पेरिस, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार देर रात करीब 2 बजे (भारतीय समय अनुसार) पेरिस पहुंचे। यहां होटल के बाहर भारतीय मूल के लोगों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। मोदी ने लोगों से हाथ मिलाया और बच्चों को दुलारा भी।
पीएम गुरुवार शाम Vivatech 2026 कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहेंगे। एक दिन पहले मोदी फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित 52वें G7 समिट में शामिल हुए। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से 18 मिनट द्विपक्षीय बातचीत हुई।
ट्रम्प ने वादा किया है कि मोदी के रहते कभी भारत पर हमला होता है तो अमेरिका मदद के लिए साथ खड़ा होगा। मोदी के अलावा कोई और नेता भारत में होगा तो मुझे सोचना पड़ेगा।
Vivatech यूरोप का बड़ा तकनीकी सम्मेलन है, जहां दुनियाभर की नई इंडस्ट्रीज, टेक्निक कंपनियां, इंवेस्टर और एक्सपर्ट नई टेक्निक और इनोवेशन का डिस्प्ले करते हैं।
मुख्य तौर पर आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप और उद्यमिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, भविष्य की उभरती तकनीकों पर उन पर चर्चा करते हैं।
यहां भारत का राष्ट्रीय मंडप (इंडिया पैवेलियन) भी स्थापित किया गया है, जहां देश के स्टार्टअप, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
दरअसल, पीएम मोदी की 6 दिन फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा का आज अंतिम दिन है। मोदी 13-14 जून तक फ्रांस के नीस शहर में थे। इसके बाद 14 से 16 तक स्लोवाकिया में रहे। वहां से लौटकर एवियन में G7 समिट में शामिल हुए।
17 जून को फ्रांस के एवियन शहर में 52वें G7 समिट का दूसरा दिन रहा। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की द्विपक्षीय चर्चा हुई। इसमें ट्रम्प ने कहा- जब तक मैं प्रेसिडेंट हूं, व्हाइट हाउस में मोदी का हमेशा अच्छा दोस्त मौजूद रहेगा। ट्रम्प ने पीएम मोदी की तारीफ में कहा- जब तक मोदी लीडर हैं, इंडिया हर फील्ड में बड़ा रोल निभाएगा। मोदी शांत और जबरदस्त नेता हैं, लेकिन मैं मोदी की तरह नहीं हूं।
बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समुद्र में भारतीयों की सुरक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि ईरान के साथ डील में भारतीयों की सुरक्षा पक्की की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कतर की ओर से उपहार में मिले 400 मिलियन डॉलर मूल्य के विशेष बोइंग 747 विमान का अनावरण करते हुए इसे अपना नया अस्थायी 'एयर फोर्स वन' घोषित किया है। ट्रंप ने इस विमान को "दुनिया का सबसे आलीशान विमान" बताया और कहा कि यह अगले कुछ वर्षों तक राष्ट्रपति की आधिकारिक हवाई यात्राओं की जिम्मेदारी संभालेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब 35 वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सेवा करने वाले पुराने एयर फोर्स वन विमान को हाल ही में रिटायर किया गया है। अगले NATO शिखर सम्मेलन में इसी विमान से जाएंगे ट्रंप राष्ट्रपति ट्रंप अगले महीने North Atlantic Treaty Organization के अंकारा शिखर सम्मेलन में इसी विमान से यात्रा करेंगे। यह विमान तब तक अस्थायी राष्ट्रपति विमान के रूप में उपयोग किया जाएगा, जब तक अमेरिकी वायु सेना के नए पीढ़ी के VC-25B विमान 2027-28 में सेवा में नहीं आ जाते। कतर के उपहार पर अमेरिका में छिड़ा विवाद ट्रंप ने मैरीलैंड स्थित Joint Base Andrews में लाल, सफेद, गहरे नीले और सुनहरे रंग से सजे इस विमान का अनावरण किया। इस विमान को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। अमेरिकी नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी को एक कैलेंडर वर्ष में किसी एक स्रोत से बिना मांगे अधिकतम 50 डॉलर तक का उपहार स्वीकार करने की अनुमति है। ऐसे में 400 मिलियन डॉलर के इस विमान को स्वीकार किए जाने पर विपक्ष और नैतिकता विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। ट्रंप बोले- इतना बड़ा प्रस्ताव ठुकराना मूर्खता होती आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े प्रस्ताव को ठुकराना "मूर्खता" होती। वहीं, United States Department of Defense के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि कतर से विमान स्वीकार करने की प्रक्रिया सभी संघीय नियमों और प्रावधानों के अनुरूप पूरी की गई है। राष्ट्रपति विमान में बदलने पर आएगा 1 अरब डॉलर तक का खर्च विमान की मूल कीमत 400 मिलियन डॉलर है, लेकिन इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप पूरी तरह तैयार करने में भारी खर्च आने का अनुमान है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस बोइंग 747 को पूर्ण राष्ट्रपति विमान में बदलने के लिए लगभग 1 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। इसमें उन्नत संचार प्रणाली, मिसाइल रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा उपकरण और विशेष कमांड सुविधाएं शामिल की जाएंगी। उधर, नए VC-25B विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण उनकी कुल परियोजना लागत भी बढ़कर लगभग 5 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। 'दुनिया का सबसे आलीशान विमान' अनावरण समारोह के दौरान ट्रंप ने कतर के अमीर का धन्यवाद करते हुए कहा, "इसे दुनिया का सबसे आलीशान विमान माना जाता है। जब इसे बनाया गया था, तब इसे ऐसे स्तर पर तैयार किया गया था, जो शायद फिर कभी देखने को न मिले।" उन्होंने यह भी कहा कि कई विदेशी नेताओं के पास अमेरिका से अधिक आधुनिक सरकारी विमान हैं और अमेरिका को भी अपने राष्ट्रपति बेड़े को उसी स्तर पर बनाए रखना चाहिए। क्यों खास है यह विमान? कीमत: लगभग 400 मिलियन डॉलर मॉडल: विशेष रूप से तैयार किया गया बोइंग 747 भूमिका: अस्थायी एयर फोर्स वन उपयोग अवधि: 2027-28 तक अनुमानित रूपांतरण लागत: लगभग 1 अरब डॉलर पहली प्रमुख यात्रा: अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन कतर से मिले इस लग्जरी विमान के अनावरण ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर ट्रंप इसे अमेरिकी प्रतिष्ठा और आधुनिकता की जरूरत बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे उपहार नीति, नैतिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रहा है।
