स्वास्थ्य

Late Night Dinner Can Harm Your Health

Late Night Dinner Side Effects: देर रात डिनर करने की आदत पड़ सकती है भारी, मेटाबॉलिज्म से लेकर किडनी की सेहत तक पर पड़ सकता है असर

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Person eating dinner late at night with a clock, highlighting the health risks of late-night meals on metabolism and kidney health.
Late Night Dinner Side Effects

आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक काम करना, मोबाइल पर समय बिताना या ओटीटी देखते हुए खाना खाना आम बात हो गई है। ऐसे में कई लोग रात 10–11 बजे या उससे भी देर से डिनर करते हैं। कभी-कभार देर से खाना खाने से आमतौर पर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन यदि यह रोज़ की आदत बन जाए तो इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर नियंत्रण, नींद और लंबे समय में किडनी की सेहत पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) दिन और रात के हिसाब से काम करती है। यही कारण है कि रात के समय भोजन को पचाने और ऊर्जा में बदलने की क्षमता दिन की तुलना में कम हो जाती है।

देर रात खाना खाने पर शरीर में क्या होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन के समय शरीर भोजन को बेहतर तरीके से पचाता है और ग्लूकोज का प्रभावी उपयोग करता है। लेकिन रात होते-होते इंसुलिन की संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) कम होने लगती है और मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है।

ऐसे में यदि देर रात भारी या अधिक कैलोरी वाला भोजन किया जाए, तो शरीर उसे उतनी कुशलता से प्रोसेस नहीं कर पाता। इसका परिणाम यह हो सकता है कि ब्लड शुगर अधिक समय तक बढ़ा रहे और अतिरिक्त कैलोरी शरीर में वसा (Fat) के रूप में जमा होने लगे।

मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है असर

1. ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है

रात के समय शरीर ग्लूकोज को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम होता है। यदि लगातार देर रात भोजन किया जाए, खासकर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अधिक कैलोरी वाला भोजन, तो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।

2. इंसुलिन की कार्यक्षमता कम हो सकती है

रात में शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो नींद की तैयारी करता है। इसी दौरान इंसुलिन की प्रभावशीलता कम हो सकती है। ऐसे समय भारी भोजन करने से शरीर को ब्लड शुगर नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

क्या किडनी पर भी पड़ सकता है प्रभाव?

देर रात खाना खाना सीधे तौर पर किडनी की बीमारी का कारण नहीं माना जाता, लेकिन यदि इस आदत की वजह से मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं विकसित होती हैं, तो ये स्थितियां आगे चलकर किडनी पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं।

1. बढ़ता वजन

रात में अतिरिक्त कैलोरी लेने से शरीर अधिक वसा जमा कर सकता है। समय के साथ मोटापा बढ़ने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

2. डायबिटीज का खतरा

यदि लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे और टाइप-2 डायबिटीज विकसित हो जाए, तो यह किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

3. हाई ब्लड प्रेशर

अनियमित खानपान और बढ़ता वजन उच्च रक्तचाप का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं, जो किडनी रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।

स्वस्थ रहने के लिए क्या करें?

  • रात का भोजन सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले करें।
  • रात में हल्का और संतुलित भोजन चुनें।
  • अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन सीमित करें।
  • नियमित समय पर भोजन करने की आदत बनाएं।
  • पर्याप्त नींद लें और रोज़ाना शारीरिक गतिविधि करें।
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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Person experiencing lower back pain radiating to the legs, illustrating symptoms of a pinched nerve and sciatica.
पीठ से पैरों तक झनझनाहट और तेज दर्द को न करें नजरअंदाज, नस दबने का हो सकता है संकेत; जानिए डॉक्टर कैसे करते हैं पहचान

