दिनांक - 02 मई 2026
दिन - शनिवार
विक्रम संवत 2083
शक संवत -1948
अयन - उत्तरायण
ऋतु - ग्रीष्म ॠतु
मास - ज्येष्ठ
पक्ष - कृष्ण
तिथि - प्रतिपदा रात्रि 12:49 तक तत्पश्चात द्वितीया
नक्षत्र - विशाखा पूर्ण रात्रि तक
योग - व्यतीपात रात्रि 09:45 तक तत्पश्चात वरीयान
राहुकाल - सुबह 09:22 से सुबह 10:59 तक
सूर्योदय - 05:18
सूर्यास्त - 06:20
दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
व्रत पर्व विवरण- विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिल्दा नेवरा इलाके में 29 अप्रैल को 7 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। घटना उस वक्त हुई जब बच्ची एक शादी समारोह में गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी का नाम पुलिस ने राजकुमार उर्फ राजा वर्मा (30 वर्ष) बताया है। तिल्दा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने आया था। 29 अप्रैल 2026 की रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच उसकी 7 साल की बेटी अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान उनके पड़ोस में रहने वाला राजकुमार उर्फ राजा वर्मा भी वहां मौजूद था। आरोपी ने मौका देखकर मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
बंतलाब इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जब एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। इस घटना में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। 6 मजदूर फंसे, 2 को सुरक्षित निकाला गया स्थानीय जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त कुल 6 मजदूर मौके पर काम कर रहे थे। इनमें से 2 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 4 मजदूर अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। बचाव कार्य तेजी से जारी है और समय के साथ रेस्क्यू टीमों की चुनौती बढ़ती जा रही है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। मौके पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी राहत कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुराने पुल की कमजोर नींव बनी वजह? घटनास्थल पर पहुंचे विधायक श्यामलाल शर्मा ने बताया कि यह पुल पहले से ही जर्जर हालत में था और उसकी नींव कमजोर हो चुकी थी। इसी कारण इसका पुनर्निर्माण किया जा रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि खुदाई के दौरान उत्पन्न कंपन या ऊपर से गुजर रहे किसी भारी वाहन के दबाव के कारण पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच के आदेश की संभावना प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण कार्य में किसी तरह की लापरवाही तो नहीं हुई। लोगों में दहशत, प्रशासन पर सवाल इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
1750 - कार्लो गोल्डोनी "ला बोटेटगा डि कफ" का प्रीमियर मैन्टुआ में किया गया। 1813 - ल्यूटन के युद्ध में नेपोलियन ने जर्मन गठबंधन के खिलाफ जीत हासिल की। 1816 - सैके-कोबोर्ग (बाद में बेल्जियन के राजा) के लियोपोल्ड ने चार्लोट अगस्ता से शादी की, लेकिन अगले साल उनकी मृत्यु हो गयी। 1845 - इंग्लैंड के ग्रेट यार्मवुड में एक निलंबन पुल के ढहने से करीब 80 लोग मारे गए जिसमे ज्यादातर बच्चे थे। 1866 - कैलाओ की लड़ाई: पेरू के रक्षको ने स्पेनी बेड़े से लड़ाई की। 1885 – बेल्जियम के राजा लियोपोल्ड द्वितीय ने की स्वतंत्र स्टेट कांगों की स्थापना की। 1920 – नीग्रो नेशनल लीग बेसबॉल का पहला मैच इंडियानापोलिस में खेला गया। 1933 – जर्मनी में हिटलर ने ट्रेड यूनियनों पर बेन लगा दी। 1945 – जर्मनी की आर्मी ने इटली में आत्मसमर्पण कर दिया। 1949 – महात्मा गांधी की हत्या मामले की सुनवाई शुरू हुई। 1950 – फ्रांस ने कोलकाता के पास स्थित अपने उपनिवेश चंद्रनगर को भारत सरकार को सौंपा। 1952 – दुनिया का पहला जेट विमान डी हैविलैंड धूमकेतु 1 ने लंदन से जोहांसबर्ग तक अपनी पहली उड़ान भरी। 1955 – टी विलियम्स ने अपने नाटक ‘कैट ऑन अ हॉट टिन रूफ’ के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता। 1959 – पहला थर्मोप्लास्टिक संयंत्र रिसरा में खोला गया। 1968 – लोक सभा ने सार्वजनिक भविष्य निधि विधेयक पारित किया। 1986 - सं.रा. अमेरिका की 30 वर्षीया एन. बैन्क्राफ़ उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाली प्रथम महिला बनीं। 1994 – पोलैंड में एक बस दुर्घटना हुई जिसमें 32 लोग मारे गए। 1997 - ब्रिटेन में 18 वर्षों बाद लेबर पार्टी सत्ता में, उसके नेता टोनी ब्लेयर ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने। 1999 - मिरया मोस्कोसो पनामा की प्रथम महिला राष्ट्रपति नियुक्त। 