डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत में प्रगति का हवाला देते हुए ‘Project Freedom’ को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए अमेरिका की रणनीति में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
बातचीत में प्रगति, ऑपरेशन पर ब्रेक
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “अच्छी प्रोग्रेस” देखने को मिल रही है, जिसके चलते इस सैन्य परियोजना को फिलहाल रोक दिया गया है। ‘Project Freedom’ का उद्देश्य समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करना और रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना था, लेकिन संभावित समझौते को ध्यान में रखते हुए इसे अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और सहमति का संकेत
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बताया कि यह फैसला पाकिस्तान समेत कई देशों के सुझाव के बाद लिया गया है। उन्होंने इसे “बड़ी सैन्य सफलता” के बाद उठाया गया संतुलित कदम बताया, जिससे कूटनीतिक रास्ता खुल सके।
‘हालात पहले से बेहतर’
अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अब हालात पहले से बेहतर हो गए हैं और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है और यह सही समय है जब कूटनीति को मौका दिया जाए।
नाकेबंदी जारी, दबाव कायम
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘Project Freedom’ को भले ही रोका गया हो, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी और दबाव पूरी तरह जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह रणनीति इसलिए जरूरी है ताकि ईरान समझौते के लिए गंभीर बना रहे और बातचीत का परिणाम सकारात्मक दिशा में जाए।
क्यों लगाई गई अस्थायी रोक?
ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि यह परखा जा सके कि कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं। अब यह देखा जाएगा कि क्या बातचीत सफल होकर अंतिम समझौते तक पहुंचती है या नहीं।
कूटनीति बनाम सैन्य दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय “डुअल स्ट्रेटेजी” अपना रहा है–एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना और दूसरी ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालना। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति ईरान के साथ समझौते तक पहुंचती है या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक हैरान करने वाला दावा चर्चा में है–क्या ईरान डॉल्फ़िन को विस्फोटक पहनाकर अमेरिकी जहाजों पर हमला करने की योजना बना रहा है? इन अटकलों पर अब पीट हेगसेथ ने प्रतिक्रिया दी है। रक्षा मंत्री का जवाब अमेरिकी रक्षा विभाग की एक ब्रीफिंग में जब पत्रकार ने “आत्मघाती डॉल्फ़िन” से जुड़े दावों पर सवाल किया, तो पीट हेगसेथ ने कहा, “मैं यह पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता कि हमारे पास ऐसी कोई क्षमता है या नहीं, लेकिन मैं यह जरूर कह सकता हूं कि ईरान के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।” उनके इस बयान ने इन दावों को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है। दावों की शुरुआत कैसे हुई? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मीडिया संस्थानों में यह चर्चा शुरू हुई कि ईरान ऐसे “असामान्य हथियारों” पर काम कर सकता है, जिनमें पनडुब्बियों के साथ-साथ विस्फोटक ले जाने वाली डॉल्फ़िनें भी शामिल हैं। इसके बाद CNN और Fox News जैसे प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। ईरान ने उड़ाया मजाक इन दावों पर ईरानी पक्ष की प्रतिक्रिया अलग रही। ईरान के कुछ सरकारी और विदेश कार्यालयों ने इन खबरों का मजाक उड़ाया। हैदराबाद स्थित एक ईरानी दफ्तर ने सोशल मीडिया पर एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की, जिसमें एक डॉल्फ़िन के साथ “विस्फोटक” दिखाया गया था। पोस्ट में तंज करते हुए लिखा गया कि “राज़ सामने आ गया।” सच्चाई क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि ईरान डॉल्फ़िन को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। हालांकि यह सच है कि अमेरिकी नौसेना जैसे कुछ देशों ने समुद्री जानवरों–जैसे डॉल्फ़िन और सी-लायन–को पानी के भीतर माइन खोजने और संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने के लिए ट्रेनिंग दी है। अफवाह या रणनीतिक मनोवैज्ञानिक युद्ध? विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की खबरें अक्सर “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” का हिस्सा भी हो सकती हैं, जिनका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना या माहौल बनाना होता है। “डॉल्फ़िन बम” जैसी बातें ज्यादा अटकलें और अफवाह ही नजर आती हैं। न तो ईरान ने इसकी पुष्टि की है और न ही कोई ठोस प्रमाण सामने आया है। हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस तरह के दावे यह जरूर दिखाते हैं कि सूचना युद्ध भी आधुनिक संघर्ष का अहम हिस्सा बन चुका है।