कमर दर्द आज के समय में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। हालांकि हर कमर दर्द गंभीर नहीं होता, लेकिन यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों, जांघों और पैरों तक फैलने लगे, साथ ही झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य मांसपेशियों का खिंचाव समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण नस दबने (Nerve Compression) या साइटिका (Sciatica) जैसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसका समय रहते इलाज न होने पर नस को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। नस दबने पर कैसा महसूस होता है दर्द? कई लोगों को चलते, खड़े होने या लंबे समय तक बैठने के दौरान कमर से शुरू होकर पैरों तक जाने वाला तेज दर्द महसूस होता है। यह दर्द अक्सर बिजली के झटके जैसा, चुभने वाला या जलन पैदा करने वाला होता है। इसके साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी भी महसूस हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ ऐसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं। रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद डिस्क, हड्डी, लिगामेंट या अन्य ऊतक जब किसी नस पर दबाव डालने लगते हैं, तब नस सामान्य रूप से मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेश नहीं पहुंचा पाती। इसी कारण दर्द और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने लगते हैं। नस दबना क्या होता है? नस दबना एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की किसी नस पर आसपास के ऊतकों का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह समस्या सबसे अधिक रीढ़ की हड्डी में देखने को मिलती है। लगातार दबाव बने रहने से नस की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी क्षति का खतरा भी बढ़ जाता है। नस के दर्द और मांसपेशियों के दर्द में अंतर दोनों तरह के दर्द के लक्षण अलग-अलग होते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है। नस दबने का दर्द मांसपेशियों का दर्द दर्द कमर से पैर तक फैलता है दर्द एक ही हिस्से तक सीमित रहता है बिजली के झटके या झनझनाहट जैसा महसूस होता है दबाने पर दर्द बढ़ता है सुन्नपन और जलन हो सकती है सुन्नपन या झनझनाहट नहीं होती पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है कमजोरी कम देखने को मिलती है आराम करने पर भी दर्द बना रह सकता है आराम करने से धीरे-धीरे राहत मिलती है नस दबने के प्रमुख कारण 1. स्लिप डिस्क रीढ़ की डिस्क अपनी जगह से खिसककर नस पर दबाव डाल सकती है। यह नस दबने के सबसे आम कारणों में से एक है। 2. साइटिका साइटिक नर्व शरीर की सबसे लंबी नस होती है। इसके दबने पर दर्द कमर से शुरू होकर पूरे पैर तक फैल सकता है। 3. स्पाइनल स्टेनोसिस उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की नलिका संकरी होने लगती है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ जाता है। इससे चलने में दर्द, पैरों में भारीपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। 4. बोन स्पर हड्डियों के अतिरिक्त उभार (Bone Spurs) आसपास की नसों पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे दर्द और नस संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। 5. चोट या दुर्घटना गिरने, दुर्घटना या किसी गंभीर चोट के कारण नस खिंच सकती है, दब सकती है या उसके आसपास सूजन आ सकती है, जिससे नस पर दबाव बढ़ जाता है। डॉक्टर कैसे करते हैं नस दबने की जांच? यदि मरीज में नस दबने के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल परीक्षण किया जाता है। जरूरत पड़ने पर निम्न जांच कराई जा सकती हैं: एमआरआई (MRI) सीटी स्कैन (CT Scan) एक्स-रे इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) इन जांचों के जरिए यह पता लगाया जाता है कि नस पर दबाव किस कारण से पड़ रहा है और उसकी गंभीरता कितनी है। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिस्ट या स्पाइन विशेषज्ञ से सलाह लें। कमर से पैर तक फैलने वाला तेज दर्द पैरों में लगातार झनझनाहट सुन्नपन या संवेदना कम होना पैर में कमजोरी चलने या संतुलन बनाने में कठिनाई आराम करने के बाद भी दर्द कम न होना समय पर इलाज है सबसे जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि कमर से पैरों तक फैलने वाला तेज या बिजली जैसा दर्द हमेशा सामान्य कमर दर्द नहीं होता। यदि इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण भी मौजूद हैं, तो यह नस दबने का संकेत हो सकता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते सही जांच और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अधिकांश मरीज बिना किसी स्थायी नुकसान के पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।  

