बिहार

Patna HC Cancels Electricity Theft FIR Over ₹5.39 Lakh Bill

₹5.39 लाख बिजली बिल बकाया था, कनेक्शन भी कटा; फिर लगा चोरी का आरोप, पटना HC ने FIR की रद्द

surbhi अगस्त 14, 2026 0
Patna High Court cancels electricity theft FIR over a disputed ₹5.39 lakh outstanding power bill.
Patna High Court Electricity Theft FIR Verdict

पटना: बिजली बिल का बड़ा बकाया होना उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, लेकिन इसे सीधे बिजली चोरी नहीं माना जा सकता। करीब ₹5.39 लाख के बिजली बिल बकाया से जुड़े एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए बिजली चोरी के आरोप में दर्ज FIR को रद्द कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बिजली बिल का भुगतान नहीं करना अपने आप में बिजली चोरी का अपराध साबित नहीं करता। बिजली चोरी का आपराधिक मामला बनाने के लिए कानून में निर्धारित जरूरी तथ्यों और साक्ष्यों का होना आवश्यक है।

बकाया बिल के बाद काटा गया था कनेक्शन

मामला एक ऐसे उपभोक्ता से जुड़ा था, जिस पर करीब 5.39 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था। भुगतान नहीं होने पर बिजली विभाग ने उपभोक्ता का कनेक्शन काट दिया।

इसके बाद विभाग की ओर से बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस कार्रवाई को उपभोक्ता ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी और FIR रद्द करने की मांग की।

हाईकोर्ट ने बताया बकाया और चोरी में अंतर

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करना और जानबूझकर बिजली चोरी करना एक जैसी स्थिति नहीं है।

सिर्फ इस आधार पर कि किसी उपभोक्ता पर बड़ी रकम का बिल बकाया है, उसके खिलाफ बिजली चोरी का आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। बिल की बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग के पास अलग कानूनी रास्ते मौजूद हैं।

बिजली चोरी के लिए जरूरी है अलग आधार

अदालत ने मामले में इस बात पर भी ध्यान दिया कि बिजली चोरी के आरोप के लिए केवल बकाया बिल पर्याप्त नहीं है। आपराधिक कार्रवाई के लिए यह देखना जरूरी है कि क्या उपभोक्ता ने बिजली का अवैध इस्तेमाल किया या विभाग को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर कोई गलत तरीका अपनाया।

इसलिए लाखों रुपये का बिजली बिल बाकी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उपभोक्ता ने बिजली चोरी की है।

FIR रद्द करने का दिया आदेश

मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद पटना हाईकोर्ट ने बिजली चोरी से जुड़ी FIR को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले से यह अंतर स्पष्ट हुआ कि बिजली बिल की वसूली का विवाद और बिजली चोरी का आपराधिक मामला अलग-अलग कानूनी विषय हैं।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है फैसले का मतलब?

इस फैसले का यह अर्थ नहीं है कि बिजली बिल जमा नहीं करने पर विभाग कार्रवाई नहीं कर सकता। बकाया राशि की वसूली के लिए बिजली विभाग अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है और कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई भी नियमों के तहत की जा सकती है।

हालांकि, केवल बिल बकाया होने के आधार पर किसी उपभोक्ता पर बिजली चोरी का आपराधिक आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होगा। चोरी के आरोप के लिए उसके अनुरूप तथ्य और कानूनी आधार भी जरूरी होंगे।

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला बिजली बिल विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने बकाया राशि की वसूली और बिजली चोरी की आपराधिक कार्रवाई के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर पर जोर दिया है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सहरसा में सड़क विकास को मिली रफ्तार, भारतीय नगर से हुसैन चौक तक चौड़ी होगी सड़क; जर्जर पुल का भी होगा कायाकल्प

