नई दिल्ली, एजेंसियां। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के वित्तीय प्रदर्शन में जून तिमाही के दौरान सुधार देखने को मिला है। कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा घटकर ₹3,754 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹6,608 करोड़ का घाटा हुआ था। कंपनी ने 10 अगस्त को बाजार बंद होने के बाद अपने पहली तिमाही के नतीजे जारी किए।
वोडाफोन आइडिया का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर करीब 6 फीसदी बढ़कर ₹11,689 करोड़ हो गया। कंपनी के EBITDA में भी सुधार हुआ और यह करीब ₹5,034 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 9.1 फीसदी अधिक है। EBITDA मार्जिन बढ़कर 43.1 फीसदी हो गया।
कंपनी के प्रदर्शन में सुधार को दूरसंचार सेवाओं से होने वाली आय में बढ़ोतरी और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।
वोडाफोन आइडिया के लिए एक और सकारात्मक संकेत प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में बढ़ोतरी है। जून तिमाही में ARPU करीब 10.2 फीसदी बढ़कर ₹195 हो गया। ARPU में लगातार सुधार कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रति ग्राहक मिलने वाला औसत राजस्व बढ़ता है और भविष्य में कंपनी की आय को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
वोडाफोन आइडिया के लिए सबसे अहम संकेतों में से एक ग्राहक आधार से जुड़ा रहा। कंपनी ने 2018 के बाद पहली बार तिमाही आधार पर ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की है।
यह बदलाव कंपनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से ग्राहक आधार में गिरावट वोडाफोन आइडिया की प्रमुख चुनौतियों में शामिल रही है। ग्राहक संख्या में सुधार और ARPU में वृद्धि कंपनी की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
घाटा कम होने और परिचालन प्रदर्शन सुधरने के बावजूद वोडाफोन आइडिया के सामने वित्तीय और प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं। कंपनी के आगे के प्रदर्शन में 5G नेटवर्क विस्तार, पूंजीगत खर्च, ग्राहक आधार और राजस्व वृद्धि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कंपनी के ताजा नतीजों के बाद शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रबंधन की आगे की रणनीति और आने वाले वर्षों के पूंजीगत खर्च कार्यक्रम पर बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्पैम और फर्जी कॉल पर लगाम लगाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों और सेवा प्रदाता संस्थानों के लिए नया निर्देश जारी किया है। अब बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी सेवाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों की सर्विस और ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल के लिए 1601 नंबर सीरीज का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए जरूरी सेवा कॉल को पहचानना आसान बनाना और धोखाधड़ी वाली कॉल पर अंकुश लगाना है। 1601 नंबर सीरीज का होगा इस्तेमाल TRAI के नए निर्देश के तहत यूटिलिटी, कूरियर, लॉजिस्टिक्स और इसी तरह के क्षेत्रों से आने वाली सेवा एवं ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल को 1601 सीरीज के नंबरों से किया जाएगा। इससे ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि कॉल किसी पंजीकृत सेवा प्रदाता या कारोबारी संस्था की ओर से की जा रही है। वर्तमान में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी संस्थाओं से जुड़ी सेवा कॉल के लिए 1600 सीरीज का इस्तेमाल किया जाता है। नई 1601 सीरीज इन दोनों तरह की सेवाओं के बीच स्पष्ट अंतर बनाएगी। फर्जी और स्पैम कॉल पर लगेगी लगाम TRAI का यह कदम लगातार बढ़ रही स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल की समस्या से निपटने की कोशिश का हिस्सा है। टेलीकॉम कंपनियों ने अप्रैल से जून के बीच 24.4 अरब कॉल और संदेशों को संदिग्ध स्पैम के तौर पर चिह्नित किया। इसी अवधि में TRAI ने स्पैम से जुड़े 1.8 लाख से ज्यादा टेलीकॉम संसाधनों पर कार्रवाई की। 