देवघर। देवघर नगर निगम को नया नगर आयुक्त मिल गया है। प्रशासनिक फेरबदल के तहत सुलोचना मीना ने गुरुवार को नगर निगम के नए नगर आयुक्त के रूप में विधिवत कार्यभार संभाल लिया। उनके पदभार ग्रहण करते ही निगम कार्यालय में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक की, जिसमें शहर के विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सुलोचना मीना ने निगम क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक बिना किसी देरी के पहुंच सके। उन्होंने निगम प्रशासन को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने पर भी जोर दिया।
नई नगर आयुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। देवघर देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छता, पेयजल, कचरा प्रबंधन, सड़क व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाए रखना निगम की प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही जल-जमाव जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में भी काम किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सुलोचना मीना जल्द ही नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेंगी। निरीक्षण के दौरान वे विकास योजनाओं की प्रगति, सफाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करेंगी। माना जा रहा है कि उनकी अगुवाई में नगर निगम शहर के समग्र विकास, बेहतर प्रशासन और जनहित से जुड़े कार्यों को नई गति देने की दिशा में काम करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Jharkhand Weather Update: झारखंड में मानसून के सक्रिय रहने के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ वज्रपात का खतरा बढ़ गया है। रविवार को अलग-अलग घटनाओं में बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। इनमें रामगढ़, गिरिडीह, हजारीबाग और पतरातू क्षेत्र के लोग शामिल हैं। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रांची मौसम केंद्र ने अगले पांच दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। 4 से 6 अगस्त के बीच कुछ जिलों में 65 से 115 मिमी तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान कई स्थानों पर मेघगर्जन और वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वज्रपात से 6 लोगों की मौत रविवार को झारखंड के अलग-अलग इलाकों में वज्रपात ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया। रामगढ़ में चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं गिरिडीह के बिरनी प्रखंड में एक बच्ची की भी बिजली गिरने से जान चली गई। पतरातू क्षेत्र में खेतों में काम कर रही तीन महिलाओं की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हुई। पतरातू प्रखंड के सांकुल गांव में खेत में काम करने के दौरान रेखा देवी (48) और उनकी बेटी रोशनी कुमारी (22) बिजली की चपेट में आ गईं। चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं लाताड़ पंचायत के पलानी गांव में खेत में काम कर रही सुलेखा देवी उर्फ सुशांति (30) की भी वज्रपात से मौत हो गई। इसके अलावा विष्णुगढ़ क्षेत्र में एक बच्ची की जान चली गई। रामगढ़ की दोहाकात पंचायत के पारलोलो टोला की रहने वाली प्रमिला देवी (32) की भी बिजली गिरने से मौत होने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए बारिश के दौरान लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। अगले पांच दिनों तक सक्रिय रहेगा मानसून मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक झारखंड में अगले पांच दिनों तक मानसून सक्रिय रह सकता है। इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दिनों पर भारी बारिश की संभावना है। 4 से 6 अगस्त के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में 65 से 115 मिमी तक वर्षा हो सकती है। बारिश के साथ कई जगहों पर मेघगर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। तेज हवा भी परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। तापमान में भी आएगी गिरावट अगले 24 घंटे के दौरान अधिकतम तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, इसके बाद अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। बारिश और तापमान में गिरावट के कारण कई इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना हो सकता है, लेकिन वज्रपात और तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा। 5 अगस्त को इन इलाकों में बढ़ेगी बारिश मौसम विभाग के अनुसार 5 अगस्त को भारी बारिश का क्षेत्र उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी झारखंड की ओर बढ़ सकता है। इस दौरान इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। 6 अगस्त को रांची समेत इन जिलों में येलो वॉच 6 अगस्त को उत्तर-पश्चिमी और मध्य झारखंड में एक बार फिर भारी बारिश का दौर लौटने के संकेत हैं। इस दिन मौसम विभाग ने कई जिलों को येलो वॉच पर रखा है। इनमें शामिल हैं: पलामू गढ़वा चतरा लातेहार हजारीबाग कोडरमा रामगढ़ रांची लोहरदगा गुमला खूंटी इन जिलों में रहने वाले लोगों को तेज बारिश के साथ मेघगर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। वज्रपात के दौरान क्या करें? झारखंड में लगातार वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए सावधानी बेहद जरूरी है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे या जलाशयों के पास खड़े होने से बचें। संभव हो तो तुरंत किसी सुरक्षित और पक्के भवन के अंदर चले जाएं। किसानों और खेतों में काम करने वाले लोगों को विशेष रूप से मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए। मोबाइल फोन पर स्थानीय मौसम चेतावनियों की जानकारी लेते रहें और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर काम करने से बचें। झारखंड में अगले पांच दिन मौसम रहेगा सक्रिय झारखंड में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। एक ओर बारिश से गर्मी से राहत मिल सकती है, तो दूसरी ओर वज्रपात, तेज हवा और भारी बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर परेशानी भी बढ़ सकती है। 