झारखंड

झूठे रेप केस में 16 महीने जेल में रहा युवक, कोर्ट ने किया बरी

abhishek singh जून 19, 2026 0
Fake Rape Case
Fake Rape Case

रांची। रांची की एक विशेष अदालत ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी मनीष कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और विश्वसनीय गवाह उपलब्ध नहीं थे। आरोपी करीब 16 महीने तक जेल में रहने के बाद रिहा हुआ।

 

क्या है मामला ?


मामले के अनुसार, यह विवाद 35,000 रुपये की कथित उधारी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोपी किराना दुकानदार था और आरोप है कि उसने अपने बकाया पैसे मांगने पर विवाद का सामना किया, जिसके बाद उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया। अदालत में यह भी सामने आया कि परिवारिक विवाद और आपसी रंजिश इस मामले की मुख्य वजह हो सकती है।

 

सुनवाई में सामने आए कई विरोधाभास


ट्रायल के दौरान अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। पीड़िता और उसके परिवार के बयानों में भी कई विरोधाभास सामने आए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।


जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में यह भी पाया गया कि मामला आपसी विवाद और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हो सकता है। अदालत ने कहा कि आरोप केवल धारणा और विवाद के आधार पर लगाए गए थे, जिनकी पुष्टि ठोस सबूतों से नहीं हुई।

 

जेल में बिताने पड़े 16 महीने


पुलिस ने 27 फरवरी 2025 को मामला दर्ज कर आरोपी को 28 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जेल में बंद रहा और वहीं से उसका ट्रायल चलता रहा। लंबे समय तक हिरासत में रहने के बाद अदालत ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।


अदालत ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पेश किए गए सबूत और रिकॉर्डिंग से भी आरोपों की पुष्टि नहीं होती, इसलिए आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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JPSC और JSSC में अनियमितता के आरोपों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, आंदोलनकारियों ने उठाई जांच की मांग

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थियों और युवाओं का आंदोलन तेज हो गया है। मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।   भर्ती परीक्षाओं को लेकर बढ़ा विवाद   प्रदर्शनकारियों ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। आंदोलनकारियों ने संबंधित परीक्षाओं की प्रक्रिया की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।   अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू   अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार और संबंधित आयोग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। भूख हड़ताल के दौरान प्रदर्शन स्थल पर अभ्यर्थियों और समर्थकों की मौजूदगी बनी हुई है।   अभ्यर्थियों ने रखीं प्रमुख मांगें   प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल है।   अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवाओं का भविष्य परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा है। इसलिए आयोगों को भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए।   सरकार और आयोग के रुख पर नजर   आंदोलन के बीच अब सरकार और JPSC-JSSC की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना है।

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झारखंड के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में AI लैब
झारखंड में AI को मिलेगा बढ़ावा, ITI और पॉलिटेक्निक में बनेंगी 11 डेटा-एआई लैब

रांची। झारखंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने इंडिया AI मिशन के तहत राज्य के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 11 डेटा एवं AI लैब स्थापित करने की मंजूरी दी है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में सांसद परिमल नाथवानी के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।   11 डेटा और AI लैब को मंजूरी     केंद्र सरकार के अनुसार, झारखंड के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 11 डेटा एवं AI लैब स्थापित की जाएंगी। इनमें से 6 संस्थानों की पहचान भी कर ली गई है। इन लैब में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनोटेशन, डेटा क्यूरेशन और एप्लाइड डेटा साइंस जैसे विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे युवाओं को उभरती तकनीकों में रोजगारोन्मुखी कौशल मिल सके।     दो AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी मिलेंगे     सरकार ने झारखंड को दो AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी आवंटित किए हैं। इनका उद्देश्य राज्य में AI आधारित अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इससे शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को नई तकनीकों के विकास में सहयोग मिलेगा।     AI रिसर्च के लिए 8 फेलोशिप     केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इंडिया AI फेलोशिप के तहत झारखंड को अब तक 8 फेलोशिप मिली हैं। इनमें 2 स्नातक स्तर और 6 पीएचडी शोध फेलोशिप शामिल हैं। इसका उद्देश्य AI क्षेत्र में शोध कर रहे युवाओं को प्रोत्साहित करना और देश की AI क्षमता को मजबूत बनाना है।     ₹10,371.92 करोड़ के इंडिया AI मिशन पर काम     केंद्र सरकार ने 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट वाले इंडिया AI मिशन को मंजूरी दी थी। मिशन के तहत AI कंप्यूटिंग, फाउंडेशन मॉडल, डेटासेट प्लेटफॉर्म, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, फ्यूचर स्किल्स, स्टार्टअप फंडिंग और सुरक्षित एवं विश्वसनीय AI जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज भी आयोजित किए जा रहे हैं।  

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रांची के हिंदपीढ़ी क्षेत्र में कारों के शीशे तोड़े गए
रांची में आधी रात को बदमाशों का उत्पात, 6 से अधिक कारों के शीशे तोड़े

रांची। राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात असामाजिक तत्वों ने जमकर उत्पात मचाया। बदमाशों ने निजाम नगर स्थित मोती मस्जिद रोड और मक्का मस्जिद रोड पर सड़क किनारे खड़ी आधा दर्जन से अधिक कारों के शीशे तोड़ दिए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।   सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों को बनाया निशाना     जानकारी के अनुसार, देर रात अज्ञात बदमाशों ने एक-एक कर कई पार्क की गई कारों को निशाना बनाया। क्षतिग्रस्त वाहनों में विभिन्न कंपनियों की कारें शामिल हैं। स्थानीय निवासी इमरान की कार के शीशे भी तोड़ दिए गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।     सुबह सामने आई घटना     घटना की जानकारी मंगलवार सुबह तब हुई, जब वाहन मालिक घरों से बाहर निकले। अपनी गाड़ियों के टूटे शीशे देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को घटना की जानकारी दी।     डीएसपी का वाहन भी क्षतिग्रस्त     तोड़फोड़ की इस घटना में एक डीएसपी स्तर के अधिकारी की कार भी क्षतिग्रस्त हुई है। लगातार कई वाहनों को निशाना बनाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।     CCTV फुटेज के आधार पर जांच     सूचना मिलने के बाद हिंदपीढ़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात किसी एक व्यक्ति ने की या इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है।     पुलिस ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा     हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी अरुण महथा ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से भी घटना से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने की अपील की है।  

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