नई दिल्ली: त्योहार हो, कोई खास मौका हो या घर पर मेहमानों की आवभगत करनी हो, बेसन की बर्फी हमेशा पसंद की जाने वाली मिठाइयों में शामिल रहती है। लेकिन घर पर इसे बनाते समय अक्सर शिकायत होती है कि बर्फी या तो बहुत सख्त हो जाती है, दानेदार टेक्सचर नहीं आता या फिर खाते समय दांतों में चिपकने लगती है।
अगर आप भी हलवाई जैसी बादामी रंग की, दानेदार और मुंह में घुलने वाली बेसन बर्फी बनाना चाहते हैं, तो मारवाड़ी हलवाई बिट्टू पंचारिया की बताई पारंपरिक विधि काम आ सकती है। इसमें बेसन को सही तरीके से ‘मोइन’ देकर तैयार करने से लेकर धीमी आंच पर भूनने और सही तार की चाशनी बनाने तक कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है।
दानेदार टेक्सचर के लिए बेसन की तैयारी सबसे अहम है। इसके लिए 4 किलो दरदरा पिसा बेसन लें। इसमें करीब 200 ग्राम गुनगुना देसी घी और 200-250 ग्राम पानी डालकर हाथों से अच्छी तरह मसलें।
इसके बाद इस मिश्रण को बड़े छेद वाली मोटी चलनी से छान लें। इससे बेसन में एक समान दाने तैयार होंगे और बर्फी का टेक्सचर ज्यादा बेहतर आएगा।
अब एक बड़ी कड़ाही में करीब 3.5 किलो देसी घी गर्म करें। घी हल्का गर्म होने पर इसमें तैयार दानेदार बेसन डाल दें।
बेसन को मध्यम से धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनना बेहद जरूरी है। तेज आंच पर बेसन जल्दी जल सकता है और स्वाद कड़वा हो सकता है। वहीं घी की मात्रा बहुत कम रखने से बर्फी ज्यादा सख्त होने की संभावना रहती है।
बेसन को तब तक भूनें जब तक उसका कच्चापन काफी हद तक खत्म न हो जाए।
जब बेसन करीब 50-60 प्रतिशत तक भुन जाए, तब इसमें अच्छी गुणवत्ता वाला ताजा मावा डालें। मावा बर्फी को रिच स्वाद देने के साथ उसकी बाइंडिंग में भी मदद करता है।
मावा मिलाने के बाद आंच धीमी कर दें और लगातार चलाते हुए मिश्रण को भूनें। जब बेसन का रंग सुंदर बादामी हो जाए और अच्छी खुशबू आने लगे, तब समझें कि इसकी सिकाई सही दिशा में है।
अब एक अलग बर्तन में करीब 2.8 लीटर पानी और 4 किलो चीनी डालकर चाशनी तैयार करें। बर्फी के लिए चाशनी को करीब एक तार से थोड़ी कड़क रखना जरूरी है।
चाशनी तैयार होने के बाद इसमें केसर का घोल मिलाएं और इसे थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद चाशनी को भुने हुए बेसन और मावा के मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
सही कंसिस्टेंसी की चाशनी बर्फी को बहुत ज्यादा चिपचिपा होने से बचाने में मदद करती है।
अब मिश्रण में जावित्री-जायफल पाउडर और इलायची पाउडर डालें। ये मसाले बर्फी में खास खुशबू और स्वाद जोड़ते हैं।
सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कड़ाही को ढककर करीब 1-2 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे बेसन चाशनी को अच्छी तरह सोख लेता है और मिश्रण में बेहतर दानेदार एवं मुलायम टेक्सचर विकसित होता है।
जब मिश्रण जमने लायक हो जाए, तो इसे घी लगी या तैयार ट्रे में डालकर समान रूप से फैला दें। ऊपर से बारीक कटे पिस्ता, बादाम और सूखी गुलाब की पंखुड़ियां डालकर सजाएं।
अब इसे करीब 5-6 घंटे तक सेट होने दें। पूरी तरह जम जाने के बाद चाकू से मनचाहे आकार में काट लें।
