एंटरटेनमेंट

Abhijeet Revisits Rift With SRK

“शाहरुख का अहंकार और मेरा आत्मसम्मान”: अभिजीत भट्टाचार्य का फिर छलका दर्द, बोले– माफी से सुलझ सकती थी बात

surbhi मई 2, 2026 0
Abhijeet Bhattacharya speaks about his fallout with Shah Rukh Khan during a recent podcast interview
Abhijeet Bhattacharya On Shah Rukh Khan Rift

बॉलीवुड के चर्चित सिंगर Abhijeet Bhattacharya ने एक बार फिर सुपरस्टार Shah Rukh Khan के साथ अपने रिश्तों पर खुलकर बात की है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने दोनों के बीच वर्षों पुराने मनमुटाव की वजह ‘अहंकार’ और ‘आत्मसम्मान’ को बताया और कहा कि एक छोटी सी पहल से यह विवाद खत्म हो सकता था।

“माफी मांग लेते तो सब ठीक हो जाता”

अभिजीत ने कहा कि उनके और शाहरुख के बीच दूरी की सबसे बड़ी वजह यह रही कि अभिनेता ने कभी माफी नहीं मांगी।
उनके शब्दों में, “शाहरुख का अहंकार और मेरा आत्मसम्मान– यही हमारे बीच दरार की वजह बने। अगर उन्होंने एक बार माफी मांग ली होती, तो शायद सब ठीक हो जाता।”

पुराने रिश्तों की मिसाल दी

सिंगर ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कई बार लोग आपसी मतभेदों के बावजूद रिश्ते बनाए रखते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए Aamir Khan का जिक्र किया और कहा कि मतभेद होने के बावजूद रिश्ते निभाए जा सकते हैं।

भावनात्मक जुड़ाव की बात

अभिजीत ने बताया कि उन्होंने सिर्फ शाहरुख ही नहीं, बल्कि कई अन्य एक्टर्स के लिए भी गाना गाना कम कर दिया था, क्योंकि उनकी आवाज पर्दे पर शाहरुख की छवि से गहराई से जुड़ गई थी। यह रिश्ता उनके लिए सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था।

“छोटी कोशिश से खत्म हो सकता था तनाव”

उन्होंने कहा कि शाहरुख के आसपास होने के बावजूद उन्हें कई बार अलग-थलग महसूस होता था। उनके मुताबिक, “अगर शाहरुख एक छोटी सी कोशिश कर लेते, तो हमारे बीच का तनाव खत्म हो सकता था।”

सुलह की संभावना पर क्या बोले?

हालांकि सिंगर ने पूरी तरह से सुलह की संभावना को खारिज नहीं किया, लेकिन यह भी साफ किया कि अब उनके बीच पहले जैसा रिश्ता नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में कभी-कभार औपचारिक बातचीत के अलावा अब कोई खास संपर्क नहीं है।

शाहरुख की फिल्मों में अभिजीत की पहचान

एक दौर था जब अभिजीत भट्टाचार्य की आवाज Baadshah और Main Hoon Na जैसी फिल्मों में शाहरुख खान की पहचान बन चुकी थी। उनके गाए कई गाने आज भी फैंस के बीच लोकप्रिय हैं।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

एंटरटेनमेंट

View more
Ramayana
‘रामायण’ में रणबीर कपूर की कास्टिंग पर रामानंद सागर के पोते ने जताई आपत्ति, बोले- ‘राम के लिए नया चेहरा बेहतर’

