नई दिल्ली, एजेंसियां। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में आज एक बड़ा मुकाबला होने जा रहा है, जहां Sunrisers Hyderabad (SRH) का सामना Punjab Kings (PBKS) से होगा। यह मैच हैदराबाद के Rajiv Gandhi International Stadium में शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। दोनों टीमें इस समय शानदार फॉर्म में हैं और अंक तालिका के टॉप-3 में शामिल हैं।
पंजाब किंग्स 9 मैचों में 6 जीत और 13 अंकों के साथ पहले स्थान पर है। वहीं सनराइजर्स हैदराबाद 10 मैचों में 6 जीत के साथ 12 अंकों पर तीसरे स्थान पर मौजूद है। अगर SRH आज जीत दर्ज करती है, तो वह सीधे नंबर-1 पर पहुंच सकती है, जिससे मुकाबले की अहमियत और बढ़ गई है।
हैदराबाद ने सीजन की शुरुआत धीमी की थी, लेकिन बाद में लगातार पांच जीत दर्ज कर दमदार वापसी की। हालांकि पिछले मैच में उन्हें Kolkata Knight Riders के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। दूसरी ओर पंजाब ने शुरुआत में जबरदस्त प्रदर्शन किया, लेकिन हाल के दो मैचों में हार के कारण उनकी लय थोड़ी डगमगाई है।
इस सीजन दोनों टीमें पहले भी भिड़ चुकी हैं, जहां पंजाब ने 220 रनों का बड़ा लक्ष्य आसानी से हासिल कर हैदराबाद को हराया था। ऐसे में आज SRH के पास उस हार का बदला लेने का सुनहरा मौका है।
दोनों टीमों के बीच अब तक 25 मुकाबले हुए हैं, जिनमें हैदराबाद ने 17 बार जीत दर्ज की है, जबकि पंजाब को केवल 8 जीत मिली हैं। खास बात यह है कि हैदराबाद के घरेलू मैदान पर SRH का रिकॉर्ड और भी मजबूत है, जहां वह 9-1 से आगे है।
इस मुकाबले में रन बरसने की पूरी उम्मीद है और दोनों टीमें जीत के लिए पूरा जोर लगाएंगी, जिससे दर्शकों को एक रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
आईपीएल 2026 में Chennai Super Kings के लिए शुरुआत भले ही उतार-चढ़ाव भरी रही हो, लेकिन Sanju Samson ने अब अपने प्रदर्शन से आलोचकों को जवाब दे दिया है। शुरुआती तीन मैचों में सिंगल डिजिट स्कोर पर आउट होने के बाद सैमसन ने जबरदस्त वापसी की है और अब टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनकर उभरे हैं। खराब शुरुआत से दमदार वापसी सीजन के पहले तीन मैचों में सैमसन का बल्ला खामोश रहा, जिससे टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल उठने लगे थे–खासतौर पर तब, जब उन्हें Ravindra Jadeja और Sam Curran जैसे खिलाड़ियों के बदले टीम में शामिल किया गया था। लेकिन इसके बाद सैमसन ने शानदार वापसी करते हुए 7 पारियों में तीन 50+ स्कोर जड़े, जिसमें दिल्ली के खिलाफ 52 गेंदों पर नाबाद 87 रन की मैच जिताऊ पारी भी शामिल है। फिंच ने की तारीफ पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान Aaron Finch सैमसन के प्रदर्शन से खासे प्रभावित हैं। उनका कहना है कि किसी नए फ्रेंचाइजी में जाने के बाद खिलाड़ी पर भारी दबाव होता है, खासकर जब वह एक बड़ा ट्रेड हो। फिंच के मुताबिक, “दो-तीन मैचों से किसी खिलाड़ी को जज करना सही नहीं है। सैमसन जिस तरह अब बल्लेबाजी कर रहे हैं, वह अलग स्तर का प्रदर्शन है।” आंकड़ों में दम सैमसन इस सीजन में अब तक 10 पारियों में 402 रन बना चुके हैं। औसत: 57.42 स्ट्राइक रेट: 167.50 उनकी यह निरंतरता Indian Premier League के इस सीजन में CSK की बल्लेबाजी की रीढ़ बन गई है। ‘अब दिख रहा असली सैमसन’ पूर्व भारतीय विकेटकीपर Deep Dasgupta ने भी सैमसन की तारीफ करते हुए कहा कि यह वही वर्जन है, जिसका इंतजार फैंस कई सालों से कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले सैमसन कुछ शानदार पारियां खेलते थे, लेकिन निरंतरता की कमी रहती थी–अब वह कमी दूर होती दिख रही है। टीम के लिए कितनी अहम यह फॉर्म? दिल्ली के खिलाफ जीत के बाद चेन्नई की टीम अभी भी पॉइंट्स टेबल में छठे स्थान पर है, लेकिन दूसरे से पांचवें स्थान तक की टीमों से सिर्फ दो अंक पीछे है। ऐसे में सैमसन की फॉर्म टीम के प्लेऑफ सफर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL