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WB Madhyamik Result 2026 Announced

WB Board 10th Result 2026 Out:86.83% छात्र पास, अभिरूप भद्रा बने टॉपर

surbhi मई 8, 2026 0
West Bengal Madhyamik Result 2026 declared with Abhirup Bhadra securing top rank in board exams
WB Madhyamik Result 2026 Topper List

पश्चिम बंगाल बोर्ड ने जारी किया 10वीं का रिजल्ट

(WBBSE) ने माध्यमिक यानी 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से परिणाम घोषित किए। इस साल कुल 86.83 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं।

करीब 9 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार था, जो अब खत्म हो गया है। छात्र सुबह 10:15 बजे से आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।

अभिरूप भद्रा ने किया टॉप

इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभिरूप भद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.71 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स की सूची में कई छात्रों ने बेहतरीन अंक दर्ज किए हैं।

WB Madhyamik Result 2026 टॉपर्स लिस्ट

रैंक

नाम

प्रतिशत

1

अभिरूप भद्रा

99.71%

2

प्रियतोष मुखर्जी

99.43%

3

सौर्य जाना

99.29%

3

अंकन कुमार जाना

99.29%

3

मैनाक मंडल

99.29%

4

अरिजीत कर

99.14%

इन वेबसाइट्स पर देखें रिजल्ट

छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं:

ऐसे करें WB Board 10th Result 2026 चेक

  1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

  2. “WB Madhyamik Result 2026” लिंक पर क्लिक करें।

  3. अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें।

  4. सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

  5. मार्कशीट डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें।

कब मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट?

बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रिजल्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद छात्रों को उनकी स्कूलों के माध्यम से ओरिजिनल मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। आगे की पढ़ाई और एडमिशन प्रक्रिया के लिए यह मार्कशीट बेहद जरूरी होगी।

फरवरी में हुई थी परीक्षा

पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा 2026 का आयोजन 2 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक किया गया था। परीक्षा ऑफलाइन मोड में एक ही शिफ्ट में सुबह 10:45 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई थी।

इस वर्ष राज्यभर के 2,682 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 9.71 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें 5.44 लाख छात्राएं, 4.26 लाख छात्र और एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार शामिल थे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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NEET-UG 2026: नीट परीक्षा की नई तारीख घोषित, अब 21 जून को होगा एग्जाम

देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। National Testing Agency ने NEET-UG 2026 परीक्षा की नई तारीख का एलान कर दिया है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक की आशंका और गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। एनटीए ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए छात्रों को किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी। नई परीक्षा तारीख और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा फैसला NEET-UG परीक्षा इस बार पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार विवादों में रही। कई राज्यों से परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई। मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। शिक्षा मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। मेडिकल प्रवेश के लिए अहम परीक्षा NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए MBBS, BDS समेत कई मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला दिया जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। अब नई तारीख घोषित होने के बाद छात्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। एनटीए ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।  

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18 लाख से ज्यादा छात्रों को रिजल्ट का इंतजार Central Board of Secondary Education यानी CBSE आज Class 12 बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर सकता है। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी तक रिजल्ट की तारीख और समय को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए आज रिजल्ट आने की संभावना जताई जा रही है। बीते दो वर्षों यानी 2024 और 2025 में भी CBSE ने 13 मई को ही 12वीं का रिजल्ट जारी किया था। ऐसे में इस बार भी लाखों छात्रों की नजरें रिजल्ट पर टिकी हुई हैं। DigiLocker और UMANG पर दिखा “Coming Soon” रिपोर्ट्स के मुताबिक DigiLocker और UMANG App पर CBSE Class 12 Result 2026 के लिए “Coming Soon” नोटिफिकेशन दिखाई देने लगा है। इससे यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि रिजल्ट कभी भी जारी किया जा सकता है। इस साल करीब 18 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने CBSE Class 12 बोर्ड परीक्षा दी थी। यहां चेक कर सकेंगे CBSE 12वीं का रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र कई प्लेटफॉर्म पर अपना स्कोरकार्ड देख सकेंगे। आधिकारिक वेबसाइट CBSE Official Website CBSE Results Portal मोबाइल ऐप DigiLocker UMANG अन्य माध्यम SMS सेवा IVRS (Interactive Voice Response System) ऐसे डाउनलोड करें CBSE Class 12 Result 2026 सबसे पहले CBSE Results Portal पर जाएं। “CBSE Class 12 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड ID दर्ज करें। Submit बटन पर क्लिक करें। स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा। स्कोरकार्ड डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। फरवरी से अप्रैल तक हुई थीं परीक्षाएं Central Board of Secondary Education की Class 12 बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गई थीं। परीक्षा समाप्त होने के बाद कॉपियों का मूल्यांकन शुरू किया गया था और अब रिजल्ट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।  