1601 सीरीज से ग्राहकों को वास्तविक सेवा कॉल और अनजान नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल के बीच अंतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। किन कंपनियों पर पड़ेगा असर नई व्यवस्था का असर खास तौर पर यूटिलिटी, कूरियर, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं से जुड़ी कंपनियों पर पड़ेगा। इन क्षेत्रों की कंपनियों को ग्राहकों से संबंधित सर्विस और ट्रांजैक्शन कॉल के लिए निर्धारित नंबर सीरीज का इस्तेमाल करना होगा। इस व्यवस्था से महत्वपूर्ण कॉल की पहचान आसान होने के साथ-साथ ग्राहकों के बीच भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। वहीं आम लोगों को भी किसी कॉल पर अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। ग्राहकों को क्या फायदा होगा TRAI का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग नंबर सीरीज होने से टेलीकॉम संचार ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकता है। ग्राहक 1601 सीरीज से आने वाली कॉल को सामान्य निजी मोबाइल नंबरों से अलग पहचान सकेंगे। हालांकि, सिर्फ 1601 नंबर देखकर किसी कॉल को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा। किसी भी कॉल पर OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है। TRAI की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पहचान को आसान बनाना है, न कि हर कॉल को स्वतः सुरक्षित घोषित करना।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Flipkart Freedom Sale में Apple के प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 17 Pro पर बड़ा डिस्काउंट मिल रहा है। 256GB मॉडल की लिस्टेड कीमत ₹1,26,900 है, जबकि एक्सचेंज और बैंक ऑफर का लाभ लेने पर इसकी प्रभावी कीमत ₹83,900 तक पहुंच सकती है। ₹83,900 की कीमत कैसे मिलेगी? iPhone 17 Pro 256GB की कीमत पहले ₹1,34,900 थी, जिसे Flipkart Freedom Sale में घटाकर ₹1,26,900 किया गया है। इसके बाद पात्र ग्राहकों को पुराने iPhone के एक्सचेंज और बैंक डिस्काउंट का लाभ मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 15 एक्सचेंज करने पर ₹35,000 तक का एक्सचेंज मूल्य और पात्र Flipkart Axis Bank क्रेडिट कार्ड पर ₹8,000 तक का इंस्टेंट डिस्काउंट मिल सकता है। इन सभी लाभों को जोड़ने पर प्रभावी कीमत ₹83,900 तक पहुंचती है। हर ग्राहक को नहीं मिलेगा ₹83,900 का ऑफर यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹83,900 कोई सामान्य सेल कीमत नहीं है। इतनी कम प्रभावी कीमत पाने के लिए ग्राहक को पात्र एक्सचेंज डिवाइस, बैंक कार्ड और संबंधित ऑफर की शर्तें पूरी करनी होंगी। एक्सचेंज की वास्तविक कीमत पुराने फोन की स्थिति, मॉडल, लोकेशन और Flipkart की पात्रता जांच पर निर्भर करेगी। इसलिए भुगतान से पहले अंतिम कीमत जरूर जांचनी चाहिए। iPhone 17 Pro के दूसरे वेरिएंट की कीमत Flipkart पर रिपोर्ट के अनुसार iPhone 17 Pro के 512GB वेरिएंट की कीमत ₹1,46,900 और 1TB मॉडल की कीमत ₹1,66,900 बताई गई है। 256GB मॉडल इस ऑफर में सबसे ज्यादा चर्चा में है। कुल मिलाकर, ₹83,900 का आंकड़ा केवल अधिकतम एक्सचेंज और बैंक लाभ लेने वाले पात्र ग्राहकों के लिए प्रभावी कीमत है, न कि iPhone 17 Pro की वास्तविक सेल कीमत।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने ब्रॉडबैंड ग्राहकों के लिए नया फाइबर प्लान पेश किया है। इस प्लान में ग्राहकों को 200 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड, 5,000 GB डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और 27 OTT प्लेटफॉर्म का मुफ्त सब्सक्रिप्शन दिया जा रहा है। कंपनी ने इस ऑफर के साथ ग्राहकों को शुरुआती छह महीनों के लिए अतिरिक्त छूट भी देने की घोषणा की है। 200 Mbps स्पीड के साथ 5,000 GB डेटा BSNL के नए प्लान में यूजर्स को 200 Mbps तक की डाउनलोड स्पीड मिलती है। प्लान के तहत 5,000 GB डेटा उपलब्ध है। डेटा सीमा पूरी होने के बाद इंटरनेट की स्पीड कम होकर निर्धारित स्तर पर आ सकती है। इसके साथ ग्राहकों को अनलिमिटेड लोकल और STD वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। यानी एक ही कनेक्शन में तेज इंटरनेट और कॉलिंग दोनों का लाभ लिया जा सकता है। 27 OTT प्लेटफॉर्म का मुफ्त सब्सक्रिप्शन इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका OTT बंडल है। ग्राहकों को 27 लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन बिना अलग से भुगतान किए दिया जा रहा है। इससे फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी कार्यक्रमों और अन्य मनोरंजन सामग्री के लिए अलग-अलग OTT सेवाओं की सदस्यता लेने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध OTT प्लेटफॉर्म और उनकी शर्तें क्षेत्र या ऑफर के अनुसार बदल सकती हैं। छह महीने तक ₹88 की अतिरिक्त छूट BSNL इस प्लान के साथ पहले छह महीनों तक हर महीने ₹88 की अतिरिक्त छूट भी दे रहा है। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार ग्राहकों को ONT डिवाइस मुफ्त दिया जा रहा है। BSNL के इस नए ऑफर का उद्देश्य ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करना है, जो एक ही ब्रॉडबैंड कनेक्शन में तेज इंटरनेट के साथ OTT मनोरंजन और अनलिमिटेड कॉलिंग चाहते हैं। ध्यान दें: प्लान की कीमत, OTT सूची और ऑफर की उपलब्धता सर्किल के अनुसार अलग हो सकती है। कनेक्शन लेने से पहले अपने क्षेत्र में BSNL की मौजूदा योजना और शर्तों की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।