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SC Orders Better Care for Injured

Supreme Court: छात्र आंदोलन में पैलेट गन से घायल लोगों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करे दिल्ली सरकार

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Supreme Court of India directs Delhi government to ensure proper medical treatment for people injured during the student protest
Supreme Court Directs Delhi Government on Treatment of Injured Protesters

Student Protest Pellet Gun Case: सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन से घायल लोगों के इलाज को लेकर अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि आंदोलन के दौरान घायल हुए सभी लोगों को उचित और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

पैलेट गन के इस्तेमाल को चुनौती

याचिका दो ऐसे लोगों की ओर से दाखिल की गई है, जो 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए थे। इस याचिका में पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद भी तीसरे याचिकाकर्ता हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। साथ ही पैलेट गन से घायल लोगों को उचित मुआवजा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश भी देने की अपील की गई है।

दिल्ली सरकार को कोर्ट का निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र आंदोलन में घायल हुए लोगों का उचित मेडिकल इलाज सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत ने दिल्ली सरकार को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि घायलों का समय पर इलाज हो सके।

मुआवजा और प्रतिबंध की भी मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान आम लोगों पर पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और घायल लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए।

मामले की सुनवाई फिलहाल जारी है और सुप्रीम कोर्ट आगे इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Japan Earthquake: जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप से 18 की मौत, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

Japan Earthquake: जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुमामोतो प्रांत में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 62 लोग घायल हुए हैं। घायलों में छह की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी भूकंप के बाद सेना, दमकल विभाग और आपदा राहत दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। कई मकान पूरी तरह ढह गए हैं, जबकि कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने बताया कि अभी भी कुछ लोगों के लापता होने की आशंका है और उनकी तलाश जारी है। हजारों घरों में बिजली-पानी ठप भूकंप के कारण करीब 34,900 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जबकि लगभग 15,000 घरों में पानी की सप्लाई बंद है। हालात को देखते हुए 8,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जो फिलहाल 400 से ज्यादा राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रशासन प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है। मॉल और फैक्ट्री हादसे में बढ़ा नुकसान कुमामोतो के काशिमा शहर स्थित एयॉन मॉल में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा, जहां चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं यत्सुशिरो में स्थित निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज की फैक्ट्री की चिमनी गिरने से पांच कर्मचारियों की मौत हो गई। सात कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि चार अन्य के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। प्रधानमंत्री ने बचाव अभियान तेज करने के दिए निर्देश जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि कई लोग अब भी मलबे में फंसे हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण है। उन्होंने राहत एवं बचाव एजेंसियों को अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए लोगों से गर्म मौसम के बीच स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की। 2016 के भूकंप की यादें फिर हुईं ताजा भूकंप के बाद बुलेट ट्रेन सेवाओं को एहतियातन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है, जबकि आसो कुमामोतो हवाई अड्डे से सीमित उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू कर दी गई हैं। गौरतलब है कि 2016 में भी कुमामोतो प्रांत विनाशकारी भूकंप की चपेट में आया था, जिसमें 50 से अधिक लोगों की जान गई थी। ताजा भूकंप ने एक बार फिर जापान की भूकंपीय संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की बड़ी चुनौती को सामने ला दिया है।  

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Assam Flood: दिखो नदी का कहर, एक घंटे में उजड़ गया 200 परिवारों का गांव; हजारों मवेशी बहे

Assam Flood News: असम के शिवसागर जिले में दिखो नदी में आई भीषण बाढ़ ने महज एक घंटे के भीतर 200 परिवारों वाले पूरे गांव को तबाह कर दिया। असम-नागालैंड सीमा से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित हिलोनी नेपाली खुटी गांव अब मलबे, गाद और बर्बादी में बदल चुका है। वर्षों से यहां रह रहे गोरखा परिवार बेघर हो गए हैं, जबकि कई लोगों की मौत और हजारों मवेशियों के बह जाने की खबर है। नागालैंड की भारी बारिश बनी तबाही की वजह 19 जुलाई को नागालैंड की पहाड़ियों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद दिखो नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। उस समय ग्रामीण हर साल की तरह नदी में बहकर आई लकड़ियां और जलावन इकट्ठा कर रहे थे। देखते ही देखते नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया और तेज बहाव ने घर, खेत, मवेशी और लोगों की आजीविका को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों का कहना है कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को घर का सामान तक समेटने का मौका नहीं मिला। कई परिवार ऊंचे स्थानों पर फंस गए, जिन्हें बाद में राहत दलों ने सुरक्षित बाहर निकाला। कई लोगों की मौत, परिवार हुए बेघर गांव के निवासी बलराम शर्मा ने बताया कि इस हादसे में उनके कम से कम सात पड़ोसियों की जान चली गई। वहीं प्रकाश शर्मा ने अपनी नाव की मदद से परिवार के 14 सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन उनके 60 मवेशियों में से सिर्फ चार ही बच सके। फिलहाल उनका परिवार तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तबाही के बाद गांव को दोबारा बसाने और पहले जैसी स्थिति में लौटने में 30 से 40 साल लग सकते हैं। हजारों मवेशी बहे, उजड़ गई आजीविका हिलोनी नेपाली खुटी गांव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से डेयरी फार्मिंग पर आधारित थी। गांव में करीब 4,000 मवेशी थे, जिनमें से अधिकांश बाढ़ की तेज धारा में बह गए। बलराम शर्मा के 23 मवेशियों में से 16 की मौत हो गई, जबकि कई परिवारों का पूरा पशुधन खत्म हो गया। ग्रामीण दूध बेचकर हर महीने अच्छी आय अर्जित करते थे और पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार था। बाढ़ ने उनकी रोजी-रोटी भी छीन ली है। गांव में पसरा सन्नाटा बाढ़ का पानी उतरने के बाद गांव में हर ओर रेत, पत्थर, उखड़े पेड़, टूटी टिन की छतें और बांस के ढांचे बिखरे पड़े हैं। कई जगह मरे हुए मवेशियों के शव पड़े होने से दुर्गंध फैल गई है। कभी जीवन से भरा रहने वाला यह गांव अब वीरानी और तबाही की तस्वीर बन चुका है। प्रशासन राहत और पुनर्वास कार्य में जुटा है, जबकि प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में ठहराया गया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।  

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PM Modi Social Media Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अभद्र पोस्ट किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। CJP विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आए पोस्टों को लेकर शिकायत मिलने पर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को नोटिस भेजकर संबंधित यूजर्स की जानकारी मांगी है। दिल्ली पुलिस ने बुधवार (29 जुलाई) को X को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्ट और वीडियो हटाने का अनुरोध किया है। साथ ही इन पोस्ट से जुड़े अकाउंट्स की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है। X से मांगी गई कौन-कौन सी जानकारी? पुलिस ने X से उन अकाउंट्स की पूरी डिटेल साझा करने को कहा है, जिन पर विवादित पोस्ट किए गए हैं। इसमें यूजर्स के नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, लॉगिन-लॉगआउट रिकॉर्ड, पोस्ट किए जाने की तारीख और समय समेत अन्य तकनीकी जानकारियां शामिल हैं। शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कदम उन शिकायतों के आधार पर उठाया गया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि ये पोस्ट 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन और 'चलो संसद' मार्च के बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए थे। सोशल मीडिया पर बढ़ाई गई निगरानी दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसकी सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही है। यदि किसी पोस्ट में आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजकर उसे हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, छात्र आंदोलनों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों की भी लगातार निगरानी की जा रही है और सोशल मीडिया पर होने वाली हर प्रमुख गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।  

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kalpana जुलाई 27, 2026 0

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