देश में कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “Inflation Man Modi” करार दिया है।
शुक्रवार (1 मई) को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में ₹993 तक की बढ़ोतरी की गई।
नई दिल्ली में इसकी नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार पर तीखा हमला बोला।
पार्टी ने कहा कि “Inflation Man Modi फिर सक्रिय हो गए हैं” और कमर्शियल सिलिंडर बार-बार महंगे किए जा रहे हैं।
कांग्रेस के मुताबिक, 1 जनवरी से 1 मई के बीच कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम कुल ₹1,518 तक बढ़ चुके हैं।
पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि साल के अभी 8 महीने बाकी हैं और “मोदी की वसूली जारी है।”
कांग्रेस ने दावा किया कि इस बढ़ोतरी से छोटे-बड़े कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और फूड इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल 913 रुपये बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव शुक्रवार को विपक्ष के सांकेतिक प्रदर्शन में पुजारी के वेश में नजर आए। प्रदर्शन के दौरान राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मुद्दे को लेकर विरोध जताया गया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों की मौजूदगी में सांकेतिक तौर पर दान पात्र भी रखा गया। घटना के बाद पप्पू यादव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। संसद परिसर में पुजारी के वेश में नजर आए पप्पू यादव नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने पुजारी का रूप धारण किया। प्रदर्शन का उद्देश्य राम मंदिर में चढ़ावे और उससे जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना था। इस दौरान विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए गए। राहुल गांधी ने दान पात्र में डाले पैसे प्रदर्शन के दौरान एक दान पात्र रखा गया था, जिसमें राहुल गांधी ने पैसे डाले। विपक्ष की ओर से इस प्रदर्शन को राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगने के प्रतीकात्मक तरीके के तौर पर पेश किया गया। पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली में शिकायत इस प्रदर्शन के बाद पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में शिकायत दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संसद में पुजारी का वेश धारण करने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी ने प्रदर्शन को बताया राजनीतिक स्टंट बीजेपी की ओर से भी पप्पू यादव के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पप्पू यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए इसे हिंदुत्व और साधु-संतों के अपमान से जोड़कर आलोचना की है। इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
लोकसभा ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को दी समय-सीमा में बढ़ोतरी, मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह तक सौंपनी होगी रिपोर्ट नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद ने 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक प्रस्तुत करनी होगी। अधिक समय देने का क्या है कारण? JPC के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने कहा कि समिति ने विभिन्न राज्यों, राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा की है। अभी कई पक्षों से सुझाव प्राप्त होने बाकी हैं, इसलिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी। क्या है 'एक देश, एक चुनाव' प्रस्ताव? 'एक देश, एक चुनाव' प्रस्ताव का उद्देश्य लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। JPC करेगी अंतिम सिफारिशें 39 सदस्यीय समिति अब सभी सुझावों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद ही सरकार इस प्रस्ताव पर आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू करेगी।
Datia Bypoll 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर गुरुवार (30 जुलाई) सुबह 7 बजे से उपचुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। इस सीट पर करीब 2.20 लाख मतदाता 21 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मतदान शुरू होने से पहले सुबह 5:30 बजे सभी केंद्रों पर मॉक पोल कराया गया, जो निर्धारित समय से पहले पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि अब तक मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और मौसम भी अनुकूल है। उन्होंने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। नरोत्तम मिश्रा बोले- कमल के निशान वाला बटन दबाया बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी दतिया में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने कमल के निशान वाला बटन दबाया है क्योंकि वह चाहते हैं कि भाजपा की जीत हो और दतिया में विकास कार्यों को नई गति मिले। कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा कि चुनाव में हार की आशंका होते ही कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाने लगती है, जो उसकी निराशा और हताशा को दर्शाता है। बीजेपी उम्मीदवार ने की 100 फीसदी मतदान की अपील बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने दतिया में शत-प्रतिशत मतदान का लक्ष्य हासिल करने की अपील की। कांग्रेस उम्मीदवार ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदाताओं से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और बेहतर कानून-व्यवस्था के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग के आधार पर बढ़ती दूरियों को खत्म करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने युवाओं से नशा और जुए जैसी बुरी आदतों से दूर रहने का आग्रह किया। दतिया सीट पर किसके बीच मुकाबला? दतिया उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दामोदर सिंह यादव को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की जा रही है। इनके अलावा 18 अन्य उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव? साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों से हराया था। हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसी कारण दतिया सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इस उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है। अब मतदान के बाद सभी की नजरें मतगणना और चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।