6 अगस्त को रांची समेत 11 जिलों के लिए जारी येलो वॉच को देखते हुए लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहें और प्रशासन तथा मौसम विभाग की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन करें।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के मोराबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू हुआ प्रदर्शन अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंच गया है। इस बीच छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो ने मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा की है। CBI जांच और कार्रवाई की मांग आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और CBI जांच की मांग कर रहे हैं। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि न्याय की मांग कर रहे सभी छात्रों का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन में दिखे मतभेद धरनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस नेता आंदोलन के बीच रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा अपने समर्थकों के साथ धरनास्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर छात्रों की मांगों और भावनाओं से उन्हें अवगत कराएगा। कुमार राजा ने कहा कि 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच CID कर रही है और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी भी छात्रों को दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील कांग्रेस नेताओं ने छात्रों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। वहीं, आंदोलन स्थल पर छात्रों का जुटान जारी है और आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। JPSC-JSSC आंदोलन तेज, देवेंद्रनाथ महतो ने भूख हड़ताल का ऐलान, धरनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस नेता रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के मोराबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू हुआ प्रदर्शन अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंच गया है। इस बीच छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो ने मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा की है। CBI जांच और कार्रवाई की मांग आंदोलन कर रहे छात्रों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और CBI जांच की मांग कर रहे हैं। देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि न्याय की मांग कर रहे सभी छात्रों का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन में दिखे मतभेद आंदोलन के विस्तार के साथ छात्र नेताओं के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ नेताओं ने आंदोलन को राजनीतिक रंग देने और बाहरी समर्थन मिलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित कराना है। धरनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस नेता आंदोलन के बीच रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा अपने समर्थकों के साथ धरनास्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर छात्रों की मांगों और भावनाओं से उन्हें अवगत कराएगा। कुमार राजा ने कहा कि 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच CID कर रही है और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी भी छात्रों को दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील कांग्रेस नेताओं ने छात्रों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। वहीं, आंदोलन स्थल पर छात्रों का जुटान जारी है और आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रांची। रांची नगर निगम राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 8 अगस्त को 'सखुआ महोत्सव' का आयोजन करेगा। इस दौरान नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार सखुआ के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। महोत्सव की तैयारियों को लेकर शनिवार को नगर निगम सभागार में मेयर रोशनी खलखो ने समीक्षा बैठक की। बैठक में उपमहापौर नीरज कुमार, सभी वार्ड पार्षद और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। 10 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य बैठक में महोत्सव के आयोजन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि इस बार 'सखुआ महोत्सव' को बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सामाजिक संगठनों, वार्ड पार्षदों और स्थानीय नागरिकों को अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक स्थानों पर पौधरोपण किया जा सके। सखुआ के साथ महुआ, पलाश और कुसुम के पौधे भी लगाए जाएंगे मेयर ने बताया कि अभियान के दौरान केवल सखुआ ही नहीं, बल्कि झारखंड की प्राकृतिक विरासत से जुड़े महुआ, पलाश, कुसुम और डाहू जैसी प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य राज्य की जैव विविधता को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इक्कीसी महादेव से होगी महोत्सव की शुरुआत नगर निगम के अनुसार, 'सखुआ महोत्सव' की शुरुआत चुटिया स्थित इक्कीसी महादेव परिसर से होगी। यहां साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। नगर निगम इस स्थल को धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। एक महीने तक चलेगा पौधरोपण अभियान मेयर ने बताया कि पहले यह कार्यक्रम 1 अगस्त को प्रस्तावित था, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इसकी तिथि बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई। महोत्सव की शुरुआत के बाद एक महीने तक शहर के सभी वार्डों में चरणबद्ध तरीके से पौधरोपण और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। वार्ड पार्षदों से अपने-अपने क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने को भी कहा गया है।