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आज का अंक ज्योतिष 4 अगस्त 2026: मूलांक 4 और 9 वालों की मेहनत लाएगी रंग, जन्मतिथि से जानें आज का भविष्यफल

surbhi अगस्त 4, 2026 0
4 August 2026 numerology forecast with success signs for Mulank 4 and Mulank 9
4 August 2026 Numerology Horoscope

आज का अंक ज्योतिष, 4 अगस्त 2026: अंक ज्योतिष के अनुसार 4 अगस्त का दिन अनुशासन, योजना, धैर्य और जिम्मेदारी पर जोर देने वाला है। आज की ऊर्जा खासतौर पर उन लोगों के लिए सकारात्मक रह सकती है जो जल्दबाजी के बजाय व्यवस्थित तरीके से अपने काम पूरे करने पर भरोसा रखते हैं। मूलांक 4 के जातकों के लिए दिन मेहनत का परिणाम दिखाने वाला हो सकता है, जबकि मूलांक 9 वालों को धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

आज का दिन केवल तेजी से काम पूरा करने का नहीं, बल्कि सही दिशा और बेहतर योजना के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है। अधूरे कामों को निपटाने, पुरानी योजनाओं को व्यवस्थित करने और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने के लिहाज से दिन उपयोगी रह सकता है। रिश्तों में भी अपनी बात मनवाने के बजाय समझदारी और संतुलन बनाए रखना फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 1: पुराने काम पूरे करने पर दें ध्यान

आज आपके लिए नए काम शुरू करने के बजाय पहले से अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करना अधिक बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में एकाग्र होकर काम करने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। काम के दबाव के बीच आराम और शरीर का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। रिश्तों में केवल अपनी बात पर अड़े रहने के बजाय थोड़ा समझौता करना आपके लिए बेहतर रहेगा।

लकी नंबर: 1, 4
लकी रंग: गोल्ड, ग्रे
क्या न करें: किसी काम को कठिन या उबाऊ समझकर उसे बीच में न छोड़ें।

मूलांक 2: टीमवर्क से मिलेगा फायदा

आज मिल-जुलकर काम करने से आपको लाभ मिल सकता है। किसी सहकर्मी या टीम के साथ मिलकर कागजी काम, योजना या किसी पुराने प्रोजेक्ट को व्यवस्थित करने में सफलता मिल सकती है। लगातार काम करने से मानसिक थकान हो सकती है, इसलिए बीच-बीच में आराम जरूर करें। रिश्तों में किसी पुरानी बात को लेकर परेशान होने के बजाय शांत बातचीत से समाधान खोजें।

लकी नंबर: 2, 4
लकी रंग: व्हाइट, ग्रे
क्या न करें: अपनी मेहनत का तुरंत परिणाम न मिलने पर निराश न हों।

मूलांक 3: रुके प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय

आज आपकी रचनात्मकता को सही दिशा देने की जरूरत है। कोई रुका हुआ प्रोजेक्ट पूरा करने या बिखरे हुए विचारों को व्यवस्थित योजना में बदलने के लिए दिन अनुकूल रह सकता है। काम और आराम के बीच संतुलन बनाकर चलें। रिश्तों में केवल हंसी-मजाक तक सीमित रहने के बजाय किसी जरूरी मुद्दे पर खुलकर और ईमानदारी से बातचीत करें।

लकी नंबर: 3, 4
लकी रंग: येलो, ग्रे
क्या न करें: किसी काम में देरी होने पर अपना धैर्य न खोएं।

मूलांक 4: मेहनत से मिल सकते हैं अच्छे परिणाम

आज का दिन मूलांक 4 वालों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। योजना बनाने, काम को व्यवस्थित करने, अधूरे कार्य पूरे करने और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने के लिए समय अच्छा है। आपकी मेहनत और अनुशासन का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है।

हालांकि लगातार काम करते रहने से शारीरिक थकान हो सकती है। इसलिए काम के बीच छोटे ब्रेक लेते रहें। परिवार और करीबी लोगों के लिए भी समय निकालें।

लकी नंबर: 4, 8
लकी रंग: ग्रे, ब्लू
क्या न करें: काम में इतना न डूबें कि आराम और अपनों के लिए समय ही न बचे।

