
यह उपलब्धि विश्व फुटबॉल में बेहद दुर्लभ मानी जाती है।
मेसी अब तक विश्व कप में 26 मैचों में 13 गोल कर चुके हैं।
विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड Miroslav Klose के नाम है, जिन्होंने 16 गोल किए थे।
अगर मेसी इस टूर्नामेंट में चार या उससे अधिक गोल करते हैं तो वह क्लोजे को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन सकते हैं।
मेसी अब तक चार अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल कर चुके हैं।
यदि वह वर्ल्ड कप 2026 में एक भी गोल करने में सफल रहते हैं तो वह पांच अलग-अलग फीफा विश्व कप में गोल करने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह उपलब्धि केवल क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम दर्ज है।
इसके साथ ही मेसी दक्षिण अमेरिका के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे जो यह कारनामा करेंगे।
मेसी ने विश्व कप में अब तक 8 असिस्ट किए हैं।
इस मामले में वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी Diego Maradona की बराबरी पर हैं।
मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना 2014 और 2022 के विश्व कप फाइनल में पहुंच चुकी है।
अगर अर्जेंटीना 2026 में भी फाइनल में पहुंचती है तो मेसी विश्व फुटबॉल इतिहास के पहले कप्तान बन जाएंगे जो अपनी टीम को तीन बार विश्व कप फाइनल तक ले गए हों।
वहीं यदि अर्जेंटीना खिताब जीतती है तो मेसी बतौर कप्तान दो फीफा विश्व कप जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन सकते हैं।
39 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच चुके मेसी के लिए यह संभवतः आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों की नजरें सिर्फ अर्जेंटीना के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेंगी जिन्हें मेसी इस टूर्नामेंट में अपने नाम कर सकते हैं।
अगर अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहती है और मेसी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी हासिल कर लेते हैं, तो उनका नाम फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में और मजबूती से दर्ज हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड क्रिकेट प्रेमियों के लिए बहुप्रतीक्षित झारखंड टी-20 लीग का आगाज आज यानी 10 जून से रांची स्थित जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होने जा रहा है। लीग के शुरू होने से पहले छोटानागपुर रॉयल्स ने मंगलवार को कांके रोड स्थित मैरियट होटल में आयोजित एक भव्य समारोह में अपनी नई जर्सी और आधिकारिक टीम एंथम लॉन्च किया। इस अवसर पर टीम के पदाधिकारी, कोचिंग स्टाफ, खिलाड़ी, प्रायोजक तथा कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम के दौरान टीम की नई जर्सी का अनावरण किया गया, जिसकी डिजाइन में छोटानागपुर की समृद्ध विरासत, क्षेत्रीय गौरव और जीत के जज्बे को दर्शाया गया है। साथ ही टीम का आधिकारिक एंथम भी जारी किया गया, जो खिलाड़ियों के उत्साह, संघर्ष और सफलता की भावना को अभिव्यक्त करता है। सदस्य संभव जैन ने टूर्नामेंट को लेकर क्या कहा ? प्रेसवार्ता में आयोजन समिति के सदस्य संभव जैन ने बताया कि टूर्नामेंट की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि लीग का मुख्य उद्देश्य झारखंड की स्थानीय क्रिकेट प्रतिभाओं को एक मजबूत मंच प्रदान करना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है। टीम के मुख्य कोच ईशांक जग्गी ने कहा कि खिलाड़ी पूरी तरह तैयार हैं और आगामी मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्साहित हैं। टीम ऑनर शुभम गरोडीया ने बताया टीम ऑनर शुभम गरोडीया ने बताया कि जर्सी का गहरा मैरून रंग क्षेत्र की समृद्ध विरासत, मिट्टी और संघर्षशीलता का प्रतीक है, जबकि सुनहरा रंग उत्कृष्टता और सफलता की आकांक्षा को दर्शाता है। जर्सी में शामिल पहाड़ों से प्रेरित डिजाइन छोटानागपुर पठार को सम्मान देता है और ‘रांची राइजिंग’ संदेश झारखंड में उभरती क्रिकेट संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है। टीम ऑनर्स राहुल अग्रवाल, जयप्रकाश सिंघानिया और आदित्य धानुका ने झारखंड राज्य क्रिकेट एसोसिएशन को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं कप्तान विराट सिंह ने टीम की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि खिलाड़ी मैदान में पूरी ताकत और जुनून के साथ उतरेंगे। टीम प्रबंधन ने कहा कि छोटानागपुर रॉयल्स का उद्देश्य केवल मैच जीतना नहीं, बल्कि झारखंड की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाना भी है। नई जर्सी, नए एंथम और नए जोश के साथ टीम लीग में शानदार प्रदर्शन के लिए पूरी तरह तैयार है।
