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Stock Market: शेयर बाजार की सुस्त शुरुआत, सेंसेक्स फिसला

anjali kumari जून 29, 2026 0
Stock Market
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मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 29 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त और मिले-जुले रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने के बाद बीएसई सेंसेक्स लाल निशान में फिसल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बने रहने में सफल रहा। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

 

सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 47.96 अंक यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 77,052.51 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 13.55 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 24,069.55 पर बना रहा। इस दौरान इटरनल और ट्रेंट के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए टॉप गेनर्स की सूची में जगह बनाई।

 

ईरान-अमेरिका तनाव का बाजार पर असर


बाजार की सुस्त शुरुआत के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव रहा। सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली। तेल महंगा होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसका असर घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दिया।

 

विशेषज्ञों का नजरिया अब भी सकारात्मक


हालांकि बाजार की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक और निकट अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के 24,000 के स्तर से ऊपर बने रहने की संभावना है। उनका मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और भारतीय रुपये में मजबूती बनी रहती है, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा।

 

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत


अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेत भी निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहे। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा। चीन का शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 भी बढ़त में कारोबार करते दिखे। वहीं, अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी मजबूती दर्ज की गई।

 

कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि यही बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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मुंबई, एजेंसियां। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।   AI मॉडल पर होगी सख्त निगरानी   प्रस्तावित नियमों के अनुसार, हर बैंक को AI और ML मॉडल के उपयोग के लिए एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। इस फ्रेमवर्क को बैंक के बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करनी होगी।   ग्राहक से जुड़े फैसलों में जरूरी होगी मानवीय निगरानी   RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि AI किसी ग्राहक से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, जैसे लोन मंजूरी या जोखिम मूल्यांकन, तो उस प्रक्रिया में मानवीय निगरानी भी अनिवार्य होगी। केवल AI के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।   जनरेटिव AI के लिए अतिरिक्त सुरक्षा   ड्राफ्ट में कहा गया है कि ग्राहक से सीधे संवाद करने वाले Generative AI सिस्टम के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। इससे डेटा लीक, गलत जानकारी और साइबर हमलों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।   थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की भी होगी जांच   अगर कोई बैंक किसी बाहरी कंपनी का AI मॉडल इस्तेमाल करता है, तब भी उसकी स्वतंत्र जांच करानी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिस्टम सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से काम कर रहा है।   24 जुलाई तक मांगे गए सुझाव   RBI ने इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर बैंकों, विशेषज्ञों और आम लोगों से 24 जुलाई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।

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भारत-ईरान के बीच बढ़ सकता है ऊर्जा सहयोग, दिल्ली पहुंचे ईरानी तेल मंत्री ने दिए बड़ी ट्रेड डील के संकेत

नई दिल्ली: भारत और Iran के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय शुरू होने के संकेत मिले हैं। ब्रिक्स देशों की ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरानी पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad ने कहा है कि ईरान भारत के साथ आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को भारत और ईरान के बीच तेल, गैस और निवेश से जुड़ी संभावित बड़ी साझेदारियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार ईरान नई दिल्ली पहुंचने के बाद मोहसिन पाकनेजाद ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद मजबूत रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ईरानी मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों की बैठकों के साथ-साथ भारत के अधिकारियों के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में ऊर्जा, निवेश और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि ईरान भारत के साथ हर संभव आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, खासकर तेल और गैस क्षेत्र में। तेल और गैस सेक्टर पर रहेगा फोकस ईरानी प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है— कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त निवेश की संभावनाएं पेट्रोकेमिकल उद्योग में साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते वैश्विक ऊर्जा बाजार की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है, जबकि ईरान विशाल तेल और गैस भंडार वाला देश है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिबंधों और 60 दिन की छूट पर भी चर्चा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े सवाल पर ईरानी तेल मंत्री ने कहा कि वर्तमान में ईरान को 60 दिनों की छूट प्राप्त है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी बैठकों के समापन के बाद साझा की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद अपने आर्थिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह साझेदारी? भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए स्रोतों और साझेदारियों की तलाश कर रहा है। यदि भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत होता है, तो इससे— भारत को तेल और गैस की आपूर्ति में विविधता मिलेगी। ऊर्जा आयात लागत कम करने में मदद मिल सकती है। दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नया आयाम मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के बाद बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में: Brent Crude लगभग 72.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। WTI Crude लगभग 69.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा। तेल कीमतों में यह गिरावट ऊर्जा आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।  

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