मूलांक 5: योजना बनाकर आगे बढ़ें

आज का अनुशासन आपको शुरुआत में थोड़ा बंधा हुआ महसूस करा सकता है, लेकिन यही ऊर्जा आपके बिखरे हुए कामों को व्यवस्थित करने में मदद करेगी। जल्दबाजी के बजाय योजना बनाकर आगे बढ़ें। बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करने से तनाव कम रहेगा। रिश्तों में भरोसा और निरंतरता बनाए रखना जरूरी होगा।

लकी नंबर: 5, 4
लकी रंग: हरा, ग्रे
क्या न करें: जल्दी आगे बढ़ने की कोशिश में जरूरी बातों और काम की बारीकियों को नजरअंदाज न करें।

मूलांक 6: दूसरों के साथ खुद के लिए भी समय निकालें

आज परिवार और लंबे समय से जुड़ी जिम्मेदारियां आपके लिए प्राथमिकता बन सकती हैं। घर की व्यवस्था सुधारने और योजनाबद्ध तरीके से काम करने में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि लगातार दूसरों की जिम्मेदारियां उठाने से मानसिक थकान हो सकती है। इसलिए अपने लिए भी कुछ समय निकालना जरूरी है।

परिवार में किसी विवाद या समस्या को सुलझाते समय प्यार, धैर्य और अनुशासन का संतुलन बनाए रखें।

लकी नंबर: 6, 4
लकी रंग: पिंक, ग्रे
क्या न करें: सभी जिम्मेदारियां अकेले उठाकर खुद को पूरी तरह न थकाएं।

मूलांक 7: तनाव और ज्यादा सोचने से बचें

आज गहराई से सोचने, तकनीकी काम करने और शांत मन से अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ने के लिए दिन उपयोगी हो सकता है। आपकी गंभीर सोच और आज की अनुशासित ऊर्जा का अच्छा तालमेल बन सकता है। हालांकि जरूरत से ज्यादा सोचने से मानसिक थकान हो सकती है। स्क्रीन से कुछ समय दूर रहना और खुद को आराम देना फायदेमंद रहेगा।

रिश्तों में किसी गलतफहमी को दूर करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं।

लकी नंबर: 7, 4
लकी रंग: इंडिगो, ग्रे
क्या न करें: किसी गलतफहमी के कारण खुद में सिमटने के बजाय जरूरी बातचीत जरूर करें।

मूलांक 8: अनुशासन और मेहनत से लाभ

करियर और आर्थिक योजनाओं के लिए आज का दिन उपयोगी रह सकता है। आपकी मेहनत और अनुशासन बड़े पेशेवर या वित्तीय फैसलों में मदद कर सकते हैं। हालांकि लगातार बैठकों और काम के दबाव से मानसिक तनाव हो सकता है। बीच में थोड़ा टहलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहतर रहेगा।

काम के साथ-साथ परिवार और करीबी लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें।

लकी नंबर: 8, 4
लकी रंग: नेवी ब्लू, ग्रे
क्या न करें: काम की उपलब्धियों में इतना व्यस्त न हों कि रिश्तों और भावनाओं को नजरअंदाज कर दें।

मूलांक 9: मेहनत और धैर्य से मिलेगा परिणाम

मूलांक 9 वालों के लिए आज का दिन जोश को नियंत्रित रखते हुए अधूरे या अटके हुए काम पूरे करने का संकेत देता है। किसी भी मामले में जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य और नियम के साथ आगे बढ़ना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

काम की धीमी प्रगति आपको थोड़ी बेचैनी या झुंझलाहट दे सकती है, लेकिन इस स्थिति में धैर्य बनाए रखना जरूरी है। टहलना या शारीरिक गतिविधि मन को शांत करने में मदद कर सकती है। हर चीज को तुरंत ठीक करने की कोशिश या जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें।

लकी नंबर: 9, 4
लकी रंग: लाल, ग्रे
क्या न करें: हर समस्या का समाधान तुरंत निकालने की जिद न करें और जल्दबाजी से बचें।