मिडिल ईस्ट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद अचानक रडार से गायब हो गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 7700 कोड भेजते ही गायब हुआ विमान फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर विमान ने कतर के पास उड़ान के दौरान “7700” स्क्वॉक कोड ट्रांसमिट किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी सिग्नल होता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब विमान किसी गंभीर संकट का सामना कर रहा हो। इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया। आखिरी लोकेशन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर सिग्नल खो दिया। माना जा रहा है कि यह उस समय एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था और किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था। एक घंटे बाद पूरी तरह बंद हुआ सिग्नल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी कोड भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि केवल सिग्नल खोना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ा रहा है। क्या हो सकती हैं वजहें? विशेषज्ञों के अनुसार 7700 कोड कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे: तकनीकी खराबी इंजन या सिस्टम फेल होना आग लगना मेडिकल इमरजेंसी बाहरी खतरा या हमले की आशंका फिलहाल किसी भी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नहीं मिला कोई मलबा या SOS संकेत अब तक न तो किसी मलबे का पता चला है, न ही कोई डिस्टेस कॉल (SOS) या रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि हुई है। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स की संख्या भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि KC-135 आमतौर पर सीमित क्रू के साथ उड़ान भरता है। क्यों अहम है यह घटना? होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में इस अमेरिकी टैंकर विमान का अचानक गायब होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तनाव के बीच बढ़ी चिंता ईरान-अमेरिका तनाव के बीच इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं–क्या यह तकनीकी खराबी थी या किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत? फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर टिकी हैं।
अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर खतरनाक संक्रमण का मामला सामने आया है। Hantavirus के संदिग्ध प्रकोप के चलते अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य यात्री बीमार बताए जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जहाज को अफ्रीकी तट पर रोक दिया गया है और यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं दी गई है। कहां रोका गया जहाज? नीदरलैंड के झंडे वाला क्रूज शिप MV Hondius फिलहाल Praia (Cape Verde) में रोका गया है। जहाज में कुल: 170 यात्री 71 क्रू सदस्य मौजूद हैं। क्या है मौजूदा स्थिति? World Health Organization और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार: 6 लोगों में संक्रमण जैसे लक्षण मिले 1 केस की लैब में पुष्टि 3 लोगों की मौत 1 मरीज ICU में भर्ती संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए जहाज को क्वारंटीन कर दिया गया है। 7 हफ्तों का लंबा सफर, कई देशों से गुजरा यह क्रूज 20 मार्च को Ushuaia (Argentina) से रवाना हुआ था। इसके बाद: अंटार्कटिक क्षेत्र के पास से गुजरा अटलांटिक पार किया यूरोप (Canary Islands) पहुंचना था यानी यह जहाज कई भौगोलिक क्षेत्रों से गुजर चुका है, जिससे संक्रमण का स्रोत ढूंढना मुश्किल हो गया है। कैसे फैलता है हंतावायरस? Centers for Disease Control and Prevention के मुताबिक, हंतावायरस: चूहों, गिलहरियों जैसे कृन्तकों से फैलता है उनके मल, मूत्र या लार के संपर्क से संक्रमण होता है संक्रमण के मुख्य तरीके: संक्रमित चूहे के काटने से दूषित सतह छूने के बाद मुंह/नाक छूने से संक्रमित खाद्य पदार्थ खाने से कितना खतरनाक है यह वायरस? हंतावायरस से होने वाली बीमारी को पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है, जिसमें: सांस लेने में गंभीर दिक्कत फेफड़ों में संक्रमण तेजी से हालत बिगड़ना देखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार: मृत्यु दर 38% तक हो सकती है कुछ स्ट्रेन में 50% से ज्यादा भी हालांकि यह वायरस हवा से नहीं फैलता, फिर भी इसकी गंभीरता अधिक मानी जाती है। जांच जारी, स्रोत अब भी रहस्य सबसे बड़ा सवाल यह है कि संक्रमण आया कहां से। अर्जेंटीना में कोई हालिया केस नहीं जहाज ऐसे क्षेत्रों में भी नहीं गया जहां यह आम हो ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि संक्रमण जहाज के अंदर ही फैला हो सकता है। क्या है आगे का खतरा? जहाज पर मौजूद सभी यात्रियों की निगरानी जारी संभावित संक्रमितों को अलग किया जा रहा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट पर