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Vedic Almanac: l वैदिक पंचांग l 18 अगस्त 2026, मंगलवार

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
Vedic Almanac
Vedic Almanac

दिनांक - 18 अगस्त 2026
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत 2083
शक संवत -1948
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा ॠतु
मास - श्रावण
पक्ष - शुक्ल
तिथि - षष्ठी शाम 05:50 तक तत्पश्चात सप्तमी
नक्षत्र - स्वाती पूर्ण रात्रि तक
योग - शुक्ल 19 अगस्त रात्रि 03:23 तक तत्पश्चात ब्रह्म
राहुकाल - शाम 03:55 से शाम 05:31 तक
सूर्योदय - 05:29
सूर्यास्त -  06:05
दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
व्रत पर्व विवरण- मंगलागौरी पूजन
विशेष- *षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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Bhogapuram Airport
भोगापुरम एयरपोर्ट शुरू, विशाखापट्टनम की सभी वाणिज्यिक उड़ानें नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट

विशाखापट्टनम/विजयनगरम, एजेंसियां। आंध्र प्रदेश के भोगापुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से 17 अगस्त 2026 से वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही विशाखापट्टनम के पुराने एयरपोर्ट से संचालित सभी नियमित वाणिज्यिक उड़ानों को नए एयरपोर्ट पर स्थानांतरित कर दिया गया है।   आधी रात से शुरू हुआ नया एयरपोर्ट   नए एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन 17 अगस्त की रात 12:01 बजे से शुरू हुआ। इसके बाद पहली घरेलू उड़ान सुबह करीब 7:30 बजे हैदराबाद के लिए रवाना हुई। शुरुआती दौर में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और तिरुपति समेत कई प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं।   विशाखापट्टनम एयरपोर्ट का कमर्शियल संचालन बंद   भोगापुरम एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ ही पुराने विशाखापट्टनम एयरपोर्ट का नियमित वाणिज्यिक विमान संचालन बंद हो गया। वहां से उड़ान भरने वाली आखिरी नियमित फ्लाइट इंडिगो की दिल्ली जाने वाली 6E 2018 थी, जो 16 अगस्त की रात करीब 10:45 बजे रवाना हुई। पुराने एयरपोर्ट का इस्तेमाल अब मुख्य रूप से रक्षा, आपातकाल और विशेष सरकारी उड़ानों के लिए किया जा सकेगा।   60 लाख यात्रियों की क्षमता   भोगापुरम एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इसके पहले चरण में सालाना करीब 60 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता है। एयरपोर्ट का विकास GMR समूह की कंपनी द्वारा किया गया है और इसे उत्तर आंध्र के प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।   विशाखापट्टनम से एयरपोर्ट पहुंचना होगा आसान   नए एयरपोर्ट और विशाखापट्टनम शहर के बीच यात्रियों की आवाजाही के लिए इलेक्ट्रिक बसों की सेवा भी शुरू की गई है। एयरपोर्ट के शुरू होने से उत्तर आंध्र प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
रेलवे स्टेशनों पर टैंक टू टैप वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की योजना

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भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री-XV में सैनिकों की ट्रेनिंग
भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ आज से शुरू, जंगल और अर्ध-शहरी युद्ध की होगी ट्रेनिंग

बैंकॉक, एजेंसियां। भारत और थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ का 15वां संस्करण 18 अगस्त 2026 से थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावदी रंगसित कैंप में शुरू हो रहा है। यह अभ्यास 31 अगस्त तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग, आपसी तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना है।   दोनों देशों के 85-85 सैनिक ले रहे हिस्सा   इस अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी के 85-85 जवान हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के सैनिक शामिल हैं, जबकि थाईलैंड की ओर से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन के जवान भाग ले रहे हैं।   आतंकवाद विरोधी अभियानों पर रहेगा जोर   ‘मैत्री-XV’ में जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त अभियान चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। दोनों सेनाएं उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों में इस्तेमाल होने वाली रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगी। प्रशिक्षण में फील्ड एक्सरसाइज, सैन्य चर्चाएं, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंत में एक संयुक्त सत्यापन अभ्यास शामिल होगा।   2006 में शुरू हुआ था ‘मैत्री’ अभ्यास   भारत-थाईलैंड ‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत 2006 में हुई थी। यह अभ्यास दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले वर्ष इसका 14वां संस्करण मेघालय के उमरोई में आयोजित हुआ था। मौजूदा अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, आपसी समझ और विश्वास को और मजबूत करने की उम्मीद है।   भारत-थाईलैंड रक्षा संबंधों के लिए अहम   यह अभ्यास दोनों देशों के बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान सैनिक आधुनिक उपकरणों और तकनीकों से जुड़े अनुभव भी साझा करेंगे। इससे भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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CosmoCube Space Mission
सूटकेस के आकार का CosmoCube बताएगा पहले तारे बनने से पहले ब्रह्मांड में क्या हुआ था

