झारखंड

RIMS: 60 Doctors Oppose Ban on HOD Rotation

RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक से 60 डॉक्टर नाराज, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र

kalpana अगस्त 8, 2026 0
RIMS doctors protest against the suspension of department head rotation system in Ranchi
RIMS HOD Rotation Row: 60 Doctors Seek Restoration of Rotation System

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में विभागाध्यक्षों के रोटेशन की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। संस्थान के करीब 60 डॉक्टरों ने इस फैसले का विरोध करते हुए स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है। डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लागू करने की मांग करते हुए एनएमसी की गाइडलाइन, रिम्स शासी परिषद के पुराने फैसले और हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया है।

रिम्स शासी परिषद की 52वीं बैठक में वर्ष 2021 में विभागाध्यक्षों के रोटेशन का फैसला लिया गया था। इसके तहत प्रत्येक तीन वर्ष में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी बदलने की व्यवस्था लागू की गयी थी। इसी आधार पर वर्ष 2021 से अलग-अलग विभागों में रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही थी।

प्रोफेसरों की बारी आते ही प्रक्रिया पर लगी रोक

डॉक्टरों का आरोप है कि अब जब रोटेशन के तहत अन्य प्रोफेसरों को विभागाध्यक्ष बनने का अवसर मिलना था, तभी इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी। इससे कई डॉक्टरों में नाराजगी है। करीब 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

डॉक्टरों ने अपने पत्र में कहा है कि एनएमसी की गाइडलाइन में विभागाध्यक्ष के पद पर रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है। साथ ही रिम्स की शासी परिषद भी पहले इस संबंध में निर्णय ले चुकी है। ऐसे में अचानक रोटेशन रोकने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाया है।

65वीं जीबी बैठक के बाद लिया गया फैसला

सूत्रों के अनुसार, हाल में हुई रिम्स शासी परिषद की 65वीं बैठक में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। इसके बाद रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नयी अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया गया है।

बताया जा रहा है कि कुछ सीनियर डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लेकर आपत्ति जतायी थी। उनका कहना था कि वे अपने से जूनियर डॉक्टर के अधीन काम करने में असहज महसूस करेंगे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और रोटेशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी।

हाईकोर्ट के निर्देश का भी दिया हवाला

डॉक्टरों ने अपने पत्र में वर्ष 2022 में हाईकोर्ट की ओर से रोटेशन प्रक्रिया को लेकर दिये गये निर्देश का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि जब एनएमसी की गाइडलाइन और रिम्स जीबी का फैसला पहले से मौजूद है, तो रोटेशन व्यवस्था को बीच में रोकना उचित नहीं है।

अब 60 डॉक्टरों के पत्र के बाद रिम्स में विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर फैसला अहम हो गया है। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द प्रक्रिया बहाल करने और पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार विभागाध्यक्षों की नियुक्ति करने की मांग की है।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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BCCL के 165 करोड़ रुपये के मामले में CVC की कार्रवाई
BCCL में 165 करोड़ का मामला, पूर्व CMD समेत 8 अधिकारी CVC के रडार पर

धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से जुड़े एक बड़े मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने कंपनी के पूर्व सीएमडी समीरन दत्ता समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। मामला झरिया के ईजे एरिया स्थित भौंरा साउथ कोलियरी में आउटसोर्सिंग कंपनी देवप्रभा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2022 में किए गए 165.97 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान से जुड़ा है। CVC ने जांच में अनुबंध की निर्धारित सीमा से काफी अधिक विचलन को मंजूरी दिए जाने को गंभीरता से लिया है। आयोग के अनुसार, अनुबंध में किए गए दो संशोधनों के कारण इसकी कुल कीमत करीब 59.60 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि नियमों के तहत सामान्य तौर पर 10 से 15 प्रतिशत तक ही विचलन की अनुमति थी।   अनुबंध मूल्य में 59.60% की बढ़ोतरी     CVC के 13 जुलाई 2026 के ज्ञापन के अनुसार, बीसीसीएल की कार्यात्मक निदेशक समिति (CFD) ने देवप्रभा कंस्ट्रक्शन के अनुबंध में दो संशोधनों को मंजूरी दी थी। इन संशोधनों के बाद अनुबंध मूल्य में करीब 59.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई।   CVC ने माना कि यह वृद्धि अनुबंध में निर्धारित स्वीकार्य सीमा से काफी अधिक थी। इसी आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई और कार्रवाई की सिफारिश की गई।   पूर्व CMD समेत तीन अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई से पहले सलाह     CVC ने बीसीसीएल के तत्कालीन सीएमडी समीरन दत्ता, तत्कालीन निदेशक (वित्त) राकेश कुमार सहाय और डीटी शंकर नागाचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से पहले प्रथम चरण की सतर्कता सलाह (SSA) लेने की अनुशंसा की है।   इसका मतलब है कि इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई से पहले निर्धारित सतर्कता प्रक्रिया के तहत संबंधित स्तर पर विचार किया जाएगा।   चार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह     इसके अलावा CVC ने तत्कालीन निदेशक (तकनीकी ऑपरेशन) संजय कुमार सिंह, तत्कालीन डीटी और वर्तमान एमसीएल सीएमडी उदय अनंत कावले, तत्कालीन डीपी हर्ष नाथ मिश्रा और डीपी मुरली कृष्ण रमैया के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह दी थी।     मंत्रालय ने चार अधिकारियों को दी चेतावनी     मामले में कोयला मंत्रालय ने CVC की प्रथम चरण की सलाह के आधार पर चार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें भविष्य में अधिक सतर्क रहने की चेतावनी देकर मामला समाप्त कर दिया।   इनमें मुरली कृष्ण रमैया, संजय कुमार सिंह, उदय अनंत कावले और हर्षनाथ मिश्रा शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये अधिकारी परियोजना के क्रियान्वयन में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे।   क्या है पूरा मामला?     मामला भौंरा साउथ कोलियरी में संचालित आउटसोर्सिंग परियोजना से संबंधित है। आरोपों की जांच के दौरान यह सवाल उठा कि अनुबंध में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक बदलावों को किस आधार पर मंजूरी दी गई और इसके चलते अनुबंध मूल्य में इतनी बड़ी वृद्धि कैसे हुई।   CVC की जांच के बाद अधिकारियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर तय की गई और उसी आधार पर कुछ के खिलाफ दंडात्मक प्रक्रिया तथा कुछ के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गई।   मुख्य बिंदु:     देवप्रभा कंस्ट्रक्शन को 165.97 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान का मामला।   अनुबंध मूल्य में करीब 59.60% की वृद्धि हुई। नियमों के अनुसार सामान्य विचलन सीमा 10-15% थी। पूर्व बीसीसीएल सीएमडी समीरन दत्ता समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ आगे की सतर्कता प्रक्रिया की सिफारिश। चार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सलाह। कोयला मंत्रालय ने चार अधिकारियों को चेतावनी देकर मामला समाप्त किया।

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रांची के अंजनी कुमार सहाय बने यूक्रेन में भारत के नए राजदूत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सौंपा नियुक्ति पत्र

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के लिए गौरव का क्षण है। बरियातू हाउसिंग कॉलोनी निवासी और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी अंजनी कुमार सहाय को यूक्रेन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपा। विदेश मंत्रालय ने अंजनी कुमार सहाय की नियुक्ति की घोषणा 7 जुलाई 2026 को की थी। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति पत्र दिया गया। अब वह यूक्रेन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।   शनिवार को परिवार के साथ यूक्रेन होंगे रवाना   नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद अंजनी कुमार सहाय शनिवार को अपने परिवार के साथ यूक्रेन के लिए रवाना होंगे। वहां वह भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम करने के साथ भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करेंगे।   माली और मॉरिटानिया में रह चुके हैं राजदूत   अंजनी कुमार सहाय भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी हैं। इससे पहले वह माली और मॉरिटानिया में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें यूक्रेन जैसे महत्वपूर्ण देश में राजदूत की जिम्मेदारी दी गई है।   रांची और पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात   रांची के बरियातू हाउसिंग कॉलोनी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का अंजनी कुमार सहाय का सफर झारखंड के लिए गौरव की बात है। उनकी नियुक्ति को राज्य के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।

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Thousands of saffron-clad Kanwariyas gather at Sultanganj during the Shravan Mela
सुलतानगंज बना ‘केसरिया समंदर’, दूसरी सोमवारी से पहले टूटा भीड़ का रिकॉर्ड; रात तक 2.90 लाख कांवरिये रवाना

