बॉलीवुड अभिनेता Ranveer Singh की बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhurandhar: The Revenge रिलीज़ से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत करती दिखाई दे रही है। फिल्म के पेड प्रीव्यू शो के लिए एडवांस बुकिंग में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक देशभर में इसके प्रीमियर शो के लिए लाखों टिकट बिक चुके हैं और फिल्म ने करोड़ों रुपये की कमाई कर ली है।
निर्देशक Aditya Dhar के निर्देशन में बनी यह स्पाई-थ्रिलर फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है, जबकि इसके खास पेड प्रीव्यू शो 18 मार्च को आयोजित किए जाएंगे। इन विशेष शो के लिए टिकटों की बुकिंग 7 मार्च से शुरू हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने अब तक देशभर में 8,337 शो के लिए करीब 3.48 लाख टिकट बेच दिए हैं। इन पेड प्रीव्यू शोज़ से फिल्म ने लगभग 18.64 करोड़ रुपये की एडवांस कमाई कर ली है।
फिल्म का हिंदी वर्जन सबसे आगे चल रहा है, जिसने करीब 3.23 लाख टिकटों की बिक्री के साथ 18.16 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। वहीं हिंदी डॉल्बी सिनेमा फॉर्मेट से भी शुरुआती बुकिंग में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
यह फिल्म एक पैन-इंडिया रिलीज़ है और इसे हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज़ किया जा रहा है।
डब्ड वर्जनों की बात करें तो:
फिल्म की शुरुआती बुकिंग और ट्रेंड को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘धुरंधर 2’ पेड प्रीव्यू कलेक्शन के मौजूदा रिकॉर्ड को चुनौती दे सकती है। यह रिकॉर्ड फिलहाल Pawan Kalyan की फिल्म OG के नाम है, जिसने पेड प्रीव्यू से करीब 25 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
हिंदी बेल्ट में तेजी से बढ़ती एडवांस बुकिंग और विदेशों में भी मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया से उम्मीद जताई जा रही है कि यह फिल्म इस आंकड़े को पार कर सकती है।
फिल्म को लेकर नॉर्थ अमेरिका में भी दर्शकों का उत्साह देखने को मिल रहा है। वहां ओपनिंग डे के लिए एडवांस बुकिंग 1 मिलियन डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो किसी भी हिंदी फिल्म के लिए मजबूत शुरुआत मानी जाती है।
Dhurandhar: The Revenge में Ranveer Singh के अलावा Sanjay Dutt, Arjun Rampal और Sara Arjun अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिल्म में रणवीर सिंह अंडरकवर भारतीय एजेंट ‘जस्किरत सिंह रंगी’ की भूमिका निभा रहे हैं, जो हमज़ा अली मज़ारी नाम से दुश्मनों के बीच काम करता है। पहली फिल्म में गैंगस्टर रहमान डकैत की मौत के बाद हमज़ा लियारी का सबसे खतरनाक सरगना बन जाता है और भारत के खिलाफ कई हमलों से जुड़े आईएसआई प्रमुख मेजर इकबाल को निशाना बनाता है।
फिल्म की एडवांस बुकिंग और दर्शकों के उत्साह को देखते हुए ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि ‘धुरंधर 2’ इस साल की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल हो सकती है। अब सभी की नजरें 18 और 19 मार्च को होने वाले इसके प्रीव्यू और ओपनिंग डे कलेक्शन पर टिकी हुई हैं।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। कॉमेडियन सुनील पाल ने एक बार फिर ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में अपने अनुभव को लेकर बड़ा दावा किया है। हालिया बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि शो में उन्हें इस तरह पेश किया गया कि समय रैना को हीरो बनाया जा सके, जबकि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं थी कि एपिसोड में उनके साथ इस तरह का मजाक और रोस्टिंग होने वाली है। स्टैंड-अप के लिए तैयार होकर पहुंचे थे सुनील पाल सुनील पाल के मुताबिक, उन्हें लगा था कि कपिल शर्मा के शो में उन्हें पहले की तरह परफॉर्म करने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि उन्हें कहा गया था कि शो में उन्हें रहना है और समय रैना तथा रणवीर इलाहाबादिया भी वहां मौजूद रहेंगे। इसी वजह से उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी के लिए भी तैयारी की थी। लेकिन स्टेज पर पहुंचने के बाद उन्हें अपने एक्ट के लिए कोई खास मौका नहीं मिला। ‘मुझे लगा मेरे साथ गेम खेला गया’ सुनील पाल ने दावा किया कि उन्हें शो के पूरे फॉर्मेट की जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, उन्हें लगा कि बातचीत के दौरान एकतरफा तरीके से समय रैना को फायदा