रोम/वॉशिंगटन: जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़ा एक कथित बयान अमेरिका और इटली के बीच नए विवाद की वजह बनता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कथित दावे पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कथित तौर पर दावा किया था कि जी7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए आग्रह किया था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "मनगढ़ंत" और "तथ्यहीन" बताया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने कभी ऐसी कोई गुजारिश की और न ही इटली को किसी से इस प्रकार की मिन्नतें करने की आवश्यकता है। वीडियो संदेश जारी कर दिया जवाब मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के दावे पूरी तरह काल्पनिक हैं। इटली और मैं किसी से मिन्नतें नहीं करते।" उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है और इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया। इटली सरकार ने जताई नाराजगी इटली सरकार ने भी ट्रंप के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने इसे इटली और उसके प्रधानमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा भी रद्द कर दी है। क्या था ट्रंप का कथित दावा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत के दौरान जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र करते हुए दावा किया कि जी7 शिखर सम्मेलन में उन्होंने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए अनुरोध किया था। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने "तरस खाकर" इसके लिए सहमति दी। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही व्हाइट हाउस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सहयोगी देशों के साथ व्यवहार पर सवाल मेलोनी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध आपसी सम्मान और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। दोनों देशों की सरकारों की ओर से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों पर किसी औपचारिक असर की घोषणा नहीं की गई है।
ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर ब्रिटिश संसद में वापसी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत प्रधानमंत्री स्टार्मर के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। मेकरफील्ड उपचुनाव ने बदला राजनीतिक समीकरण शुक्रवार सुबह घोषित नतीजों में एंडी बर्नहैम ने दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के उम्मीदवार को भारी अंतर से पराजित कर संसद में प्रवेश किया। उनकी जीत को केवल एक उपचुनाव की सफलता नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिटेन के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने के लिए संसद का सदस्य होना आवश्यक है। ऐसे में मेकरफील्ड उपचुनाव बर्नहैम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। बर्नहैम बोले- यह बदलाव की रात है जीत के बाद एंडी बर्नहैम ने कहा कि देश की राजनीति अपने उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं कर रही है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा, "हर कोई महसूस कर सकता है कि हमारा देश वहां नहीं है, जहां उसे होना चाहिए था। आज की रात एक नए बदलाव की शुरुआत हो सकती है। यह एक ऐसी राजनीति की शुरुआत है, जो एकता और उम्मीद पर आधारित होगी।" बर्नहैम ने अपनी जीत को देश की राजनीति के लिए "टर्निंग पॉइंट" करार दिया। क्यों बढ़ी कीर स्टार्मर की मुश्किलें? साल 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने 14 वर्षों बाद भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। सरकार बनने के बाद से उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को कई क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी दलों ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि एंडी बर्नहैम को पार्टी के एक प्रभावशाली वर्ग द्वारा संभावित वैकल्पिक नेता के रूप में देखा जा रहा है। क्या आने वाला है 'लीडरशिप चैलेंज'? बर्नहैम की संसद में वापसी के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की स्थिति और कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति ब्रिटेन की राजनीति को नए दौर में ले जा सकती है और आने वाले दिनों में सत्ताधारी दल के अंदर नेतृत्व संघर्ष तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ी अनिश्चितता एंडी बर्नहैम की जीत ने ब्रिटिश राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपनी गिरती लोकप्रियता और चुनावी झटकों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बर्नहैम का उभार लेबर पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदलने की क्षमता रखता है। आने वाले सप्ताह ब्रिटेन की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं और यह स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या लेबर पार्टी अपने वर्तमान नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी या फिर देश को एक नए प्रधानमंत्री की ओर ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।