सहरसा: सहरसा जिला मुख्यालय से सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के हुसैन चौक तक सफर अब पहले के मुकाबले आसान होने की उम्मीद है। भारतीय नगर से हुसैन चौक तक सड़क को चौड़ा और मजबूत करने की योजना पर काम आगे बढ़ गया है। पथ निर्माण विभाग ने इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार कर विभाग को सौंप दी है। फिलहाल यह मार्ग कई हिस्सों में संकरी सड़क के कारण यातायात दबाव झेलता है। खासकर व्यस्त समय में वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क चौड़ीकरण की योजना पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के गांवों से आने-जाने वाले यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय नगर से हुसैन चौक तक चौड़ीकरण की तैयारी प्रस्ताव के मुताबिक भारतीय नगर से सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के हुसैन चौक स्थित दुर्गा मंदिर तक सड़क को चौड़ा किया जाएगा। इस मार्ग का इस्तेमाल बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय वाहन चालक और दूसरे क्षेत्रों के यात्री करते हैं। स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की मांग की जा रही थी। अब DPR तैयार होने के बाद इस मांग के पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है। कई गांवों की आवाजाही होगी आसान सड़क निर्माण का लाभ केवल सहरसा और सिमरी बख्तियारपुर के यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। सुलिंदाबाद, दिवारी, भरौली, विशुनपुर और सोनवर्षा कचहरी समेत आसपास के कई गांवों की आबादी को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। सड़क चौड़ी होने से दो वाहनों के एक साथ गुजरने में आसानी होगी। इससे जाम की समस्या कम होने और यात्रा का समय घटने की संभावना है। कुछ हिस्सों में 7 मीटर तक होगी सड़क की चौड़ाई विभागीय जानकारी के अनुसार, भारतीय नगर से सुलिंदाबाद हाई स्कूल तक सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई 7 मीटर रखी गई है। दूसरे हिस्सों में करीब 5.50 मीटर चौड़ाई का प्रावधान किया गया है। सड़क के घुमावदार हिस्सों में मौजूदा अलाइनमेंट को बरकरार रखते हुए चौड़ीकरण करने की योजना है। यानी सड़क के वर्तमान मार्ग में बड़े बदलाव के बजाय उसी दिशा में इसे अधिक उपयोगी और सुरक्षित बनाया जाएगा। दीवारी मंदिर के पास पुराने पुल का भी होगा सुधार सड़क चौड़ीकरण योजना में सिर्फ सड़क को मजबूत करने पर ही जोर नहीं दिया गया है। दीवारी मंदिर के पास नहर पर बने पुराने और जर्जर पुल के जीर्णोद्धार को भी परियोजना में शामिल किया गया है। लंबे समय से खराब हालत में पड़े इस पुल से हादसे का खतरा बना रहता था। पुल की मरम्मत और मजबूतीकरण होने के बाद इस हिस्से में आवागमन अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है। DPR के बाद अब स्वीकृति और टेंडर का इंतजार पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए DPR तैयार कर विभाग को भेज दी गई है। अब विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होने का रास्ता साफ होगा। यानी फिलहाल परियोजना कागजी प्रक्रिया के चरण में है, लेकिन DPR तैयार होने से काम आगे बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है। वर्षों पुरानी परेशानी से मिल सकती है राहत भारतीय नगर से हुसैन चौक तक सड़क का चौड़ीकरण स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय से उठ रही मांग को पूरा करने वाला कदम माना जा रहा है। सड़क और पुल दोनों के सुधार से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अगर परियोजना तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है, तो सहरसा से सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के बीच आवागमन को बड़ी सुविधा मिल सकती है और दर्जनों गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।  

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Bihar students attending online classes as government expands digital education support with teachers available until 11 PM.
बिहार के छात्रों के लिए बड़ी पहल! अब रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक से पूछ सकेंगे सवाल, 15 अगस्त से शुरू होगी सुविधा

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े सवालों और विषयों की कठिनाइयों के समाधान के लिए केवल स्कूल के समय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 15 अगस्त से छात्र रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों से जुड़कर अपनी पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे। इस सुविधा का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान उपलब्ध कराना और डिजिटल माध्यम से शिक्षा को ज्यादा सुलभ बनाना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित AAGAAZ 2026 कार्यक्रम के दौरान इस पहल की जानकारी दी। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक रहेंगे उपलब्ध मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार में पहले से चल रहे बिहार स्कूल लाइव क्लासेस कार्यक्रम को अब और विस्तारित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत छात्र रात में भी ऑनलाइन शिक्षक से जुड़कर किसी विषय या टॉपिक से संबंधित अपनी शंका दूर कर सकेंगे। अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाई करते समय किसी सवाल को समझने में परेशानी होती है, तो उसे अगले दिन स्कूल खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वह निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन शिक्षक से सहायता ले सकेगा। सरकार का लक्ष्य खास तौर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना है। 551 मॉडल स्कूलों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं राज्य में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 जुलाई को 551 मॉडल स्कूलों का शुभारंभ किया गया था। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षण जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनका फायदा खास तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त पढ़ाई के लिए हर बार बड़े शहरों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 211 ब्लॉकों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज उच्च शिक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समीक्षा के दौरान राज्य के 211 ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद इन सभी ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार, इस दिशा में 15 जुलाई से काम शुरू कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अपने क्षेत्र से दूर जाने की मजबूरी कम करना और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कॉलेज शिक्षा से जोड़ना है। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को लेकर भी सरकार की योजना बताई। उनके अनुसार, नियमित कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। 10 अगस्त से नवनियुक्त शिक्षकों ने अलग-अलग कॉलेजों में योगदान देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चिन्हित 211 कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और वहां पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन महीनों के भीतर राज्य के सभी कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की बहाली पूरी करना है। डिजिटल शिक्षा से सरकारी स्कूलों के छात्रों को फायदा बिहार सरकार की इन पहलों में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान मिलने की उम्मीद है। वहीं, मॉडल स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं और नए डिग्री कॉलेजों के साथ शिक्षकों की नियुक्ति से स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर सुविधाओं को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।  

