दुनिया

Iran-Israel War Day 12 Update

Iran War Live: 12वें दिन में भी नहीं थमा संघर्ष, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा; पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ी अस्थिरता

surbhi मार्च 12, 2026 0

 

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बीते 11 दिनों में यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का कारण बन गया है। लगातार हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई के बीच क्षेत्र में तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है, लेकिन इसके लंबे समय तक खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

रात भर पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयर डिफेंस सायरन बजते रहे और मिसाइलों के दागे जाने की खबरें सामने आती रहीं। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं।

 

ईरान का बड़ा सैन्य अभियान, इजरायल के दावे

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है। इस चरण में मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के मध्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब है।

दूसरी ओर, इजरायली सेना का दावा है कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई अहम ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात उनके लिए एक ऐतिहासिक अवसर हो सकते हैं। उन्होंने ईरानियों से अपील करते हुए कहा कि वे मौजूदा शासन के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाएं।

 

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव

इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय हॉर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ सकती है।

अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र के आसपास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। इन जहाजों में कुछ ऐसे पोत भी शामिल थे जिनका इस्तेमाल समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति मार्ग को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था।

 

बढ़ता मानवीय संकट

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1300 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। कई शहरों में भारी तबाही और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले के बाद मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने स्वीकार किया है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से 8 सैनिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

 

लेबनान और खाड़ी देशों तक फैला संघर्ष

यह युद्ध अब धीरे-धीरे पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में लेता नजर आ रहा है। लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए हैं। यह इलाका ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया है।

खाड़ी देशों में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

  • बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं।
     
  • कतर ने अपने क्षेत्र में 7 मिसाइल हमलों की पुष्टि की है।
     
  • कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में 5 ड्रोन के प्रवेश की जानकारी दी है।
     
  • सऊदी अरब ने 4 ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया है।
     

वहीं संयुक्त अरब अमीरात का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1475 ड्रोन और 260 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार में बाधा जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह टकराव अब एक क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास इस संकट को शांत कर पाएंगे या यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

दुनिया

View more
PoK Protest
PoK संकट गहराया: मुनीर सेना के खिलाफ विरोध, लोगों ने भारत से लगाई मदद की गुहार

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी अशांति और कथित सैन्य कार्रवाई के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए कहा है कि क्षेत्र में खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं की भारी कमी हो गई है।   सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारत से मदद की गुहार   वायरल वीडियो में सरदार अमन खान यह कहते नजर आ रहे हैं कि “हमें भारत की मदद चाहिए, राशन और दवाओं की गंभीर कमी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद इलाके में हालात बिगड़ गए हैं और आम नागरिक संकट का सामना कर रहे हैं।   LOC खोलने की मांग, लोगों में आक्रोश   रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक रैली में खान ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) की ओर जाने की बात भी उठाई। भीड़ ने कथित तौर पर इस पर समर्थन जताते हुए “उधर बढ़ें” के नारे लगाए। उन्होंने पुंछ और डोडा सेक्टर में LOC खोलने की मांग करते हुए कहा कि लोगों के पास हालात बिगड़ने पर भारत जाने का विकल्प होना चाहिए।   PoK में प्रदर्शन और नाकेबंदी से बिगड़े हालात   जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से PoK में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के बाद क्षेत्र में कथित तौर पर आर्थिक नाकेबंदी और सख्ती बढ़ाई गई है, जिससे स्थानीय लोगों को खाद्य सामग्री और जरूरी दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।   प्रदर्शन अब आज़ादी की मांग में बदले   स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जो आंदोलन पहले सुधारों की मांग तक सीमित था, वह अब पाकिस्तान के नियंत्रण से आजादी की खुली मांग में बदलता दिख रहा है। कई रैलियों में “PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है” जैसे नारे भी लगाए गए हैं।   स्थिति पर बढ़ी अंतरराष्ट्रीय नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में बढ़ता राजनीतिक संकट स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच गहरी खाई को दर्शाता है। वहीं पाकिस्तान प्रशासन द्वारा JAAC पर प्रतिबंध और सख्त कार्रवाई से तनाव और बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Kango Boat