हैदराबाद, एजेंसियां। वैज्ञानिक ब्रह्मांड के शुरुआती दौर के रहस्यों को समझने के लिए एक अनोखे मिशन पर काम कर रहे हैं। CosmoCube नाम का सूटकेस के आकार का छोटा सैटेलाइट चांद की कक्षा में रहकर बेहद कमजोर रेडियो सिग्नल का अध्ययन करेगा। इन संकेतों के जरिए वैज्ञानिक बिग बैंग के बाद और पहले तारों के बनने से पहले के समय को समझने की कोशिश करेंगे।   चांद की रेडियो शील्ड का करेगा इस्तेमाल   CosmoCube की खासियत यह है कि यह चांद के उस हिस्से का इस्तेमाल प्राकृतिक ढाल के रूप में करेगा, जो पृथ्वी से दूर रहता है। चांद पृथ्वी से आने वाले रेडियो इंटरफेरेंस को रोकने में मदद करेगा, जिससे सैटेलाइट को ब्रह्मांड से आने वाले बेहद कमजोर संकेतों को पकड़ने का बेहतर मौका मिलेगा।   प्रस्तावित मिशन में सैटेलाइट चांद के चारों ओर करीब दो घंटे की कक्षा में घूमेगा। इसमें लगभग 40 मिनट चांद की दूसरी तरफ बिताकर रेडियो सिग्नल रिकॉर्ड करने की योजना है।   13.5 अरब साल पुराने संकेतों की तलाश   वैज्ञानिक जिस सिग्नल का अध्ययन करना चाहते हैं, वह शुरुआती ब्रह्मांड में मौजूद हाइड्रोजन से जुड़ा 21-सेंटीमीटर रेडियो सिग्नल है। यह संकेत ब्रह्मांड के उस दौर की जानकारी दे सकता है, जब पहले तारे और आकाशगंगाएं अस्तित्व में नहीं आई थीं।   बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड में करीब 150 मिलियन वर्षों तक कॉस्मिक डार्क एज का दौर रहा। इसके बाद पहले तारों का निर्माण शुरू हुआ। इस संक्रमण को समझना खगोल विज्ञान की बड़ी चुनौतियों में से एक है।   धरती से सिग्नल पकड़ना क्यों मुश्किल?   पृथ्वी से इन बेहद कमजोर रेडियो संकेतों का अध्ययन करना आसान नहीं है। आयनोस्फीयर कम-फ्रीक्वेंसी वाली कुछ रेडियो तरंगों को प्रभावित करता है। इसके अलावा FM रेडियो, टेलीकम्युनिकेशन और सैटेलाइट से पैदा होने वाला रेडियो शोर भी कॉस्मिक सिग्नल को दबा सकता है।   इसी समस्या को देखते हुए वैज्ञानिक चांद के दूर वाले हिस्से को रेडियो-शांत क्षेत्र के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।   डार्क मैटर के रहस्य भी खुल सकते हैं   CosmoCube से मिलने वाले आंकड़े सिर्फ पहले तारों की कहानी समझने में ही मदद नहीं कर सकते, बल्कि शुरुआती ब्रह्मांड में डार्क मैटर की भूमिका पर भी नई जानकारी मिल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, डार्क मैटर के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने गैस और दूसरे पदार्थों को एक साथ खींचने में भूमिका निभाई होगी। इसी प्रक्रिया से आगे चलकर तारों और आकाशगंगाओं के निर्माण में मदद मिली।   छोटा सैटेलाइट, बड़ी चुनौती   आकार छोटा होने के बावजूद CosmoCube के लिए तकनीकी चुनौतियां काफी बड़ी हैं। सैटेलाइट को अपने ही सिस्टम और दूसरे अंतरिक्षीय स्रोतों से पैदा होने वाले शोर को कॉस्मिक सिग्नल से अलग करना होगा।   इसके लिए हल्के रेडियो एंटीना और एडवांस्ड डेटा प्रोसेसिंग तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। वैज्ञानिक सैटेलाइट की स्थिति और आसपास के वातावरण की लगातार निगरानी भी करेंगे, ताकि इंस्ट्रूमेंट से पैदा होने वाले इंटरफेरेंस की पहचान की जा सके।   पांच साल में लॉन्च की तैयारी संभव   वैज्ञानिकों की टीम फिलहाल CosmoCube के मॉडल को विकसित और टेस्ट कर रही है। इसमें अंतरिक्ष में सैटेलाइट के थर्मल प्रदर्शन का परीक्षण भी शामिल है।   टीम के मुताबिक, पर्याप्त सहयोग और संसाधन मिलने पर मिशन को करीब पांच साल में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है। हालांकि, चांद के दूर वाले हिस्से में बढ़ते अंतरिक्ष अभियानों और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण रेडियो-शांत वातावरण को बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है।   अगर CosmoCube सफल होता है, तो यह ब्रह्मांड के उस बेहद शुरुआती दौर को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है, जो अब तक वैज्ञानिकों के लिए काफी हद तक अनदेखा रहा है।

anjali kumari अगस्त 17, 2026 0
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