तैयार होगी मारवाड़ी स्टाइल की दानेदार बेसन बर्फी, जिसमें बादामी रंग, घी की खुशबू और मसालों का शाही स्वाद मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: त्योहार हो, कोई खास मौका हो या घर पर मेहमानों की आवभगत करनी हो, बेसन की बर्फी हमेशा पसंद की जाने वाली मिठाइयों में शामिल रहती है। लेकिन घर पर इसे बनाते समय अक्सर शिकायत होती है कि बर्फी या तो बहुत सख्त हो जाती है, दानेदार टेक्सचर नहीं आता या फिर खाते समय दांतों में चिपकने लगती है। अगर आप भी हलवाई जैसी बादामी रंग की, दानेदार और मुंह में घुलने वाली बेसन बर्फी बनाना चाहते हैं, तो मारवाड़ी हलवाई बिट्टू पंचारिया की बताई पारंपरिक विधि काम आ सकती है। इसमें बेसन को सही तरीके से ‘मोइन’ देकर तैयार करने से लेकर धीमी आंच पर भूनने और सही तार की चाशनी बनाने तक कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है। सबसे पहले बेसन में दें मोइन दानेदार टेक्सचर के लिए बेसन की तैयारी सबसे अहम है। इसके लिए 4 किलो दरदरा पिसा बेसन लें। इसमें करीब 200 ग्राम गुनगुना देसी घी और 200-250 ग्राम पानी डालकर हाथों से अच्छी तरह मसलें। इसके बाद इस मिश्रण को बड़े छेद वाली मोटी चलनी से छान लें। इससे बेसन में एक समान दाने तैयार होंगे और बर्फी का टेक्सचर ज्यादा बेहतर आएगा। देसी घी में धीमी आंच पर भूनें बेसन अब एक बड़ी कड़ाही में करीब 3.5 किलो देसी घी गर्म करें। घी हल्का गर्म होने पर इसमें तैयार दानेदार बेसन डाल दें। बेसन को मध्यम से धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनना बेहद जरूरी है। तेज आंच पर बेसन जल्दी जल सकता है और स्वाद कड़वा हो सकता है। वहीं घी की मात्रा बहुत कम रखने से बर्फी ज्यादा सख्त होने की संभावना रहती है। बेसन को तब तक भूनें जब तक उसका कच्चापन काफी हद तक खत्म न हो जाए। मावा डालकर लाएं बादामी रंग जब बेसन करीब 50-60 प्रतिशत तक भुन जाए, तब इसमें अच्छी गुणवत्ता वाला ताजा मावा डालें। मावा बर्फी को रिच स्वाद देने के साथ उसकी बाइंडिंग में भी मदद करता है। मावा मिलाने के बाद आंच धीमी कर दें और लगातार चलाते हुए मिश्रण को भूनें। जब बेसन का रंग सुंदर बादामी हो जाए और अच्छी खुशबू आने लगे, तब समझें कि इसकी सिकाई सही दिशा में है। एक तार की चाशनी है सबसे जरूरी अब एक अलग बर्तन में करीब 2.8 लीटर पानी और 4 किलो चीनी डालकर चाशनी तैयार करें। बर्फी के लिए चाशनी को करीब एक तार से थोड़ी कड़क रखना जरूरी है। चाशनी तैयार होने के बाद इसमें केसर का घोल मिलाएं और इसे थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद चाशनी को भुने हुए बेसन और मावा के मिश्रण में डालकर अच्छी तरह मिलाएं। सही कंसिस्टेंसी की चाशनी बर्फी को बहुत ज्यादा चिपचिपा होने से बचाने में मदद करती है। जायफल-जावित्री और इलायची से आएगी शाही खुशबू अब मिश्रण में जावित्री-जायफल पाउडर और इलायची पाउडर डालें। ये मसाले बर्फी में खास खुशबू और स्वाद जोड़ते हैं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कड़ाही को ढककर करीब 1-2 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे बेसन चाशनी को अच्छी तरह सोख लेता है और मिश्रण में बेहतर दानेदार एवं मुलायम टेक्सचर विकसित होता है। ट्रे में जमाएं और ऐसे करें गार्निश जब मिश्रण जमने लायक हो जाए, तो इसे घी लगी या तैयार ट्रे में डालकर समान रूप से फैला दें। ऊपर से बारीक कटे पिस्ता, बादाम और सूखी गुलाब की पंखुड़ियां डालकर सजाएं। अब इसे करीब 5-6 घंटे तक सेट होने दें। पूरी तरह जम जाने के बाद चाकू से मनचाहे आकार में काट लें। तैयार होगी मारवाड़ी स्टाइल की दानेदार बेसन बर्फी, जिसमें बादामी रंग, घी की खुशबू और मसालों का शाही स्वाद मिलेगा। बर्फी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान बेसन को तेज आंच पर न भूनें। दानेदार टेक्सचर के लिए बेसन को छानना महत्वपूर्ण है। मावा डालने के बाद आंच धीमी रखें। चाशनी की सही कंसिस्टेंसी बर्फी के टेक्सचर के लिए बेहद जरूरी है। बर्फी को काटने से पहले पूरी तरह सेट होने दें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन के सोमवार व्रत में अगर आप रोजाना एक जैसा फलाहार खाकर बोर हो गए हैं, तो इस बार अपनी थाली में स्वादिष्ट फलाहारी सैंडविच शामिल कर सकते