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ऑनलाइन गेमिंग के बाद जहरीला पदार्थ निगलने से दो दोस्तों की मौत

पंजाब में ऑनलाइन गेमिंग का खौफनाक अंत, दो दोस्तों की मौत; तीसरा खतरे से बाहर

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
पंजाब के नवांशहर में ऑनलाइन गेमिंग के बाद दो दोस्तों की मौत
नवांशहर में ऑनलाइन गेमिंग के बाद दो दोस्तों की मौत

नवांशहर। पंजाब के नवांशहर जिले के गढ़ पधाना गांव में ऑनलाइन गेमिंग में नुकसान के बाद तीन दोस्तों द्वारा जहरीला पदार्थ निगलने का मामला सामने आया है। घटना में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि तीसरे का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

 

गेमिंग में नुकसान के बाद बिगड़ी स्थिति

 

पुलिस के अनुसार, 21 वर्षीय दिलप्रीत सिंह को ऑनलाइन गेमिंग में कथित तौर पर काफी आर्थिक नुकसान हुआ था। इसके बाद उसने अपने करीबी दोस्तों 15 वर्षीय परमजीत सिंह और 15 वर्षीय मनिंदर सिंह को जहरीला पदार्थ निगलने की बात बताई। इसके बाद दोनों नाबालिग दोस्तों ने भी जहरीला पदार्थ निगल लिया।

तीनों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। परमजीत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दिलप्रीत सिंह ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मनिंदर सिंह का उपचार जारी है और उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।

 

पुलिस खंगाल रही मोबाइल फोन

 

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तीनों ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे या नहीं और गेमिंग में हुए नुकसान का इस घटना से कितना संबंध है। परमजीत और मनिंदर के मोबाइल फोन की जांच की जा चुकी है, जबकि दिलप्रीत का फोन लॉक होने के कारण तकनीकी टीम को भेजा गया है।

पुलिस का कहना है कि फोन को जबरन खोलने से उसमें मौजूद महत्वपूर्ण डेटा नष्ट हो सकता है। इसलिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से फोन से गेमिंग, संभावित आर्थिक नुकसान और घटना से जुड़े अन्य सुराग जुटाए जा रहे हैं।

 

कर्ज की बात भी जांच के दायरे में

 

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि ऑनलाइन गेमिंग में नुकसान के साथ कथित कर्ज का कोई संबंध था या नहीं। पुलिस घटना में जहरीला पदार्थ कहां से आया और तीनों तक कैसे पहुंचा, इसकी भी पड़ताल कर रही है।

दिलप्रीत के पिता के भाई विदेश में रहते हैं और उसकी देखभाल के साथ आर्थिक मदद भी करते थे। उनके एक-दो दिन में गांव पहुंचने की संभावना है। पुलिस उनसे भी पूछताछ कर घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगी।

 

गांव में पसरा मातम

 

परमजीत और मनिंदर साधारण परिवारों से ताल्लुक रखते थे। घटना के बाद गांव में शोक और स्तब्धता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह और पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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मानसून सत्र में लोकसभा की करीब 16 प्रतिशत उत्पादकता
लोकसभा की उत्पादकता करीब 16% रही, मानसून सत्र में भारी हंगामे का असर

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला। लगातार विरोध-प्रदर्शन और हंगामे का सीधा असर लोकसभा की कार्यवाही पर पड़ा और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सदन की उत्पादकता करीब 16 प्रतिशत रही।   हंगामे के कारण प्रभावित हुआ कामकाज     मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), विभिन्न विधेयकों और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया।   कई मौकों पर हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इससे प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित कामकाज प्रभावित हुए। विपक्ष का आरोप रहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई गई, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन का काम बाधित हुआ।   कई महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित     कम उत्पादकता के बावजूद सरकार अपने कई विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल रही। मानसून सत्र के दौरान सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक, खान एवं खनिज क्षेत्र से जुड़े संशोधन, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से संबंधित संशोधन और अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद में कार्रवाई हुई।   वहीं FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजे जाने का फैसला भी सत्र के प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रमों में रहा। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग मत सामने आए।   सरकार और विपक्ष ने एक-दूसरे को ठहराया जिम्मेदार     सत्र के दौरान कम कामकाज को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी चलता रहा। विपक्ष ने सरकार पर चर्चा से बचने और महत्वपूर्ण मुद्दों को पर्याप्त समय नहीं देने का आरोप लगाया। दूसरी ओर सरकार ने कहा कि विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।   लोकसभा की करीब 16 प्रतिशत उत्पादकता का आंकड़ा इस पूरे सत्र में हुए व्यवधान की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, केवल उत्पादकता का आंकड़ा यह नहीं बताता कि संसद ने कितने विधेयक पारित किए या कितने मुद्दों पर चर्चा हुई—इसके लिए पूरे सत्र के विस्तृत संसदीय आंकड़ों को अलग-अलग देखना जरूरी है।   सत्र खत्म, लेकिन राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत     मानसून सत्र समाप्त होने के साथ संसद की औपचारिक कार्यवाही तो खत्म हो गई, लेकिन SIR, FCRA, चुनावी प्रक्रिया और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है।   सत्र के अंतिम दिन भी संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। अब दोनों पक्ष संसद के बाहर इन मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाएंगे।

