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Meloni Congratulates Modi

PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल पर इटली की PM मेलोनी ने दी बधाई, भारत-इटली साझेदारी को बताया भविष्य की ताकत

Deepshikha जून 11, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni congratulates Narendra Modi on becoming India's longest-serving elected Prime Minister.
Giorgia Meloni Congratulates PM Modi

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। इसी क्रम में इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को लगातार 4,399 दिन का कार्यकाल पूरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही वह भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।

मेलोनी ने सोशल मीडिया पर दी शुभकामनाएं

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए लिखा कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने हाल ही में रोम में हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शुरू हुई विशेष रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मेलोनी ने विश्वास जताया कि भारत और इटली के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के नागरिकों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी साबित होगा।

रोम में हुई मुलाकात रही थी चर्चा का केंद्र

मई 2026 में रोम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात ने व्यापक चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी उत्साह देखने को मिला था।

इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की थी। भारत और इटली के बीच संबंधों को नई दिशा देने के लिए कई पहलुओं पर सहमति भी बनी थी।

यूरोपीय परिषद प्रमुख ने भी जताई खुशी

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष António Costa ने भी प्रधानमंत्री मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

कोस्टा ने कहा कि इस वर्ष आयोजित भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक ने दोनों पक्षों के सहयोग को नई मजबूती प्रदान की है और भविष्य में यह साझेदारी और अधिक व्यापक होगी।

मोदी के नाम दर्ज हुआ नया राजनीतिक कीर्तिमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और 2024 के आम चुनावों में जीत हासिल कर उन्होंने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई।

मोदी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार इतने लंबे समय तक पद पर रहते हुए यह रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री भी हैं, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है।

12 वर्षों में भाजपा का राष्ट्रीय विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने देश के कई नए क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत की है। पार्टी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों और राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अपना प्रभाव लगातार विस्तारित किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय राजनीति में लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व की मिसाल के रूप में भी देखा जाएगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अमेरिका-ईरान तनाव और शांति समझौते को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान की खबर
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- शांति समझौते की अच्छी संभावना, लेकिन जरूरत पड़ी तो फिर होंगे हमले

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते की अच्छी संभावना बन रही है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे और ईरान ने समझौते का पालन नहीं किया, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।   'बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन विकल्प खुले हैं'   ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच "अच्छी बातचीत" चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि एक समझौता संभव है। उन्होंने कहा, "समझौते की बहुत अच्छी संभावना है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से हमले करेंगे।" ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।   क्षेत्रीय तनाव अभी भी बरकरार   हालांकि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों द्वारा ड्रोन हमलों और रणनीतिक क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में अपने सैन्य और समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।   समझौते पर दुनिया की नजर   विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिलेगी। हालांकि दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं, इसलिए आने वाले दिनों की बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की मुलाकात के दौरान रक्षा सहयोग पर चर्चा
ज़ेलेंस्की का ब्रिटेन दौरा: नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से रक्षा सहयोग पर चर्चा, ड्रोन और मिसाइल सुरक्षा पर बनी सहमति

लंदन, एजेंसियां। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन का दौरा कर नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से मुलाकात की। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद किसी विदेशी नेता के साथ यह बर्नहम की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक थी। दोनों नेताओं ने यूक्रेन की रक्षा क्षमता बढ़ाने, संयुक्त रक्षा उत्पादन और रूस के खिलाफ सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की।   ड्रोन और मिसाइल रक्षा पर विशेष जोर   बैठक में यूक्रेन की सबसे बड़ी जरूरत मानी जा रही ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा पर विशेष चर्चा हुई। ब्रिटेन ने यूक्रेन को अपनी "स्टोन क्लोक" इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक उपलब्ध कराने का फैसला किया है, जिससे यूक्रेनी ड्रोन रूसी एयर डिफेंस सिस्टम से बेहतर तरीके से बच सकेंगे। यह तकनीक अब यूक्रेन में भी तैयार की जा सकेगी।   रक्षा उत्पादन में बढ़ेगा सहयोग   दोनों नेताओं ने ब्रिटेन और यूक्रेन के बीच संयुक्त रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रस्तावित योजना के तहत ब्रिटेन में यूक्रेन के लिए ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे युद्ध के दौरान हथियारों और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तेज हो सकेगी। ज़ेलेंस्की ने इसे यूक्रेन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।   ब्रिटेन ने दोहराया समर्थन   प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ "100 प्रतिशत" खड़ा है और रूस के खिलाफ उसकी सुरक्षा जरूरतों में हर संभव सहयोग जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और यूरोप की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, इसलिए ब्रिटेन का समर्थन आगे भी जारी रहेगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
ICC चीफ प्रॉसिक्यूटर करीम खान को हटाए जाने पर ईरान द्वारा अमेरिका और इजराइल की आलोचना