पहुंचाया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि शो में उनके कई जोक्स पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली जैसी वह उम्मीद कर रहे थे। अर्चना पूरन सिंह पर भी उठाए सवाल सुनील पाल ने दावा किया कि शो में अर्चना पूरन सिंह भी उनके जोक्स पर नहीं हंसीं। उन्होंने इस बात को अपने अनुभव से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि पूरा माहौल उनके खिलाफ था। हालांकि, ये सुनील पाल के आरोप और व्यक्तिगत अनुभव हैं; शो के निर्माताओं की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। समय रैना ने छुए थे पैर सुनील पाल ने यह भी बताया कि शो में आने से पहले समय रैना ने उनके पैर छुए थे। स्क्रीन पर दोनों के बीच बातचीत और मजाक देखने को मिला, लेकिन शो के बाद सुनील पाल ने अपने अनुभव को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें बाद में लगा कि उनके साथ ‘गेम’ खेला गया।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर चल रही लंबे समय की अटकलों के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सुनीता आहूजा ने बांद्रा फैमिली कोर्ट में दायर तलाक की याचिका वापस ले ली है। इस बात की पुष्टि गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने की है। करीब दो साल से चल रहा था मामला रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनीता आहूजा ने दिसंबर 2024 में गोविंदा के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। हालांकि, दोनों के रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं और मामला लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा। बेटे यशवर्धन के साथ कोर्ट पहुंची थीं सुनीता 19 अगस्त को सुनीता आहूजा अपने बेटे यशवर्धन आहूजा और वकील के साथ बांद्रा फैमिली कोर्ट पहुंची थीं। उनकी कोर्ट में मौजूदगी के बाद एक बार फिर तलाक की खबरों ने जोर पकड़ लिया। बाद में सामने आया कि वह नई याचिका दाखिल करने नहीं, बल्कि पहले से चल रहे तलाक मामले को वापस लेने के लिए कोर्ट गई थीं। गोविंदा के मैनेजर ने कहा- अब कोई अलगाव नहीं गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने बताया कि सुनीता ने तलाक का केस वापस ले लिया है और दोनों के बीच अब अलगाव नहीं है। उन्होंने इसे परिवार के लिए अच्छी खबर बताया, हालांकि इस निजी मामले के सार्वजनिक होने पर उन्होंने अफसोस भी जताया। हाल के विवादों के बाद आया फैसला सुनीता और गोविंदा के रिश्ते को लेकर हाल के महीनों में कई तरह की खबरें सामने आई थीं। सुनीता ने सार्वजनिक रूप से गोविंदा को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और उनके साथ एक अभिनेत्री की नजदीकियों पर भी सवाल उठाए थे। ऐसे माहौल के बीच तलाक की याचिका वापस लेने का फैसला दोनों के रिश्ते में नए मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में एक फार्म खरीदा है और इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी नई प्रॉपर्टी की झलक दिखाई, जिसमें वह फार्म पर बैठकर चाय और बिस्किट का आनंद लेते नजर आए। सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो वरुण धवन ने अपने नए फार्म का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में अभिनेता काफी सहज अंदाज में नजर आए। किसी आलीशान कार या महंगे घर की तस्वीर दिखाने के बजाय उन्होंने अपनी नई जमीन और वहां के शांत माहौल को प्रशंसकों के साथ साझा किया। इसे बताया जिंदगी की बड़ी उपलब्धि वरुण ने अपनी इस खरीदारी को खास बताते हुए इसे अपनी “सबसे बड़ी उपलब्धि” करार दिया। अभिनेता का यह अंदाज उनके प्रशंसकों को भी पसंद आया, क्योंकि उन्होंने अपनी नई संपत्ति को ग्लैमर से ज्यादा सुकून और प्रकृति से जोड़कर पेश किया। चाय-बिस्किट के साथ मनाया जश्न वीडियो में वरुण धवन अपने फार्म पर चाय और बिस्किट का आनंद लेते दिखाई दिए। उनका यह साधारण अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। अभिनेता ने अपनी नई उपलब्धि को किसी बड़े जश्न के बजाय बेहद सामान्य और व्यक्तिगत अंदाज में सेलिब्रेट किया। फिल्मों के साथ निजी जिंदगी में भी नया पड़ाव वरुण धवन इन दिनों अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में हैं। ऐसे समय में फार्म खरीदना उनकी निजी जिंदगी में एक नया पड़ाव माना जा रहा है। अभिनेता के इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि वह व्यस्त फिल्मी करियर के साथ प्रकृति और शांत माहौल के लिए भी अपनी जिंदगी में जगह बनाना चाहते हैं।