नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी टेक कंपनी एप्पल ने भारत में जून 2026 तिमाही के दौरान अब तक का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टिम कुक ने बताया कि भारत में इस अवधि के दौरान एप्पल का राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जबकि मैक (Mac) कंप्यूटरों की बिक्री ने भी नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया। कंपनी ने भारत को अपने सबसे तेज़ी से बढ़ते वैश्विक बाजारों में शामिल बताया।
एप्पल के अनुसार, जून तिमाही में भारत में मैक कंप्यूटरों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ती प्रीमियम डिवाइस मांग, कॉर्पोरेट ग्राहकों की खरीद और शिक्षा क्षेत्र में उपयोग बढ़ने से मैक की बिक्री अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप की लागत बढ़ी हुई है।
टिम कुक ने कहा कि भारत एप्पल के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में से एक बन गया है। कंपनी देश में अपने रिटेल नेटवर्क, स्थानीय विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला का लगातार विस्तार कर रही है। भारत में बढ़ती आईफोन और अन्य एप्पल उत्पादों की मांग कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को मजबूती दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्थानीय उत्पादन और आईफोन निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी से एप्पल को बड़ा लाभ मिला है। भारत अब कंपनी के वैश्विक विनिर्माण और निर्यात नेटवर्क का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जिससे आने वाले समय में एप्पल की बाजार हिस्सेदारी और निवेश दोनों के बढ़ने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Vivo अपनी लोकप्रिय S सीरीज़ को भारत में फिर से लॉन्च करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का नया स्मार्टफोन Vivo S2 भारत में 6 अगस्त 2026 को लॉन्च किया जा सकता है। यह सीरीज करीब छह साल बाद भारतीय बाजार में वापसी कर रही है। हालांकि कंपनी ने अभी आधिकारिक लॉन्च तारीख की पुष्टि नहीं की है। Vivo S2 में मिल सकते हैं प्रीमियम फीचर्स लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Vivo S2 में 6.59 इंच OLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, 50MP OIS कैमरा और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। कंपनी इस फोन को मिड-हाई रेंज सेगमेंट में पेश कर सकती है। Dimensity प्रोसेसर और फास्ट चार्जिंग की उम्मीद रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि Vivo S2 में MediaTek Dimensity 7360 प्रोसेसर दिया जा सकता है। इसके अलावा फोन में करीब 7000mAh बैटरी और तेज चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि लॉन्च के समय ही होगी। 6 साल बाद भारत में लौट रही S सीरीज़ Vivo की S सीरीज़ ने इससे पहले भारत में Vivo S1 के साथ पहचान बनाई थी, लेकिन इसके बाद कंपनी ने इस लाइनअप को भारतीय बाजार में आगे नहीं बढ़ाया। अब Vivo S2 के जरिए कंपनी प्रीमियम डिजाइन और कैमरा-केंद्रित स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कीमत और बिक्री को लेकर बढ़ी चर्चा लीक के मुताबिक, Vivo S2 को ₹40,000 से ₹50,000 के आसपास के सेगमेंट में उतारा जा सकता है। फोन की बिक्री स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि कीमत और उपलब्धता की अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हीरो मोटोकॉर्प की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ब्रांड Vida ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर Vida VX2 लाइनअप का विस्तार करते हुए नया VX2 GO FB वेरिएंट लॉन्च किया है। कंपनी ने इस नए मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत 1.13 लाख रुपये रखी है। नए वेरिएंट के साथ अब Vida VX2 सीरीज चार अलग-अलग बैटरी विकल्पों और पांच वेरिएंट में उपलब्ध हो गई है। 3.1kWh फिक्स्ड बैटरी के साथ आया नया मॉडल नए Vida VX2 GO FB में 3.1kWh की फिक्स्ड बैटरी दी गई है। यह वेरिएंट उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो रिमूवेबल बैटरी की बजाय सीधे वॉल सॉकेट से स्कूटर चार्ज करना पसंद करते हैं। कंपनी का कहना है कि बैटरी DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है और 65 मिनट में 0 से 80 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। 