कांगो में छात्रों से भरी नाव नदी में पलटी, कम से कम 20 की मौत; राहत-बचाव अभियान जारी

Saint Petersburg

यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनल को बनाया निशाना

US Independence Day

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबीं प्रियंका चोपड़ा, शेयर किया आतिशबाजी का वीडियो

Mehbooba Mufti and members of the Indian delegation pay tribute to former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei during funeral ceremonies in Tehran.
ईरान पहुंचीं महबूबा मुफ्ती, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अयातुल्लाह अली खामेनेई को दी श्रद्धांजलि

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह की शुरुआत से पहले जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचीं। उन्होंने अन्य प्रतिनिधियों के साथ खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लिए आयोजित सलात-अल-जनाज़ा (अंतिम संस्कार की नमाज़) में हिस्सा लिया। महबूबा मुफ्ती के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद सहित कई भारतीय शिया समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दुआ की। 4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार के कार्यक्रम अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े छह दिवसीय कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो गए हैं। ईरानी सरकार के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 9 जुलाई तक जारी रहेंगे। इसके बाद खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान में करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना है। राजधानी समेत पूरे ईरान में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह खामेनेई के पोस्टर व बैनर लगाए गए हैं। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे तेहरान खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल समारोह में हिस्सा ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में क्यों नहीं हुए शामिल? ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, पूर्व निर्धारित विदेशी दौरों और आधिकारिक कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बन सके। उनकी जगह भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को ईरान भेजा है। 36 वर्षों तक रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा और क्षेत्र में सैन्य संघर्ष छिड़ गया। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा और कई देशों में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोम और मशहद में भी होंगे विशेष कार्यक्रम ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रम 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा मशहद पहुंचेगी, जहां 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि छह दिनों तक चलने वाले शोक कार्यक्रमों में देशभर से करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf and Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi pay emotional tribute to former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla.

खामेनेई को अंतिम विदाई: गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद

A McDonald's restaurant in Venezuela's La Guaira province serves as a temporary field hospital after a devastating earthquake overwhelmed local healthcare facilities.

वेनेजुएला भूकंप: मैकडॉनल्ड्स बना अस्पताल, फूड काउंटर पर बंट रहीं दवाएं; तबाही के बीच जिंदगी बचाने की जंग

Workers prepare a massive 408-kilogram time capsule for burial at Philadelphia's Independence National Historical Park to mark America's 250th anniversary.

अमेरिका आजादी के 250 साल पूरे होने पर दफनाएगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा; जानिए इसकी खासियत

Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu responds to reports alleging plans to target Iranian negotiators during US-Iran peace talks.
ईरानी वार्ताकारों की हत्या की साजिश वाली रिपोर्ट पर इजराइल का खंडन, बोला- 'यह पूरी तरह फेक न्यूज'

तेल अवीव: इजराइल ने अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को "पूरी तरह झूठा" और "फेक न्यूज" करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि रिपोर्ट का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में क्या कहा गया था? अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि इजराइल कथित तौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बना सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता ईरान की ओर से युद्धविराम और शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका की चिंता का दावा रिपोर्ट में कहा गया था कि अप्रैल में चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरानी वार्ताकारों पर हमला हुआ तो शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है और क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज हो सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया था। संघर्ष और खुफिया सहयोग को लेकर भी दावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी तथा इस अभियान में अमेरिकी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों का भी जिक्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल के करीबी संबंधों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 के दौरान लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच कुछ मतभेद उभर सकते हैं। इजराइल ने किया स्पष्ट इनकार इजराइली सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले पर अमेरिका या ईरान की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.

खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

Pakistan Coast Guard camp in Jiwani, Gwadar, after the claimed BLA suicide attack in Balochistan.

ग्वादर के जिवानी में आत्मघाती हमले का दावा, BLA बोला- 30 से ज्यादा पाकिस्तानी जवान मारे गए

Mourners gather around the flag-draped coffin of Iran's Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei at Tehran's Grand Mosalla ahead of the state funeral.

खामेनेई को अंतिम विदाई: तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, 14 महीने की नातिन के साथ 9 जुलाई को होंगे सुपुर्द-ए-खाक

0 Comments

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?