आईपीएल 2026 का खिताब जीतने के 10 दिन बाद स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने आखिरकार सोशल मीडिया पर अपनी पहली प्रतिक्रिया साझा की है। लगातार दूसरी बार अपनी टीम को चैंपियन बनाने के बाद कोहली सार्वजनिक तौर पर ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे थे, लेकिन अब उनके एक भावुक पोस्ट ने करोड़ों फैंस का दिल जीत लिया है। विराट ने ट्रॉफी के साथ टीम की तस्वीर और एक खास वीडियो साझा करते हुए पूरे सीजन के संघर्ष, भावनाओं और फैंस के समर्थन को कुछ ही लाइनों में समेट दिया। विराट कोहली ने क्या लिखा? अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर विराट कोहली ने लिखा कि टीम ने इस सीजन की शुरुआत अटूट विश्वास के साथ की थी और उसी विश्वास के दम पर लगातार दूसरा खिताब अपने नाम किया। उन्होंने लिखा कि इस टीम ने पूरे सीजन में जीत की खुशी, दबाव, चुनौतियों और फैंस के असीम समर्थन जैसे हर एहसास को एक साथ महसूस किया। कोहली ने खिलाड़ियों और समर्थकों के बीच बने मजबूत रिश्ते को भी खास बताया। 'HOME' लिखकर जताया खास रिश्ता पोस्ट के आखिर में विराट कोहली ने एक ऐसा शब्द लिखा, जिसने फैंस का दिल जीत लिया। उन्होंने लिखा कि यह जीत उनके लिए इसलिए और भी खास है क्योंकि यह जगह उनका "HOME" है। विराट कोहली आईपीएल के पहले सीजन से अब तक सिर्फ एक ही फ्रेंचाइजी के लिए खेलते आए हैं। ऐसे में उनका यह संदेश टीम और फैंस के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। अफवाहों पर भी लगा विराम पिछले कुछ समय में विराट कोहली के टीम बदलने को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आती रही थीं। हालांकि, अपने पोस्ट में "HOME" शब्द का इस्तेमाल कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि इस फ्रेंचाइजी और उसके प्रशंसकों के साथ उनका रिश्ता केवल पेशेवर नहीं, बल्कि भावनात्मक और पारिवारिक है। फैंस को पसंद आया कोहली का अंदाज विराट का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस उनके इस संदेश को टीम के प्रति वफादारी और समर्पण का प्रतीक मान रहे हैं।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान क्रिकेट टीम में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण टेस्ट कप्तान Shan Masood की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Salman Ali Agha को पाकिस्तान की टेस्ट टीम का नया कप्तान बनाया जा सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन Mohsin Naqvi इस बदलाव को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। शान मसूद का कप्तानी रिकॉर्ड बना चिंता का कारण दिसंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद शान मसूद को टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई थी। लेकिन उनके नेतृत्व में पाकिस्तान का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। कप्तान के रूप में 16 टेस्ट मैच 12 मैचों में हार हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ लगातार चौथी टेस्ट हार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पाकिस्तान सबसे निचले स्थानों में रहा सबसे चिंताजनक बात यह रही कि टेस्ट क्रिकेट के प्रमुख देशों में शान मसूद ऐसे कप्तान बन गए जिन्होंने अपने शुरुआती 12 टेस्ट मैचों में जीत का स्वाद नहीं चखा। मोहसिन नकवी बदलाव के मूड में रिपोर्ट्स के मुताबिक, शान मसूद ने नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें मौका देने की अपील की है। हालांकि PCB नेतृत्व टीम के खराब प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। सूत्रों का दावा है कि आगामी चुनौतीपूर्ण विदेशी दौरों को देखते हुए बोर्ड नए नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहता है। पाकिस्तान को जल्द ही वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के कठिन दौरे पर जाना है, जहां टीम को पांच महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबले खेलने हैं। क्यों आगे हैं सलमान आगा? 32 वर्षीय सलमान अली आगा पिछले कुछ समय से पाकिस्तान टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। मार्च 2025 से वह टी20 टीम की कप्तानी भी संभाल रहे हैं। टेस्ट करियर की बात करें तो: 25 टेस्ट मैच 1663 रन 3 शतक 12 अर्धशतक सर्वोच्च स्कोर 132* रन उनकी नेतृत्व क्षमता और लगातार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें टेस्ट टीम की कमान सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है। बल्लेबाजी में भी संघर्ष कर रहे हैं मसूद कप्तानी के अलावा शान मसूद का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी सवालों के घेरे में है। हालिया टेस्ट श्रृंखला में वह चार पारियों में केवल एक अर्धशतक ही लगा सके। ऐसे में टीम में उनकी जगह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। कोचिंग स्टाफ में भी हो सकते हैं बदलाव रिपोर्ट्स के अनुसार: Sarfaraz Ahmed मुख्य कोच बने रह सकते हैं। Umar Gul गेंदबाजी कोच के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकते हैं। बल्लेबाजी कोच के पद पर नया चेहरा लाया जा सकता है। पूर्व कप्तान Mohammad Hafeez को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट निदेशक बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से लगातार नेतृत्व और प्रबंधन में बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में यदि शान मसूद की कप्तानी जाती है, तो यह पाकिस्तान क्रिकेट में एक और बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा।