ओकलैंड, एजेंसियां। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) के खिलाफ अमेरिका में बड़ा कानूनी मुकदमा शुरू हो गया है। 29 अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि मेटा ने बच्चों और किशोरों को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए ऐसे फीचर और सिस्टम विकसित किए, जो उन्हें सोशल मीडिया का आदी बना सकते हैं और उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी समेत 29 राज्यों की ओर से दायर मामले की सुनवाई ओकलैंड की संघीय अदालत में शुरू हुई है। राज्यों का आरोप है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म की संभावित जोखिमों के बारे में जनता को गुमराह किया और बच्चों से जुड़ी निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर भी नियमों का उल्लंघन किया।
मामले में मेटा पर दसियों अरब डॉलर से लेकर करीब 200 अरब डॉलर तक के आर्थिक दंड की मांग की जा सकती है। मेटा ने अदालत में संभावित अधिकतम नुकसान का आंकड़ा करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर बताया है, हालांकि राज्यों के वकीलों ने कहा है कि उनकी मांग इससे काफी कम, लगभग 200 अरब डॉलर के आसपास हो सकती है।
राज्यों की ओर से केवल आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के संचालन में बड़े बदलाव की भी मांग की जा रही है। इसमें बच्चों के लिए उम्र की सख्त पाबंदी, स्क्रीन टाइम सीमित करना और युवाओं को लंबे समय तक स्क्रॉल करते रखने वाले कुछ फीचर में बदलाव शामिल हैं।
मेटा ने सभी आरोपों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि उसने माता-पिता, विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए कई उपाय किए हैं। कंपनी यह भी तर्क दे रही है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल और किशोरों की मानसिक सेहत के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
मामले की सुनवाई करीब छह सप्ताह चलने की उम्मीद है और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग तथा इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी के भी गवाही देने की संभावना है। इस मामले का फैसला सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नियमों पर व्यापक असर डाल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
शंघाई, एजेंसियां। चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री (Unitree) ने अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट ‘सुपरमैन’ पेश किया है, जिसने अपनी असाधारण रफ्तार और छलांग लगाने की क्षमता से दुनियाभर में चर्चा बटोर ली है। कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 12.66 मीटर प्रति सेकंड यानी करीब 45.6 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार तक दौड़ सकता है और एक जगह से 2 मीटर ऊंची छलांग लगा सकता है। इंसानों की स्पीड को दी चुनौती यूनिट्री के अनुसार ‘सुपरमैन’ ने परीक्षण के दौरान 12.66 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार हासिल की। यह आंकड़ा उस गति से अधिक है जिसे आमतौर पर उसैन बोल्ट की 100 मीटर विश्व रिकॉर्ड दौड़ के दौरान दर्ज अधिकतम गति के संदर्भ में बताया जाता है। रोबोट की 2 मीटर की स्टैंडिंग जंप क्षमता भी इसकी खासियतों में शामिल है। सिर्फ तीन महीने में तैयार किया गया प्रोटोटाइप यूनिट्री का कहना है कि इस रोबोट को विकसित करने में तीन महीने से थोड़ा अधिक समय लगा। कंपनी ने इसे मुख्य रूप से रोबोट की शारीरिक क्षमता, संतुलन और तेज गति से चलने की तकनीक को प्रदर्शित करने के लिए तैयार किया है। हालांकि, इसके वास्तविक व्यावसायिक इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर तैनाती की क्षमता को अभी साबित किया जाना बाकी है। शंघाई शेयर बाजार में यूनिट्री की धमाकेदार एंट्री ‘सुपरमैन’ रोबोट की घोषणा ऐसे समय हुई है जब यूनिट्री ने शंघाई के STAR Market में शेयर बाजार में प्रवेश किया है। कंपनी ने आईपीओ के जरिए करीब 6.1 अरब युआन यानी लगभग 905 मिलियन डॉलर जुटाए। लिस्टिंग के पहले दिन कंपनी के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जिससे चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट उद्योग को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी भी सामने आई। ह्यूमनॉइड रोबोट की दौड़ में चीन का दबदबा यूनिट्री की सफलता चीन के तेजी से बढ़ते ह्यूमनॉइड रोबोट उद्योग को भी दर्शाती है। बीजिंग में चल रहे वर्ल्ड रोबोट कॉन्फ्रेंस में सैकड़ों कंपनियां अपने नए रोबोट और तकनीक प्रदर्शित कर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल तेज दौड़ने या कलाबाजी दिखाने के बजाय