राजनीति

शशि थरूर की पीएम मोदी पर टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

abhishek singh जून 20, 2026 0
Shashi Tharoor Narendra MODI
Shashi Tharoor PM MODI

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर  द्वारा नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल की सराहना करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए थरूर के बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी  को निशाने पर लिया।

 

थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ सार्वजनिक और निजी दोनों बैठकों में भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे सैनिक नहीं होते। थरूर ने यह भी कहा कि भारतीय ध्वज वाले और अन्य जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिक चिंता है।

 

कांग्रेस ने उठाए थे सवाल


इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पार्टी ने सवाल उठाया था कि अमेरिका से इस घटना पर जवाब या खेद व्यक्त करने की मांग क्यों नहीं की गई।

 

भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा


थरूर के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने कहा कि थरूर की टिप्पणी ने राहुल गांधी के आरोपों की पोल खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो प्रधानमंत्री मोदी मजबूती से भारत का पक्ष रखते हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है।

 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह द्विपक्षीय मुलाकात जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 16 महीने बाद हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Setback for Uddhav Thackeray
उद्धव ठाकरे को झटका, 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल

मुंबई, एजेंसियां। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है। सोमवार को सभी बागी सांसदों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके नंदनवन बंगले पर मुलाकात की और बाद में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले की जानकारी दी। शिंदे गुट की बढ़ी ताकत इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत 7 से बढ़कर 13 सांसदों तक पहुंच गई है। वहीं उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसदों में अब केवल 3 सांसद ही बचे हैं। बागी सांसदों में संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। उद्धव ठाकरे ने की बैठक इधर, मुंबई में उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की। हालांकि बैठक में कुछ विधायक अनुपस्थित रहे, जिससे पार्टी में और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बागी सांसदों पर वफादारी बेचने का आरोप लगाया। वहीं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे “गद्दारी” करार देते हुए कहा कि पार्टी को अब बड़े राजनीतिक ऑपरेशन की जरूरत है। ठाकरे 27 जून से राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में आगामी चुनावों से पहले बड़ा असर डाल सकता है। इसी बीच उद्धव ठाकरे 27 जून से राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं, जिसके जरिए वे अपने संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगे।

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झारखंडः हेमंत को सरयू राय के ऑफर पर भड़की कांग्रेस

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सियासी हलचल जारी है। जदयू विधायक सरयू राय की ओर से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ये सुझाव दिया गया कि वो कांग्रेस से नाता तोड़ लें। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बिना भी राज्य में गठबंधन की सरकार आराम से चल सकती है। जेएमएम के 34, राजद के 4, भाकपा-माले के 2 विधायकों को मिलाकर संख्या 40 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा जदयू और जेएलकेएम के एक विधायक के समर्थन से ये आंकड़ा 42 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से लिए पर्याप्त है।   सरयू राय ने क्या अमित शाह से अनुमति ली है? जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय के इस सुझाव के बाद जेएमएम की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस की ओर से सरयू राय के सुझाव के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि झारखंड में सरकार बनाने का जो फॉर्मूला सरयू राय दे रहे हैं, क्या उसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति ले ली है? झारखंड में बीजेपी का मंसूबा सफल नहीं होगा-कांग्रेस... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं की सत्तालोलुपता भी साफ देखी जा सकती है, लेकिन वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का जनादेश दिया था और आने वाले समय में भी बीजेपी का नापाक मंसूबा झारखंड में सफल नहीं होगा। सरयू राय को क्या पूरे एनडीए का समर्थन है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सरयू राय को सबसे पहले जनता को यह बताना चाहिए कि वे किस गठबंधन और किस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिस समर्थन की बात कर रहे हैं, क्या उनके साथ पूरा एनडीए गठबंधन भी इस ओर कदम बढ़ा रहा है, या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कल्पना मात्र है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि विपक्ष चाहे जितने हथकंडे अपना ले, चुनी हुई सरकार को गिराने की उनकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी। सरयू राय के फॉर्मूला की कोई विश्वसनीयता नहीं... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजनीति में नए साथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन क्या इंडी गठबंधन के अन्य घटक दल राजद और भाकपा-माले भी इस बात से सहमत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। लाल किशोर नाथ शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि सरयू राय जो फॉर्मूला पेश कर रहे हैं, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

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शशि थरूर की पीएम मोदी पर टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

Former Siliguri Mayor Gautam Deb submits his resignation amid political uncertainty in North Bengal and TMC's organizational reshuffle.
गौतम देब ने सिलीगुड़ी मेयर पद से दिया इस्तीफा, उत्तर बंगाल में TMC के सामने नया राजनीतिक संकट

  उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Gautam Deb ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम आयुक्त को सौंप दिया, जिसके बाद उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सिलीगुड़ी नगर निगम को उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में गौतम देब का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ा दबाव हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को उत्तर बंगाल के कई प्रमुख जिलों—Darjeeling, Jalpaiguri, Alipurduar और Cooch Behar—में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। खुद गौतम देब भी सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद से ही सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड की स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति को लेकर दबाव बढ़ गया था। इस्तीफे पर पार्षदों में मतभेद सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को गौतम देब ने मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों और पार्टी पार्षदों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान उन्होंने मेयर पद छोड़ने की इच्छा जताई। सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल अभी एक वर्ष से अधिक समय तक शेष है। ऐसे में कई पार्षद नहीं चाहते थे कि वे पद छोड़ें। बैठक में इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए, लेकिन विरोध के बावजूद गौतम देब अपने फैसले पर कायम रहे और शुक्रवार को औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। संगठन में मिली नई जिम्मेदारी इस्तीफे के बीच पार्टी नेतृत्व ने गौतम देब को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी भी सौंपी है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने उन्हें दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस (मैदानी क्षेत्र) का चेयरमैन नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गौतम देब प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उत्तर बंगाल में संगठन को दोबारा मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य पर सवाल गौतम देब के इस्तीफे के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। नगर निगम में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और नए मेयर के चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में लगातार कमजोर पड़ती पकड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे समय में मेयर का इस्तीफा पार्टी के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है। उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नए नेतृत्व की नियुक्ति पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।  

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TMC, शिवसेना के बाद अब सपा में बड़ी टूट का दावा, ओपी राजभर बोले- कई सांसद BJP के संपर्क में

Karnataka BJP president BY Vijayendra reacts after Congress wins five MLC seats amid cross-voting controversy in the Legislative Council elections.

कर्नाटक MLC चुनाव में क्रॉस-वोटिंग से सियासी हलचल, बीजेपी शीर्ष नेतृत्व नाराज; विजयेंद्र दिल्ली तलब

Uddhav Thackeray addresses Shiv Sena’s 60th Foundation Day event and offers to step down amid rebellion by party MPs.

उद्धव ठाकरे बोले- अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार, कांग्रेस में विलय की अटकलों पर दिया बड़ा बयान

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राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0

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