नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट री-एग्जाम को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है, जहां आज इस पर अहम सुनवाई होनी है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर चल रहा तनाव अब शिक्षा जगत से निकलकर डिजिटल दुनिया की दहलीज तक पहुंच गया है। नीट री-एग्जाम के दौरान किसी भी तरह की धांधली और पेपर लीक जैसी अफवाहों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त कदम उठाते हुए लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले ने टेक जगत में खलबली मचा दी है।
सरकारी आदेश के जारी होते ही इस प्रतिबंध का व्यापक असर दिखने लगा है। टेक दिग्गज गूगल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारत में अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम ऐप को हटा दिया है, जबकि एप्पल भी जल्द ही अपने ऐप स्टोर से इसे ब्लॉक करने की तैयारी में है। सरकार का इस बैन के पीछे स्पष्ट तर्क है कि परीक्षा जैसे अत्यधिक संवेदनशील समय में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल फर्जी प्रश्न पत्र और भ्रामक जानकारियां तेजी से फैलाने के लिए किया जाता है। ऐसे में परीक्षा को बिना किसी रुकावट और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए इस तरह का 'डिजिटल ब्लैकआउट' एक जरूरी एहतियाती कदम है।
दूसरी ओर, सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ टेलीग्राम ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना है। कंपनी ने इस अस्थायी बैन को चुनौती देने के लिए सीधे दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। टेलीग्राम प्रबंधन का तर्क है कि इस फैसले के कारण भारत में मौजूद उसके करोड़ों सामान्य यूज़र्स को बेवजह भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐप का दावा है कि एक विशिष्ट परीक्षा के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को बंद कर देना करोड़ों लोगों के संचार माध्यम को बाधित करने जैसा है।
मामले की गंभीरता और करोड़ों यूज़र्स के हितों के टकराव को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर त्वरित सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। बुधवार, 17 जून 2026 को अदालत इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अपना रुख स्पष्ट करेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायालय परीक्षा की शुचिता बनाए रखने की सरकारी चिंता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन अधिकारों के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
यूपीएससी 2025 के नतीजों में पंजाब की बेटियों के शानदार प्रदर्शन ने राज्य में चल रहे बुनियादी शैक्षिक सुधारों और नई शिक्षण विधियों की सफलता पर मुहर लगा दी है। नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 के नतीजों में पंजाब के युवाओं, विशेषकर बेटियों के बेहतरीन प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा है। यह सफलता केवल छात्रों की व्यक्तिगत कड़ी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था में जमीनी स्तर पर आ रहे एक बड़े बदलाव का सीधा रिफ्लेक्शन है। पंजाब के सरकारी स्कूल अब एक नए दौर से गुजर रहे हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर पढ़ाने के तरीकों तक में बड़े पैमाने पर सुधार किए जा रहे हैं। दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच एक गहरी खाई रही है, जिसके कारण गांव के बच्चे अक्सर पिछड़ जाते थे। लेकिन अब यह खाई तेजी से पट रही है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 99.9 प्रतिशत सार्वजनिक स्कूलों का विद्युतीकरण (Electrification) पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों को आधुनिक 'स्मार्ट क्लासरूम' में तब्दील कर दिया गया है। इन बुनियादी सुविधाओं ने सरकारी स्कूलों के छात्रों को निजी स्कूलों के बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बना दिया है। बुनियादी ढांचे के अलावा, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सबसे बड़ा कदम प्राथमिक स्तर पर उठाया गया है। इसके लिए 'मिशन समर्थ' (Mission Samarth) की शुरुआत की गई है, जो पूरी तरह से कौशल-आधारित शिक्षा (Skills-based education) पर केंद्रित है। इस मिशन के तहत TaRL (Teaching at Right Level) पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि शिक्षक पहले छात्रों की सीखने की क्षमता और उनके वर्तमान स्तर का मूल्यांकन करते हैं, और फिर उसी स्तर के अनुसार उन्हें शिक्षा और सपोर्ट दिया जाता है। इस वैज्ञानिक तरीके से यह सुनिश्चित हो रहा है कि क्लास में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे न रहे। इन्हीं मजबूत नींव का असर अब देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में देखने को मिल रहा है। लड़कियों का इन परीक्षाओं में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करना यह साबित करता है कि जब समान अवसर मिलते हैं, तो प्रतिभा किसी भी जेंडर या पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यूपीएससी के सफल उम्मीदवारों को बधाई देते हुए इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों की यह सफलता वास्तविक महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। सरकार की प्राथमिकता अब स्पष्ट है—शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा बेहतरीन माहौल तैयार करना जहां समाज के हर तबके के बच्चे को आगे बढ़ने का समान और निष्पक्ष मौका मिल सके। प्राथमिक शिक्षा से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक का यह सफर एक सशक्त और समृद्ध पंजाब के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। 22 जून से शुरू होने जा रही यूजीसी नेट परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। कंप्यूटर आधारित इस परीक्षा के लिए अपना एप्लीकेशन नंबर डालकर उम्मीदवार तुरंत अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) का लक्ष्य लेकर चल रहे देश भर के लाखों युवाओं का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आगामी यूजीसी नेट जून 2026 (UGC NET June 2026) परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिए हैं। ऐसे में अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए उम्मीदवारों को जल्द से जल्द अपना प्रवेश पत्र प्राप्त कर लेना चाहिए। क्या है परीक्षा का शेड्यूल और टाइमिंग? NTA के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस महत्वपूर्ण परीक्षा का आयोजन 22, 23, 24, 25, 29 और 30 जून 2026 को किया जाएगा। यह परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में होगी, जिसके लिए देश भर में कई परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। भीड़ प्रबंधन और सुचारू संचालन के लिए परीक्षा को हर दिन दो पालियों (शिफ्ट) में बांटा गया है: पहली पाली: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक। दूसरी पाली: दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक। कैसे करें अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड? NTA ने प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की प्रक्रिया को बेहद आसान रखा है। उम्मीदवार इन सरल चरणों का पालन करके अपना हॉल टिकट प्राप्त कर सकते हैं: सबसे पहले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर विजिट करें। मुख्य पृष्ठ (होमपेज) पर ही आपको 'UGC NET Admit Card 2026' का लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें। अब जो नया पेज खुलेगा, वहां अपना एप्लीकेशन नंबर और मांगे गए अन्य लॉगिन विवरण सावधानीपूर्वक भरें। जानकारी सबमिट करते ही एडमिट कार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। इसे डाउनलोड कर लें और एक साफ प्रिंटआउट निकाल लें। इन बातों का रखें विशेष ध्यान प्रवेश पत्र हाथ में आने के बाद सबसे पहला काम उसमें दर्ज अपनी निजी जानकारियों को क्रॉस-चेक करना है। अपना नाम, फोटो, परीक्षा की तारीख, शिफ्ट का समय और परीक्षा केंद्र की सही लोकेशन जरूर जांच लें। साथ ही, परीक्षा वाले दिन केंद्र पर अपने एडमिट कार्ड के प्रिंटेड कॉपी के साथ भारत सरकार द्वारा जारी एक वैध और मूल फोटो पहचान पत्र (जैसे- आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि) ले जाना बिल्कुल न भूलें। इन दस्तावेजों के बिना परीक्षा हॉल में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।
रांची। आरयू द्वारा स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2025-27 में नामांकन के लिए पहली सेलेक्शन लिस्ट 13 जून को जारी की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और नामांकन 15 से 23 जून तक होगा। इसके बाद दूसरी सेलेक्शन लिस्ट 25 जून को जारी की जाएगी।