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भारत में बच्चों में बढ़ रहा मोटापा, ICMR ने जताई चिंता; जंक फूड और अस्वस्थ खानपान पर सख्ती की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़े नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) ने बच्चों के बीच बढ़ते ओवरवेट और मोटापे की समस्या से निपटने के लिए नई नीति रूपरेखा जारी की है। इसमें जंक फूड, गलत खानपान और बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर नियंत्रण जैसे कदमों का सुझाव दिया गया है।   4.1 करोड़ बच्चों पर मोटापे का खतरा, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता   रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 4.1 करोड़ (41 मिलियन) बच्चे और किशोर ओवरवेट या मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ता वजन भविष्य में डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। ICMR-NIN के नेतृत्व में तैयार नीति दस्तावेज में कहा गया है कि बच्चों के खानपान के माहौल में बदलाव करना जरूरी है, क्योंकि केवल व्यक्तिगत स्तर पर खानपान सुधारने से समस्या का समाधान नहीं होगा।   जंक फूड पर नियंत्रण और स्कूल कैंटीन के लिए नए नियमों का सुझाव   ICMR की ओर से तैयार प्रस्ताव में स्कूलों के आसपास और स्कूल कैंटीन में ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को नियंत्रित करने की बात कही गई है। इसके अलावा स्कूलों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अक्सर विज्ञापनों और आसानी से उपलब्ध फास्ट फूड के कारण अस्वस्थ खानपान की ओर आकर्षित होते हैं। इसलिए बच्चों को लक्षित करने वाले खाद्य विज्ञापनों पर भी सख्ती की जरूरत बताई गई है।   जंक फूड महंगा करने और आसान लेबलिंग की सिफारिश   ICMR-NIN की नीति रूपरेखा में जंक फूड पर अतिरिक्त टैक्स लगाने, खाद्य पदार्थों के लेबल को आसान भाषा में समझने योग्य बनाने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने जैसे सुझाव शामिल हैं। इसका उद्देश्य लोगों को ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करना है।   स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में मोटापे को रोकने के लिए परिवार, स्कूल और सरकार तीनों स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और स्क्रीन टाइम कम करना भी महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।   सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों के सामने बड़ी चुनौती   बच्चों में बढ़ता मोटापा अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ सकता है।   ICMR की नई पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए ऐसा खाद्य वातावरण तैयार करना है, जहां उन्हें स्वस्थ विकल्प आसानी से मिल सकें और कम उम्र से ही बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
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बारिश में गला बैठ गया है? डॉक्टरों के बताए इस आसान घरेलू उपाय से मिल सकती है राहत

Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण, ठंडी-गर्म चीजों का सेवन और मौसम में अचानक बदलाव के कारण गले में खराश, आवाज बैठना और निगलने में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में कई लोग तुरंत एंटीबायोटिक दवाओं का सहारा लेते हैं, जबकि हर गले की समस्या में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गले की परेशानी हल्की है और किसी गंभीर संक्रमण के लक्षण नहीं हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय गले को आराम देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यदि बुखार, तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत या लंबे समय तक लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। गला बैठ जाए तो क्या करें? अगर मौसम बदलने की वजह से गला बैठ गया है या हल्की खराश महसूस हो रही है, तो यह आसान घरेलू उपाय आजमा सकते हैं। आवश्यक सामग्री आधा कप गुनगुना पानी 1 छोटा चम्मच अदरक का रस 1 छोटा चम्मच नींबू का रस एक चुटकी नमक कैसे करें इस्तेमाल? सबसे पहले आधा कप गुनगुना पानी लें। इसमें अदरक का रस, नींबू का रस और एक चुटकी नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। जरूरत महसूस होने पर दिन में 1–2 बार इसका सेवन किया जा सकता है। इस घरेलू उपाय से क्या हो सकते हैं फायदे? गले की खराश कम करने में मदद मिल सकती है। गले की हल्की सूजन और दर्द से राहत मिल सकती है। गले को आराम मिल सकता है। आवाज बैठने की समस्या में सुधार हो सकता है। निगलने में होने वाली हल्की असुविधा कम हो सकती है। ध्यान रखें कि ये घरेलू उपाय सामान्य गले की परेशानी में सहायक हो सकते हैं। किसी गंभीर संक्रमण का इलाज नहीं हैं। गले को जल्दी ठीक रखने के लिए अपनाएं ये उपाय दिनभर गुनगुना पानी पिएं। बहुत ठंडी चीजें खाने-पीने से बचें। धूल, धुएं और प्रदूषण से दूरी बनाएं। पर्याप्त आराम करें। जरूरत पड़ने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करें। संतुलित आहार लें और विटामिन-C युक्त फलों को डाइट में शामिल करें। कब डॉक्टर से संपर्क करें? यदि गले का दर्द 3–5 दिन से अधिक बना रहे या इसके साथ तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, गले में अत्यधिक सूजन, खून आना या निगलने में गंभीर कठिनाई हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। स्वयं एंटीबायोटिक लेना सही विकल्प नहीं है। ध्यान रखें: बदलते मौसम में गले की हल्की समस्या को सही खानपान, पर्याप्त आराम और आसान घरेलू उपायों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।  

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