4 अगस्त का संदेश

4 अगस्त का अंक ज्योतिष यही संकेत देता है कि आज सफलता की कुंजी अनुशासन, धैर्य, योजना और निरंतर मेहनत में छिपी है। खासकर मूलांक 4 और 9 वालों के लिए अपनी मेहनत को सही दिशा में लगाने का दिन है। हालांकि सभी मूलांक वालों को काम के साथ-साथ आराम, परिवार और रिश्तों के लिए भी संतुलित समय देना चाहिए।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Nag Panchami 2026: नाग पूजा की विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व जानें, कालसर्प दोष से जुड़े उपाय भी

Nag Panchami 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी दौरान नाग देवता की पूजा से जुड़ी परंपराएं भी अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। 3 अगस्त 2026 को सावन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है और बिहार, बंगाल, राजस्थान तथा ओडिशा समेत कुछ क्षेत्रों में इस दिन नाग पूजा की परंपरा का उल्लेख मिलता है। पंचांग के अनुसार 3 अगस्त को कृष्ण पक्ष पंचमी है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उत्तर भारत में प्रचलित सावन शुक्ल पंचमी वाली नाग पंचमी 2026 में 17 अगस्त को पड़ रही है। इसलिए नाग पंचमी की तारीख क्षेत्र और पंचांग परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा, नाग-नागिन की आकृति बनाने, घर के मुख्य द्वार पर चित्र उकेरने और धान, धान का लावा, दूर्वा आदि अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यताओं में नाग पूजा को परिवार की सुख-समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना से जोड़ा गया है। नाग पंचमी पर नाग पूजा क्यों की जाती है? हिंदू धार्मिक परंपरा में नाग देवताओं का संबंध भगवान शिव से भी माना जाता है। शिवजी के गले में नाग का विराजमान होना नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। इसी कारण सावन के दौरान नाग देवता की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। कई क्षेत्रों में नाग पंचमी के दिन मिट्टी या गोबर से नाग-नागिन की आकृतियां बनाई जाती हैं। घर के मुख्य द्वार पर नागों के चित्र बनाए जाते हैं और धान, धान का लावा, दूर्वा तथा अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है और सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है। नाग पंचमी की कथा: राजा जनमेजय और आस्तिक मुनि नाग पंचमी से जुड़ी एक प्रमुख धार्मिक कथा राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय और आस्तिक मुनि से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पदंश से हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र राजा जनमेजय ने नागों का अंत करने के उद्देश्य से एक विशाल नाग यज्ञ कराया। यज्ञ के दौरान बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे। इसी समय आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोकने का प्रयास किया। धार्मिक कथा के अनुसार, उनके हस्तक्षेप के बाद नाग यज्ञ को रोक दिया गया और नागों की रक्षा हुई। कथा में आगे बताया जाता है कि नागों ने आस्तिक मुनि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह वरदान दिया कि सावन की पंचमी तिथि पर जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक नाग देवता की पूजा करेगा, उसके परिवार को नागवंश के भय से सुरक्षा मिलेगी। इसी कथा को नाग पंचमी की धार्मिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। नाग पंचमी पूजा की विधि नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या मिट्टी से बनाई गई नाग-नागिन की आकृति स्थापित की जाती है। पूजा में क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार धान, धान का लावा, दूर्वा, पुष्प और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। भगवान शिव की पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण किया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। महत्वपूर्ण सावधानी: जीवित सांपों को पकड़कर या उनके सामने सीधे दूध रखने की कोशिश न करें। सांपों को दूध पिलाना उनके लिए प्राकृतिक या आवश्यक आहार नहीं है और इससे उन्हें नुकसान हो सकता है। नाग पूजा के लिए प्रतिमा, चित्र या प्रतीकात्मक पूजा करना अधिक सुरक्षित है। नाग पंचमी का नाग गायत्री मंत्र नाग पूजा में नाग गायत्री मंत्र के जाप की परंपरा भी बताई जाती है: “ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।” धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का 108 बार जाप किया जा सकता है। कुछ परंपराओं में शिवलिंग पर विराजमान नाग देवता का ध्यान करते हुए इस मंत्र के साथ पूजा की जाती है। आस्तिक मुनि का मंत्र नाग पंचमी पर आस्तिक मुनि का स्मरण करने की भी परंपरा है। “ॐ आस्तिक मुनिभ्यो नमः।” मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का जाप नाग देवता और आस्तिक मुनि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए किया जाता है। कुछ परंपराओं में इसे घर के मुख्य द्वार से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान में भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, किसी मंत्र के जाप से वास्तविक रूप से सांपों का घर में प्रवेश रुकने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सर्प भय से मुक्ति के लिए मंत्र नाग पंचमी से जुड़ी परंपराओं में एक अन्य मंत्र का भी उल्लेख मिलता है: “सर्पापसर्प भद्रं ते गच्छ सर्प महाविष। जनमेजयस्य यज्ञान्ते आस्तीकवचनं स्मर॥” धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जाप से सर्प भय से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है और आस्तिक मुनि की कथा का स्मरण किया जाता है। नाग पंचमी और कालसर्प दोष ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को कालसर्प दोष और नाग दोष से जुड़े धार्मिक उपायों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में ऐसे योग बताए जाते हैं, वे इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करते हैं। हालांकि, कालसर्प दोष और उससे जुड़े प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारण या उपचार नहीं माना जाता। इसलिए पूजा को आस्था और धार्मिक परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। नाग पंचमी पर दूध और धान का लावा चढ़ाने की मान्यता धार्मिक परंपराओं में नाग देवता को दूध और धान का लावा अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और नाग भय से सुरक्षा की कामना पूरी होती है। लेकिन पूजा के लिए जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या प्रतीकात्मक रूप से पूजन करना चाहिए। नाग पंचमी का धार्मिक महत्व नाग पंचमी केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़ा हुआ है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में सांपों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और भगवान शिव के साथ उनका संबंध विशेष रूप से देखा जाता है। इस पर्व का संदेश यह भी माना जा सकता है कि मनुष्य को प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ संतुलन बनाकर रहना चाहिए। नाग पंचमी पर क्या करें? स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक नाग देवता की पूजा करें। भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करें। नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर पारंपरिक पूजन सामग्री अर्पित करें। नाग गायत्री मंत्र या आस्तिक मुनि मंत्र का जाप करें। परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। जीवित सांपों को पकड़ने, छेड़ने या दूध पिलाने से बचें।