मुंबई, एजेंसियां। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ रिलीज से पहले ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। अब रामानंद सागर की चर्चित टीवी सीरीज ‘रामायण’ से जुड़े परिवार के सदस्य और उनके पोते शिव सागर ने रणबीर की कास्टिंग को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम जैसे किरदार के लिए किसी नए चेहरे को लेना ज्यादा उपयुक्त हो सकता था।   ‘एनिमल’ की छवि को लेकर थी चिंता   शिव सागर ने बताया कि वह फिल्म की कास्टिंग को लेकर पूरी तरह नकारात्मक नहीं हैं, लेकिन रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में चुने जाने को लेकर उनके मन में शुरुआत में कुछ संदेह था। इसकी बड़ी वजह रणबीर की फिल्म ‘एनिमल’ से बनी छवि बताई गई।   उनके मुताबिक, भगवान राम का किरदार भारतीय दर्शकों के लिए बेहद आदर्श और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अभिनेता की पिछली भूमिकाओं की छवि इस किरदार को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से वह मानते हैं कि ऐसे किरदार के लिए किसी नए और अपेक्षाकृत अनजान चेहरे को चुनना बेहतर विकल्प हो सकता था।   ‘राम’ के लिए नया चेहरा क्यों बेहतर?   शिव सागर की राय है कि भगवान राम जैसे किरदार के लिए दर्शकों के मन में अभिनेता की कोई पुरानी छवि नहीं होनी चाहिए। नए चेहरे के साथ दर्शक अभिनेता को उसके पुराने किरदारों से जोड़ने के बजाय सीधे राम के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।   हालांकि, उन्होंने रणबीर कपूर की अभिनय क्षमता को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से अभिनेता की पिछली फिल्मों से बनी सार्वजनिक छवि और भगवान राम के आदर्श स्वरूप के बीच संभावित अंतर को लेकर है।   फिल्म को लेकर बढ़ी उम्मीदें   नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी, यश और सनी देओल जैसे बड़े कलाकार भी नजर आएंगे। यश फिल्म में रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद इसके कलाकारों और भव्य प्रस्तुति को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा और तेज हो गई है।   दिलचस्प बात यह है कि रामानंद सागर की मूल ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल इस नई फिल्म में राजा दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। वहीं उन्होंने पहले रणबीर कपूर की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्हें अभिनेता पर पूरा भरोसा है और वह अपनी भूमिका के लिए पूरी मेहनत करेंगे।   ऐसे में शिव सागर की टिप्पणी के बाद ‘रामायण’ में रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में देखने को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बहस दोनों बढ़ गई हैं।

abhishek singh अगस्त 4, 2026 0
सलमान खान ने जेल में बिताए दिनों को किया याद

सलमान खान ने याद किए जेल के दिन, बोले- ‘वहां हर दिन एक सबक जैसा था’

फिल्म इंडस्ट्री में 45 साल पूरे होने पर संजय दत्त

फिल्म इंडस्ट्री में 45 साल पूरे होने पर संजय दत्त का छलका दर्द, बोले- पहले बॉलीवुड में था परिवार जैसा माहौल

Gatta Kusthi 2

नेटफ्लिक्स पर आते ही नंबर-1 बनी ‘गट्टा कुश्ती 2’, 350 करोड़ की ‘पेद्दी’ को छोड़ा पीछे

गुरु रंधावा ने असम बाढ़ राहत के लिए आर्थिक सहायता दी
गुरु रंधावा ने असम बाढ़ राहत के लिए दिए 5 लाख रुपये, लोगों से मदद की अपील

गुवाहाटी, एजेंसियां। असम में बाढ़ से मची तबाही के बीच पंजाबी गायक और संगीतकार गुरु रंधावा ने मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत और बचाव कार्यों के लिए अपनी निजी निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की है। गुरु रंधावा की इस पहल के बाद उनकी सोशल मीडिया पर भी सराहना हो रही है।   राहत कार्यों के लिए आगे आए गुरु रंधावा     रिपोर्टों के अनुसार, गुरु रंधावा ने यह राशि ऊपरी असम में चल रहे राहत कार्यों के लिए देने का फैसला किया है। उनका योगदान असम के डिजिटल क्रिएटर दिम्पू बरुआ के माध्यम से राहत कार्यों तक पहुंचाया जा रहा है। दिम्पू बरुआ ‘हेलो लाइफ फाउंडेशन’ के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत अभियान चला रहे हैं।   बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, जरूरी सामान और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं।   लोगों से भी मदद के लिए की अपील     गुरु रंधावा ने अपनी ओर से आर्थिक मदद देने के साथ ही देश के लोगों से भी असम के बाढ़ पीड़ितों के समर्थन में आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए और उनकी मदद के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।   उनकी अपील ऐसे समय में सामने आई है, जब असम के कई हिस्सों में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राहत अभियान में आम लोगों के साथ-साथ मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी अपना योगदान दे रही हैं।   असम में जारी है राहत और बचाव अभियान     असम में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं। ऊपरी असम के कई जिलों में बाढ़ ने घरों, सड़कों और लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में राहत संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।   गुरु रंधावा की 5 लाख रुपये की सहायता इसी राहत अभियान का हिस्सा है। उनके इस कदम से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ ही लोगों में राहत कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Harshad Chopda Shivangi Joshi