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शराब नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया की नई याचिका, दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की चुनौती को खारिज करने की मांग

विजय माल्या की संपत्तियों के इस्तेमाल के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी से मांगा जवाब

मुंबई, एजेंसियां। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की संपत्तियों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। मामला उन संपत्तियों से जुड़ा है जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब्त किया था और बाद में SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को उनके इस्तेमाल की अनुमति मिली थी।   माल्या ने विशेष अदालत के आदेश को दी थी चुनौती   विजय माल्या ने वर्ष 2020 में विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को ED द्वारा जब्त की गई उनकी संपत्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। माल्या की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की एकल पीठ ने सुनवाई की।   बैंकों के पक्ष में संपत्तियों के इस्तेमाल का मामला   मामला मुख्य रूप से माल्या से जुड़े बैंक कर्ज और उससे संबंधित जब्त संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर है। बैंकों का पक्ष है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें इन संपत्तियों के जरिए अपने बकाये की वसूली का रास्ता मिलना चाहिए। माल्या की ओर से इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।   कोर्ट ने जांच एजेंसी से मांगा जवाब   बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वर्षों से चले आ रहे विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय पक्षों को मामले के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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बेंगलुरु, एजेंसियां। कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को छोड़े जाने के विरोध में कन्नड़ संगठनों द्वारा बुलाए गए कर्नाटक बंद के बीच आज बेंगलुरु में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। राज्यव्यापी बंद 13 अगस्त को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है। बंद का मुद्दा केवल कावेरी जल ही नहीं, बल्कि मेकेदाटु और महादयी परियोजनाओं से भी जुड़ा है।   पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दी चेतावनी   बेंगलुरु पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस आयुक्त सीमंत कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति, संगठन या समूह को जबरन दुकानें, संस्थान या अन्य प्रतिष्ठान बंद कराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।   बंद का बेंगलुरु में मिला-जुला असर   शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक बेंगलुरु में बंद का असर अपेक्षा से कम रहा। शहर के कई हिस्सों में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे तथा स्कूल-कॉलेजों में भी सामान्य गतिविधियां जारी रहीं। वहीं, राज्य के कुछ अन्य इलाकों में बंद का असर ज्यादा दिखाई दिया। रामनगर जिले में आंशिक बंद की खबर है। बेंगलुरु एयरपोर्ट भी संचालित रहा, हालांकि यात्रियों को परिवहन व्यवस्था में संभावित व्यवधान को देखते हुए अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई।   कावेरी पानी को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?   कर्नाटक के कन्नड़ संगठनों और किसान समूहों का विरोध तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े जाने को लेकर है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि राज्य के जलाशयों और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना पानी छोड़ा जाना कर्नाटक के हित में नहीं है। इसी के साथ मेकेदाटु और महादयी परियोजनाओं को लेकर भी राज्य के हितों की मांग उठाई जा रही है।   ट्रैफिक और सार्वजनिक सेवाओं पर नजर   बंद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। सार्वजनिक परिवहन और टैक्सी सेवाओं पर असर की आशंका जताई गई थी, लेकिन बेंगलुरु में जमीनी स्थिति कई इलाकों में सामान्य से काफी बेहतर रही। यात्रियों को स्थानीय यातायात की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।

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अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?