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राम मंदिर चढ़ावा
राम मंदिर में फिर बढ़ा सोने-चांदी का चढ़ावा, 10 दिनों में मिला करीब 1 किलो सोना

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में एक बार फिर सोने-चांदी के चढ़ावे में तेजी देखने को मिल रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में श्रद्धालुओं ने करीब एक किलोग्राम सोना और लगभग तीन किलोग्राम चांदी दान स्वरूप अर्पित की है। सावन माह में दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ नकद दान के अलावा आभूषण, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का चढ़ावा भी लगातार बढ़ रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, प्राप्त सभी दान का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों के तहत उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जा रहा है। इसके बाद ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार धातुओं की शुद्धता की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।   चोरी की घटना के बाद लौटा श्रद्धालुओं का भरोसा, झूलनोत्सव की तैयारियां तेज   राम मंदिर में कुछ समय पहले हुई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सोने-चांदी के दान में कमी आई थी, लेकिन अब सावन के दौरान श्रद्धालुओं का भरोसा फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को करीब 75 हजार, गुरुवार को सवा लाख और शुक्रवार को लगभग 80 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इसी दौरान कर्नाटक के एक श्रद्धालु ने 600 ग्राम चांदी का हार भेंट किया, जबकि अन्य श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के दान किए।   17 अगस्त को स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला   राम मंदिर ट्रस्ट ने सावन उत्सव और झूलनोत्सव की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। सावन शुक्ल पंचमी यानी 17 अगस्त को रामलला को स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इसके लिए धर्म समिति विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर रही है, जिसमें प्रतिदिन झूला दर्शन, भजन, कजरी और अन्य धार्मिक आयोजन शामिल होंगे। 15 अगस्त से मणि पर्वत पर पारंपरिक झूलनोत्सव की शुरुआत होगी, जबकि मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है। ट्रस्ट के पदाधिकारी और संत आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।    

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
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