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₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी तेज, अप्रैल 2027 से शुरू हो सकता है इस्तेमाल

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
RBI Plastic Notes
RBI Plastic Notes

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में पहली बार पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट लाने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्र सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, इन नोटों को वित्त वर्ष 2027-28 की शुरुआत में प्रचलन में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोटों का होगा परीक्षण

 

सरकार ने शुरुआती परीक्षण के लिए ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब यानी कुल 200 करोड़ पॉलिमर नोट जारी करने की अनुमति दी है। इन नोटों के लिए जरूरी पॉलिमर सामग्री की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

 

फील्ड ट्रायल का उद्देश्य यह देखना है कि भारतीय परिस्थितियों में पॉलिमर नोट कितने टिकाऊ रहते हैं और उनके इस्तेमाल से करेंसी प्रबंधन पर क्या असर पड़ता है।

 

कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होंगे

 

पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में पानी, गंदगी और फटने से अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। छोटे मूल्यवर्ग के नोट रोजाना बड़ी संख्या में इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले नोटों से बार-बार नोट बदलने की जरूरत कम हो सकती है।

 

इसके अलावा पॉलिमर करेंसी में आधुनिक सुरक्षा विशेषताओं को शामिल करना संभव होता है, जिससे नकली नोटों की समस्या से निपटने में भी मदद मिल सकती है।

 

अप्रैल 2027 के आसपास प्रचलन में आने का लक्ष्य

 

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को बताया कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027-28 की शुरुआत में ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों को प्रचलन में लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसका मतलब है कि इन नोटों का इस्तेमाल अप्रैल 2027 के आसपास शुरू हो सकता है।

 

हालांकि, फिलहाल यह फील्ड ट्रायल और तैयारी के चरण में है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के कागजी नोट बंद होने जा रहे हैं। पॉलिमर नोट आने के बाद पुराने नोटों की वैधता और चलन को लेकर RBI की ओर से अलग से स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएंगे।

 

नकली नोट और करेंसी प्रबंधन पर भी नजर

 

RBI का यह कदम सिर्फ नोटों की उम्र बढ़ाने तक सीमित नहीं है। पॉलिमर करेंसी के जरिए सुरक्षा, टिकाऊपन और करेंसी प्रबंधन को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

 

अगर शुरुआती फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों में भी पॉलिमर सामग्री के इस्तेमाल की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल RBI का प्राथमिक फोकस ₹10 और ₹20 के नोटों के परीक्षण पर है।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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सुप्रीम कोर्ट में बढ़ी जजों की संख्या, संसद ने विधेयक को दी मंजूरी; अब 38 न्यायाधीश होंगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। संसद ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।   राज्यसभा से भी पास हुआ विधेयक   लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया है। सरकार की ओर से इसे न्यायिक व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों के दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।   विधेयक के तहत मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने पर कुल स्वीकृत संख्या 38 होगी।   चार नए न्यायाधीशों के पद बढ़ेंगे   इस संशोधन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चार अतिरिक्त न्यायाधीशों के पद बढ़ेंगे। केंद्र सरकार ने इस वृद्धि का प्रमुख उद्देश्य अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाना और मामलों के निपटारे में तेजी लाना बताया है।   सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश संख्या में इससे पहले वर्ष 2019 में बढ़ोतरी की गई थी। उस समय मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।   लंबित मामलों का बोझ कम करने पर जोर   सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के पीछे लंबित मामलों की बड़ी संख्या और न्यायिक कार्यभार को कम करना प्रमुख वजहों में शामिल है। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त न्यायाधीशों से मामलों की सुनवाई और निपटारे की क्षमता बढ़ेगी तथा न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।   अब संसद से विधेयक पारित होने के बाद इसके लागू होने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता 38 हो जाएगी।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में बढ़ते सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना और लेन अनुशासन का पालन सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह मानवीय व्यवहार और यातायात नियमों की अनदेखी है।   ड्राइवर ट्रेनिंग पर दिया सबसे ज्यादा जोर   संसद में अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल बेहतर सड़कों से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालकों से भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को ट्रैफिक नियमों, लेन अनुशासन और सुरक्षित ड्राइविंग की वैज्ञानिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में कमी लाई जा सके।   सड़क हादसों के प्रमुख कारण   सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों और गडकरी के बयान के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं— ट्रैफिक नियमों की जानकारी और प्रशिक्षण की कमी गलत लेन में वाहन चलाना और बिना संकेत लेन बदलना ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाना मानवीय त्रुटियां और असावधानी राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतों में आई कमी   सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 2025 के दौरान 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 62,122 लोगों की मौत हुई, जबकि 2024 में यह संख्या 64,772 और 2023 में 63,112 थी।   हालांकि, 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,43,526 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं, वर्ष 2026 में 27 जुलाई तक 77,234 हादसे रिकॉर्ड किए जा चुके हैं।   देशभर में हादसों की स्थिति चिंताजनक   साल 2025 में देशभर में कुल 5,13,563 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.30 प्रतिशत अधिक हैं। इन हादसों में 1,83,382 लोगों की मौत हुई। यानी देश में औसतन हर घंटे 21 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई।   तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सबसे आगे   राज्यों के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में सबसे अधिक 71,387 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि उत्तर प्रदेश सड़क हादसों में मौतों के मामले में शीर्ष पर रहा, जहां वर्ष 2025 में 27,550 लोगों की जान गई।   केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ ड्राइवर प्रशिक्षण और ट्रैफिक नियमों के प्रभावी पालन पर विशेष जोर दे रही है।

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Monsoon Session 2026
Monsoon Session 2026: विपक्ष के हंगामे से लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, छात्र आंदोलन और राम मंदिर मुद्दे पर टकराव

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मॉनसून सत्र का गुरुवार को 14वां दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के साथ शुरू हुआ। विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदा मामले को लेकर सरकार को घेर रहा है।   कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा   लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा और पारित कराने का कार्यक्रम था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही। लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।   छात्र आंदोलन पर चर्चा की मांग   कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा की मांग की। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में इस मुद्दे पर औपचारिक बयान देने की भी मांग की। नोटिस में प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस, वॉटर कैनन और अन्य बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।   संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन   संसद परिसर में I.N.D.I.A. गठबंधन के सांसदों ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में विपक्षी दलों की बैठक भी हुई, जिसमें संसद के भीतर और बाहर की रणनीति पर चर्चा की गई।   पप्पू यादव ने सरकार को घेरा   निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने झारखंड के छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की मांगों पर बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के जवाब में लाठीचार्ज और गोलियां चलाई गईं, जबकि अब बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहा है।   मार्क जुकरबर्ग की माफी पर बीजेपी की प्रतिक्रिया   बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मामले में Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग की माफी का स्वागत किया। उन्होंने इसे भारत के कानून, संविधान और संसद की जीत बताते हुए कहा कि भारत में कारोबार करने वाली हर कंपनी को भारतीय कानून का पालन करना होगा।   राज्यसभा में भी अहम विधायी कार्य   राज्यसभा में एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल, 2026 पर चर्चा और पारित कराने का कार्यक्रम निर्धारित है। हालांकि, विपक्ष के रुख को देखते हुए दोनों सदनों में आगे भी हंगामे की संभावना बनी हुई है।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
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