सुलतानगंज: श्रावणी मेला के नौवें दिन शुक्रवार को सुलतानगंज में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. दूसरी सोमवारी से पहले उत्तरवाहिनी गंगा के तट से देवघर जाने वाले कांवरियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया. पूरा अजनैवीनाथ धाम केसरिया रंग में रंगा नजर आया और ‘बोल बम’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा शहर गूंजता रहा. देर रात से ही सुलतानगंज पहुंचने वाले कांवरियों का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शुक्रवार देर शाम तक जारी रहा. गंगा घाटों से लेकर कांवरिया पथ तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं. दूसरी सोमवारी और सोम प्रदोष के मौके पर बाबा वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक की तैयारी में शिवभक्त गंगाजल लेकर देवघर की ओर रवाना हुए. रात 12 बजे तक 2,90,594 कांवरिये रवाना कृष्णगढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम सात बजे तक 2,41,478 कांवरिये बाबा धाम के लिए रवाना हो चुके थे. रात 12 बजे तक यह संख्या बढ़कर 2,90,594 पहुंच गयी. इनमें पैदल कांवरियों के साथ डाकबम और वाहनों से देवघर जाने वाले श्रद्धालु भी शामिल रहे. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान किया और पवित्र जल लेकर बाबा वैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए अपनी यात्रा शुरू की. 407 डाकबम ने भी शुरू की बाबा धाम यात्रा शुक्रवार को सुलतानगंज से 407 डाकबम भी प्रमाणपत्र लेकर देवघर के लिए रवाना हुए. इनमें 20 महिला डाकबम शामिल रहीं. डाकबम कांवरिये निर्धारित प्रक्रिया के तहत गंगाजल लेकर तेज गति से बाबा धाम की यात्रा करते हैं. कांवरियों की भारी भीड़ का असर मेला क्षेत्र के बाजारों में भी दिखा. दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों के कारोबार में तेजी देखने को मिली. मन्नत पूरी हुई तो बेटी को डलिया में लेकर निकले कांवरिया श्रावणी मेला में आस्था की एक भावुक तस्वीर भी देखने को मिली. एक कांवरिया अपनी मन्नत पूरी होने के बाद अपनी बेटी को डलिया में बैठाकर बाबा वैद्यनाथ के दरबार की ओर रवाना हुआ. कांवरिया ने बताया कि उन्होंने बाबा वैद्यनाथ से बेटी के लिए मन्नत मांगी थी. मन्नत पूरी होने के बाद अब वह बेटी को साथ लेकर बाबा के दरबार में जलाभिषेक करने जा रहे हैं. परिवार के अन्य सदस्य भी इस यात्रा में उनके साथ हैं. गंगा महाआरती में भक्तिमय हुआ घाट शुक्रवार शाम सुलतानगंज के गंगा घाट पर भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया गया. जिला प्रशासन और जाड़वी गंगा महाआरती महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. ‘जय गंगे माता’ के जयघोष के साथ शिव तांडव स्तोत्र, मंत्रोच्चार और धार्मिक प्रस्तुतियों से पूरा गंगा तट भक्तिमय हो उठा. श्रावणी मेला के दौरान यहां प्रतिदिन गंगा महाआरती का आयोजन किया जा रहा है. शिवभजनों पर देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु मेला क्षेत्र में शुक्रवार को धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की भी झलक देखने को मिली. धांधी-बेलारी महाशिविर से लेकर नमामि गंगे घाट तक आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कांवरिये और श्रद्धालु देर रात तक भक्ति गीतों पर झूमते रहे. कलाकारों ने शिवभजनों और लोकगीतों की प्रस्तुति दी. ‘शिव के धाम, बोल बम का नारा है’, ‘बाबा एक सहारा है’ और अन्य भक्ति गीतों पर श्रद्धालु कलाकारों के साथ झूमते नजर आये. सुलतानगंज से देवघर तक शिवमय हुआ माहौल दूसरी सोमवारी से पहले सुलतानगंज में उमड़ी लाखों कांवरियों की भीड़ ने श्रावणी मेला की भव्यता को एक बार फिर दिखा दिया. गंगा स्नान से लेकर जल भरने, कांवर यात्रा, डाकबम प्रस्थान, गंगा महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक पूरा सुलतानगंज शिवभक्ति में डूबा नजर आया. रात तक 2.90 लाख से ज्यादा कांवरियों के देवघर रवाना होने से दूसरी सोमवारी से पहले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का नया रिकॉर्ड बनता दिखा. सुलतानगंज से देवघर तक की यह आस्था यात्रा धार्मिक उत्साह के साथ स्थानीय बाजार और कारोबार को भी रफ्तार देती नजर आयी.  

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