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Global Spotlight on TMC Turmoil

टीएमसी में अंदरूनी संकट पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर, ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठे सवाल

Deepshikha जून 11, 2026 0
International media coverage highlights political developments and organizational challenges within Trinamool Congress in West Bengal.
Global Media Focus on TMC Political Crisis

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी कथित असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। विभिन्न वैश्विक प्रकाशनों में प्रकाशित विश्लेषणों में पार्टी की मौजूदा स्थिति, नेतृत्व शैली और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा की गई है।

वैश्विक मीडिया में टीएमसी संकट पर चर्चा

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित रिपोर्टों और विश्लेषणों में टीएमसी के भीतर उभर रहे मतभेदों को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया है। कई लेखों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे राजनीतिक सफर और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए वर्तमान परिस्थितियों का आकलन किया गया है।

विश्लेषकों ने ममता बनर्जी को एक संघर्षशील और जनाधार वाली नेता बताया है, जिन्होंने लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद राज्य में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कुछ रिपोर्टों में पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया गया है।

संगठनात्मक चुनौतियों पर केंद्रित रहे विश्लेषण

विदेशी मीडिया में प्रकाशित कुछ लेखों में दावा किया गया है कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व को लेकर असंतोष ने संगठन के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखना टीएमसी के लिए बड़ी परीक्षा बन सकता है।

कुछ विश्लेषणों में चुनावी रणनीतियों और संगठनात्मक ढांचे में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें पार्टी की वर्तमान स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग राय

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई दिखाई देती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि टीएमसी अभी भी पश्चिम बंगाल की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी हुई है और पार्टी नेतृत्व के पास हालात संभालने का पर्याप्त अनुभव है।

वहीं, कुछ अन्य विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

नेतृत्व और संगठन दोनों के लिए अहम दौर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां टीएमसी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकती हैं। पार्टी को एकजुट बनाए रखना और कार्यकर्ताओं का विश्वास कायम रखना आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी।

टीएमसी की ओर से अब तक पार्टी के भीतर किसी बड़े संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन की एकता और मजबूती पर जोर देता रहा है।

बंगाल की राजनीति पर बनी रहेगी नजर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी की भूमिका को देखते हुए राजनीतिक पर्यवेक्षक आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। पार्टी के भीतर की स्थिति और नेतृत्व के फैसले न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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राज्यसभा में CJP प्रदर्शन पर घमासान, खरगे-नड्डा आमने-सामने; बोले- 'एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना पड़ेगा'

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया, जबकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया। छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। खरगे ने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन छात्रों पर कथित अत्याचार करने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की। नड्डा बोले- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हुई कार्रवाई सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह कानून-व्यवस्था से जुड़ा सामान्य मामला था और इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाया जा रहा है। नड्डा ने कहा, "जो भी छात्र एक्टिविस्ट बनेगा, उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।" उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान छात्र आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण उन्हें भी कई बार गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल का दिया उदाहरण जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान लगाए गए आपातकाल में उन्हें कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों में शामिल लोगों को कई बार कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और इसे असामान्य नहीं माना जाना चाहिए। विपक्ष पर लगाया मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप नड्डा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को राजनीतिक रंग देकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की थी और इसे लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई, जबकि सरकार ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है।  

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Rajasthan Tiger Reserve
राजस्थान को जल्द मिलेगा नया टाइगर रिजर्व, बाघों के संरक्षण के लिए बढ़ेगा वन क्षेत्र

वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार   जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही एक नए टाइगर रिजर्व की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। राज्य में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके लिए सुरक्षित आवास तैयार करने को लेकर वन विभाग लगातार योजनाओं पर काम कर रहा है। राजस्थान में पहले से मौजूद टाइगर रिजर्व के अलावा नए क्षेत्रों को भी बाघ संरक्षण के लिए विकसित करने की तैयारी चल रही है।   बाघों की संख्या में हुआ इजाफा   राजस्थान में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बाघों की संख्या एक साल में 135 से बढ़कर 149 हो गई है। वन विभाग का मानना है कि बेहतर संरक्षण, निगरानी और एंटी-पोचिंग अभियान से बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली है।   नए क्षेत्रों को विकसित करने की तैयारी   राज्य में बाघों के लिए नए आवास और कॉरिडोर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। वन विभाग का उद्देश्य बाघों के प्राकृतिक विस्तार के लिए सुरक्षित जंगल क्षेत्र तैयार करना है, ताकि बढ़ती बाघ आबादी को पर्याप्त स्थान मिल सके।   राजस्थान में बढ़ेगा टाइगर संरक्षण नेटवर्क   राजस्थान में पहले से ही रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी जैसे टाइगर रिजर्व मौजूद हैं। इसके अलावा धौलपुर-करौली क्षेत्र को भी टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जा चुका है। नए रिजर्व से राज्य में बाघ संरक्षण का नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।   पर्यटन को भी मिलेगा फायदा   नए टाइगर रिजर्व बनने से वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल सकती है।

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Parliament Session: एंटी पेपर लीक बिल पर शशि थरूर के सवाल, बोले- सिर्फ सजा नहीं, लीक रोकने का पुख्ता इंतजाम भी हो

Parliament Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (Prevention of Unfair Means) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा जारी है। सरकार इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि सिर्फ कड़ी सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए। वहीं संसद के भीतर और बाहर विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। शशि थरूर ने उठाए अहम सवाल कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विधेयक में दोषियों के लिए सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान तो किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही कैसे रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या खत्म नहीं होगी। थरूर ने फास्ट ट्रैक अदालतों की मौजूदा स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले से ही इन अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। यदि सरकार इस कानून को प्रभावी बनाना चाहती है तो नए जजों की नियुक्ति, अतिरिक्त अदालतों की स्थापना और पर्याप्त संख्या में अभियोजकों की व्यवस्था भी करनी होगी। संसद में हंगामे के बीच कार्यवाही प्रभावित लोकसभा की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ समय के लिए दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष राम मंदिर चंदा मामले, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। लगातार नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। राहुल गांधी से रिजिजू की अपील संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी 20-30 मिनट बोलते हैं तो कम से कम पांच मिनट इस महत्वपूर्ण विधेयक पर भी अपने सुझाव दें। रिजिजू ने कहा कि छात्रों से जुड़े इतने अहम कानून पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। पंजाब पेपर लीक मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन संसद परिसर में पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने राज्य में कथित पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन किया। सांसदों ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफे की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। जॉन ब्रिटास ने उठाया दिल्ली पुलिस का मुद्दा राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि छात्र नेता आइशी घोष की तलाश में दिल्ली पुलिस वामपंथी दल के कार्यालय पहुंची थी। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह पुलिस का पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। अमित शाह पेश करेंगे अहम विधेयक आज लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेंगे। इसके अलावा सदन में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र के दौरान प्रमुख विधायी कार्य पूरे किए जाएं, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।  

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