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भूकंप की भाषा दुनिया को समझाने वाले वैज्ञानिक: जानिए चार्ल्स रिक्टर की प्रेरणादायक कहानी

कैसे एक खगोल वैज्ञानिक का सपना बना भूकंप विज्ञान की बड़ी खोज दुनिया में जब भी कहीं भूकंप आता है, उसकी तीव्रता मापने के लिए सबसे पहले जिस नाम का जिक्र होता है, वह है “रिक्टर स्केल”। इस पैमाने को विकसित करने वाले महान वैज्ञानिक थे Charles Francis Richter। उन्होंने जर्मन वैज्ञानिक Beno Gutenberg के साथ मिलकर 1935 में इस तकनीक को विकसित किया, जिसने भूकंप विज्ञान की दिशा ही बदल दी। आज पूरी दुनिया भूकंप की ताकत को समझने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चार्ल्स रिक्टर कभी खगोल वैज्ञानिक बनना चाहते थे। बचपन से विज्ञान में थी गहरी रुचि चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर का जन्म 26 अप्रैल 1900 को अमेरिका के ओहायो राज्य के ग्रामीण इलाके हैमिल्टन में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए, जिसके बाद उनका परिवार कैलिफोर्निया चला गया। विज्ञान और गणित में उनकी रुचि शुरू से ही काफी गहरी थी। उन्होंने Stanford University से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद California Institute of Technology से सैद्धांतिक भौतिकी में पीएचडी हासिल की। खगोल विज्ञान से सीस्मोलॉजी तक का सफर रिक्टर का सपना अंतरिक्ष और तारों का अध्ययन करने का था, लेकिन किस्मत उन्हें भूकंप विज्ञान यानी सीस्मोलॉजी की दुनिया में ले आई। कैल्टेक की सिस्मोलॉजिकल लैब में काम करते समय उन्होंने भूकंप की तरंगों और उनके पैटर्न का अध्ययन शुरू किया। उस दौर में भूकंप की तीव्रता को “मरकाली स्केल” से समझा जाता था, जिसमें लोगों द्वारा महसूस किए गए झटकों और नुकसान के आधार पर आंकलन किया जाता था। रिक्टर को यह तरीका पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं लगा। वे चाहते थे कि भूकंप को ऊर्जा के आधार पर मापा जाए, ठीक वैसे ही जैसे किसी वस्तु का वजन किया जाता है। यही सोच आगे चलकर रिक्टर स्केल की नींव बनी। 1935 में दुनिया को मिला रिक्टर स्केल साल 1935 में चार्ल्स रिक्टर और बेनो गुटेनबर्ग ने मिलकर “रिक्टर स्केल” विकसित किया। इस स्केल ने पहली बार वैज्ञानिक तरीके से भूकंप की तीव्रता मापने का रास्ता तैयार किया। इस खोज के बाद दुनियाभर में भूकंप मापने की प्रक्रिया अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई। रिक्टर स्केल ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि किसी भूकंप में कितनी ऊर्जा निकलती है और उसका प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है। आपदा प्रबंधन में भी दिया बड़ा योगदान चार्ल्स रिक्टर सिर्फ वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने भूकंप से बचाव के लिए मजबूत बिल्डिंग कोड और आपदा तैयारी पर भी जोर दिया। उन्होंने “Seismicity of the Earth” और “Elementary Seismology” जैसी महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, जो आज भी भूकंप विज्ञान के क्षेत्र में अहम मानी जाती हैं। अपने ही नाम से दूरी बनाते थे रिक्टर दिलचस्प बात यह है कि पूरी दुनिया जिस “रिक्टर स्केल” के नाम से उन्हें याद करती है, खुद चार्ल्स रिक्टर इस नाम से ज्यादा सहज नहीं थे। वे हमेशा अपने सहयोगी बेनो गुटेनबर्ग का जिक्र करते थे और कहते थे कि यह खोज केवल उनकी अकेली मेहनत का परिणाम नहीं थी। विज्ञान की दुनिया में अमर हो गया नाम चार्ल्स रिक्टर का निधन 30 सितंबर 1985 को हुआ, लेकिन उनकी खोज आज भी दुनिया को भूकंप की ताकत समझाने का सबसे बड़ा माध्यम बनी हुई है। उनके सम्मान में Seismological Society of America ने युवा वैज्ञानिकों के लिए “Charles Richter Early Career Award” भी शुरू किया, ताकि नई पीढ़ी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।  

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