गृह मंत्री सुदन गुरुंग पर आरोप है कि उन्होंने विवादित कारोबारी Deepak Bhatt से जुड़ी कंपनियों में निवेश किया। भट्ट पहले मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल जा चुके हैं। हाल ही में सामने आए दस्तावेजों में दावा किया गया कि गुरुंग के पास स्टार माइक्रो इंश्योरेंस और लिबर्टी माइक्रो इंश्योरेंस जैसी कंपनियों के शेयर हैं, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
मुख्य विपक्षी दल Nepali Congress समेत कई राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पार्टी प्रवक्ता Devaraj Chalise ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है। ऐसे में मंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
वहीं Rastriya Prajatantra Party के अध्यक्ष Rajendra Lingden ने भी सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है और गुरुंग से स्थिति साफ करने को कहा है।
युवा संगठन ‘GenZ रेड फोर्स नेपाल’ ने भी नैतिकता के आधार पर गुरुंग के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि मंत्री का पद पर बने रहना न केवल जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच सुदन गुरुंग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें “प्रायोजित अफवाह” बताया। उन्होंने कहा कि उनका कुल निवेश करीब 20 मिलियन नेपाली रुपये है और इससे जुड़ी सभी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में पहले से मौजूद है।
गुरुंग का दावा है कि कुछ लोग अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई से बचने के लिए जानबूझकर उनके खिलाफ गलत जानकारी फैला रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ बैठक की है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि गुरुंग इस्तीफा देंगे या सरकार उन्हें पद से हटाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
India-Iran Relations: भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वरिष्ठ भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विश्वेश नेगी को ईरान में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि वह जल्द ही तेहरान में अपना कार्यभार संभालेंगे। विदेश मंत्रालय ने जारी की नियुक्ति विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी विश्वेश नेगी वर्तमान में मंत्रालय में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें अब ईरान में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। रक्षा और कूटनीति का लंबा अनुभव विश्वेश नेगी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है। विदेश मंत्रालय में आने से पहले वे रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों में भी उन्होंने अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। तनावपूर्ण माहौल में हुई नियुक्ति यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। भारत लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में वाणिज्यिक जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सभी पक्षों से संवाद बनाए हुए है। जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से की बातचीत हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर किसी भी तरह के हमले रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी पक्ष द्वारा वाणिज्यिक जहाजों या नाविकों पर किए जाने वाले हमलों का विरोध करता है। क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और जारी कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी भी साझा की। भारत ने दोहराया कि वह हमेशा शांतिपूर्ण समाधान, बातचीत और कूटनीति का समर्थक रहा है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने वाली है। वहीं, ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच समुद्री व्यापार मार्गों के संचालन से जुड़े संयुक्त तंत्र पर भी अंतिम चरण की वार्ता चल रही है। भारत की ओर से नए राजदूत की नियुक्ति को ऐसे समय में महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है।
PoK Protest News: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट, आटे की कमी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 100 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में लोग महंगाई, बिजली संकट, आटे की कमी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया और गोलियां चलाईं। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई और कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक गतिविधियों में शामिल थे। मस्जिदों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में मस्जिदों के लाउडस्पीकरों के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने और एकजुट रहने की अपील की जा रही है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने कहा कि अतीत में जिस तरीके का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ करता था, अब उसी तरह के तरीकों का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ होता दिखाई दे रहा है। युवाओं पर सबसे ज्यादा असर रावलाकोट में राहत कार्य से जुड़े एक डॉक्टर के अनुसार, गोली लगने वाले अधिकांश लोग 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिक उपचार की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन सिर, सीने और पेट में गंभीर गोली लगने वाले घायलों को बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में घायल आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया है। परिजनों का आरोप- अधिकार मांगने पर मिली गोलियां मृतकों और घायलों के परिजनों का कहना है कि वे केवल सस्ती बिजली, आटा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके परिजन किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं थे, बल्कि अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार और JAAC के दावे आमने-सामने JAAC का आरोप है कि पाकिस्तान और PoK प्रशासन ने अक्टूबर 2025 में हुए समझौते को लागू नहीं किया, जिससे लोगों का आक्रोश बढ़ा। वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि संगठन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और उसके कुछ सदस्यों के हथियारबंद होने की जानकारी मिली है। पाकिस्तानी प्रशासन का आरोप है कि आंदोलन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की लोकतांत्रिक लड़ाई बता रहे हैं। पाकिस्तान के लिए बढ़ी चुनौती लगातार जारी विरोध प्रदर्शन और बढ़ता जनाक्रोश पाकिस्तान के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। मौजूदा हालात ने क्षेत्र में सुरक्षा और शासन व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
US Visa Bond Program: अगर आप अमेरिका घूमने या बिजनेस के सिलसिले में जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका ने अपने Visa Bond Program को अब स्थायी नियम का रूप दे दिया है। इसके तहत कुछ देशों के नागरिकों को B-1 (बिजनेस) और B-2 (टूरिस्ट) वीजा जारी होने से पहले 20,000 डॉलर तक का रिफंडेबल सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। हालांकि भारतीय नागरिकों के लिए राहत की बात यह है कि भारत इस सूची में शामिल नहीं है। किन लोगों पर लागू होगा नया नियम? नया नियम उन 50 देशों के नागरिकों पर लागू होगा जो B-1 और B-2 वीजा के लिए आवेदन करेंगे। पात्र आवेदकों से अधिकतम 20,000 डॉलर तक का सिक्योरिटी बॉन्ड लिया जा सकता है। यदि वीजा धारक अमेरिका में तय नियमों का पालन करता है और वीजा अवधि समाप्त होने से पहले देश छोड़ देता है, तो पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। वहीं, यदि वीजा आवेदन अस्वीकार हो जाता है, तब भी जमा किया गया बॉन्ड लौटा दिया जाएगा। भारतीयों पर क्या होगा असर? फिलहाल भारत इस Visa Bond Program का हिस्सा नहीं है। इसका मतलब है कि भारत से B-1 या B-2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों को यह अतिरिक्त सिक्योरिटी बॉन्ड जमा नहीं करना होगा। हालांकि, यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिकी प्रशासन वीजा ओवरस्टे (Visa Overstay) को रोकने के लिए अब पहले से अधिक सख्त रुख अपना रहा है। पहले क्या था और अब क्या बदला? इससे पहले लागू पायलट प्रोग्राम के तहत कॉन्सुलर अधिकारी 5,000 डॉलर, 10,000 डॉलर या अधिकतम 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड तय कर सकते थे। अब नए स्थायी नियम में: 5,000 डॉलर का विकल्प समाप्त कर दिया गया है। अधिकतम बॉन्ड राशि बढ़ाकर 20,000 डॉलर कर दी गई है। यह कार्यक्रम ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में पायलट आधार पर शुरू किया था। इसका उद्देश्य वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुकने वाले लोगों की संख्या कम करना और इमिग्रेशन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना था। क्यों लिया गया यह फैसला? अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, 2024 में कार्यक्रम में शामिल 50 देशों के लगभग 45,500 लोग वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुके रहे। वहीं, पायलट प्रोग्राम के पहले 10 महीनों के दौरान जिन लोगों पर बॉन्ड नियम लागू किया गया, उनमें 50 से भी कम मामलों में वीजा ओवरस्टे दर्ज हुआ। विभाग का मानना है कि यह नियम B-1/B-2 वीजा के दुरुपयोग को कम करने में प्रभावी साबित हो सकता है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे विकासशील देशों के यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रभावित हो सकती है।