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Emergency responders at the scene after a van struck people during the Berlin Pride celebration
बर्लिन प्राइड पर हमला: LGBTQ+ कार्यक्रम में भीड़ पर वैन चढ़ी, 1 की मौत, 16 घायल

Berlin Pride Attack: जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित LGBTQ+ प्राइड कार्यक्रम के दौरान शनिवार को एक दर्दनाक हमला हुआ। टियरगार्टन पार्क के पास प्राइड सेलिब्रेशन में शामिल लोगों की भीड़ में एक वैन घुस गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस ने पूरे कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया और इलाके को खाली करा लिया। भीड़ में घुसी वैन, मची अफरा-तफरी पुलिस के अनुसार, वैन उस स्थान पर घुसी जहां कुछ ही देर पहले प्राइड मार्च गुजरा था। कई लोगों को टक्कर मारने के बाद वाहन एक पेड़ से जा टकराया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, फायर ब्रिगेड तथा एम्बुलेंस की टीमें पहुंचीं। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राइशस्टैग के पास अस्थायी हेलीकॉप्टर लैंडिंग ज़ोन भी बनाया गया। संदिग्ध की पहचान, गिरफ्तारी की कोशिश जारी बर्लिन पुलिस के प्रवक्ता फ्लोरियन नाथ ने बताया कि संभावित संदिग्धों की तलाश जारी है। बाद में पुलिस ने कहा कि संदिग्ध की पहचान कर ली गई है और उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि संदिग्ध का संबंध एक इस्लामिस्ट समूह से होने की आशंका है। हालांकि, जांच अभी जारी है और घटना के मकसद को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जर्मन चांसलर ने क्या कहा? जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मर्ज़ ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार हमले की पूरी जांच कराएगी और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दिलाई जाएगी। वहीं, बर्लिन के मेयर काई वेग्नर ने इसे शहर के खुले, लोकतांत्रिक और समावेशी समाज पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्राइड समारोह को निशाना बनाना बेहद गंभीर घटना है। यूरोप के सबसे बड़े LGBTQ+ आयोजनों में से एक बर्लिन का यह आयोजन "क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे (Christopher Street Day)" के नाम से जाना जाता है और यह यूरोप के सबसे बड़े LGBTQ+ प्राइड आयोजनों में शामिल है। इस वर्ष की थीम थी: "Taking a Stand is Hot" (अपनी बात पर डटे रहना शानदार है) आयोजकों के मुताबिक, यह थीम जर्मनी में LGBTQ+ समुदाय के प्रति बढ़ती नफरत और भेदभाव के खिलाफ एक संदेश देने के लिए चुनी गई थी। पहले भी हुआ था विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम से पहले दक्षिणपंथी समूहों ने प्राइड मार्च के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस ने विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया था। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल इस विरोध प्रदर्शन और वैन हमले के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं की है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
China's reusable Long March 10B rocket and its proposed electromagnetic launch system for future space missions

अंतरिक्ष की नई रेस: क्या चीन का इलेक्ट्रिक लॉन्च सिस्टम एलन मस्क के रॉकेट्स को चुनौती दे पाएगा?

Poppy fields in Afghanistan amid a sharp decline in opium cultivation following the Taliban ban

अफगानिस्तान में 'अफीम संकट': 95% घटी खेती, फिर भी तस्करी क्यों नहीं थमी?

Security personnel deployed after a communal clash in Nepal's Sunsari district near the India-Nepal border

भारत-नेपाल सीमा के पास सांप्रदायिक झड़प, युवक की मौत; लाउडस्पीकर और धार्मिक झंडे को लेकर विवाद

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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

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