हैं। कुट्टू या सिंघाड़े के आटे, उबले आलू और पनीर से तैयार यह सैंडविच कम समय में बन जाता है और नाश्ते, स्नैक या व्रत के मुख्य भोजन के रूप में परोसा जा सकता है। कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से तैयार करें फलाहारी ब्रेड फलाहारी सैंडविच बनाने के लिए सबसे पहले कुट्टू या सिंघाड़े के आटे में दही, सेंधा नमक और थोड़ा सा चीनी मिलाकर बैटर तैयार करें। बैटर को सैंडविच मेकर या तवे पर हल्का घी लगाकर दोनों तरफ से सेक लें। इससे व्रत में इस्तेमाल होने वाली ब्रेड तैयार हो जाएगी। आलू-पनीर की स्वादिष्ट स्टफिंग बनाएं एक बाउल में मैश किए हुए उबले आलू, कद्दूकस किया हुआ पनीर, सेंधा नमक, काली मिर्च, बारीक कटी हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर स्टफिंग तैयार करें। चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें भुनी हुई मूंगफली का चूरा भी मिला सकते हैं। दो आसान तरीकों से तैयार करें सैंडविच तैयार फलाहारी ब्रेड के बीच स्टफिंग भरकर दोनों तरफ हल्का घी लगाएं और तवे या सैंडविच मेकर पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। दूसरा तरीका यह है कि बैटर फैलाने के बाद उसी पर स्टफिंग रखें, ऊपर से फिर बैटर डालें और दोनों तरफ से अच्छी तरह पकाएं। दही या व्रत वाली चटनी के साथ करें सर्व गरमा-गरम फलाहारी सैंडविच को त्रिकोण आकार में काटकर दही, व्रत वाली हरी चटनी या ताजे फलों के साथ परोसें। ऊपर से भुना जीरा पाउडर या काली मिर्च छिड़कने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इन बातों का रखें ध्यान स्वाद और सेहत दोनों बनाए रखने के लिए घी का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। सैंडविच हमेशा ताजा बनाकर तुरंत परोसें और व्रत के नियमों के अनुसार ही सामग्री का चयन करें। ताजे दही या लस्सी के साथ परोसने पर यह भोजन अधिक संतुलित और पौष्टिक बन जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भरवां करेला भारतीय रसोई की पारंपरिक और लोकप्रिय सब्जियों में से एक है। हालांकि, इसकी कड़वाहट के कारण कई लोग इसे खाने से बचते हैं। लेकिन रसोई के कुछ आसान पारंपरिक नुस्खों की मदद से इसे स्वादिष्ट और संतुलित बनाया जा सकता है। ऐसा ही एक तरीका है मसाले में थोड़ी मात्रा में गुड़ मिलाना, जिससे करेले का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। गुड़ से संतुलित होती है कड़वाहट विशेषज्ञों के अनुसार, भरवां करेले के मसाले में थोड़ा-सा कद्दूकस किया हुआ गुड़ मिलाने से इसकी कड़वाहट संतुलित हो जाती है। गुड़ मसाले में हल्की मिठास और गहराई जोड़ता है, जिससे सब्जी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक लगता है, बिना उसे मीठा बनाए। ऐसे करें करेले की तैयारी भरवां करेला बनाने से पहले करेले को अच्छी तरह धोकर हल्का छील लें और बीच से चीरा लगाकर बीज निकाल दें। इसके बाद उस पर नमक लगाकर 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दें। बाद में धोकर हल्का निचोड़ लें। इससे करेले की कड़वाहट कुछ हद तक कम हो जाती है। मसाला तैयार करने का तरीका सरसों के तेल में प्याज को सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद सौंफ, धनिया पाउडर, हल्दी, लाल मिर्च और अमचूर डालकर मसाला अच्छी तरह भूनें। अंत में कद्दूकस किया हुआ गुड़ मिलाकर 1–2 मिनट तक पकाएं। यही छोटा-सा कदम भरवां करेले के स्वाद को खास बनाता है। धीमी आंच पर पकाएं तैयार मसाले को करेले के अंदर भरकर जरूरत पड़ने पर धागे से बांध दें। फिर हल्के तेल में धीमी आंच पर 20–25 मिनट तक ढककर पकाएं और बीच-बीच में पलटते रहें। इससे मसाले का स्वाद करेले के अंदर तक अच्छी तरह समा जाता है और सब्जी स्वादिष्ट बनकर तैयार होती है।