झारखंड

भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में कराया गया भर्ती

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Rahul Kranti
Rahul Kranti on Hunger Strike

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा। इसी दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

छह दिन से भूख हड़ताल पर थे छात्र

 

रिपोर्ट के अनुसार राहुल क्रांति उन छह प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, जो भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे हैं। लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने लगी। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल से सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।

 

JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का विरोध

 

छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का सरकार और संबंधित आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। आंदोलन के 14वें दिन छात्रों का विरोध और तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

विधानसभा मार्च की भी तैयारी

 

भूख हड़ताल के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने शुक्रवार को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने की तैयारी की। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहते हैं। आंदोलन को लेकर राजनीतिक समर्थन भी सामने आया है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने के साथ ही छात्रों की मांगों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

 

छात्रों की मांगों पर टिकी नजर

 

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी आंदोलन अब स्वास्थ्य संकट तक पहुंच गया है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत की मांग भी तेज हो रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए क्या ठोस निर्णय लिया जाता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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JPSC-JSSC आंदोलन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान
JPSC-JSSC आंदोलन: CM हेमंत बोले- छात्रों से बातचीत को तैयार

रांची। 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा इस उद्देश्य से गठित समिति संवाद का माध्यम बनेगी।   'सरकार बातचीत के लिए तैयार'   मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए बनाई गई समिति के माध्यम से सरकार छात्रों के सुझाव और शिकायतें जानने की इच्छुक है, ताकि उचित समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।   'मुद्दे को जयपाल सिंह स्टेडियम से बाहर तक ले जाना चाहते हैं'   हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार चाहती है कि यह चर्चा केवल जयपाल सिंह स्टेडियम तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राज्य के छात्र-छात्राएं भी इस विषय पर अपनी राय रखें। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में व्यापक और मजबूत सुधार (रिफॉर्म) लाने की दिशा में काम करना चाहती है, ताकि युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जा सके।   14 दिनों से जारी है छात्र आंदोलन   14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र पिछले 14 दिनों से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं। आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है।   वार्ता पर अब भी बनी हुई है स्थिति   सरकार की ओर से बातचीत की पहल के बावजूद अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच वार्ता की संभावना जताई जा रही है, हालांकि प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ नामों को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। सत्तापक्ष ने आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया है।   क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?   छात्रों की मुख्य मांगें हैं कि TDPL कंपनी द्वारा आयोजित JPSC और JSSC की हालिया परीक्षाओं को रद्द किया जाए, पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और दोनों आयोगों में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ठोस सुधारात्मक कदम उठाए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
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रांची में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की कोशिश, विधानसभा घेराव मार्च के दौरान हंगामा

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देवघर श्रावणी मेले में महिला श्रद्धालुओं के लिए 10 स्थानों पर मातृत्व विश्राम गृह

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abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
BJP legislators protesting over the alleged JPSC-JSSC recruitment irregularities outside the Jharkhand Assembly in Ranchi.

JPSC-JSSC मामले पर विधानसभा में हंगामा, BJP विधायकों का प्रदर्शन तेज; अनशन कर रहे छात्र की बिगड़ी तबीयत

The submerged low-level bridge over the Roro River in Chaibasa after continuous heavy rainfall.

लगातार बारिश से रोरो नदी उफान पर, छोटा पुल डूबा, चाईबासा में बढ़ी परेशानी

Expired Ghee and Suspicious Peda

श्रावणी मेले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, 45 किलो एक्सपायरी घी और 56 किलो संदिग्ध पेड़ा नष्ट

Officials and revenue staff attending a two-day Census 2026 training programme in Khunti.
जनगणना 2026 की तैयारी तेज, खूंटी में दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, 20 अगस्त से होगा डाटा संकलन

खूंटी: जनगणना 2026 की तैयारियों के तहत खूंटी जिले में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (डीसीएचबी) तैयार करने के लिए गुरुवार से डीआरडीए सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. प्रशिक्षण में अधिकारियों और राजस्वकर्मियों को डाटा संकलन, सत्यापन और डिजिटल माध्यम से सूचनाएं दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई. प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर समाहर्ता सह जिला जनगणना पदाधिकारी सुषमा लकड़ा ने की. इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली से संयुक्त निदेशक एवं नोडल पदाधिकारी पूर्णिमा प्रसाद विशेष रूप से मौजूद रहीं. उन्होंने प्रतिभागियों को जनगणना कार्य की महत्ता बताते हुए गुणवत्तापूर्ण और त्रुटिरहित डाटा संग्रह सुनिश्चित करने पर जोर दिया. अधिकारियों ने दी डाटा संकलन और सत्यापन की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान जनगणना कार्य निदेशालय, झारखंड के अधिकारियों सेतेंग ज्योति बराड़ और प्रवीण कुमार सिन्हा ने जिला जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार करने के लिए आवश्यक आंकड़ों के संकलन, सत्यापन और संधारण की विस्तृत प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि जनगणना के दौरान एकत्र किए जाने वाले सभी आंकड़ों की शुद्धता और समयबद्ध प्रविष्टि बेहद महत्वपूर्ण होगी. मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल से होगी डिजिटल एंट्री कर्मियों को डीसीएचबी (DCHB) मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डाटा एंट्री, सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट करने का प्रशिक्षण भी दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी, जिससे आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को ऐप के उपयोग, ऑनलाइन डाटा अपलोड करने और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया. 20 अगस्त से शुरू होगा गांव-गांव डाटा संकलन जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह अपर जिला जनगणना पदाधिकारी ने बताया कि जिले के सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों से आवश्यक आंकड़ों का संकलन 20 अगस्त 2026 से 5 सितंबर 2026 तक किया जाएगा. इस दौरान संबंधित कर्मी घर-घर और विभिन्न क्षेत्रों से निर्धारित प्रारूप के अनुसार सूचनाएं एकत्र करेंगे, जिनके आधार पर जिला जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार होगी. कई प्रखंडों के राजस्वकर्मी हुए शामिल इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में खूंटी, मुरहू, तोरपा, रनिया, अड़की, कर्रा तथा खूंटी नगर पंचायत के नामित राजस्वकर्मियों ने भाग लिया. सभी प्रतिभागियों को जनगणना कार्य से जुड़े तकनीकी पहलुओं और फील्ड स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी दी गई. विकास योजनाओं की नींव है जनगणना अपर समाहर्ता सुषमा लकड़ा ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि देश और राज्य की विकास योजनाओं का आधार है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं की रूपरेखा जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है. उन्होंने सभी कर्मियों से पूरी जिम्मेदारी, गंभीरता और पारदर्शिता के साथ कार्य करने की अपील की, ताकि जिले का डाटा सटीक और विश्वसनीय तैयार किया जा सके.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Election officials reviewing the draft voter list during the SIR-2026 campaign in Garhwa district.

गढ़वा में 47 नए मतदान केंद्र बने, 4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति

Officials verifying ration card records during a beneficiary verification drive in Dhanbad.

धनबाद में 23,612 राशन कार्ड होंगे रद्द, आयकरदाता और सरकारी कर्मचारी भी कार्रवाई के दायरे में

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झारखंड को मिले 58 आधुनिक मिनी फायर टेंडर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिखाई हरी झंडी

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kalpana अगस्त 1, 2026 0

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