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Jantar Mantar Row: Teen Apologises

जंतर-मंतर विवाद: PM मोदी पर टिप्पणी करने वाली युवती ने मांगी माफी, बोली- 'मुझसे बड़ी गलती हुई, मैं शर्मिंदा हूं'

kalpana अगस्त 1, 2026 0
A teenage girl issues a public apology in a video after controversy over remarks made during the Jantar Mantar protest.
Teen Apologises Over PM Modi Remark During Jantar Mantar Protest

Jantar Mantar Protest Row: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में विवादों में आई एक युवती ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। वीडियो में युवती हाथ जोड़कर अपनी गलती स्वीकार करती नजर आ रही है। उसने कहा कि वह अपने व्यवहार पर शर्मिंदा है और पूरे देश से क्षमा मांगती है।

'मैं सिर्फ 15 साल की हूं, दूसरों के प्रभाव में आ गई'

वायरल वीडियो में युवती ने दावा किया कि उसकी उम्र 15 वर्ष है। उसने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं से जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में पहुंच गई। उसके मुताबिक, वहां मौजूद कुछ लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते देख वह भी उनके प्रभाव में आकर नारे लगाने लगी।

युवती ने कहा कि उसे अपने किए पर पछतावा है और उसने बिना सोचे-समझे ऐसा किया। उसने इसे अपनी "पहली और आखिरी गलती" बताते हुए दोबारा ऐसी गलती न दोहराने का भरोसा दिलाया।

'मुझसे गंभीर गलती हुई, पूरे देश से माफी मांगती हूं'

माफीनामा वीडियो में युवती ने कहा कि उसे एहसास है कि उससे गंभीर भूल हुई है। उसने कहा कि वह अपने व्यवहार से बेहद शर्मिंदा है और देशवासियों से हाथ जोड़कर माफी मांगती है। वीडियो में वह लोगों से उसे माफ करने की अपील भी करती दिखाई देती है।

PM मोदी ने युवाओं को सुधार का मौका देने की कही थी बात

युवती का माफीनामा वीडियो उस समय सामने आया, जब कुछ घंटे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों पर दुख जताया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने और सुधार का अवसर मिलना चाहिए।

नोएडा में दर्ज हुई थी FIR

इस मामले को लेकर 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई।

जांच दिल्ली पुलिस को सौंपी गई

नोएडा पुलिस ने बताया कि घटना दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में हुई थी, इसलिए मामला जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, अधिवक्ता स्मृति सिंह की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने सोसाइटी में की पूछताछ

पुलिस के मुताबिक, युवती अपनी मां के साथ नोएडा के सेक्टर-168 स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के बाद से वह अपने फ्लैट पर वापस नहीं लौटी है। पुलिस ने सोसाइटी पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों से पूछताछ भी की है।

CJP ने आपराधिक कार्रवाई पर उठाए सवाल

इस बीच प्रदर्शन का आयोजन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवती के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, तो उसके लिए मानहानि जैसे कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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जंतर मंतर छात्र प्रदर्शन
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर राजनीतिक जुबानी जंग, छात्रों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि सरकार की ओर से आंदोलन और उससे जुड़े आरोपों पर जवाब दिया गया।   छात्रों के समर्थन में विपक्ष ने सरकार को घेरा   जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता छात्रों के समर्थन में सामने आए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल समेत नेताओं ने परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई।   राहुल गांधी ने सरकार से कार्रवाई की मांग की   कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई करने की मांग की और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया।   पीएम मोदी की अपील के बाद सियासत और तेज   प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें समझाने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपशब्द किसी समस्या का समाधान नहीं करते।   प्रदर्शन ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा   जंतर-मंतर का आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा। पेपर लीक, छात्रों की सुरक्षा, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

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आंध्र प्रदेश में नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, भोगापुरम एयरपोर्ट से विकास को मिलेगी नई उड़ान

विजयनगरम, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में बने अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। करीब ₹5,640 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में हवाई संपर्क, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।   60 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता   भोगापुरम एयरपोर्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया है। इसके पहले चरण में यह एयरपोर्ट हर साल करीब 60 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। भविष्य में इसकी क्षमता को और बढ़ाने की योजना है। आधुनिक यात्री टर्मिनल, बेहतर रनवे और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ यह एयरपोर्ट क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।   AI और आधुनिक तकनीक से लैस एयरपोर्ट   अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट में यात्रियों की सुविधा और संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोमेट्रिक यात्री प्रोसेसिंग, ऑटोमेटेड बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और स्मार्ट ऑपरेशनल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।   पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा   सरकार का कहना है कि नया एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश में पर्यटन, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को गति देगा। विशाखापत्तनम और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह एयरपोर्ट एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार में मदद मिलेगी।   विशाखापत्तनम एयरपोर्ट से बदलेगा हवाई संचालन   नए एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद विशाखापत्तनम के मौजूदा एयरपोर्ट से नागरिक उड़ानों को धीरे-धीरे भोगापुरम एयरपोर्ट की ओर स्थानांतरित करने की योजना है। इससे उत्तर आंध्र क्षेत्र में एक बड़े आधुनिक विमानन केंद्र के रूप में भोगापुरम की भूमिका बढ़ेगी।   दक्षिण भारत के विमानन नेटवर्क को मजबूती   अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को दक्षिण भारत के विमानन ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और आर्थिक विकास को नई गति देगी।

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Jaish-e-Mohammed
बर्धमान से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, STF ने दबोचा; जांच में मिले अहम सुराग

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध रखने वाले एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान मोहम्मद हमीद मंडल के रूप में हुई है। अधिकारियों ने उसके संभावित आतंकी नेटवर्क से संबंधों की जांच शुरू कर दी है।   बर्धमान के आवासीय परिसर से हुई गिरफ्तारी   STF ने हमीद मंडल को बर्धमान शहर के एक आवासीय परिसर से गिरफ्तार किया। रिपोर्ट के अनुसार वह पिछले करीब दो-तीन महीने से वहां किराये के मकान में रह रहा था। STF को उसकी गतिविधियों पर संदेह था, जिसके बाद निगरानी बढ़ाई गई और कार्रवाई की गई।   मोबाइल और दस्तावेजों से मिले अहम सुराग   जांच एजेंसियों को संदिग्ध के मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेजों से ऐसी जानकारियां मिलने की बात सामने आई है, जिनकी अब गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों को कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी की गतिविधियों से जुड़ी निगरानी संबंधी जानकारी भी मिली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इसका किसी संभावित आतंकी साजिश से संबंध था या नहीं।   आतंकी नेटवर्क से कनेक्शन की जांच तेज   STF अब हमीद मंडल के संपर्कों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसके संबंध जैश-ए-मोहम्मद के अन्य संदिग्धों से थे या नहीं। फिलहाल उसके खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी है और उसके कथित आतंकी संबंधों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।   झारखंड तक पहुंची जांच की कड़ी   मामले की जांच बर्धमान तक सीमित नहीं रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक STF ने झारखंड के साहिबगंज में भी कार्रवाई करते हुए हमीद मंडल से कथित संपर्क रखने वाली अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अब दोनों के बीच संपर्क और संभावित नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।

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