128 किमी की रेंज और 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड कंपनी के मुताबिक, नया VX2 GO FB फुल चार्ज पर IDC प्रमाणित 128 किलोमीटर की रेंज देता है। इसमें 6kW की इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई है, जो स्कूटर को 70 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार तक पहुंचाने में सक्षम है। स्मार्ट फीचर्स से लैस है स्कूटर Vida VX2 GO FB में 4.3 इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और 27.2 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा स्कूटर में आधुनिक कनेक्टेड फीचर्स और फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है। अब चार बैटरी विकल्पों में उपलब्ध नए वेरिएंट के लॉन्च के बाद Vida VX2 अब 2.2kWh, 3.1kWh, 3.4kWh और 4.4kWh बैटरी विकल्पों के साथ उपलब्ध है। कंपनी के अनुसार, अलग-अलग वेरिएंट में 93 किमी से लेकर 187 किमी तक की IDC प्रमाणित रेंज मिलती है, जिससे ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं। अगस्त से शुरू होगी बिक्री Vida ने जानकारी दी है कि नया VX2 GO FB वेरिएंट अगस्त 2026 की शुरुआत से देशभर के अधिकृत डीलरशिप पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। नए मॉडल के साथ कंपनी भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की तैयारी में है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में जल्द ही एक दुर्लभ घटना देखने को मिलेगी। स्पेसएक्स (SpaceX) के एक निष्क्रिय (डेड) रॉकेट का अपर स्टेज चंद्रमा के निकट वाले हिस्से से टकराने वाला है। वैज्ञानिक इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे निकलने वाला मलबा और बनने वाला गड्ढा भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है। दूसरी बार इंसानी रॉकेट चंद्रमा से टकराएगा यह दूसरी बार होगा जब किसी मानव निर्मित रॉकेट का हिस्सा चंद्रमा से टकराएगा। इससे पहले वर्ष 2022 में एक चीनी रॉकेट का हिस्सा चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से टकराया था, जिससे दो गड्ढे बने थे। इस बार टक्कर चंद्रमा के पृथ्वी की ओर दिखाई देने वाले हिस्से पर होगी, जिससे वैज्ञानिकों को घटना का बेहतर अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। टक्कर से उठेगा धूल और मलबे का गुबार विशेषज्ञों के अनुसार, टक्कर के दौरान लगभग तीन टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकलेगी। टक्कर से उत्पन्न चमक बेहद कम समय के लिए होगी और संभव है कि नंगी आंखों से दिखाई न दे। हालांकि, चंद्रमा की कम गुरुत्वाकर्षण शक्ति और वहां वातावरण न होने के कारण धूल और मलबा काफी देर तक अंतरिक्ष में फैला रहेगा, जिसे शक्तिशाली दूरबीनों और अंतरिक्ष यानों से देखा जा सकेगा। भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए अहम होगी जानकारी वैज्ञानिकों का मानना है कि इस घटना से यह समझने में मदद मिलेगी कि चंद्रमा पर उड़ने वाली धूल भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों और वहां बनने वाले संभावित स्थायी ठिकानों के लिए कितनी चुनौती बन सकती है। अनुमान है कि टक्कर से करीब 27 मीटर चौड़ा और 5 मीटर गहरा गड्ढा बन सकता है। NASA और दक्षिण कोरिया के ऑर्बिटर रखेंगे नजर इस घटना की निगरानी के लिए NASA का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) और दक्षिण कोरिया का डानूरी (Danuri) ऑर्बिटर सक्रिय रहेंगे। दोनों अंतरिक्ष यान टक्कर से पहले और बाद की तस्वीरें लेकर वैज्ञानिकों को विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएंगे। डानूरी ऑर्बिटर टक्कर से कुछ मिनट पहले रॉकेट के बेहद करीब से भी गुजरेगा। भविष्य में बढ़ सकती है अंतरिक्ष मलबे की चुनौती विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह टक्कर किसी बड़े खतरे का कारण नहीं है, लेकिन आने वाले वर्षों में यदि चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्तियां या वैज्ञानिक बेस स्थापित किए जाते हैं, तो इस तरह का अंतरिक्ष मलबा और अनियंत्रित टक्करें गंभीर चिंता का विषय बन सकती हैं। इसलिए इस घटना से मिलने वाले निष्कर्ष भविष्य के चंद्र मिशनों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।