रोबोट कंपनियों के लिए वास्तविक काम, उत्पादकता और व्यावसायिक उपयोगिता साबित करना बड़ी चुनौती होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक्नो ने आज भारत में अपने नए स्मार्टफोन Tecno Pova 8 Pro 5G को लॉन्च कर दिया है। फोन को कंपनी ने खास तौर पर आकर्षक ट्रांसपेरेंट-स्टाइल डिजाइन, Alive Matrix Display और गेमिंग-केंद्रित फीचर्स के साथ पेश किया है। लॉन्च से पहले ही इन फीचर्स को लेकर स्मार्टफोन यूजर्स के बीच काफी उत्सुकता देखने को मिल रही थी। ट्रांसपेरेंट डिजाइन बना सबसे बड़ा आकर्षण Tecno Pova 8 Pro 5G का सबसे खास फीचर इसका रियर डिजाइन है। फोन के पीछे कंपनी ने Alive Matrix Display दिया है, जो मिनी-LED लाइटिंग सिस्टम के जरिए अलग-अलग पैटर्न और विजुअल इफेक्ट दिखाता है। यह सिस्टम नोटिफिकेशन, कॉल और अन्य गतिविधियों के दौरान यूजर को विजुअल संकेत देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने फोन के डिजाइन को युवाओं और गेमिंग यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है। रियर पैनल पर मौजूद लाइटिंग सिस्टम फोन को सामान्य स्मार्टफोन से अलग लुक देता है। 144Hz AMOLED डिस्प्ले और गेमिंग पर फोकस फोन में 6.78 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। हाई रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग, एनिमेशन और गेमिंग के दौरान स्क्रीन का अनुभव ज्यादा स्मूथ रहने की उम्मीद है। परफॉर्मेंस के लिए स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 7400 Ultimate 5G प्रोसेसर दिया गया है। इसके साथ कंपनी ने गेमिंग परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए अलग गेमिंग चिप भी दी है। इससे हाई-ग्राफिक्स वाले गेम खेलने वाले यूजर्स को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है। 6500mAh बैटरी और 50MP कैमरा Tecno Pova 8 Pro 5G में 6,500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। फोन में 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। बड़ी बैटरी के चलते सामान्य इस्तेमाल के साथ गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग करने वाले यूजर्स को भी लंबे बैकअप की उम्मीद होगी। फोटोग्राफी के लिए फोन में 50MP का मुख्य कैमरा दिया गया है। इसके साथ अल्ट्रा-वाइड कैमरा और फ्रंट कैमरा भी मिलता है। कंपनी ने कैमरा सिस्टम में कई AI आधारित फीचर्स भी शामिल किए हैं। Android 16 और स्टोरेज विकल्प Tecno Pova 8 Pro 5G Android 16 आधारित HiOS 16 पर काम करता है। फोन को अलग-अलग RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में पेश किया गया है, जिससे यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से मॉडल चुन सकेंगे। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को मुख्य रूप से ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है, जो आकर्षक डिजाइन के साथ अच्छी डिस्प्ले, बड़ी बैटरी और गेमिंग परफॉर्मेंस चाहते हैं। Alive Matrix Display इसे इस सेगमेंट के दूसरे स्मार्टफोन्स से अलग पहचान देने वाला फीचर बन सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Motorola ने भारतीय बाजार में अपना नया टैबलेट Moto Pad 70 लॉन्च कर दिया है। यह टैबलेट 12.1 इंच के 2.5K डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर और 10,200mAh की बड़ी बैटरी के साथ आता है। कंपनी ने इसे 5G कनेक्टिविटी वाले मिड-रेंज टैबलेट के तौर पर पेश किया है। 12.1 इंच 2.5K डिस्प्ले Moto Pad 70 में 12.1 इंच का 2.5K IPS LCD डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 2560×1600 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 90Hz है। डिस्प्ले 96 प्रतिशत DCI-P3 कलर गैमट और 800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है। Dimensity 6400 प्रोसेसर और 5G टैबलेट में MediaTek Dimensity 6400 चिपसेट दिया गया है। इसमें 8GB RAM के साथ 128GB और 256GB स्टोरेज विकल्प मिलते हैं। टैबलेट में 5G कनेक्टिविटी भी दी गई है। 10,200mAh बैटरी और 68W चार्जिंग Moto Pad 70 में 10,200mAh की बैटरी दी गई है, जो 68W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। मनोरंजन के लिए इसमें चार स्पीकर और Dolby Atmos सपोर्ट दिया गया है। बॉक्स में Moto Pen स्टायलस भी मिलता है, जिससे नोट्स बनाने और लिखने जैसे काम आसान होते हैं। कीमत और बिक्री भारत में Moto Pad 70 के 8GB+128GB मॉडल की कीमत ₹33,999 और 8GB+256GB मॉडल की कीमत ₹36,999 रखी गई है। इसकी बिक्री Flipkart और Motorola की वेबसाइट के माध्यम से 15 अगस्त से शुरू हो चुकी है। टैबलेट Pantone Sea Angel रंग में उपलब्ध है।