2002 - पाकिस्तान के इंजामामुल हक ने न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 329 रन बनाये। 2004 - मारेक बेल्का पोलैंड के नये प्रधानमंत्री बने। 2008 - अनिल अम्बानी ग्रुप की फर्म रिलायंस पावर लिमिटेड ने इण्डोनेशिया में तीन कोयला खदानों का अधिग्रहण किया। 2008 - ब्रिटेन के स्थानीय चुनाव में सत्तारुढ़ लेबर पार्टी की हार हुई। 2008 - अमेरिका ने म्यांमार पर नए प्रतिबन्ध लगाये। 2008 – वर्मा में चक्रवात नरगिस के आने से 1,38,000 लोग मारे गए और लाखों लोग बेघर। 2010 - सेवी का प्राथमिक पूंजी बाज़ार में नए इश्युओं की ख़रीद के लिए आवेदन करते समय संस्थागत निवेशकों को भी खुदरा निवेशकों की तरह शत प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश प्रभावी हो गया। 2019 - ईडी ने जाकिर नाईक के खिलाफ चार्जशीट दायर की , 50 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की। 2020 - अमेरिका में एफडीए ने कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर के इस्तेमाल को मंजूरी दी। 2021 - विश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक ‘सत्यजीत रे’ की जन्म शताब्दी मनाई गई व 10वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। 2021 - असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल हुए राज्य विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती शुरू की गई। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस की तीन देशों की यात्रा पर रवाना हुए। 2022 - गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सुबह भूकंप के 4.0 और 3.2 की तीव्रता के लगातार दो झटके महसूस किए गए। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने बर्लिन में छठे भारत-जर्मनी अंतर सरकारी परामर्श की सह-अध्यक्षता की। 2022 - इंडो - जर्मन हाइड्रोजन टास्क फोर्स पर एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। 2023 - भारत ने मालदीव को तेज गश्ती जहाज, लैंडिंग क्राफ्ट हमला जहाज सौंपा। 2023 - ‘ऑपरेशन कावेरी' के तहत सूडान से 559 भारतीयों का एक और जत्था स्वदेश लौटा। 2023 - नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार का सिंगापुर दौरा शुरू हुआ , पहले आसियान भारत समुद्री अभ्यास का उद्घाटन समारोह हुआ। 2 मई को जन्मे व्यक्ति 1921 - सत्यजित राय ऑस्कर पुरस्कार सम्मानित फ़िल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक। 1921 - पद्म भूषण से सम्मानित ब्रज बासी लाल - भारत के विख्यात पुरातत्त्वविद्। 1922 - विल्सन जोन्स - भारत के पेशेवर बिलियर्ड्स खिलाड़ी थे। 1929 - विष्णु कांत शास्त्री - भारतीय राजनीतिज्ञ एवं साहित्यकार थे। 1929 - जिग्मे दोरजी वांग्चुक - भूटान के तीसरे राजा थे। 1935 - दया प्रकाश सिन्हा - एक अवकाशप्राप्त आई०ए०एस० अधिकारी , लेखक, नाटककार, नाट्यकर्मी, निर्देशक व चर्चित इतिहासकार। 1939 - विश्वेश्वर नाथ खरे - भारत के सर्वोच्च न्यायालय के भूतपूर्व 33वें न्यायाधीश रहे। 2 मई को हुए निधन 1519 - लिओनार्दो दा विंची, इटलवासी, महान चित्रकार। 1911 – भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध विद्वान सैयद अली बिलगिरामी का स्वर्गवास हुआ। 1975 - पद्मजा नायडू - प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ श्रीमती सरोजिनी नायडू की पुत्री। 1985 -बनारसीदास चतुर्वेदी- प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार। 2020 - जस्टिस अजय त्रिपाठी की कोरोना संक्रमण से मौत। 2022 - रूसी फुटबॉल मिडफील्डर यूरी वासेनिन (73) का निधन हुआ। 2023 - अंग्रेजी भूगोलवेत्ता ऐलिस कोलमैन (99) का निधन हुआ। 2023 - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते अरुण गांधी का कोल्हापुर में 89 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2023 - क्रोएशियाई पेशेवर बास्केटबॉल खिलाड़ी दामिर सोल्मन (74) का निधन हुआ। 2023 - ऑस्ट्रेलियाई पेशेवर गोल्फ खिलाड़ी फ्रैंक फिलिप्स (90) का निधन हुआ। 2 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव मुनि श्री सुव्रतनाथ जी ज्ञान कल्याणक ( जैन , बैशाख कृष्ण नवमी )। आचार्य शिरोमणि श्री 108 धर्मसागर जी महाराज समाधि दिवस (37 वाँ , जैन , बैसाख कृष्ण नवमी)। गुरु श्री अर्जुनदेव जयन्ती (नानकशाही)। राजनीतिज्ञा पद्मजा नायडू स्मृति दिवस। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान स्थापना दिवस (61वां , 1963)। अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान दिवस' ( International Astronomy Day , प्रतिवर्ष दो बार 2 मई व 26 सितंबर )। वर्ल्ड ट्यूना डे (World Tuna Day)। कृपया ध्यान दें जी यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।