surbhi अगस्त 14, 2026 0
PM-JANMAN scheme

PM-JANMAN योजना के तहत PVTG छात्रों को मुफ्त हॉस्टल, 6 जिलों में बनेंगे 15 छात्रावास

Dark storm clouds over Bihar as heavy rain, thunderstorms and lightning trigger weather alerts across several districts.

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Patna High Court cancels electricity theft FIR over a disputed ₹5.39 lakh outstanding power bill.

₹5.39 लाख बिजली बिल बकाया था, कनेक्शन भी कटा; फिर लगा चोरी का आरोप, पटना HC ने FIR की रद्द

AI-based real-time bed tracking system to help Bihar hospitals monitor ICU and ward bed availability digitally.
बिहार में AI बताएगा किस अस्पताल में खाली है ICU-बेड, मरीजों को रेफर करने से पहले मिलेगी पूरी जानकारी

पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। राज्य में AI आधारित रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए अस्पतालों में ICU, वार्ड और सामान्य बेड की उपलब्धता की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिल सकेगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा गंभीर मरीजों को हो सकता है। डॉक्टर किसी मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने से पहले यह देख सकेंगे कि वहां आवश्यक बेड उपलब्ध है या नहीं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकने की परेशानी कम हो सकती है। रेफर करने से पहले पता चलेगी बेड की स्थिति अक्सर गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पताल में भेजा जाता है। लेकिन कई बार वहां पहुंचने के बाद पता चलता है कि ICU या वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं है। नई डिजिटल व्यवस्था इसी समस्या को कम करने की कोशिश है। डॉक्टर रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल में उपलब्ध ICU, सामान्य और वार्ड बेड की स्थिति देख सकेंगे। इससे मरीज को उचित अस्पताल तक पहुंचाने में समय की बचत हो सकती है। 15 अगस्त से नई रेफरल व्यवस्था लागू करने की तैयारी के बीच इस डिजिटल सिस्टम को भी आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ने की तैयारी इस योजना का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। बिहार के करीब 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। इसमें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बड़े चिकित्सा संस्थान शामिल किए जा सकते हैं। नेटवर्क तैयार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के पास राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं और संसाधनों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध होगी। बेड के साथ डॉक्टर और दवाओं की भी होगी निगरानी AI आधारित सिस्टम को केवल बेड की उपलब्धता तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसके जरिए अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं के वितरण और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की भी डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस अस्पताल में कौन-सी सुविधा उपलब्ध है और किन जगहों पर अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। QR कोड से मिलेगा OPD टोकन बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए अन्य सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत QR कोड स्कैन करके OPD का डिजिटल टोकन लेने की सुविधा विकसित की जा रही है। इससे मरीजों को OPD में टोकन लेने के लिए लंबी कतार में खड़े रहने की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के जरिए पर्चे, जांच रिपोर्ट और एक्स-रे जैसी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। 3900 से अधिक केंद्रों पर टेलीमेडिसिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए टेलीमेडिसिन को भी इस डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। राज्य में 3900 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। इसके जरिए मरीज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। जिला अस्पतालों को टेली-ICU सहायता से जोड़ने की योजना भी है, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद समय पर मिल सके। अस्पतालों की जानकारी होगी डिजिटल बिहार सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को कागजी रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की जानकारी तक सीमित रखने के बजाय एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। यदि AI आधारित बेड ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो डॉक्टरों को मरीजों के लिए सही अस्पताल चुनने में मदद मिल सकती है। ICU या सामान्य बेड की उपलब्धता, डॉक्टरों की मौजूदगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी एक डिजिटल सिस्टम पर मिलने से रेफरल प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। फिलहाल सिस्टम को विकसित और लागू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरी तरह प्रभावी होने के बाद बिहार में अस्पतालों के बीच समन्वय बेहतर होने और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

surbhi अगस्त 14, 2026 0
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बिहार में खुलेंगे नए बालू घाट! 10 से 12% तक बढ़ सकती है संख्या, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

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surbhi अगस्त 11, 2026 0

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