के मौजूदा सीजन में लगातार दूसरी जीत दर्ज की। टीम ने मंगलवार को खेले गए मैच में दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हराया। अरुण जेटली मैदान पर दिल्ली ने टॉस जीतकर बैटिंग करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 155 रन बनाए। चेन्नई ने 156 रन का टारगेट 17.3 ओवर में 2 विकेट पर हासिल कर लिया। चेन्नई के 10 प्वाइंट्स इस जीत के बाद चेन्नई के 10 मैचों में 10 पॉइट्स हो गए हैं। वहीं, दिल्ली की यह 10 मैचों में छठी हार है। चेन्नई के लिए संजू सैमसन ने 52 गेंद पर नाबाद 87 रनों की पारी खेली। संजू ने इस सीजन में दूसरी फिफ्टी लगाई है। संजू की इस पारी में 7 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। सैमसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। संजू-कार्तिक के बीच नाबाद 114 रन की साझेदारी संजू के अलावा कार्तिक शर्मा ने नाबाद 41 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए नाबाद 114 रन की पार्टनरशिप हुई। दिल्ली के लिए लुंगी एनगिडी और अक्षर पटेल को 1-1 विकेट मिला। दिल्ली की ओर से एक भी फिफ्टी नही दिल्ली के लिए समीर रिजवी ने नाबाद 40 रन की पारी खेली। उनके अलावा, ट्रिस्टन स्टब्स 38, पथुम निसांका 19, नीतीश राणा 15, आशुतोष शर्मा 14, करुण नायर 13 और केएल राहुल 12 रन बनाए। रिजवी और स्टब्स के बीच छठे विकेट के लिए 65 रन की साझेदारी हुई। चेन्नई की ओर से नूर अहमद ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए।
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक नया नाम तेजी से चर्चा में आ रहा है–Suryansh Shedge। 23 वर्षीय इस युवा बल्लेबाज ने हाल ही में Punjab Kings के लिए शानदार पारी खेलकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। Ambati Rayudu का मानना है कि शेडगे की सबसे बड़ी ताकत उनकी सिक्स मारने की क्षमता है, जो उन्हें टी20 क्रिकेट में खास बनाती है। मुश्किल हालात में दमदार पारी Suryansh Shedge ने Gujarat Titans के खिलाफ 29 गेंदों में 57 रन की तेजतर्रार पारी खेली। जब वह बल्लेबाजी करने आए, तब टीम 36/4 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी। इसके बाद उन्होंने Marcus Stoinis के साथ मिलकर 44 गेंदों में 79 रन की साझेदारी की, जिससे टीम संभल सकी। अपनी पारी में उन्होंने 3 चौके और 5 छक्के लगाए। रायुडू का बड़ा बयान रायुडू ने शेडगे की तारीफ करते हुए कहा, “अगर कोई भारतीय खिलाड़ी IPL में आते ही बड़े शॉट्स आसानी से लगा सकता है, तो समझिए आधी लड़ाई वह पहले ही जीत चुका है। इसके बाद सिर्फ गेम अवेयरनेस की जरूरत होती है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि शेडगे ने घरेलू क्रिकेट में भी फाइनल मैच जिताने वाली पारी खेली थी, जिससे उनकी मैच विनिंग क्षमता साबित होती है। ‘इंतजार नहीं, तैयारी कर रहा था’ दिलचस्प बात यह है कि शेडगे को इस सीजन में तुरंत मौका नहीं मिला। लेकिन उन्होंने इसे इंतजार नहीं, बल्कि तैयारी का समय बताया। उन्होंने कहा, “मैं इंतजार नहीं कर रहा था, मैं खुद को तैयार कर रहा था। जब भी मौका मिले, मुझे तैयार रहना है–यही मैंने सीखा है।” उन्होंने यह भी बताया कि टीम के कोच Ricky Ponting और कप्तान Shreyas Iyer से लगातार बातचीत ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया। एक गलती जो भारी पड़ी हालांकि शानदार शुरुआत के बावजूद शेडगे अपनी पारी को अंत तक नहीं ले जा सके। Kagiso Rabada की गेंद पर वह आउट हो गए, जिसे लेकर उन्होंने खुद माना कि वह शॉट खेलने की बजाय छोड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर वह टिके रहते तो टीम 20-25 रन और जोड़ सकती थी। सीख और आगे की राह इस मैच में Punjab Kings ने 163 रन बनाए, जो अंततः थोड़ा कम साबित हुआ। हालांकि टीम ने मुकाबले को आखिरी ओवर तक खींचा। शेडगे का मानना है कि हर चुनौती उन्हें बेहतर बनाती है और आगे भी वह हर स्थिति के लिए खुद को तैयार रखते हैं।