‘लॉक अप 2’ से हर्षद चोपड़ा हुए बाहर, शिवांगी जोशी के साथ दोस्ती ने बटोरी खूब सुर्खियां

सलमान खान ने 16 किलो वजन घटाने का खुलासा किया

सलमान खान ने 16 किलो घटाया वजन, वायरल वीडियो के बाद सेहत को लेकर उठी चिंताओं पर दिया जवाब

Imran Khan

इमरान खान ने 10 साल बाद फिल्मों में वापसी का किया ऐलान, Netflix की रोमांटिक-कॉमेडी में आएंगे नजर

AI डीपफेक पर प्रतिक्रिया देतीं अभिनेत्री मृणाल ठाकुर
AI डीपफेक पर भड़कीं मृणाल ठाकुर, पहचान के गलत इस्तेमाल पर दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बनाए जा रहे डीपफेक कंटेंट पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी तस्वीर, चेहरा या पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करना गैर-कानूनी है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।   इंस्टाग्राम पर जारी की चेतावनी     मृणाल ठाकुर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि उनकी शक्ल का इस्तेमाल कर डीपफेक कंटेंट बनाना या साझा करना पूरी तरह अस्वीकार्य और कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसे उनकी ओर से औपचारिक कानूनी नोटिस माना जाए और भविष्य में उनकी पहचान का किसी भी तरह गलत इस्तेमाल हुआ तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।     बढ़ रही है डीपफेक को लेकर चिंता     AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक वीडियो, फर्जी तस्वीरें और पहचान के दुरुपयोग के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसे लेकर मनोरंजन जगत में भी चिंता बढ़ी है और कई कलाकार अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपना रहे हैं।     कई सितारे पहले भी उठा चुके हैं आवाज     मृणाल ठाकुर से पहले अक्षय कुमार, वरुण धवन, अनिल कपूर, शिल्पा शेट्टी, प्रीति जिंटा, कार्तिक आर्यन, सुनील शेट्टी और श्रुति हासन सहित कई फिल्मी हस्तियां डीपफेक और AI से बने फर्जी कंटेंट के खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं। कुछ कलाकारों ने अपनी छवि और व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालत का भी रुख किया है।     वर्कफ्रंट     मृणाल ठाकुर हाल ही में 'डकैत' और 'है जवानी तो इश्क होना है' जैसी फिल्मों में नजर आईं। फिलहाल वह निर्देशक एटली की आगामी एक्शन फिल्म 'राका' से जुड़ी हैं, जिसमें अल्लू अर्जुन, दीपिका पादुकोण और रश्मिका मंदाना भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म के दिसंबर 2027 में रिलीज होने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Ramayan Costumes

‘रामायण’ के कॉस्ट्यूम पर विवाद, डिजाइनरों ने आलोचना पर दी सफाई

Aishwarya Rai Bachchan

ऐश्वर्या राय बच्चन की 7,000 मोतियों वाली अनदेखी कान्स ड्रेस की तस्वीरें वायरल

Guru Randhawa donates ₹5 lakh to support Assam flood victims and relief efforts

असम बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए गुरु रंधावा, राहत के लिए दिए 5 लाख रुपये

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?